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अमेरिका ने पेगासस स्पायवेयर बनाने वाले इज़रायल के एनएसओ ग्रुप को ‘ब्लैकलिस्ट’ में डाला

अमेरिकी के वाणिज्य विभाग ने इस ‘ब्लैकलिस्ट’ में चार कंपनियों को शामिल किया है, जिसमें एनएसओ के अलावा इज़रायल की ही एक कंपनी- कैंडिरू भी शामिल है. विभाग की इस लिस्ट में शामिल की गई कंपनियों को अमेरिकी सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर मुहैया कराने पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है.

(फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: अमेरिकी सरकार ने बीते बुधवार (तीन नवंबर को) को कहा कि उसने इजरायली स्पायवेयर ‘पेगासस’ को बनाने वाली कंपनी एनएसओ ग्रुप को वाणिज्य विभाग की ‘एंटिटी लिस्ट’ में डाल दिया है. यह एक ब्लैकलिस्ट होती है, जिसमें शामिल की गईं कंपनियों को अमेरिकी तकनीक देने पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है.

जो बाइडेन प्रशासन द्वारा ये कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब एनएसओ के फोन हैकिंग टूल्स का इस्तेमाल कर विदेशी सरकारों द्वारा गैरकानूनी तरीके से ‘सरकारी अधिकारियों, पत्रकारों, उद्योगपतियों, कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और दूतावास के कर्मचारियों’ को निशाना बनाने के मामले सामने आए हैं.

अमेरिकी सरकार ने इस तरह की गतिविधियों की पुष्टि की है.

मालूम हो कि एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया कंसोर्टियम, जिसमें द वायर  भी शामिल था, ने पेगासस प्रोजेक्ट के तहत यह खुलासा किया था कि इजरायल की एनएसओ ग्रुप कंपनी के पेगासस स्पायवेयर के जरिये नेता, पत्रकार, कार्यकर्ता, सुप्रीम कोर्ट के अधिकारियों के फोन कथित तौर पर हैक कर उनकी निगरानी की गई या फिर वे संभावित निशाने पर थे.

इस कड़ी में 18 जुलाई से द वायर  सहित विश्व के 17 मीडिया संगठनों ने 50,000 से ज्यादा लीक हुए मोबाइल नंबरों के डेटाबेस की जानकारियां प्रकाशित करनी शुरू की थी, जिनकी पेगासस स्पायवेयर के जरिये निगरानी की जा रही थी या वे संभावित सर्विलांस के दायरे में थे.

अमेरिकी के वाणिज्य विभाग ने इस ‘ब्लैकलिस्ट’ में चार कंपनियों को शामिल किया है, जिसमें एनएसओ के अलावा इजरायल की ही एक छोटी कंपनी- कैंडिरू भी शामिल है.

इसने एक प्रेस रिलीज में कहा, ‘एनएसओ ग्रुप और कैंडिरू (इजरायल) को इस सबूत के आधार पर ‘एंटिटी लिस्ट ’ में जोड़ा गया है कि इन संस्थाओं ने स्पायवेयर विकसित कर विदेशों में आपूर्ति की, जिसका इस्तेमाल सरकारी अधिकारियों, पत्रकारों, व्यापारियों, कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और दूतावास के कर्मचारियों को दुर्भावनापूर्ण रूप से निशाना करने के लिए किया गया है.’

उन्होंने कहा कि इन उपकरणों ने विदेशी सरकारों को दमन करने में भी बढ़ावा दिया है. इसका इस्तेमाल सत्तावादी सरकारों द्वारा असंतुष्टों, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के लिए किया गया. इससे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को खतरा है.

रिपोर्ट्स के मुताबित एंटिटी लिस्ट में शामिल की गईं कंपनियों को अमेरिकी सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर मुहैया कराने पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है.

इससे पहले चीनी कंपनियों जैसे कि हुवावे को इस सूची में जोड़ा गया था. उन पर उइगरों (चीन में एक अल्पसंख्यक समुदाय) के मानवाधिकार हनन में कथित तौर पर योगदान देने का आरोप लगा था. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी आमतौर पर अपने सहयोगी देश की कंपनियों को निशाना नहीं बनाती है.

वाणिज्य सचिव गिना एम. रायमोंडो ने कहा, ‘संयुक्त राज्य अमेरिका उन कंपनियों को जवाबदेह बनाने के लिए निर्यात नियंत्रणों का आक्रामक रूप से उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों का संचालन करने के लिए प्रौद्योगिकियों का विकास करते हैं, जो कि नागरिक समाज के सदस्यों, प्रतिरोध जताने वाले लोगों, सरकारी अधिकारियों की साइबर सुरक्षा के लिए खतरा हैं.’

एनएसओ का जवाब

इस मामले को लेकर एनएसओ ने अपने एक बयान में कहा कि वह इस फैसले से ‘निराश’ है और वह इस फैसले को वापस लेने की मांग उठाएगा.

कंपनी के एक प्रवक्ता ने दावा किया कि वे मानवाधिकार कानूनों का कठोरता से पालन करते हैं, जो कि अमेरिकी मूल्यों पर आधारित है और वे इसे गहराई से साझा करते हैं. उन्होंने कहा कि कंपनी ने उनके नियमों का उल्लंघन करने वाली सरकारी एजेंसियों के साथ कई कॉन्ट्रैक्ट रद्द किए हैं.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)