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सिंघू बॉर्डर लिंचिंग: किसान मोर्चा ने मामले की सुप्रीम कोर्ट के जज से जांच कराने की मांग की

पंजाब के तरन तारन ज़िले के दलित मज़दूर लखबीर सिंह का शव बीते 15 अक्टूबर को दिल्ली-हरियाणा के सिंघू बॉर्डर पर एक बैरिकेड से बंधा हुआ पाया गया था. एक वीडियो में सिखों के धर्मग्रंथ की बेअदबी के आरोप में निहंग सिखों के एक समूह ने उनकी हत्या किए जाने की बात स्वीकार की थी.

किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान सिंघू बॉर्डर पर सुरक्षाकर्मी पहरा देते हुए. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने बृहस्पतिवार को मांग की कि सिंघू बॉर्डर पर एक दलित खेतिहर मजदूर की पीट-पीट कर हत्या किए जाने की घटना की जांच उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश से कराई जाए और निहंग सिख के एक नेता बाबा अमन सिंह से मुलाकात करने के लिए केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और कैलाश चौधरी से इस्तीफा देने की मांग की, जिसका समूह कथित तौर पर खेतिहर मजदूर लखबीर सिंह की जघन्य हत्या में संलिप्त था.

किसान संगठनों के समूह ने लखीमपुर खीरी घटना में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा की बर्खास्तगी एवं गिरफ्तारी की मांग तथा कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन के 11 माह पूरा होने पर अखिल भारतीय स्तर पर धरना देने का भी आह्वान किया.

मोर्चा ने बयान जारी कर कहा, ‘किसान मोर्चा मांग करता है कि केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और कैलाश चौधरी तुरंत इस्तीफा दें, जिन्होंने निहंग सिखों के एक नेता से मुलाकात की, जिसका समूह जघन्य हत्या में संलिप्त था. मोर्चा षड्यंत्र की उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश से जांच कराने की मांग करता है.’

इसने कहा कि इस तरह की घटनाओं से किसान आंदोलन को बदनाम करने और इसे हिंसा में फंसाने का षड्यंत्र रचा गया.

संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा, ‘पंजाब के 32 किसान संगठनों की कल (बुधवार को) सिंघू मोर्चा पर बैठक हुई. घटना की तथ्यान्वेषी रिपोर्ट सौंपने के लिए पांच सदस्यीय समिति का भी गठन किया गया. सरकार के षड्यंत्र को विफल करने के लिए बैठक में पंजाब के किसानों से कहा गया कि मोर्चा को मजबूत बनाएं.’

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, किसान नेता बलदेव सिरसा ने कहा कि 15 अक्टूबर की घटना (खेतिहर मजदूर की लाश मिलने का दिन) प्रदर्शनकारियों को बदनाम करने और कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे विरोध को समाप्त करने के लिए एक पूर्व नियोजित साजिश थी.

उन्होंने कहा कि उनके समेत पांच नेताओं की फैक्ट फाइडिंग समिति भी अपने स्तर पर मामले की जांच कर रही है और 27 अक्टूबर तक अपनी रिपोर्ट देगी.

सिरसा ने कहा, ‘हमने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के इस्तीफे की मांग की है और कृषि आंदोलन के 11 महीने पूरे होने पर 26 अक्टूबर को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेंगे.’

मालूम हो कि पंजाब के तरन तारन जिले के मजदूर लखबीर सिंह का शव बीते 15 अक्टूबर को दिल्ली-हरियाणा के सिंघू बॉर्डर पर एक बैरिकेड से बंधा हुआ पाया गया था. जहां पास में ही नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान डेरा डाले हुए हैं. सिंह का एक हाथ कटा हुआ मिला और शरीर पर धारदार हथियारों के कई घाव मिले थे.

घटना से संबंधित एक वायरल वीडियो में निहंग सिखों द्वारा कथित तौर पर सिखों के पवित्र ग्रंथ की बेअदबी के आरोप में उनकी हत्या करने की बात कही गई थी.

कुंडली थाने में बीते 15 अक्टूबर को दर्ज हत्या के मामले में पुलिस ने अब तक चार निहंग सिखों- सरबजीत सिंह, नारायण सिंह, भगवंत सिंह और गोविंद प्रीत सिंह को गिरफ्तार किया है.

इस घटनाक्रम के बाद बीते दिनों मृतक दलित मजदूर लखबीर सिंह के खिलाफ सिखों के पवित्र पुस्तक का कथित तौर पर अपमान करने का मामले दर्ज किया है.

बीते 17 अक्टूबर को राज्य की कुंडली पुलिस थाने में बलविंदर सिंह, जत्थेदार, मोइयां दी मंडी वाले, उड़ना दल की शिकायत के आधार पर सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 295ए (किसी उपासना के स्थान को या व्यक्तियों के किसी वर्ग द्वारा पवित्र मानी गई किसी वस्तु को नष्ट, नुकसानग्रस्त या अपवित्र करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)