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मध्य प्रदेश: नीमच में एक दरगाह पर हमला, पुनर्निमाण न कराने की चेतावनी दी गई

यह दरगाह मध्य प्रदेश नीमच ज़िले में रतनगढ़ पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत वन क्षेत्र में एक सुनसान इलाके में स्थित है. आरोप है कि बीते 2-3 अक्टूबर की दरमियानी रात में 20 से अधिक नक़ाबपोश लोगों ने कथित रूप से इस दरगाह को निशाना बनाया था. हमलावरों ने मौके पर एक पर्चा भी छोड़ा है, जिसमें कहा गया है कि दरगाह में हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराकर मुसलमान बनाया जाता है, जो सनातन धर्म के ख़िलाफ़ है.

सोशल मीडिया पर वायरल घटना की वीडियो का स्क्रीनशॉट.

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के नीमच जिले की जावद तहसील में बीते 2-3 अक्टूबर की दरमियानी रात में 20 से अधिक नकाबपोश लोगों ने कथित रूप से एक धार्मिक स्थल (दरगाह) पर विस्फोटकों से हमला कर उसे नुकसान पहुंचाया तथा उसके खादिम और एक जायरीन (श्रद्धालु) की लाठी-डंडों से पिटाई की.

अधिकारी ने बताया कि हमलावर मौके पर एक पर्चा भी छोड़ गए, जिसमें कहा गया है कि संबंधित दरगाह में हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराकर मुसलमान बनाया जाता है, जो सनातन धर्म के खिलाफ है.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक हमलावरों ने उस पर्चे में यह भी लिखा है कि यदि किसी ने दरगाह का पुनर्निर्माण कराने की कोशिश की तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.

पुलिस ने बताया कि यह हमला पिछले हफ्ते शनिवार (दो अक्टूबर) को रात करीब 11 बजे से रविवार तड़के तीन बजे तक चार घंटे चला था.

पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार वर्मा ने बताया कि घायल जायरीन की पहचान अब्दुल रज्जाक के रूप में हुई है, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि इस धार्मिक स्थल के खादिम (मौलवी) नूर बाबा को मामूली चोटें आई हैं.

उन्होंने बताया कि नूर बाबा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद भारतीय दंड संहिता की दंगा करने, धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाने आदि धाराओं के तहत 24 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है.

उन्होंने बताया कि अब तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है.

अधिकारी के अनुसार, प्रथमदृष्टया ऐसा लगता है कि कुछ विस्फोटक पदार्थों का उपयोग कर दरगाह को क्षतिग्रस्त किया गया है. इस्तेमाल किए गए विस्फोटक के बारे में पूछे जाने पर पुलिस अधीक्षक ने कहा कि यह फॉरेंसिक जांच के बाद पता चल पाएगा.

उन्होंने बताया कि यह धार्मिक स्थल नीमच जिले में रतनगढ़ पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत वन क्षेत्र में एक सुनसान इलाके में स्थित है.

पर्चे के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हो सकता है कि जांचकर्ताओं को बरगलाने और घटना को अलग मोड़ देने के लिए इसे छोड़ा गया हो.

हालांकि, वर्मा ने कहा कि वह आरोपियों की पहचान के बारे में कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं, क्योंकि अभी जांच चल रही है.

उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक स्थल को सिर्फ पांच प्रतिशत नुकसान हुआ है, लेकिन यह भी स्वीकार किया कि हमले से उसके खंभे कमजोर हो गए हैं.

वर्मा ने इन खबरों का खंडन किया कि हमलावर तलवार और भाला लेकर पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि हमलावरों के पास लाठियां थीं.

इस बीच घटना के विरोध में मुस्लिम समुदाय के सदस्यों ने जुलूस निकाला. उन्होंने हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर पुलिस अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा.

दरगाह पर हुए हमले के बाद सबूत जुटाने के लिए इस धार्मिक स्थल को बंद कर दिया गया है. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि घटना की जांच कर रही पुलिस ने दरगाह के क्षतिग्रस्त हिस्से के नमूने जांच के लिए फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भेज दिया है.

इस हमले में घायल हुए अब्दुल रज्जाक एवं दरगाह के खादिम नूर बाबा इलाज कराने के बाद राजस्थान स्थित अपने-अपने घर लौट चुके हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)