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कार कंपनी ऑडी ने कहा, भारत में आयातित इलेक्ट्रिक वाहनों पर शुल्क घटाए सरकार

जर्मनी की लक्ज़री कार कंपनी ऑडी की ओर से कहा गया है कि आयात किए जाने वाले मॉडलों पर कर में कमी से वाहन के मूल्य को कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही बाज़ार में वह एक निश्चित मात्रा में बिक्री के आंकड़े को हासिल कर पाएगी. ऑडी की ओर यह बयान ऐसे समय आया है, जब इसी महीने की शुरुआत में अमेरिका की प्रमुख वाहन निर्माता फोर्ड मोटर कंपनी ने भारत में वाहन उत्पादन बंद करने की घोषणा की थी.

एक ऑडी कार पर बना कंपनी का लोगो. (प्रतीकात्मक तस्वीर: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: जर्मनी की लक्जरी कार कंपनी ऑडी ने भारत में आयातित कारों पर लगने वाली कर की ऊंची दरों को इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र की वृद्धि के लिए बाधा करार दिया है. कंपनी ने सरकार से आयातित कारों पर कर की दरों में कटौती का आग्रह किया है.

कंपनी ने कहा कि शुल्कों में कुछ राहत से भी वह अधिक वाहन बेच सकेगी और अपने मुख्यालय को ऐसे वाहनों के स्थानीय विनिर्माण के लिए निवेश के प्रति आश्वस्त कर पाएगी.

ऑडी की देश में फिलहाल पांच बिजलीचालित यानी इलेक्ट्रिक वाहन बेचती है.

कंपनी ने कहा कि आयात किए जाने वाले मॉडलों पर कर में कमी से वाहन के मूल्य को कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही बाजार में वह एक निश्चित मात्रा में बिक्री के आंकड़े को हासिल कर पाएगी.

ऑडी ने कहा कि यदि कंपनी को बाजार में एक निश्चित हिस्सेदारी मिलती है तो वह अपने वैश्विक मुख्यालय को भारत विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए देश में फिर से निवेश करने के लिए मनाने की कोशिश करेगी.

ऑडी इंडिया के प्रमुख बलबीर सिंह ढिल्लों ने कहा कि कंपनी देश में आयातित अपने इलेक्ट्रिक वाहनों के पहले सेट को बेच दिया है.

उन्होंने कहा, ‘हाल में भारतीय बाजार में उतारी गई की गई बिजली से चलने वाली ई-ट्रॉन गाड़ी की पहली खेप बिक गई हैं. इससे हमें विश्वास मिला है कि लोग और भारत इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए तैयार हैं. यह सब हमें ऐसी अधिक से अधिक कारों को पेश करने में मदद कर रहा है.’

कंपनी ने पिछले सप्ताह ही दो नई पूर्ण इलेक्ट्रिक चार दरवाजे की ‘कूपे ई-ट्रॉन जीटी’ और ‘आरएस ई-ट्रॉन जीटी’ भारत में पेश की है. इसके साथ कंपनी की भारत में बिजली से चलने वाली कुल पांच गाड़ियां हो गई हैं.

हालांकि, उन्होंने कहा कि आयात शुल्क इलेक्ट्रिक वाहनों के रास्ते में बाधक साबित हो रहा है. ढिल्लों ने कहा, ‘अगर कर कम होगा तो शायद हम देश में ज्यादा बेच सकते हैं.’

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘आयात शुल्क अधिक है, इसलिए सरकार से हमारा अनुरोध है कि क्या इसके बारे में कुछ किया जा सकता है. भले ही कुछ राहत 3 से 5 साल की अवधि के लिए हो. यह हमें एक निश्चित न्यूनतम (बिक्री) मात्रा हासिल करने में मदद करेगी, जो हमें हमारे मुख्यालय को यह समझाने में मदद करेगी कि स्थानीय स्तर पर कारों का निर्माण शुरू करने के लिए देश (भारत) में और निवेश किया जा सकता है.’

वर्तमान में पूरी तरह से निर्मित इकाइयों (सीबीयू) के रूप में आयात की जाने वाली कारों पर 60 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक सीमा शुल्क लगता है. इंजन के आकार और लागत, बीमा और माल ढुलाई (सीआईएफ) से कुल कीमत 40,000 अमरीकी डॉलर से कम या उससे अधिक हो जाती है.

ढिल्लों ने कहा कि पांच प्रतिशत की कम जीएसटी दर और पंजीकरण लागत के मामले में कुछ राज्य सरकारों द्वारा दी गई मदद कुछ ऐसे कारक थे, जो इलेक्ट्रिक कार सेगमेंट के लिए फायदेमंद थे.

उन्होंने कहा, ‘सबसे बड़ी बाधा आयात शुल्क है, जो 100 प्रतिशत से अधिक है.’

ढिल्लों ने कहा, ‘उन्हें (मुख्यालय) को यह विश्वास करने की आवश्यकता है कि एक मांग है ताकि वे आगे के निवेश के बारे में सोच सकें. ई-ट्रॉन रेंज के साथ एक सकारात्मक संकेत है. भारत में फिर से निवेश के लिए उन्हें तैयार करने से पहले हमें कुछ समय के लिए दौड़ना (अच्छी बिक्री) होगा.’

ढिल्लों ने बताया कि कंपनी 2025 तक देश में अपनी कुल बिक्री का 15 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री से अर्जित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है.

विश्व स्तर पर ऑडी ने 2033 से इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता बनने का फैसला किया है.

ढिल्लों ने कहा कि ऑडी इंडिया उसी दिशा में कदम उठा रही है और पहले से ही देश में केवल पेट्रोल और इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री कर रही है.

ढिल्लों ने कहा कि देश में अपने इलेक्ट्रिक वाहन ग्राहकों की मदद करने के लिए ऑडी इंडिया ने अपने डीलरशिप और अपनी समूह फर्मों में 100 से अधिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना बनाई है.

मालूम हो कि इसी महीने की शुरुआत में भारत में अपनी पहचान बनाने के लिए लगभग तीन दशकों के संघर्ष के बाद अमेरिका की प्रमुख वाहन निर्माता फोर्ड मोटर कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा था कि वह देश के अपने दो संयंत्रों में वाहन उत्पादन बंद कर देगी और केवल आयातित वाहनों को ही बेचेगी.

जनरल मोटर्स के बाद भारत में कारखाना बंद करने वाली फोर्ड दूसरी अमेरिकी वाहन कंपनी है. वर्ष 2017 में जनरल मोटर्स ने घोषणा की थी कि वह भारत में वाहनों की बिक्री बंद कर देगी, क्योंकि दो दशकों से अधिक समय तक संघर्ष करने के बाद भी उसकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है.

वहीं, पिछले साल सितंबर में अमेरिकी मोटरसाइकिल कंपनी हार्ले-डेविडसन ने हरियाणा के बावल में स्थित अपने उत्पादन केंद्र को बंद करने की घोषणा की थी. इसके साथ ही उसने गुड़गांव में अपने सेल्स ऑपरेशन को भी छोटा कर दिया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)