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हरिद्वार धर्म संसद में मुस्लिमों के ख़िलाफ़ नफ़रत भरे भाषण मामले में दूसरी एफ़आईआर दर्ज

दूसरी एफ़आईआर में धर्म संसद के आयोजक यति नरसिंहानंद गिरि, जितेंद्र नारायण त्यागी पूर्व नाम वसीम रिज़वी, सागर सिंधुराज महाराज, धरमदास, परमानंद, साध्वी अन्नपूर्णा, आनंद स्वरूप, अश्विनी उपाध्याय, सुरेश चव्हाण और प्रबोधानंद गिरि को नामज़द किया गया है. 17-19 दिसंबर 2021 को हरिद्वार में आयोजित धर्म संसद में कथित तौर पर मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा और उनके नरसंहार का आह्वान किया गया था.

उत्तराखंड के हरिद्वार में 17-19 दिसंबर 2021 के बीच हिंदुत्ववादी नेताओं और कट्टरपंथियों द्वारा एक ‘धर्म संसद’ का आयोजन किया गया. (फोटो साभार: फेसबुक)

देहरादून: हरिद्वार में आयोजित एक धर्म संसद के संबंध में 10 लोगों के खिलाफ दूसरी एफआईआर दर्ज की गई है. इस धर्म संसद में कथित तौर पर मुसलमानों के खिलाफ हिंदू समुदाय के कुछ कट्टरपंथियों ने द्वेषपूर्ण बयान देते हुए कथित तौर पर उनके नरसंहार का आह्वान किया था.

ज्वालापुर के वरिष्ठ उपनिरीक्षक नितेश शर्मा ने बताया कि मामले में दूसरी एफआईआर बीती तीन जनवरी को हरिद्वार क्षेत्र के निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता नदीम अली की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है.

उन्होंने कहा कि दूसरी एफआईआर में दस लोगों के नाम हैं, जिनमें कार्यक्रम के आयोजक यति नरसिंहानंद गिरि, जितेंद्र नारायण त्यागी (जिन्हें पहले वसीम रिज़वी के नाम से जाना जाता था), सागर सिंधुराज महाराज, धरमदास, परमानंद, साध्वी अन्नपूर्णा, आनंद स्वरूप, अश्विनी उपाध्याय, सुरेश चव्हाण और प्रबोधानंद गिरि शामिल हैं.

अधिकारी ने कहा कि प्राथमिकी ज्वालापुर पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई और नगर पुलिस थाने में स्थानांतरित कर दी गई, जहां मामले के संबंध में पहली प्राथमिकी दर्ज की गई थी.

मामले की जांच के लिए बीती तीन जनवरी को एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का भी गठन किया गया था.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, राज्य के डीजीपी अशोक कुमार ने कहा कि दूसरी एफआईआर शत्रुता को बढ़ावा देने (153A) और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने (298) से संबंधित आईपीसी की धाराओं के तहत दर्ज की गई है.

डीजीपी कुमार ने यह भी कहा कि धर्म संसद में दिए गए भाषणों की जांच के लिए एक अतिरिक्त एसपी और एक डिप्टी एसपी स्तर के अधिकारी के साथ एसआईटी का गठन किया गया है.

बता दें कि उत्तराखंड के हरिद्वार में 17-19 दिसंबर 2021 के बीच हिंदुत्ववादी नेताओं और कट्टरपंथियों द्वारा एक ‘धर्म संसद’ का आयोजन किया गया, जिसमें मुसलमान एवं अल्पसंख्यकों के खिलाफ खुलकर नफरत भरे भाषण (हेट स्पीच) दिए गए, यहां तक कि उनके नरसंहार का आह्वान भी किया गया था.

कार्यक्रम के आयोजकों में से एक यति नरसिंहानंद ने मुस्लिम समाज के खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी करते हुए कहा था कि वह हिंदू प्रभाकरण बनने वाले व्यक्ति को एक करोड़ रुपये देंगे.

इससे पहले 23 दिसंबर 2021 को दर्ज इस संबंध में पहली प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसमें सिर्फ जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी को नामजद किया गया था. इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म अपनाने से पहले त्यागी का नाम वसीम रिजवी था.

वसीम रिजवी उत्तर प्रदेश सेंट्रल शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष थे, जिन्होंने हाल ही में हिंदू धर्म अपनाने का दावा करते हुए अपना नाम बदला है.

अधिकारियों ने बताया कि प्राथमिकी में धारा 153 ए (धर्म, नस्ल, जन्मस्थान, आवास, भाषा के आधार पर विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाना) के अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 295 (पूजा स्थल या किसी पवित्र वस्तु को नुकसान पहुंचाना) भी जोड़ी गई है.

इस  प्राथमिकी में 25 दिसंबर 2021 को बिहार निवासी स्वामी धरमदास और साध्वी अन्नपूर्णा उर्फ पूजा शकुन पांडेय के नाम जोड़े गए. पूजा शकुन पांडेय निरंजिनी अखाड़े की महामंडलेश्वर और हिंदू महासभा के महासचिव हैं.

इसके बाद बीते एक जनवरी को इस एफआईआर में यति नरसिंहानंद और रूड़की के सागर सिंधुराज महाराज का नाम शामिल किया गया था.

हाल ही में उत्तर प्रदेश और हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशकों क्रमश: विभूति नारायण राय और विकास नारायण राय सहित सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर कहा था कि ‘धर्म  संसद’ विभिन्न धर्मों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की उत्तराखंड की लंबी परंपरा पर काला धब्बा है.

सुप्रीम कोर्ट के 76 वकीलों ने भी मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना को पत्र लिखकर दिल्ली और हरिद्वार में हुए हालिया कार्यक्रमों में मुस्लिम समाज के खिलाफ भड़काऊ बयान देने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के लिए निर्देश देने की मांग की है.

इसके अलावा बीते दिनों देश के पूर्व सेना प्रमुखों, नौकरशाहों और कई बुद्धिजीवियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर मुस्लिमों के नरसंहार के आह्वान की निंदा करने और इस तरह की धमकियां देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी.

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति को लिखे गए इस खुले पत्र पर 200 से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)