سایت کازینو کازینو انلاین معتبرترین کازینو آنلاین فارسی کازینو انلاین با درگاه مستقیم کازینو آنلاین خارجی سایت کازینو انفجار کازینو انفجار بازی انفجار انلاین کازینو آنلاین انفجار سایت انفجار هات بت بازی انفجار هات بت بازی انفجار hotbet سایت حضرات سایت شرط بندی حضرات بت خانه بت خانه انفجار تاینی بت آدرس جدید و بدون فیلتر تاینی بت آدرس بدون فیلتر تاینی بت ورود به سایت اصلی تاینی بت تاینی بت بدون فیلتر سیب بت سایت سیب بت سایت شرط بندی سیب بت ایس بت بدون فیلتر ماه بت ماه بت بدون فیلتر دانلود اپلیکیشن دنس بت دانلود برنامه دنس بت برای اندروید دانلود دنس بت با لینک مستقیم دانلود برنامه دنس بت برای اندروید با لینک مستقیم Dance bet دانلود مستقیم بازی انفجار دنس بازی انفجار دنس بت ازا بت Ozabet بدون فیلتر ازا بت Ozabet بدون فیلتر اپلیکیشن هات بت اپلیکیشن هات بت برای اندروید دانلود اپلیکیشن هات بت اپلیکیشن هات بت اپلیکیشن هات بت برای اندروید دانلود اپلیکیشن هات بت عقاب بت عقاب بت بدون فیلتر شرط بندی کازینو فیفا نود فیفا 90 فیفا نود فیفا 90 شرط بندی سنگ کاغذ قیچی بازی سنگ کاغذ قیچی شرطی پولی bet90 بت 90 bet90 بت 90 سایت شرط بندی پاسور بازی پاسور آنلاین بت لند بت لند بدون فیلتر Bababet بابا بت بابا بت بدون فیلتر Bababet بابا بت بابا بت بدون فیلتر گلف بت گلف بت بدون فیلتر گلف بت گلف بت بدون فیلتر پوکر آنلاین پوکر آنلاین پولی پاسور شرطی پاسور شرطی آنلاین پاسور شرطی پاسور شرطی آنلاین پاسور شرطی پاسور شرطی آنلاین پاسور شرطی پاسور شرطی آنلاین تهران بت تهران بت بدون فیلتر تهران بت تهران بت بدون فیلتر تهران بت تهران بت بدون فیلتر تخته نرد پولی بازی آنلاین تخته ناسا بت ناسا بت ورود ناسا بت بدون فیلتر هزار بت هزار بت بدون فیلتر هزار بت هزار بت بدون فیلتر شهر بت شهر بت انفجار چهار برگ آنلاین چهار برگ شرطی آنلاین چهار برگ آنلاین چهار برگ شرطی آنلاین رد بت رد بت 90 رد بت رد بت 90 پنالتی بت سایت پنالتی بت بازی انفجار حضرات حضرات پویان مختاری بازی انفجار حضرات حضرات پویان مختاری بازی انفجار حضرات حضرات پویان مختاری سبد ۷۲۴ شرط بندی سبد ۷۲۴ سبد 724 بت 303 بت 303 بدون فیلتر بت 303 بت 303 بدون فیلتر شرط بندی پولی شرط بندی پولی فوتبال بتکارت بدون فیلتر بتکارت بتکارت بدون فیلتر بتکارت بتکارت بدون فیلتر بتکارت بتکارت بدون فیلتر بتکارت بت تایم بت تایم بدون فیلتر سایت شرط بندی بدون نیاز به پول یاس بت یاس بت بدون فیلتر یاس بت یاس بت بدون فیلتر بت خانه بت خانه بدون فیلتر Tatalbet tatalbet 90 تتل بت شرط بندی تتل بت شرط بندی تتلو Tatalbet tatalbet 90 تتل بت شرط بندی تتل بت شرط بندی تتلو Tatalbet tatalbet 90 تتل بت شرط بندی تتل بت شرط بندی تتلو Tatalbet tatalbet 90 تتل بت شرط بندی تتل بت شرط بندی تتلو Tatalbet tatalbet 90 تتل بت شرط بندی تتل بت شرط بندی تتلو Tatalbet tatalbet 90 تتل بت شرط بندی تتل بت شرط بندی تتلو اپلیکیشن سیب بت دانلود اپلیکیشن سیب بت اندروید اپلیکیشن سیب بت دانلود اپلیکیشن سیب بت اندروید اپلیکیشن سیب بت دانلود اپلیکیشن سیب بت اندروید سیب بت سایت سیب بت بازی انفجار سیب بت سیب بت سایت سیب بت بازی انفجار سیب بت سیب بت سایت سیب بت بازی انفجار سیب بت بت استار سایت استاربت بت استار سایت استاربت پابلو بت پابلو بت بدون فیلتر سایت پابلو بت 90 پابلو بت 90 پیش بینی فوتبال پیش بینی فوتبال رایگان پیش بینی فوتبال با جایزه پیش بینی فوتبال پیش بینی فوتبال رایگان پیش بینی فوتبال با جایزه بت 45 سایت بت 45 بت 45 سایت بت 45 سایت همسریابی پيوند سایت همسریابی پیوند الزهرا بت باز بت باز کلاب بت باز 90 بت باز بت باز کلاب بت باز 90 بری بت بری بت بدون فیلتر بازی انفجار رایگان بازی انفجار رایگان اندروید بازی انفجار رایگان سایت بازی انفجار رایگان بازی انفجار رایگان اندروید بازی انفجار رایگان سایت شير بت بدون فيلتر شير بت رویال بت رویال بت 90 رویال بت رویال بت 90 بت فلاد بت فلاد بدون فیلتر بت فلاد بت فلاد بدون فیلتر بت فلاد بت فلاد بدون فیلتر روما بت روما بت بدون فیلتر پوکر ریور تاس وگاس بت ناببتکارتسایت بت بروسایت حضراتسیب بتپارس نودایس بتسایت سیگاری بتsigaribetهات بتسایت هات بتسایت بت بروبت بروماه بتاوزابت | ozabetتاینی بت | tinybetبری بت | سایت بدون فیلتر بری بتدنس بت بدون فیلترbet120 | سایت بت ۱۲۰ace90bet | acebet90 | ac90betثبت نام در سایت تک بتسیب بت 90 بدون فیلتریاس بت | آدرس بدون فیلتر یاس بتبازی انفجار دنسبت خانه | سایتبت تایم | bettime90دانلود اپلیکیشن وان ایکس بت 1xbet بدون فیلتر و آدرس جدیدسایت همسریابی دائم و رایگان برای یافتن بهترین همسر و همدمدانلود اپلیکیشن هات بت بدون فیلتر برای اندروید و لینک مستقیمتتل بت - سایت شرط بندی بدون فیلتردانلود اپلیکیشن بت فوت - سایت شرط بندی فوت بت بدون فیلترسایت بت لند 90 و دانلود اپلیکیشن بت 90سایت ناسا بت - nasabetدانلود اپلیکیشن ABT90 - ثبت نام و ورود به سایت بدون فیلتر

कृषि क़ानून: क्यों जारी रह सकता है किसानों का आंदोलन

संसद द्वारा तीन कृषि क़ानून निरस्त करने से किसानों की कोई मांग पूरी नहीं होगी- वे बस वहीं पहुंच जाएंगे, जहां वे यह क़ानून बनाए जाने से पहले थे.

/
टिकरी सीमा पर कृषि कानून वापस लिए जाने के निर्णय पर जश्न मनाते किसान. (फोटो: पीटीआई)

संसद द्वारा तीन कृषि क़ानून निरस्त करने से किसानों की कोई मांग पूरी नहीं होगी- वे बस वहीं पहुंच जाएंगे, जहां वे यह क़ानून बनाए जाने से पहले थे.

टिकरी सीमा पर कृषि कानून वापस लिए जाने के निर्णय पर जश्न मनाते किसान. (फोटो: पीटीआई)

किसानों और सरकार के बीच एक साल से ज्यादा चली रस्साकशी के बाद प्रधानमंत्री ने सबको चौंकाते हुए 19 तारीख की सुबह गुरुपर्व के अवसर पर किसानों और सरकार के बीच एक लंबे संघर्ष का कारण रहे तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की अपनी सरकार की योजना का ऐलान किया.

जल्दबाजी में लाया गया विधेयक

जून, 2020, जब कोरोना वायरस संक्रमण की पहली लहर अपने उफान पर थी, सरकार ने अध्यादेश के रास्ते से तीन कृषि कानूनों को लागू किया था. किसानों ने इसके ठीक बाद से अपना विरोध शुरू कर दिया.

इतने महत्वपूर्ण मसले पर अध्यादेश लाने की इतनी क्या जल्दबाजी थी? साफतौर पर कॉरपोरेट सेक्टर की मदद करना इस सरकार के एजेंडा का अहम अंग है और एक ऐसे समय में जब विरोध प्रदर्शनों की इजाजत नहीं थी, इस कानून को थोपा जा सकता था. संसद के अगले सत्र में सरकार समुचित बहस के बगैर ही इस अध्यादेश की जगह लेने के लिए विधेयक लेकर आई.

सवाल फिर उठता है कि जब इन कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो चुके थे, तब इन विधेयकों को इतनी जल्दबाजी में लाने के लिए सरकार इतनी बेचैन क्यों थी? एक बार फिर इसे एक मौके के तौर पर देखा गया. किसानों ने अपने आंदोलन को तेज कर दिया और नवंबर, 2020 में अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने दिल्ली की सीमा की ओर कूच किया.

उन्होंने यह महसूस किया कि अपने राज्यों में विरोध प्रदर्शन करने से उनकी कोई सुध कोई नहीं लेगा और अपनी बात सुनाने के लिए उन्हें दिल्ली जाना होगा. वे रामलीला मैदान में प्रदर्शन करना चाहते थे, लेकिन उन्हें दिल्ली की सीमा पर रोक दिया गया और पिछले लगभग पूरे एक साल से वे वहीं जमे हुए हैं.

संसद में इन कानूनों को रद्द कराने की वर्तमान घोषणा किसानों की एक जीत है. खासतौर पर इसलिए क्योंकि वर्तमान सरकार अपनी गलतियों को स्वीकार नहीं करती है और विपक्ष और लोकतांत्रिक आवाजों की रत्ती भर भी परवाह किए बगैर अपने एजेडे को आगे बढ़ाने से कोई गुरेज नहीं करती है.

मिसाल के लिए, नोटबंदी ओर जीएसटी क्रियान्वयन की गलतियों के बारे सबको पता था, लेकिन सरकार अपनी गलती माने बगैर इन रास्तों पर आगे बढ़ती गई. कोरोना से निपटने के उपाय के तौर पर लगाए गए लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था धराशायी हो गई और यह स्पष्ट था कि मांग में कमी है और गरीबों के हाथों में पैसे की सख्त जरूरत है, लेकिन सरकार आपूर्ति केंद्रित नीतियों के रूप में अपने कारोबार हितैषी एजेंडा को आगे बढ़ाती रही.

पहला नीति हस्तक्षेप एक अल्पकालिक उपाय ही होता, लेकिन इसका तत्काल असर पड़ता, जबकि दूसरा एक दीर्घावधिक उपाय है जिसके सफल होने के लिए मांग में सुधार होना आवश्यक है. लेकिन सरकार ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया है.

चुनावी मजबूरियों के कारण हुआ हृदय परिवर्तन

तो, क्या किसानों को जश्न में डूब जाते हुए अपने आंदोलन को वापस ले लेना चाहिए? किसान नेताओं को यह बात समझ लेनी चाहिए कि यह कदम उत्तर भारत, खासकर उत्तर प्रदेश के बेहद अहम चुनाव के मद्देनजर उठाया गया है. यहां तक कि अपनी एक हालिया बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भारतीय जनता पार्टी को यह सलाह दी थी कि उत्तर प्रदेश चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है और किसान आंदोलन के कारण हो रहे नुकसान को कम करने के लिए इस मसले का जल्दी समाधान खोजा जाना चाहिए.

भाजपा ने यह महसूस किया कि अगर वह उत्तर प्रदेश गंवा बैठती है, तो 2024 में उसकी संभावनों को काफी नुकसान पहुंचेगा.

साफतौर पर सरकार का हृदय परिवर्तन के पीछे की वजह चुनावी है, न कि उसने किसानों की यह दलील स्वीकार कर ली है कि तीन कृषि कानून सुधार न होकर, उनकी बर्बादी का वारंट हैं. ये कानून उनकी स्थिति को सुधारने के बदले, उसे और बिगाड़ देंगे. इनका निर्माण बाजारीकरण (मार्केटाइजेशन) और कृषि के कॉरपोरेटीकरण को बढ़ावा देने के लिए किया गया है जिसका एकमात्र नतीजा ज्यादातर किसानों की हालत को और खराब करने के तौर पर ही निकल सकता है.

छोटे और सीमांत किसानों पर अपनी जमीन गंवाने और अपने ही खेत में मजदूर बन जाने का खतरा मंडराने लगेगा. चूंकि बढ़ते मशीनीकरण के चलते देश में गैर कृषि रोजगार पैदा होना काफी कम हो चुका है, इसलिए इन नए कामगारों की स्थिति वर्तमान समय के उनके सीमांत किसान भाइयों से भी बदतर हो जाएगी. सबसे बड़ी बात यह है कि यह एक जीवन पद्धति को ध्वस्त कर देगी.

ऐसा नहीं है कि किसान अपनी वर्तमान दुर्दशा में सुधार नहीं चाहते हैं. लेकिन उनका कहना है कि ये तीन कृषि कानून उनकी पहले से ही खराब स्थिति को और खराब कर देंगे. ऐसे में कोई हैरत की बात नहीं है कि वे इतने लंबे समय से पूरे जी-जान से इन कानूनों का विरोध कर रहे हैं.

किसानों द्वारा विरोध प्रदर्शन नए नहीं हैं. 2019 के राष्ट्रीय चुनावों से पहले भी महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, दिल्ली के आसपास और दूसरी जगहों पर किसानों के बड़े मार्च हुए थे. लाभकारी कीमतें, एमएसपी की गारंटी ओर एपीएमसी की मंडियों को जारी रखना, उनकी मांगें रही हैं और इन कानूनों से इनमें से कोई भी मांग पूरी नहीं हो रही थी.

बाजारीकरण और कॉररपोरेटीकरण

कारोबार हितैषी होने के कारण इस सरकार का सारा जोर बाजार आधारित समाधानों की तरफ रहा है. लेकिन इससे पूंजी वालों को और उन्हें जो बाजार में मजबूत हैं- यानी कॉरपोरेटों को- मदद मिलती है. सरकार ने किसानों की मांगों को बाजार के खिलाफ जाने वाले के तौर पर देखा और इसी कारण यह उसके लिए स्वीकार्य नहीं था.

आज के ज्यादातर अर्थशास्त्री और ज्यादातर राजनीतिक पार्टियां भी बाजार की तरफ झुकाव रखने वाले हैं और वे 1991 से ही बाजार आधारित सुधारों की पैरवी कर रहे हैं.

सरकार का यह कहना सही है कि ज्यादातर अर्थशास्त्री और राजनीतिक पार्टियां इन तीन कानूनों से निकलने वाले सुधारों के पक्ष में रहे हैं. उसका यह कहना भी सही है कि बातचीत काफी लंबे समय से चल रही है और ऐसा नहीं है कि इस पर आम सहमति नहीं है. लेकिन यहां जिनके बीच आम सहमति की बात हो रही है, उनमें निश्चित तौर पर किसान नहीं हैं. और इससे भी आगे, कृषि में मुक्त बाजार संभव नहीं है, क्योंकि बाजार आपस में जुड़े हुए हैं.

किसान जो कर्ज लेते हैं, उसके कारण उन्हें अपनी फसल कर्जदाताओं को, वह भी उसकी कटाई के तुरंत बाद बेच देना पड़ता है. इसलिए उनके पास अपनी मर्जी से कहीं बेच पाने का बहुत कम विकल्प है. और जब बात निर्णायक फैसले आई, तो बड़े किसानों ने भी यह महसूस किया कि इन तीन कानूनों के प्रावधानों से उन्हें काफी नुकसान होगा.

2 हेक्टेयर से कम जोत वाले 85 फीसदी छोटे और सीमांत किसानों पर बड़ी चोट पड़ेगी और नीति निर्माण में उनकी आवाज को सुनने वाला कोई नहीं है. सामान्य तौर पर अमीर और सीमांत किसानों के हित आपस में टकराते हैं, लेकिन वर्तमान मामले में दोनों के हित आपस में जुड़े गए. किसान आंदोलनों का नेतृत्व कर रहे अमीर किसान और कारोबारी सीमांत और छोटे किसानों के हितों का भी प्रनितिधित्व कर रहे हैं.

सामान्य तौर पर ऐसा देखा गया है कि किसी भी आंदोलन में साधन संपन्न तबका नेतृत्व करता है क्योंकि गरीब के लिए विरोध-प्रदर्शन आदि करना काफी मुश्किल होता है. हमने कब गरीबों को देश की गरीबी की भीषण स्थिति के बावजूद इतने लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन करते देखा है?

एकमात्र तबका जो प्रदर्शनों में हाशिये पर रहा है, वह है कृषि मजदूर- उन्हें ज्यादा मजदूरी की जरूरत है, लेकिन इस सवाल को शायद ही कभी विरोध प्रदर्शनों में उठाया जाता है.

हालांकि सच्चाई यह भी है कि उनकी किस्मत किसानों के साथ बंधी हुई है. इसलिए कृषि क्षेत्र में कोई भी संकट उन पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा और इस तरह से देखें तो किसानों के आंदोलनों में एक तरह से उनके हितों का भी प्रतिनिधित्व हो रहा था.

सुधार के लिए ब्लूप्रिंट की जरूरत

क्या कृषि कानूनों को रद्द करना वर्तमान निजाम के हृदय परिवर्तन की ओर इशारा करता है? अगर भावुक हुए बगैर प्रधानमंत्री के भाषण का विश्लेषण किया जाए, तो मालूम होगा कि ऐसा नहीं हुआ है.

उन्होंने कहा कि ये कानून छोटे किसानों का भला करने के लिए थे. इसके आगे उन्होंने कहा कि सिर्फ कुछ लोग विधेयक कानून के खिलाफ थे और उन्हें सरकार का पक्ष समझाने में वे नाकाम रहे.

दूसरे शब्दों में,  प्रधानमंत्री ने कहा कि ये कानून अच्छे थे. हकीकत यह है कि संसद द्वारा कानून को निरस्त करने से किसानों की कोई मांग पूरी नहीं होगी- वे बस वहां लौट जाएंगे, जहां वे इस कानून के बनने से पहले थे.

कोई भी समिति, जिसके गठन की बात प्रधानमंत्री ने की, उसमें ज्यादातर बाजार समर्थक सुधारों के पैरोकार होंगे. इन समितियों में जो कुछ किसान नेता शामिल भी किए जाएंगे उनका समिति के बाकी सदस्यों के साथ टकराव बना रहेगा और हो सकता है कि वे हाशिये पर पड़ जाएं. सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति भी एकतरफा थी. इसने जो रिपोर्ट सौंपी वह अभी तक सामने नहीं आई है और खबरें आ रही हैं कि इसके सदस्य इन कानूनों को वापस लिए जाने का विरोध कर रहे हैं.

समिति की रिपोर्ट को सरकार द्वारा स्वीकार किया जाना या ठंडे बस्ते में डालना या उन्हें सिर्फ आंशिक रूप से लागू करना जरूरी नहीं है. आखिर स्वामीनाथन समिति की रिपोर्ट को भी सिर्फ आंशिक तौर पर ही लागू किया गया था.

किसानों के पास अपनी मांगें मानने के लिए सरकार को राजी करने के लिए सिर्फ चुनाव से पहले तक का समय है. लेकिन उनकी समस्या का समाधान सिर्फ कृषि से नहीं नहीं निकलेगा. उन्हें नीतियों के एक समग्र पैकेज की दरकार है. इसमें समाज के सभी तबकों, जिनमें कृषि कामगार और सीमांत किसान भी शामिल हैं, के हितों को शामिल किया जाना चाहिए.

ऐसी कोशिशें अतीत में की जा चुकी हैं और इसे एक बार फिर किया जा सकता है- किसानों को इस बार मिली जीत उन्हें इसकी कोशिश करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है.

किसानों और सरकार के बीच अभी टकराव कायम रहने की ही संभावना दिखाई दे रही है. किसान चाहते हैं कि सरकार हस्तक्षेप करे, जबकि सरकार अपने हाथ पीछे खींचना चाहती है. इस बात की संभावना कम है कि सरकार एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की गारंटी को स्वीकार करेगी. इसके लिए वह व्यावहारिकता आदि का बहाना बनाएगी.

सैद्धांतिक तौर पर सभी फसलों की कीमतों की घोषणा की जा सकती है, लेकिन समस्या इसके क्रियान्वयन में आएगी- प्रशासनिक मुश्किलें और भ्रष्टाचार के मसले को सुलझाना होगा और भारत के वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए यह काफी चुनौतीपूर्ण होगा.

लेकिन मौजूदा प्रणाली किस तरह से अच्छी है? इसने सैकड़ों दिक्कतों को जन्म दिया है और यह करोड़ों किसानों और उनके परिवारों की जरूरतों को पूरा नहीं करती है. वास्तविकता यह भी है कि अगर इच्छाशक्ति हो तो किसी भी समस्या से पार पाने का रास्ता खोजा जा सकता है.

अरुण कुमार इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज में चेयर प्रोफेसर हैं.

(इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)