राजनीति

उत्तर प्रदेश: विधानसभा चुनाव से पहले साथ आईं सपा और सुभासपा

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी प्रमुख ओमप्रकाश राजभर की बैठक हुई. हालांकि यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि दोनों दल आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कोई गठबंधन करेंगे या नहीं. पूर्वांचल के कई ज़िलों में प्रभावी माने जाने वाली सुभासपा के विधानसभा में चार विधायक हैं.

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर. (फोटो: ट्विटर/@samajwadiparty)

लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने ‘साथ मिलकर दलितों और पिछड़ों की लड़ाई लड़ने’ का ऐलान किया है.

सपा ने बुधवार को एक ट्वीट कर इसकी जानकारी दी. हालांकि यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि दोनों दल उत्तर प्रदेश का आगामी विधानसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ेंगे या नहीं.

ट्वीट में कहा गया है, ‘वंचितों, शोषितों, पिछड़ों, दलितों, महिलाओं, किसानों, नौजवानों, हर कमजोर वर्ग की लड़ाई समाजवादी पार्टी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी मिलकर लड़ेंगे. सपा और सुभासपा आए साथ, उत्तर प्रदेश में भाजपा साफ.’

ट्वीट में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर की आज हुई बैठक की एक तस्वीर भी टैग की गई है.

प्रदेश के विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू होने के बाद हुई इस बैठक को लेकर तमाम राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं.

विधानसभा में राजभर की पार्टी के चार विधायक हैं और उनके दल का पूर्वांचल के एक दर्जन से ज्यादा जिलों में दबदबा रखने वाले राजभर मतदाताओं में प्रभाव माना जाता है.

राजभर ने ट्वीट किया, ‘अबकी बार, भाजपा साफ़! समाजवादी पार्टी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी मिलकर आए साथ. दलितों, पिछड़ों अल्पसंख्यकों के साथ सभी वर्गों को धोखा देने वाली भाजपा सरकार के दिन हैं बचे चार. माननीय पूर्व मुख्यमंत्री एवं सपा के सुप्रीमो अखिलेश यादव से शिष्टाचार मुलाकात की.’

हालांकि राजभर ने भी यह स्पष्ट नहीं किया कि उनकी पार्टी सपा के साथ मिलकर प्रदेश का आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेगी या नहीं.

हालांकि सुभासपा के नेता अरुण राजभर का कहना है कि उनकी पार्टी सपा के साथ है और सीटों का बंटवारा जल्दी तय किया जाएगा. पार्टी आगामी 27 अक्टूबर को मऊ में एक रैली करेगी. जिसमें स्थिति बिल्कुल साफ हो जाएगी.

सपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव सीट बंटवारे का मसला तय करेंगे, सपा और सुभासपा साथ हैं.

राजभर ने हाल ही में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह से मुलाकात की थी जिसके बाद उनकी पार्टी के एक बार फिर भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हो गई थी.

सुभासपा ने 2017 का विधानसभा चुनाव भाजपा के साथ मिलकर लड़ा था. राजभर को प्रदेश की मौजूदा सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बनाया गया था लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से तनातनी के बाद 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने पद से इस्तीफा देते हुए भाजपा से अलग होने का ऐलान कर दिया था.

राजभर ने भागीदारी मोर्चा गठित किया है, जिसमें असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम भी शामिल है जो मुसलमानों को प्रतिनिधित्व देने के नाम पर उत्तर प्रदेश की 100 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने का ऐलान कर चुकी है.

न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, राजभर छोटे क्षेत्रीय और जाति-आधारित दलों को साथ लेने के अभियान की अगुवाई कर रहे हैं. उन्होंने 10 छोटे दलों के एक समूह को भागीदारी संकल्प मोर्चा का नाम दिया है.

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के मोर्चा का हिस्सा होने या न होने के सवाल पर सुभासपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता पीयूष मिश्रा ने कहा कि यदि जरूरी हुआ तो सुभासपा एआईएमआईएम के साथ अलग हो जाएगा क्योंकि एआईएमआईएम के साथ मोर्चा में आने के संबंध में अभी तक चीजें अंतिम नहीं हुई हैं.

सीट बंटवारे के के बारे में राजभर ने कहा कि भले ही समाजवादी पार्टी ने सुभासपा के लिए एक भी सीट न छोड़ी हो, फिर भी वह अखिलेश यादव के साथ गठबंधन में 2022 का चुनाव लड़ेंगे.

इस बीच, एक आधिकारिक बयान में समाजवादी पार्टी ने 2022 के चुनावों के लिए सुभासपा के साथ हाथ मिलाने की भी पुष्टि की.

सपा ने कहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी सरकार ने वंचितों, शोषितों, किसानों, युवाओं, महिलाओं, व्यापारियों सहित गरीब, दलित और पिछड़े वर्गों के लिए अनगिनत काम किए हैं. समाजवादी पार्टी के साथ कमजोरों के हक के लिए आवाज उठाने वाली सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी यूपी को विकास के पथ पर ले जाने के लिए तैयार है. यह भाजपा के दमनकारी शासन के अंत की शुरुआत है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)