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मुझे एफआईआर दिखाए बिना हिरासत में लिया, न ही वकील से मिलने दिया गयाः प्रियंका गांधी

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों से मिलने जाते वक्त प्रियंका गांधी को चार अक्टूबर को सुबह पांच बजे रास्ते में सीतापुर में हिरासत में लिया गया था. यूपी पुलिस ने शांतिभंग की आशंका को लेकर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी और 10 अन्य के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है.

प्रियंका गांधी. (फोटोः पीटीआई)

नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश पुलिस ने शांतिभंग करने की आशंका को लेकर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी को खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जबकि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को उनसे मिलने के लिए हवाईअड्डे से बाहर नहीं आने दिया गया.

लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा को लेकर उत्तर प्रदेश में व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और सरकार ने राज्य में कई निषेधात्मक आदेश लागू किए हैं.

प्रियंका गांधी को लखीमपुर खीरी जाते समय हिरासत में लिया गया था. प्रियंका गांधी का कहना है कि उनकी 38 घंटे की हिरासत अवधि के बाद भी उन्हें कोई नोटिस या एफआईआर की कॉपी नहीं उपलब्ध कराई गई है और उन्हें उनके वकील से भी मिलने नहीं दिया जा रहा है.

उत्तर प्रदेश में शांतिभंग करने की आशंका के चलते आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत प्रियंका गांधी और 10 अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.

प्रियंका गांधी

उत्तर प्रदेश पुलिस ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 151, 107, 116 के तहत उत्तर प्रधेश कांग्रेस प्रमुख अजय कुमार लल्लू और पार्टी नेता दीपेंद्र हुड्डा के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, हरगांव पुलिस स्टेशन ऑफिसर (एसएचओ) बृजेश कुमार त्रिपाठी ने कहा, ‘हमने कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया है. सोमवार तड़के लगभग 4.30 बजे प्रियंका जी को लखीमपुर खीरी जाते समय रास्ते में रोक लिया गया. हमने उन्हें बताया कि आप वहां नहीं जा सकते क्योंकि वहां स्थिति ठीक नहीं है और सीआरपीसी की धारा 144 लागू है. उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी और उचित सुरक्षा उपस्थिति में हमें उन्हें स्थानीय गेस्ट हाउस ले जाना पड़ा.’

सीतापुर सब डिविजनल मजिस्ट्रेट प्यारे लाल मौर्य ने कहा, ‘ये निवारक धाराएं हैं. एक बार हमें आश्वासन मिल जाए कि उनके द्वारा शांतिभंग का कोई उल्लंघन नहीं किया जाएगा. इसके बाद इन धाराओं को हटा दिया जाएगा.’

प्रियंका गांधी ने कहा कि उनका वकील मंगलवार सुबह से कंपाउंड के गेट पर खड़ा है.

उन्होंने कहा, ‘मौजूदा समय में मैं मेरी गिरफ्तारी के समय मेरे सहयोगियों और मुझ पर पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए गए अवैध शारीरिक बल का बयोरा नहीं दूंगी.’

उन्होंने कहा, ‘मुझे मेरी हिरासत से संबंधित न तो कोई नोटिस दिखाया गया और न ही कोई आदेश और ना ही मुझे एफआईआर की कॉपी उपलब्ध कराई गई. मुझे मजिस्ट्रटे या किसी अन्य न्यायिक अधिकारी के समक्ष भी पेश नहीं किया गया. मुझे मेरे वकील से भी मिलने नहीं दिया जा रहा है, जो मंगलवार सुबह से गेट पर खड़ा है.’

बता दें कि प्रियंका गांधी को सोमवार सुबह से हिरासत में रखा गया है. प्रियंका ने आरोप लगाया है कि बिना किसी कानूनी आधार के संवैधानिक अधिकारों का हनन करते हुए उन्हें सीतापुर पीएसी परिसर में हिरासत में रखा गया है.

एसडीएम सीतापुर ने बताया कि प्रियंका गांधी, दीपेंद्र हुड्डा और अजय सिंह लल्लू के अलावा संदीप, राज कुमार, दीपक सिंह, नरेंद्र शेखावत, योगेंद्र, हरिकंत, धीरज गुर्जर और अमित के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.

उन्होंने कहा कि इन सभी लोगों को यहां पीएसी की दूसरी बटालियन के अतिथि गृह में विभिन्न कमरों में रखा गया है.

प्रियंका ने मंगलवार की शाम बयान जारी कर कहा, ‘चार अक्टूबर को सुबह करीब साढ़े चार बजे पुलिस उपाधीक्षक के कथनानुसार मुझे धारा 151 के तहत हिरासत में ले लिया गया. जिस समय मुझे हिरासत में लिया गया, उस समय मैं लखीमपुर खीरी जिले की सीमा से 20 किलोमीटर पहले सीतापुर में थी और उस समय लखीमपुर खीरी में धारा 144 लगी थी लेकिन सीतापुर जिले में धारा 144 नहीं लगी थी.’

कांग्रेस महासचिव ने आगे कहा, ‘वैसे भी मैं दो कांग्रेस कार्यकर्ताओं और दीपेंद्र हुड्डा और संदीप सिंह के साथ एक गाड़ी में जा रही थी. चार लोगों के अलावा न तो मेरे साथ सुरक्षा दस्ते की गाड़ी थी और न ही कोई अन्‍य कांग्रेस कार्यकर्ता मेरे साथ था.’

उन्होंने सवाल उठाया, ‘सीतापुर के पीएसी परिसर में लाये जाने के 38 घंटे बाद पांच अक्टूबर को शाम साढ़े छह बजे तक प्रशासन द्वारा न तो मुझे ये बताया गया कि मुझे किन परिस्थितियों या किन कारणों से हिरासत में लिया गया है और न तो यह बताया गया कि मुझे किस धारा के तहत हिरासत में लिया गया है.’

कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘मैंने सोशल मीडिया पर एक कागज देखा, जिसमें प्रशासन ने 11 लोगों को नामजद किया है. इन 11 लोगों में से आठ लोग तो मुझे हिरासत में लिए जाने के समय वहां मौजूद भी नहीं थे. यहां तक कि प्रशासन ने उन दो लोगों को भी नामजद कर दिया है जो चार अक्टूबर को दोपहर में लखनऊ से मेरे कपड़े लेकर आए थे.’

उन्होंने कहा, ‘मेरे और मेरे साथियों को पूरी तरह गैरकानूनी तरीके से बलपूर्वक हिरासत में लिया गया.’

पी. चिदंबरम सहित कई कांग्रेस नेताओं ने प्रियंका को हिरासत में रखने पर सवाल उठाते हुए इसे पूरी तरह से अवैध और असंवैधानिक बताया.

चिदंबरम ने मंगलवार को बयान में कहा कि सीतापुर में प्रियंका को हिरासत में रखने संबंधित तथ्य और परिस्थितियां निर्णायक रूप से स्थापित करती हैं कि उत्तर प्रदेश में कानून का शासन नहीं है.

देश में लोकतंत्र हुआ करता था, अब तानाशाही है: राहुल गांधी

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के बाद प्रियंका गांधी और पार्टी के कुछ अन्य नेताओं को मौके पर जाने से रोकने को लेकर बुधवार को उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला किया और दावा किया कि भारत में लोकतंत्र हुआ करता था, लेकिन अब तानाशाही है.

उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि उत्तर प्रदेश में अपराधियों को खुले घूमने की आजादी है, जबकि पीड़ितों को जेल में डाल दिया जाता है.

राहुल गांधी ने संवाददाताओं से बातचीत में बताया, ‘वह छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ लखीमपुर खीरी जाकर पीड़ित परिवारों से मिलने का प्रयास करेंगे.’

उन्होंने कहा, ‘मैं वहां जाकर यह समझना चाहता हूं कि ज़मीनी हकीकत क्या है क्योंकि ज़मीनी हकीकत के बारे में अभी तक किसी को मालूम नहीं है. इसलिए हम लखनऊ जा रहे हैं.’

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, ‘किसानों को जीप के नीचे कुचला जा रहा है. गृह राज्य मंत्री मंत्री (अजय मिश्रा) और उनके पुत्र पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. किसानों पर सुनियोजित ढंग से आक्रमण किया जा रहा है.’

राहुल गांधी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री जी, कल लखनऊ में थे, लेकिन लखीमपुर खीरी नहीं जा पाए.’

उन्होंने कहा, ‘हम दो मुख्यमंत्रियों के साथ लखनऊ जाने और लखीमपुर खीरी जाकर परिवारों से मिलने का प्रयास करेंगे. हम तीन लोग जा रहे हैं. हमने उनको (प्रशासन को) पत्र लिखा है.’

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने आरोप लगाया, ‘उत्तर प्रदेश में नयी तरह की राजनीति हो रही है. अपराधी जो चाहे वो कर सकते हैं. अपराध करने वाले जेल से बाहर होते हैं, लेकिन पीड़ित जेल के अंदर होते हैं.’

कांग्रेस की ओर से इस मामले पर राजनीति करने संबंधी आरोप पर उन्होंने कहा, ‘हमारा काम दबाव बनाने का होता है. जब हम दबाव बनाते हैं तो कार्रवाई होती है. हाथरस में हमने दबाव बनाया तो कार्रवाई हुई. सरकार चाहती है कि हम दबाव नहीं बनाएं.’

एक सवाल के जवाब में उन्होंने दावा किया, ‘लोकतंत्र हुआ करता था. आज हिंदुस्तान में तानाशाही है. राजनेता उत्तर प्रदेश में नहीं जा सकते. कल से हमसे कहा जा रहा है कि आप उत्तर प्रदेश नहीं जा सकते. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री नहीं जा पाए.’

उन्होंने आगे कहा, ‘तानाशाही किस बात की है? तानशाही क्यों? क्योंकि भयंकर चोरी हो रही है, छोटे व्यापारी और किसानों से चोरी हो रही है और आम जनता की जेब से चोरी की जा रही है. आम लोगों की आवाज कुचली जा रही है.’

प्रियंका गांधी के साथ कथित धक्का-मुक्की के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘प्रियंका, मुझे या फिर परिवार के किसी भी सदस्य को दुर्व्यवहार से फर्क नहीं पड़ता. हम किसानों की बात कर रहे हैं. हमें बंद कर दीजिये, मार दीजिए, गाड़ दीजिए, कुछ फर्क नहीं पड़ता है, यह वर्षों पुरानी ट्रेनिंग है, जो हमें अपने परिवार से मिली है.’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘देश के ढांचे पर भाजपा और आरएसएस ने कब्जा कर लिया है. सभी संस्थाओं को नियंत्रित किया गया है.’

मालूम हो कि लखीमपुर खीरी कांड के पीड़ितों से मिलने जाते वक्त रास्ते में चार अक्टूबर सुबह पांच बजे सीतापुर में हिरासत में ली गई कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी अब भी पुलिस हिरासत में हैं.

बता दें कि लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया क्षेत्र में रविवार को भड़की हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी. इस मामले में केंद्रीय गृहराज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा समेत कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)