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अमेरिकी सांसदों की एनएसओ ग्रुप और अन्य स्पायवेयर कंपनियों पर प्रतिबंध की मांग

अमेरिकी सांसदों ने वित्त विभाग और विदेश विभाग को पत्र भेजकर एनएसओ के शीर्ष अधिकारियों, संयुक्त अरब अमीरात की साइबरसिक्योरिटी कंपनी डार्कमैटर, यूरोपीयन ऑनलाइन बल्क सर्विलांस कंपनियों नेक्सा टेक्नोलॉजीज और ट्रोविकोर पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है.

(फोटो: रॉयटर्स)

वॉशिंगटनः अमेरिकी सांसदों के एक समूह ने वित्त विभाग और विदेश विभाग से इजरायली कंपनी एनएसओ ग्रुप और तीन अन्य विदेशी सर्विलांस कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने को कहा है. सांसदों का कहना है कि इसके जरिये अधिकारवादी सरकारों को मानवाधिकारों के हनन में मदद मिली है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इन सांसदों ने मंगलवार को इन विभागों को पत्र भेजा और एनएसओ के शीर्ष अधिकारियों, संयुक्त अरब अमीरात की साइबर सिक्योरिटी कंपनी डार्कमैटर (DarkMatter), यूरोपीयन ऑनलाइन बल्क सर्विलांस कंपनियों नेक्सा टेक्नोलॉजीज और ट्रोविकोर (Trovicor) पर प्रतिबंध लगाने की मांग की.

इन सांसदों ने ग्लोबल मैग्निट्स्की प्रतिबंध कार्यक्रम के तहत इन पर बैन लगाने की मांग की है. दरअसल इस प्रतिबंध कार्यक्रम के तहत उन्हें दंडित किया जाता है जिन पर मानवाधिकार हनन के आरोप लगे हैं. इसके तहत उनके बैंक एकाउंट फ्रीज कर दिए जाते हैं और उनकी अमेरिकी यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है.

इस मामले पर डार्कमैटर से प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी. वहीं, तीन अन्य कंपनियों का इस पर तुरंत जवाब नहीं मिल पाया.

इस पत्र पर सीनेट वित्त समिति के अध्यक्ष रॉन वेडेन, हाउस इंटेलिजेंस समिति के अध्यक्ष एडम शिफ और 16 अन्य डेमोक्रिटेक सांसदों के हस्ताक्षर हैं.

इन सांसदों ने इस महीने रॉयटर्स की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि एनएसओ स्पायवेयर का इस्तेमाल यूगांडा में विदेश विभाग के कर्मचारियों की सर्विलांसिंग में किया गया.

सांसदों ने कहा कि स्पायवेयर इंडस्ट्री अमेरिकी निवेश और बैंकों पर निर्भर करती है.

इन सांसदों ने पत्र में कहा, ‘उन्हें सार्थक रूप से दंडित करने और सर्विलांस टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री को एक स्पष्ट संकेत भेजने के लिए अमेरिकी सरकार को वित्तीय प्रतिबंधों को लागू करना चाहिए.’

पत्र में कहा गया कि इन कंपनियों की वजह से मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के गायब होने, उन्हें प्रताड़ित करने और उनकी हत्या में मदद मिली.

रॉन वेडेन ने बताया, ‘इन सर्विलांस कंपनियों ने अपनी सेवाएं (स्पायवेयर) तानाशाही सरकारों को बेच दी हैं, जिनका मानवाधिकार दुरुपयोगों का लंबा रिकॉर्ड रहा है. निगरानी सेवाओं से इन तानाशाहों को जासूसी करने की अपार शक्तियां मिली हैं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘जाहिर तौर पर इन देशों ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को जेल में बंद करने, उन्हें प्रताड़ित करने और उनकी हत्या में इन सर्विलांस तकनीकों का इस्तेमाल किया है. बाइडेन प्रशासन के पास उन्हें व्यापार से बाहर निकालने में मदद करने का मौका है.’

मालूम हो कि बीते नवंबर में अमेरिका के वाणिज्य विभाग ने एनएसओ को ब्लैकलिस्ट कर दिया था, जिससे अमेरिकी सप्लायर्स को इजरायली स्पायवेयर कंपनी एनएसओ को सॉफ्टवेयर और सेवाएं बेचने पर रोक लग गई है.

बीते हफ्ते सऊदी अरब की महिला अधिकार कार्यकर्ता लुज़ैन अल-हथलूल और गैर-लाभकारी संगठन इलेक्ट्रॉनिक फ्रंटियर फाउंडेशन ने डार्कमैटर पर मुकदमा दायर किया था और उस पर आरोप लगाया था कि ग्रुप ने उनके फोन में सेंधमारी की थी, जिसने उनकी गिरफ्तारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और बाद में उन्हें सऊदी अरब की जेल में प्रताड़ित भी किया गया.

कार्यकर्ता लुज़ैन अल-हथलूल ने अवैध रूप से उनका फोन हैक करने का आरोप अमेरिका के तीन पूर्व खुफिया कॉन्ट्रैक्टर पर आरोप लगाया था.

इससे पहले एप्पल ने नवंबर में एनएसओ ग्रुप पर मुकदमा दायर करते हुए कहा कि एनएसओ ग्रुप ने पेगासस स्पायवेयर के जरिये एप्पल यूजर्स की डिवाइसों को निशाना बनाया.

इस पत्र में रॉयटर्स की 2019 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए डार्कमैटर की सीक्रेट हैकिंग यूनिट (प्रोजेक्ट रेवेन) का भी उल्लेख किया, जिसने यूएई को उसके दुश्मनों की जासूसी करने में मदद की थी.

वहीं, न्याय विभाग के साथ सितंबर में हुए समझौते में इस यूनिट के तीन सदस्यों (सभी अमेरिका के पूर्व खुफिया ऑपरेटिव) ने हैकिंग कानूनों को तोड़ने की बात स्वीकार की थी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)