भारत

दिल्लीः आम आदमी पार्टी ने सरकारी स्कूलों में शुरू किया देशभक्ति पाठ्यक्रम

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को भगत सिंह की जयंती के मौक़े पर आयोजित कार्यक्रम में देशभक्ति पाठ्यक्रम की शुरुआत की. नर्सरी से कक्षा बारहवीं तक के इस पाठ्यक्रम में अलग-अलग उम्र के विद्यार्थियों के लिए तीन श्रेणियों में हैंडबुक दी गई हैं, जिनमें स्वतंत्रता सेनानियों की सौ कहानियां शामिल हैं.

देशभक्ति पाठ्यक्रम योजना का शुरू करते दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (फोटोः पीटीआई)

नई दिल्लीः दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने राजधानी के सरकारी स्कूलों के लिए मंगलवार को अपनी महत्वकांक्षी देशभक्ति पाठ्यक्रम को शुरू किया.

आम आदमी पार्टी का मानना है कि इससे सच्चे अर्थों में देशभक्तों की पीढ़ियों को तैयार किया जाएगा.

समारोह में भारत माता की जय, वंदे मातरम के नारे गूंजे

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह की जयंती के मौके पर छत्रसाल स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में इस योजना की शुरुआत की. इस दौरान स्टेडियम में भारत माता की जय, वंदे मातरम और इंकलाब जिंदाबाद के नारे गूंजते रहे.

इस योजना का सबसे पहले केजरीवाल ने 2019 में स्वतंत्रता दिवस की पूर्वसंध्या पर ऐलान किया था.

योजना की शुरुआत के दौरान केजरीवाल ने जनता को संबोधित करते हुए 23 साल की उम्र में भगत सिंह के बलिदान को याद करते हुए कहा, ‘मैंने उनके जीवन के बारे में गहराई से पढ़ा है. जब आप उनकी कहानी सुनते हैं, तो आपके रोंगटे खड़े हो जाते हैं. आपको उत्साह और प्रेरणा की एक अलग अनुभूति होती है. इसी भावना को देशभक्ति कहते हैं.’

केजरीवाल ने कहा, ‘एक ऐसा माहौल तैयार करने की जरूरत है, जहां हम सभी और हमारे बच्चे लगातार हर कदम पर देशभक्ति की भावना को महसूस कर सकें. हम सिर्फ कल्पना कर सकते हैं, अगर ऐसा होगा तो भविष्य कैसा होगा.’

उन्होंने देशभक्ति की अपनी परिभाषा देते हुए कहा, ‘देशभक्ति की भावना देश के हर इंसान में है. इसके साथ व्यक्ति पैदा होता है लेकिन इसकी अलख जगाने की जरूरत पड़ती है.’

उन्होंने कहा कि बीते 74 सालों में हमने हमारे स्कूलों में भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित पढ़ा लेकिन हमने अपने बच्चों को देशभक्ति नहीं पढ़ाई. देशभक्ति की भावना हम सभी के भीतर है लेकिन इसकी अलख जगाने की जरूरत है.

कोई पाठ्यपुस्तक नहीं, छात्रों को तीन हैंडबुक से पढ़ाया जाएगा

इस पाठ्यक्रम के जरिये उनकी सरकार क्या हासिल करना चाहती है? इस पर केजरीवाल कहते हैं, ‘हम सभी प्रकार के पेशेवरों को तैयार कर रहे हैं लेकिन हम देशभक्त पेशेवरों को तैयार नहीं कर रहे. हम यह नहीं कह रहे कि हम व्यवसायों को बढ़ावा नहीं देंगे, हम हर तरह की शिक्षा का समर्थन करना जारी रखेंगे लेकिन हम इनमें देशभक्ति के मूल्यों को जोड़ेंगे. हम देशभक्त डॉक्टर, वकील, इंजीनियर, अभिनेता, गायक, कलाकार, पत्रकारों आदि को तैयार करेंगे.’

मुख्यमंत्री केजरावील ने ऐलान किया था कि उनकी सरकार ने इस बेजोड़ फ्रेमवर्क को तैयार करने में कड़ी मेहनत की है. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

केजरीवाल ने कहा, ‘यह पाठ्यक्रम नर्सरी से कक्षा बारहवीं तक के लिए शुरू किया जाएगा. हालांकि, छात्रों के लिए कोई पाठ्यपुस्तक नहीं होगी. इस संबंध में नर्सरी से कक्षा पांच, कक्षा छह से आठ और कक्षा नौ से बारह तीन श्रेणियों में हैंडबुक डिजाइन की गई है जिनमें स्वतंत्रता सेनानियों की 100 कहानियां शामिल हैं.’

‘पाठ्यक्रम छात्रों को शहीदों की तरह तैयार करेगा’

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि कोविड-19 महामारी की वजह से देशभक्ति पाठ्यक्रम को पेश करने में दो साल लगे हैं लेकिन यह 75वें स्वतंत्रता दिवास पर लॉन्च हो गया था.

दिल्ली के शिक्षा मंत्री सिसोदिया ने इस पाठ्यक्रम के बारे में बताते हुए कहा, ‘इस पाठ्यक्रम में सिर्फ देशभक्ति के बारे में बात नहीं की जाएगी बल्कि एक जुनून पैदा किया जाएगा. यह नैतिक मूल्यों का प्रचार नहीं होगा. हम नहीं चाहते कि छात्र ऐतिहासिक तथ्यों को याद करें बल्कि हम उम्मीद करते हैं कि वे अपनी देशभक्ति के बारे में सोचें.’

सिसोदिया ने यह भी बताया कि कैसे यह पाठ्यक्रम छात्रों को स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिबद्धता और जुनून के स्तर पर आत्मनिरीक्षण करेंगे.

उन्होंने कहा, ‘हम आज अपने छात्रों के दिलों में इस जुनून और देशभक्ति की अलख जगाएंगे. जब तक ये छात्र 19 साल के होंगे, वे शहीद हेमू कलानी की तरह बनेंगे, जिन्होंने इतनी कम उम्र में देश के लिए बलिदान दे दिया.’

हर कक्षा से पहले पांच मिनट का ध्यान

सिसोदिया ने कहा कि नर्सरी से लेकर कक्षा बारहवीं तक के छात्रों को 700-800 तक कहानियां और 500-600 देशभक्ति गाने और कविताएं सिखाई जाएंगी.

उन्होंने कहा कि अब हर कक्षा लगभग पांच मिनट के देशभक्ति ध्यान से शुरू होंगी, जिसका मतलब है कि छात्रों को प्रतिदिन पांच देशभक्तों को याद करना होगा.

संयोग से हाल के कुछ दिनों में आम आदमी पार्टी की बड़ी संख्या में योजनाओं और धर्म के मामलों को लेकर इसका रुख सवालों के घेरे में रहा है.

अन्य वर्गों के अलावा दलितों और मुस्लिमों के समर्थन से दो बार दिल्ली का चुनाव दो बार जीत चुकी आम आदमी पार्टी ने हाल के वर्षों में कई घोषणाएं की हैं, जिन्हें राजनीतिक जानकारों ने उनके सॉफ्ट हिंदुत्व के प्रति झुकाव बताया है.

आम आदमी पार्टी का हिंदुत्व रुझान

केजरीवाल ने जिस तरह चुनावों के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ किया और कई मंदिरों का दौरा किया, उससे लगता है कि कहीं न कहीं पार्टी बहुसंख्यक समुदाय का समर्थन हासिल करने के लिए अपने धार्मिक पक्ष को दिखाने की कोशिश कर रही हैं.

हाल ही में आम आदमी पार्टी ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या और अन्य स्थानों से तिरंगा यात्रा निकाली थी और केजरीवाल ने उत्तराखंड में वादा किया था कि अगर उनकी पार्टी वहां सत्ता में आती है तो वह राज्य को हिंदुओं की वैश्विक आध्यात्मिक राजधानी बना देंगे.

आम आदमी पार्टी ने राज्य में चारधाम ट्रस्ट को भंग करने के फैसले का समर्थन किया था. दरअसल बड़ी संख्या में मंदिर के पुजारी लगभग दो सालों से इसके विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे.

आम आदमी पार्टी की स्थापना 2011 के लोकपाल आंदोलन से हुई थी. इस आंदोलन को कई दक्षिणपंथी समूहों का समर्थन प्राप्त था और इस आंदोलन के दौरान मंच पर जहां नेता बैठते थे, उनके पीछे भारत माता की तस्वीर लगी होती थी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)