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लखीमपुर हिंसा: राष्ट्रपति से केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा की बर्ख़ास्तगी और गिरफ़्तारी की मांग

दिल्ली की सीमाओं पर विवादित कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसान आंदोलन की अगुवाई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से लखीमपुर खीरी हिंसा की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय की निगरानी में एक विशेष जांच दल गठित करने की मांग की है. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा लखीमपुर खीरी में किसानों को गाड़ी से कुचल कर उनकी हत्या किए जाने के मामले में आरोपी हैं.

अजय मिश्रा. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली/आगरा: दिल्ली की सीमाओं पर विवादित कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन की अगुवाई कर रहे संगठन संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने सोमवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को एक पत्र लिखकर लखीमपुर खीरी हिंसा के सिलसिले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा की बर्खास्तगी तथा गिरफ्तारी के साथ ही घटना की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय की निगरानी में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग की है.

अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा लखीमपुर खीरी में किसानों को गाड़ी से कुचल कर उनकी हत्या किए जाने के मामले में आरोपी हैं.

मोर्चा ने कहा कि लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में ‘हितों का टकराव न्याय के लिए एक प्रमुख बाधा है.’ मोर्चा ने आरोप लगाया कि हिरासत में आरोपियों के साथ ‘वीआईपी’ व्यवहार किया जा रहा है.

संगठन ने अपने पत्र में कहा, ‘केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए. हत्या में भूमिका के लिए उन्हें भी तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए.’

मोर्चा ने कहा, ‘हम यह भी मांग करते हैं कि इस घटना की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में एक एसआईटी द्वारा की जानी चाहिए.’

बीते तीन अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा में मारे गए आठ लोगों में से चार किसान थे, जिन्हें कथित तौर पर भाजपा कार्यकर्ताओं को ले जा रहे एक वाहन ने पीछे से टक्कर मारकर कुचल दिया था.

किसानों ने दावा किया है कि अजय मिश्रा का बेटा आशीष मिश्रा एक वाहन में थे. हालांकि इस आरोप का उनके और उनके पिता ने खंडन किया करते हुए है कि वे यह साबित करने के लिए सबूत पेश कर सकते हैं कि वह उस समय एक अन्य कार्यक्रम में मौजूद थे.

मोर्चा का आरोप है कि हिरासत में आरोपियों के साथ ‘वीआईपी’ व्यवहार किया जा रहा है और गवाहों के बयान अपेक्षित गति से दर्ज नहीं किए जा रहे हैं.

मोर्चा ने पत्र में कहा, ‘यह स्पष्ट है कि हितों का टकराव लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में न्याय के लिए एक प्रमुख बाधा है तथा कोई भी सभ्य सरकार अब तक नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के तहत, अजय मिश्रा को बर्खास्त कर उन्हें गिरफ्तार कर लेती.’

लखीमपुर खीरी के सांसद और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ‘टेनी’ के विरोध में बीते तीन अक्टूबर को वहां के आंदोलित किसानों ने उनके (टेनी) पैतृक गांव बनबीरपुर में आयोजित एक समारोह में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के जाने का विरोध किया था. इसके बाद भड़की हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी.

चार किसानों की मौत कथित रूप से भाजपा कार्यकर्ताओं को लेकर जा रहे वाहनों से कुचल दिए जाने की वजह से हुई थी.

केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में करीब दस महीने से आंदोलन कर रहे किसानों की नाराजगी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ‘टेनी’ के उस बयान के बाद और बढ़ गई थी, जिसमें उन्होंने किसानों को ‘दो मिनट में सुधार देने की चेतावनी’ और ‘लखीमपुर खीरी छोड़ने’ की चेतावनी दी थी.

गाड़ी से कुचल जाने से मृत किसानों की पहचान- गुरविंदर सिंह (22 वर्ष), दलजीत सिंह (35 वर्ष), नक्षत्र सिंह और लवप्रीत सिंह (दोनों की उम्र का उल्लेख नहींं) के रूप में की गई है.

बीते तीन अक्टूबर को भड़की हिंसा में भाजपा के दो कार्यकर्ता- शुभम मिश्रा और श्याम सुंदर निषाद, केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के ड्राइवर हरिओम मिश्रा और एक निजी टीवी चैनल के लिए काम करने वाले पत्रकार रमन कश्यप की भी मौत हो गई थी.

किसानों का आरोप है कि केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा के पुत्र आशीष मिश्रा ने किसानों को अपनी गाड़ी से कुचला. हालांकि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने इस बात से से इनकार किया है.

इस मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा तथा 15-20 अन्य लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है.

इस मामले में अब तक केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा सहित 10 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.

यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा का विरोध करेगा संयुक्त किसान मोर्चा: राकेश टिकैत

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेता राकेश टिकैत ने सोमवार को आगरा में अरुण नारवार के परिवार से भेंट की और उनके परिवार को 40 लाख रुपये मुआवजा तथा एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने की मांग की.

गौरतलब है कि अरुण की 19 अक्टूबर को आगरा में पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी. पुलिस ने जगदीशपुरा थाने के मालखाने से 25 लाख रुपये की चोरी के सिलसिले में अरुण को हिरासत में लिया था.

नारवार परिवार से मिलने के बाद टिकैत ने पत्रकारों से कहा, ‘राज्य सरकार मुआवजा देने में भेदभाव कर रही है. उसने लखीमपुर खीरी और कानपुर में 40-45 लाख रुपये की सहायता दी है, लेकिन आगरा में सरकार ने महज 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया है.’

उन्होंने कहा, ‘राज्य सरकार को अरुण के परिवार को भी 40 लाख रुपये का मुआवजा देना चाहिए. सरकार को भेदभाव नहीं करना चाहिए.’

उन्होंने नारवार परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने और अरुण के मौत की न्यायिक जांच कराने की भी मांग की.

कृषि कानूनों को लेकर भाजपा नीत सरकार पर निशाना साधते हुए टिकैत ने कहा, ‘मैं किसानों से अनुरोध करूंगा कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को वोट न दें. संयुक्त किसान मोर्चा राज्य के विधानसभा चुनावों में भाजपा का विरोध करेगा.’

उन्होंने कहा, ‘विधानसभा चुनाव में हम न तो कोई उम्मीदवार उतारेंगे और न ही किसी राजनीतिक दल का समर्थन करेंगे.’

टिकैत ने कहा कि केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ उनका विरोध प्रदर्शन समस्या सुलझने तक जारी रहेगा और इसे लेकर ‘हम केंद्र सरकार से बातचीत करने को भी तैयार हैं.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)