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कोरोना पैकेज के तहत महिला जन-धन खाताधारकों को पैसे भेजने में विसंगतियां: आरटीआई

कोरोना महामारी के चलते खड़ी हुई अप्रत्याशित स्थिति में भारत सरकार ने प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत महिला खाताधारकों को तीन किस्तों में 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी. अब आरटीआई के तहत सामने आई जानकारी में इसके आंकड़ों में विसंगतियां मिली हैं.

(प्रतीकात्मक तस्वीर: पीटीआई)

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) के तहत कोविड लॉकडाउन के दौरान प्रधानमंत्री जन-धन योजना (पीएमजेडीवाई) के महिला खाताधारकों को तीन किस्त में 1,500 रुपये (500 रुपये प्रति किस्त) की वित्तीय सहायता देने के मामले में बड़ी विसंगतियां सामने आई हैं.

कोरोना महामारी के चलते उत्पन्न हुई अप्रत्याशित स्थिति में भारत सरकार ने पीएमजेडीवाई महिला खाताधारकों को तीन किस्त में 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी. सरकार ने कहा था कि इससे 20 करोड़ से अधिक महिलाएं लाभान्वित होंगी.

इसे लागू करने को लेकर सरकार ने जून 2020 और अगस्त 2021 में अलग-अलग प्रेस रिलीज जारी किए हैं.

लेकिन इनमें से किसी में भी जिलेवार लाभान्वित महिलाओं की संख्या का कोई विवरण नहीं है. इसके साथ ही लक्ष्य और वास्तविक लाभान्वितों की संख्या में भी विसंगतियां देखने को मिलती हैं.

ट्रांसपेरेंसी एक्टिविस्ट वेंकटेश नायक द्वारा सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत प्राप्त किए गए दस्तावेजों से पता चलता है कि लाभान्वितों की सूची में 133 जिलों के नाम गायब हैं. योजना की घोषणा के वक्त देश में 721 जिले थे, लेकिन इसमें से सिर्फ 588 जिलों की ही महिलाओं को लाभ देने का विवरण दिया गया है.

ऐसा प्रतीत होता है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय, जो इस योजना को लागू कर रहा है, को करीब 12.5 फीसदी महिला लाभार्थियों के जिलों की जानकारी नहीं है.

इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा सार्वजनिक किए गए आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि योजना को लागू करने में करीब 286 करोड़ रुपये की विसंगतियां हो सकती हैं.

दरअसल, सरकार ने बताया था कि अप्रैल 2020 में योजना की पहली किस्त के तहत 20.05 महिलाओं के खाते में 10,029 करोड़ रुपये भेजे गए थे. हालांकि इस चरण में 98.33 फीसदी पात्र महिलाओं को ही लाभ मिला था.

इसके बाद मई 2020 में दूसरी किस्त के तहत 20.63 करोड़ महिलाओं के खाते में 10,315 करोड़ रुपये डाले गए थे. इस बार सभी पात्र महिलाओं को लाभ मिला. यानी कि लाभान्वित महिलाओं की कुल संख्या 20.63 करोड़ है.

लेकिन इसके बाद सरकार ने इस बात की जानकारी नहीं दी कि आखिर तीसरे चरण में कुल कितनी महिलाओं को लाभ दिया गया.

पिछले महीने 28 अगस्त 2021 को जारी एक प्रेस रिलीज में वित्त मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत कोविड लॉकडाउन के दौरान अप्रैल 2020 से जून 2020 के बीच, महिला पीएमजेडीवाई खाताधारकों के खातों में कुल 30,945 करोड़ रुपये जमा किए गए.

इस तथ्य के आधार पर ये कहा जा सकता है कि तीसरी किस्त में कुल 10,601 करोड़ रुपये [30,945 करोड़ रुपये-(10,029 करोड़ रुपये + 10,315 करोड़ रुपये)=10,601 करोड़ रुपये] जारी किए गए थे.

चूंकि उपर्युक्त सरकारी आंकड़ों के आधार पर कुल लाभान्वितों की संख्या 20.63 करोड़ और इस आधार पर किसी किस्त में कुल लाभ राशि 10,315 करोड़ रुपये से अधिक नहीं हो सकती है, इसलिए ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर क्यों तीसरे चरण में 286 करोड़ रुपये (10,601 करोड़ रुपये-10,315 करोड़ रुपये= 286 करोड़ रुपये) का अधिक भुगतान किया गया.

इसे लेकर सरकार ने अभी तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है. इसलिए ये आरोप लग रहे हैं कि योजना को लागू करने के दौरान करोड़ों रुपये की हेराफेरी किए जाने की संभावना है.

इसका एक संभावित जवाब ये हो सकता है कि चूंकि पहली किस्त में सभी लोगों को लाभ नहीं मिला था, इसलिए जो लोग उस समय छूट गए थे, उन्हें तीसरी किस्त के साथ ही पहली किस्त का भी पैसा दिया गया हो. गणना करने पर ये राशि भी 286 करोड़ रुपये (10,315 करोड़ रुपये-10,029 करोड़ रुपये= 286 करोड़ रुपये) निकलकर आती है.

आरटीआई एक्ट के तहत प्राप्त आंकड़े दर्शाते हैं कि सरकार के 100 फीसदी कवरेज के उलट कम से कम 2.26 लाख अतिरिक्त महिला लाभार्थी थीं. इसलिए सरकार का ये दावा भी सही साबित नहीं होता है कि उन्होंने दूसरी किस्त में सभी लोगों को लाभ पहुंचाया था.

वहीं ग्रामीण विकास मंत्रालय का कहना है कि इस योजना के तहत कुल 20.64 करोड़ महिलाओं को अप्रैल, मई और जून 2020 में 500-500 रुपये दिए गए थे.

इस आधार पर सरकार द्वारा कुल 30,964 करोड़ रुपये महिलाओं के खाते में भेजे जाने चाहिए थे. हालांकि वित्त मंत्रालय के 28 अगस्त के प्रेस रिलीज से पता चलता है कि केंद्र ने 30,945 करोड़ रुपये ही ट्रांसफर किए हैं. इस तरह यहां पर भी 19 करोड़ रुपये की विसंगति निकलकर सामने आती है.

इस तरह सरकार के आधिकारिक प्रेस रिलीज और आरटीआई एक्ट के तहत दी गई जानकारियों में काफी अंतर है, इसलिए सरकार को इस मामले में तत्काल तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)