भारत

लखीमपुर खीरी हिंसा: दो आरोपी गिरफ़्तार, पूछताछ के लिए नहीं पेश हुए गृह राज्य मंत्री के बेटे

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में दो आरोपियों लव कुश और आशीष पांडे को गिरफ़्तार कर लिया गया है. वहीं केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा को पूछताछ के लिए लखीमपुर खीरी स्थित अपराध शाखा कार्यालय में बुलाया गया था. पुलिस ने बताया कि घटनास्थल की जांच में उन्हें कारतूस के खोखे मिले हैं.

आशीष मिश्रा और घटनास्थल पर मौजूद पुलिस. (फोटो: एएनआई/पीटीआई)

नई दिल्ली: लखीमपुर खीरी कांड मामले में पुलिस ने बीते गुरुवार को दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और मुख्य आरोपी एवं केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा को समन भेजकर शुक्रवार को पूछताछ के लिए बुलाया गया था.

हालांकि शुक्रवार को आशीष पूछताछ के लिए पेश नहीं हुए. इसके बाद पुलिस ने दूसरा नोटिस जारी उन्हें शनिवार को सुबह 11 बजे तक पेश होने का समय दिया है.

पुलिस सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार दोपहर बाद उनके घर के बाहर चस्पा नोटिस में कहा गया है, ‘शनिवार को प्रात: 11 बजे अपराध शाखा कार्यालय पुलिस लाइन लखीमपुर खीरी में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष प्रस्तुत करें. यदि आपके द्वारा ऐसा नहीं किया जाता है, तो नियमानुसार विधिक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी.’

आधिकारिक सूत्रों ने बताया, ‘आशीष को पुलिस ने सुबह 10 बजे तलब किया था लेकिन वह आज नहीं पहुंचे. जबकि जांच टीम का नेतृत्व कर रहे पुलिस उपमहानिरीक्षक (मुख्यालय) उपेंद्र अग्रवाल समय पर कार्यालय पहुंच गए थे.’

इस बीच लखनऊ में गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा ने अपने बेटे को ‘निर्दोष’ बताते हुए शुक्रवार को कहा कि उनका बेटा ‘अस्वस्थ’ है और वह शनिवार को पुलिस के सामने पेश होगा.

मिश्रा ने यहां चौधरी चरण सिंह हवाई अड्डे पर संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘हमें कानून पर भरोसा है. मेरा बेटा निर्दोष है, उसे गुरुवार को नोटिस मिला लेकिन उसने कहा कि उसकी तबीयत ठीक नहीं है.’

उन्होंने कहा, ‘वह कल (शनिवार) पुलिस के सामने पेश होगा और अपने निर्दोष होने के बारे में बयान और सबूत देगा.’ यह पूछे जाने पर कि विपक्ष उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है, उन्होंने कहा, ‘विपक्ष तो कुछ भी मांगता है.’

मंत्री ने कहा कि यह भाजपा सरकार है जो निष्पक्ष तरीके से काम करती है. दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा का नाम तीन अक्टूबर को हुई लखीमपुर हिंसा की प्राथमिकी में है, जिसमें चार किसानों और एक पत्रकार सहित आठ लोगों की मौत हो गई थी.

इस बीच अपुष्ट सूत्रों से ऐसी खबर मिल रही है कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री का आरोपी बेटा आशीष नेपाल भाग गया है. इस पर समाजवादी पार्टी (सपा) ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की है.

इन खबरों के बारे में पूछे जाने पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा, ‘अगर यह सच है, तो केंद्र सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए और आरोपी को नेपाल से गिरफ्तार करवाना चाहिए.’

वहीं, संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने यहां जारी एक बयान में कहा कि आशीष मिश्रा को जारी किए गए समन के बाद भी उनका कोई अता पता नहीं है, यह बहुत चिंताजनक बात है.

बयान में कहा गया है कि लखीमपुर हिंसा में शामिल सुमित जायसवाल, अंकित दास और अन्य को गिरफ्तार करने में पुलिस ढिलाई बरत रही है. जबकि थार वाहन (जिससे किसानों को कुचलने का आरोप है) में से सुमित जायसवाल स्पष्ट रूप से वाहन से भागते हुए दिखाई दे रहे थे.

एसकेएम ने कहा कि इसी तरह एक और वीडियो क्लिप सामने आई है जिसमें एक पुलिस अधिकारी घटना में पकड़े गए एक व्यक्ति से पूछताछ कर रहा है, जो कह रहा है कि अंकित दास काफिले के फॉर्च्यूनर वाहन में था.

संयुक्त किसान मोर्चा ने आशीष, सुमित और अंकित की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की हैं.

पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए दो लोगों में बनबीरपुर गांव के लवकुश और निघासन तहसील के आशीष पांडेय शामिल हैं.

इससे पहले सूत्रों ने द वायर  को बताया था कि केंद्रीय मंत्री को इस्तीफा देने के लिए नहीं कहा जाएगा, बल्कि उनसे जांच में सहयोग करने के लिए कहा गया है. फिलहाल मंत्री और उनके बेटे दोनों ने दावा किया है कि वे घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे.

कुमार ने बताया कि लखीमपुर में बीते रविवार को हुई हिंसा के मामले में नामजद अभियुक्त आशीष मिश्रा के अलावा अज्ञात आरोपियों में से छह के नाम सामने आए हैं. इनमें से तीन आरोपियों की घटना वाले दिन मौके पर ही मौत हो चुकी है. बाकी चार आरोपियों में दो को गिरफ्तार कर लिया गया है.

उन्होंने यह भी बताया कि बीते बुधवार को मामले के विवेचक ने फॉरेंसिक टीम के साथ घटनास्थल का दौरा किया था. इस दौरान वहां मौजूद एक वाहन से 315 बोर के दो कारतूसों के खोखे बरामद हुए हैं.

लखनऊ जोन की पुलिस महानिरीक्षक लक्ष्मी सिंह ने बताया कि अगर आशीष पूछताछ के लिए नहीं आते हैं तो इसके लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी.

उन्होंने बताया कि इस मामले में कुछ लोगों से पूछताछ की जा रही है. इस दौरान लखनऊ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक एसएन साबत ने पुलिस लाइन का दौरा किया.

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष पिछली तीन अक्टूबर को लखीमपुर खीरी जिले के तिकोनिया इलाके में हुई हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत के मामले के मुख्य आरोपी हैं.

पुलिस महानिरीक्षक लक्ष्मी सिंह ने बताया कि वारदात में मारे गए तीन अन्य लोगों की भूमिका के बारे में पहले कुछ भी स्पष्ट नहीं हो रहा था, लेकिन दो लोगों से पूछताछ के दौरान चीजें कुछ स्पष्ट हो रही हैं. हालांकि उन्होंने इस बारे में ज्यादा कुछ बताने से मना कर दिया.

इस सवाल पर कि क्या मौका-ए-वारदात पर किसी गाड़ी से खाली कारतूस बरामद हुए हैं, लक्ष्मी ने कहा कुछ सबूत सामने आए हैं और फॉरेंसिक टीम उनकी जांच कर रही है.

अपर पुलिस महानिदेशक साबत ने बताया कि मामले की जांच जारी है.

यह पूछे जाने पर कि क्या किसानों तथा पत्रकार के अतिरिक्त मारे गए लोगों तथा गिरफ्तार बताए जा रहे लोगों ने हिंसा भड़काई थी, साबत ने कहा, ‘दुर्घटना के बाद ही चीजें शुरू हुईं और जो लोग वाहन चला रहे थे, निश्चित रूप से उनका अपनी अपनी गाड़ी पर नियंत्रण था और वह हादसे के लिए 100 फीसदी जिम्मेदार हैं.’

पुलिस की यह कार्रवाई ऐसे वक्त शुरू हुई है जब उच्चतम न्यायालय ने लखीमपुर खीरी कांड को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए राज्य सरकार से मामले के आरोपियों की गिरफ्तारी के सिलसिले में शुक्रवार तक स्थिति रिपोर्ट मांगी है.

गौरतलब है कि लखीमपुर खीरी के तिकोनिया इलाके में पिछले रविवार को हुई हिंसा में मारे गए किसानों के अलावा चार अन्य लोगों में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के वाहन चालक और एक निजी समाचार चैनल के स्थानीय रिपोर्टर रमन कश्यप भी शामिल हैं.

केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहा किसानों का एक समूह उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की यात्रा के खिलाफ तीन अक्टूबर को प्रदर्शन कर रहा था, जब कथित तौर पर लखीमपुर खीरी में एक एसयूवी गाड़ी ने चार किसानों को कुचल दिया गया था.

लखीमपुर खीरी के सांसद और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ‘टेनी’ के विरोध में बीते तीन अक्टूबर को वहां के आंदोलित किसानों ने उनके (टेनी) पैतृक गांव बनबीरपुर में आयोजित एक समारोह में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के जाने का विरोध किया था. इसके बाद भड़की हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई.

केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में करीब दस महीने से आंदोलन कर रहे किसानों की नाराजगी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ‘टेनी’ के उस बयान के बाद और बढ़ गई थी, जिसमें उन्होंने किसानों को ‘दो मिनट में सुधार देने की चेतावनी’ और ‘लखीमपुर खीरी छोड़ने’ की चेतावनी दी थी.

इस संबंध में भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 149 (तीनों दंगों से संबंधित धाराएं), 279 (रैश ड्राइविंग), 338 (किसी भी व्यक्ति को जल्दबाजी या लापरवाही से गंभीर चोट पहुंचाना, जिससे मानव जीवन को खतरा हो) 304ए (लापरवाही से मौत), 302 (हत्या), 120बी (आपराधिक साजिश का पक्ष) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है.

मृतक किसानों की पहचान- गुरविंदर सिंह (22 वर्ष), दलजीत सिंह (35 वर्ष), नक्षत्र सिंह और लवप्रीत सिंह (दोनों की उम्र का उल्लेख नहीं) के रूप में की गई है.

इसके साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की जांच के लिए एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया गया है. इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिन्हें दो महीने के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)