राजनीति

पंजाब: केजरीवाल के ख़िलाफ़ मानहानि का मुक़दमा करेंगे चन्नी, कांग्रेस का प्रचार अभियान शुरू

विधानसभा चुनाव राउंड-अप: यूपी में मुख्यमंत्री उम्मीदवार के चेहरे को लेकर पूछे गए सवाल पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि क्या कोई दूसरा चेहरा नज़र आ रहा है? उत्तराखंड में भाजपा से निष्कासित हरक सिंह रावत कांग्रेस में शामिल हुए. शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि चुनाव पूर्ण गठबंधन प्रस्ताव पर कांग्रेस ने दिलचस्पी नहीं दिखाई. मणिपुर में तृणमूल के एकमात्र विधायक भाजपा में शामिल.

चरणजीत सिंह चन्नी. (फोटो: पीटीआई)

चंडीगढ़/लखनऊ/नई दिल्ली/देहरादून/पणजी/इंफाल: पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने शुक्रवार को कहा कि वह ‘आप’ नेता अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे.

अवैध खनन मामले में चन्नी के भतीजे सहित अन्य लोगों के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी करने के बाद केजरीवाल ने कांग्रेस नेता की ईमानदारी पर सवाल उठाए थे.

चन्नी ने आरोप लगाया कि दूसरों की छवि बिगाड़ने के लिए उन पर बेबुनियाद आरोप लगाना केजरीवाल की आदत है. कांग्रेस नेता ने कहा कि अतीत में देखा जा चुका है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री को बाद में कैसे भाजपा नेता नितिन गडकरी, दिवंगत अरुण जेटली और शिरोमणि अकाली दल के बिक्रम सिंह मजीठिया से माफी मांगनी पड़ी थी.

अपने निर्वाचन क्षेत्र चमकौर साहिब में संवाददाताओं से बातचीत में चन्नी ने दावा किया कि ‘आप’ नेता ने सारी हदें पार कर दी हैं.

उन्होंने कहा, ‘मैं केजरीवाल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करूंगा. मैंने अपनी पार्टी से इस बाबत अनुमति मांगी है. मैं ऐसा करने को मजबूर हूं. वह मुझे बेईमान बताते फिर रहे हैं और अपने ट्विटर हैंडल पर भी इसका जिक्र किया है.’

ईडी के छापों के बाद विपक्षी दलों, खासकर ‘आप’ ने चन्नी और कांग्रेस पर हमला तेज कर दिया है.

दिन की शुरुआत में केजरीवाल ने कहा था कि चन्नी के भतीजे के घर से करोड़ों रुपये जब्त होते देख पंजाब की जनता स्तब्ध है. उन्होंने दावा किया था कि चन्नी अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनावों में चमकौर साहिब सीट पर जीत नहीं दर्ज कर पाएंगे.

शुक्रवार को केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा था, ‘हमारा सर्वे दिखा रहा है चन्नी जी चमकौर साहिब से हार रहे हैं. टीवी पर ईडी के अफसरों द्वारा इतनी मोटी-मोटी नोटों की गड्डियां गिनते देख लोग सदमे में हैं.’

केजरीवाल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए चन्नी ने कहा, ‘हुआ कुछ और है, पैसे किसी और के पास से मिले हैं, छापे कहीं और पड़े हैं, लेकिन केजरीवाल सोशल मीडिया पर ईडी की कार्रवाई में जब्त नोटों की गड्डी के साथ मेरी फोटो लगाकर मुझे बेईमान बता रहे हैं. क्या उन्होंने तब खुद को बेईमान बताया था, जब उनका भांजा पकड़ा गया था.’

चन्नी ने सवाल किया, ‘मेरे पास कौन सा पैसा आया? मेरी इसमें क्या गलती है? केजरीवाल मेरा नाम क्यों घसीट रहे हैं? पंजाब में दस जगहों पर छापे पड़े थे, जिसमें किसी और के पैसे जब्त हुए थे, केजरीवाल मुझे इस मामले से क्यों जोड़ रहे हैं?’

जब से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चन्नी के भतीजे के परिसरों सहित कई जगहों पर छापेमारी की है, तब से आम आदमी पार्टी मुख्यमंत्री चन्नी पर हमलावर है.

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने बीते 19 जनवरी को कहा था कि चन्नी एक आम आदमी नहीं बल्कि एक ‘बेईमान आदमी’ हैं, क्योंकि उन्होंने ईडी के छापे पर कांग्रेस नेता को घेरने की कोशिश की थी.

जांच एजेंसी ईडी ने बीते 19 ​जनवरी को कहा था कि उसने विधानसभा चुनाव वाले राज्य में गैर-कानूनी रेत खनन के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग रोधी की जांच के तहत की गई छापेमारी की कार्रवाई में 10 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की गई है जिनमें से आठ करोड़ रुपये चन्नी के रिश्तेदार से मिले हैं.

केंद्रीय एजेंसी ने बताया कि बुधवार को संपन्न छापेमारी की कार्रवाई के दौरान ‘गैरकानूनी’ खनन और संपत्ति हस्तांतरण के ‘अपराध में संलिप्तता’ वाले दस्तावेज, मोबाइल फोन, 21 लाख रुपये मूल्य के सोने के जेवर, 12 लाख रुपये की रोलेक्स की घड़ी भी जब्त की गई है.

कांग्रेस ने ‘पंजाब चन्नी दे नाल है’ नाम से प्रचार अभियान शुरू किया

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के छापों के मुद्दे पर राजनीतिक विरोधियों के निशाने पर आई पंजाब की कांग्रेस इकाई ने सोशल मीडिया पर अभियान चलाया है, जिसमें दावा किया गया है कि पूरा राज्य मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी के साथ है.

यहां सत्तारूढ़ पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा नीत केंद्र सरकार अनुसूचित जाति से आने वाले पंजाब के पहले मुख्यमंत्री को बदनाम करने की कोशिश कर रही है.

कांग्रेस की पंजाब इकाई ने सोशल मीडिया पर ‘पंजाब चन्नी दे नाल है’ नाम से अभियान शुरू किया है और अपने फेसबुक अकाउंट पर कई लोगों के वीडियो क्लिप साझा किए हैं, जिनमें वे मुख्यमंत्री चन्नी का समर्थन करते सुनाई दे रहे हैं.

कांग्रेस द्वारा तत्कालीन मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह का इस्तीफा लेने के बाद पिछले साल सितंबर में चन्नी को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया था.

पंजाब की विपक्षी पार्टियों ने कांग्रेस से मांग की थी कि वह चन्नी के भतीजे के परिसरों में ईडी की छापेमारी के दौरान मिली राशि पर सफाई दे, जबकि राज्य की भाजपा इकाई ने सत्तारूढ़ पार्टी को ‘घोटालेबाज कांग्रेस’ और ‘कांग्रेस चोर’ बता निशाना साधा था.

इसके जवाब में पंजाब में कांग्रेस की इकाई द्वारा शुरू किए गए सोशल मीडिया अभियान में पार्टी विधायक बरिंदरमीत सिंह पाहड़ा का वीडियो साझा किया गया है जिसमें उनके द्वारा भाजपा पर निशाना साधते और चन्नी को ‘सुनियोजित साजिश’ के तहत बदनाम करने का आरोप लगाते सुना जा सकता है.

उन्होंने आरोप लगाया है कि केंद्र अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ ईडी का दुरुपयोग कर रहा है. वहीं, एक अन्य वीडियो में श्री हरगोबिंदपुर एक निवासी ईडी की छापेमारी पर केंद्र की आलोचना करते हुए दावा कर रहा है कि पूरा पंजाब चन्नी के साथ है.

कांग्रेस की पंजाब इकाई के फेसबुक पेज पर कई और लोगों के वीडियो भी अपलोड किए गए हैं जिनमें चन्नी का समर्थन किया गया है.


उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव


मुख्यमंत्री चेहरे के सवाल पर प्रियंका ने कहा: क्या कोई दूसरा चेहरा नजर आ रहा है?

नई​ दिल्ली: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने शुक्रवार को परोक्ष रूप से कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी का चेहरा वह खुद हैं, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह चुनाव लड़ेंगी या नहीं.

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव सात चरणों में 10 फरवरी से 7 मार्च के बीच होने हैं. वोटों की गिनती और परिणाम की घोषणा 10 मार्च को होनी है.

प्रियंका गांधी. (फोटो: पीटीआई)

मुख्यमंत्री पद के लिए कांग्रेस की ओर से चेहरे के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘क्या आपको कोई दूसरा चेहरा नजर आ रहा है?’

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए ‘भर्ती विधान: युवा घोषणापत्र’ जारी करते हुए प्रियंका ने एक सवाल के जवाब में यह टिप्पणी की.

इंडिया टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, जब उनसे स्पष्ट रूप से पूछा गया कि क्या वह (यूपी में कांग्रेस का) चेहरा हैं तो कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘मेरा चेहरा हर जगह दिखाई दे रहा है.’

यह पहली बार है कि प्रियंका गांधी ने संकेत दिया है कि वह पार्टी राज्य का चेहरा हो सकती हैं.

प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद सरकार गठन के लिए विपक्षी दलों के गठबंधन की परिस्थिति पैदा होने पर उनकी पार्टी इस पर विचार करेगी.

उन्होंने कहा कि अगर ऐसी किसी गठबंधन सरकार में कांग्रेस शामिल होगी तो उसकी एक शर्त युवाओं और महिलाओं से जुड़े अपने एजेंडे को लागू कराने की होगी.

उनसे सवाल किया गया कि क्या चुनाव के बाद जरूरत पड़ने पर कांग्रेस विपक्ष के गठबंधन में शामिल होगी?

इसके जवाब में कांग्रेस की उत्तर प्रदेश प्रभारी ने कहा, ‘अगर ऐसी परिस्थिति आती है तो इस बारे में विचार किया जाएगा. अगर ऐसी परिस्थिति आई तो हम यह चाहेंगे कि जो हमारा एजेंडा युवाओं और महिलाएं के लिए है, वो पूरा हो. यह हमारी एक शर्त होगी.’

उन्होंने यह भी कहा कि उनके चुनाव लड़ने के बारे में फिलहाल कोई फैसला नहीं हुआ है.

प्रियंका ने कहा, ‘अगर यह तय होगा तो आप लोगों को पता चल जाएगा.’

कांग्रेस ने कहा, ‘नया उत्तर प्रदेश’ बनाएंगे, 20 लाख रोजगार देंगे

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए शुक्रवार को युवाओं के लिए घोषणा-पत्र जारी किया और कहा कि वह युवाओं की शक्ति के आधार पर ‘नया उत्तर प्रदेश’ बनाएगी.

पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने ‘भर्ती विधान: युवा घोषणापत्र’ जारी किया, जिसमें 20 लाख रोजगार देने, भर्ती प्रक्रिया को दुरुस्त करने और शिक्षा का बजट बढ़ाने समेत कई वादे किए गए हैं.

कांग्रेस ने इस मौके पर ‘मेरा जॉब मुझे मिलेगा’ नामक गीत भी जारी किया.

घोषणा-पत्र जारी करने के मौके पर राहुल गांधी ने कहा, ‘हम नफरत नहीं फैलाते हैं. हम लोगों को जोड़ने का काम करते हैं. हम युवाओं के जोश और शक्ति के साथ एक नया उत्तर प्रदेश बनाना चाहते हैं.’

कांग्रेस की उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी ने कहा, ‘भर्ती विधान को बनाने के लिए युवाओं से बात की गई. इसे भर्ती विधान इसलिए कहा गया है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी समस्या भर्ती की है. युवा योग्य हैं, लेकिन उन्हें नौकरियां नहीं मिलती. बड़ी-बड़ी घोषणएं होती हैं, लेकिन यह नहीं बताया जाता कि रोजगार कैसे दिए जाएंगे.’

प्रियंका गांधी ने घोषणा की कि सरकार बनने पर उत्तर प्रदेश में 20 लाख रोजगार दिए जाएंगे, जिनमें 40 प्रतिशत यानी आठ लाख रोजगार महिलाओं को दिए जाएंगे.

‘युवा घोषणा-पत्र’ में कहा गया है कि उच्च शिक्षा और महाविद्यालयों में शिक्षकों के 8,000 रिक्त पदों को भरा जाएगा. माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों के 38,000 रिक्त पदों को भरा जाएगा. बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में रिक्त प्रधानाध्यापकों के 1 लाख पदों को भरा जाएगा.

इसके अनुसार, प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के खाली पड़े 1.5 लाख पद भरे जाएंगे. आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के 19,300 और आंगनबाड़ी सहायिकाओं के 27,100 रिक्त पदों को भरा जाएगा.

इसमें यह वादा भी किया गया कि स्टार्ट-अप के लिए 5,000 करोड़ रुपये का ‘सीड स्टार्ट-अप फंड’ स्थापित किया जाएगा. इसमें 30 साल से कम उम्र के उद्यमियों को प्राथमिकता दी जाएगी.

बुलंदशहर में कांग्रेस के दो नेताओं ने चुनाव से पहले पार्टी से इस्तीफा दिया

बुलंदशहर: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ऐन पहले बुलंदशहर क्षेत्र से कांग्रेस के दो नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. बताया जा रहा है दोनों ने उम्मीदवार के चयन से नाराज होकर ऐसा किया है.

(प्रती​कात्मक फोटो: रॉयटर्स)

चुनावों से ऐन पहले बुलंदशहर जिले में कांग्रेस के अध्यक्ष व राज्य कांग्रेस समिति के सदस्य शिवपाल सिंह और जिले के महासचिव राहुल वाल्मिकी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है.

सूचना के अनुसार, शिवपाल सिंह अनूपशहर विधानसभा सीट से टिकट पाना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस ने वहां से बसपा छोड़कर आए दो बार के विधायक चौधरी गजेंद्र सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया.

गजेंद्र सिंह पिछले महीने राष्ट्रीय लोकदल में शामिल हुए थे, लेकिन पार्टी से टिकट नहीं मिलने के बाद कांग्रेस के पाले में आ गए.

अवतार सिंह भड़ाना ने कहा, जेवर सीट से लड़ेंगे चुनाव

नोएडा: कोरोना वायरस संक्रमित होने की वजह से नामांकन वापस लेने की अटकलों के बीच गुर्जर नेता अवतार सिंह भड़ाना ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि वह राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के उम्मीदवार के रूप में जेवर से उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे.

पार्टी सूत्रों ने बृहस्पतिवार को दिन में कहा था कि भड़ाना अपना नामांकन वापस ले लेंगे और शुक्रवार को नए उम्मीदवार की घोषणा की जाएगी.

मुजफ्फरनगर की मीरापुर सीट से मौजूदा विधायक भड़ाना हाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छोड़कर रालोद में शामिल हो गए थे. रालोद, समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन में विधानसभा चुनाव लड़ रही है.

इस सप्ताह की शुरुआत में 64 वर्षीय गुर्जर नेता ने जेवर से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था, जहां उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले चरण के तहत 10 फरवरी को मतदान होना है.

भड़ाना ने बृहस्पतिवार देर रात ट्वीट किया, ‘सेहत खराब थी और कोविड-19 के शुरुआती लक्षण दिखाई दिए थे. आरटी-पीसीआर जांच में कोरोना वायरस से संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई. मेरे परिवार रूपी जेवर विधानसभा के लोगों को निराश होने की जरूरत नहीं है. मैं आपका अपना हूं, आपके मान-सम्मान के लिए गठबंधन प्रत्याशी के रूप में ही चुनाव लड़ूंगा.’

वर्तमान में जेवर विधानसभा सीट से भाजपा के धीरेंद्र सिंह प्रतिनिधित्व करते हैं. हरियाणा के मूल निवासी भड़ाना पहले कांग्रेस में भी रहे हैं और चार बार लोकसभा सांसद रहे हैं.

भाजपा प्रत्याशी और विधायक समेत कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज

संभल/मुजफ्फरनगर: संभल जिले में असमोली विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के उम्मीदवार और 50 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ आचार संहिता एवं कोविड-19 दिशानिर्देशों के उल्लंघन के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है. पुलिस के एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी.

पुलिस अधीक्षक (एसपी) चक्रेश मिश्रा ने बताया कि असमोली विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी हरेंद्र सिंह रिंकू और 50 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ आदर्श आचार संहिता और कोविड-19 दिशा-निर्देशों के उल्लंघन के आरोप में मामला दर्ज किया गया है.

एसपी ने कहा कि बृहस्पतिवार शाम रिंकू चौपा गांव में चुनावी सभा कर रहे थे, जिसमें बड़ी संख्या में लोग बिना मास्क के और शारीरिक दूरी का पालन किए बगैर वहां जमा थे. मिश्रा ने बताया कि घटना को संज्ञान में लेते हुए बहजोई थाने में रिंकू और 50 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है.

इधर मुजफ्फरनगर में भाजपा विधायक तेजेंद्र निर्वाल और उनके समर्थकों के खिलाफ आदर्श आचार संहिता का कथित उल्लंघन करने का मामला दर्ज किया गया है. अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी.

पुलिस अधीक्षक कार्याल्य से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक निर्वाल और उनके करीब 100 समर्थकों के खिलाफ बृहस्पतिवार को भारतीय दंड संहिता की धारा-188, 269 और 270 एवं महामारी बीमारी अधिनियम-1897 की धारा-तीन के तहत दो-दो अलग मामले दर्ज किए गए हैं.

विज्ञप्ति के मुताबिक उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए जब विधायक नामाकंन दाखिल करने जा रहे थे तब वह और उनके समर्थक दो स्थानों पर जमा हुए थे.

वहीं, एक अन्य घटना में पुलिस ने समाजवादी पार्टी के नेता सुधीर पवार और उनके 80 समर्थकों के खिलाफ आदर्श आचार संहिता और कोविड-19 दिशानिर्देश का कथित उल्लंघन करने पर इन्हीं धाराओं के तहत मामला दर्ज किया.

शामली से बेटे को टिकट नहीं मिलने पर राजेश्वर बंसल ने रालोद छोड़ा

मुजफ्फरनगर: राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के पूर्व विधायक राजेश्वर बंसल ने अपने बेटे को शामली विधानसभा सीट से टिकट नहीं दिये जाने के बाद पार्टी से इस्तीफा दे दिया.

राजेश्वर बंसल और उनके बेटे अखिल बंसल ने बृहस्पतिवार को पार्टी के नेता जयंत चौधरी को अपने-अपने इस्तीफे भेजे.

समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल गठबंधन ने शामली से प्रसन्न चौधरी को टिकट दिया था, जो बीते 18 जनवरी को अपना नामांकन पत्र दाखिल कर चुके हैं.

कैराना से पूर्व विधायक राजेश्वर ने शामली से अपने बेटे अखिल को टिकट देने की मांग की थी.

पार्टी के संस्थापक अजित सिंह ने 2020 में राजेश्वर को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया था और उन्हें क्षेत्र में कद्दावर नेता के तौर पर जाना जाता है.

शाह शनिवार को कैराना में घर-घर जाकर करेंगे चुनाव प्रचार

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद पहली बार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शनिवार को राज्य का दौरा करेंगे. वह कैराना में घर-घर जाकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा के उम्मीदवार के लिए प्रचार करेंगे.

अमित शाह. (फोटो: पीटीआई)

सूत्रों के मुताबिक, शाह अपने इस दौरे पर शामली और बागपत में पार्टी कार्यकर्ताओं व क्षेत्र के पदाधिकारियों के साथ बैठक भी करेंगे.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा की रणनीति में अहम भमिका निभा रहे शाह बाद में मेरठ भी जाएंगे. वह वहां पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करने के अलावा वहां के प्रबुद्ध लोगों के साथ संवाद भी करेंगे.

अपने पहले चुनावी दौरे पर शाह का कैराना जाने का बड़ा राजनीतिक महत्व भी है. पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के कैराना से तत्कालीन सांसद दिवंगत हुकुम सिंह ने यहां से हिन्दुओं के पलायन का मुद्दा उठाया था. कैराना अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र है.

अखिलेश का वादा, सत्ता में आने पर राज्य कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाल करेंगे

इधर, सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीते बृहस्पतिवार को आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी के सत्ता में आने पर राज्य कर्मचारियों की बंद हो चुकी पुरानी पेंशन को बहाल करने और यश भारती पुरस्कार को दोबारा शुरू करने का वादा किया.

यादव ने बृहस्पतिवार को एक पत्रकार वार्ता में कहा, ‘समाजवादी पार्टी ने फैसला लिया है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी सरकार बनने पर पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली होगी. इस बात को समाजवादी पार्टी के चुनावी घोषणा-पत्र में शामिल किया जाएगा.’

उन्होंने यह भी कहा कि सपा व सहयोगियों की सरकार आने पर ‘यशभारती सम्मान’ दोबारा बहाल किया जाएगा.

सपा नेता ने कहा कि नगरों में ‘नगर-भारती’ सम्मान-पत्र उत्कृष्ट समाजसेवियों, साहित्यकारों, पत्रकारों, कलाकारों, खिलाड़ियों व नौकरी-रोज़गार सृजित करने वाले उद्यमियों तथा पेशेवर लोगों को दिये जाएंगे.

ज्ञातव्य है कि सरकारी सेवा में नियुक्त शिक्षक, कर्मचारी एवं अधिकारियों को सेवानिवृत्ति होने पर जीवनयापन के लिए मासिक पेंशन दी जाती थी. केंद्र की तत्कालीन भारतीय जनता पार्टी सरकार ने नियमावली बनाई थी, जिसके आधार पर अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त शिक्षक और कर्मचारियों की मासिक पेंशन की योजना समाप्त की गई. ‘’

उन्होंने कहा, ‘मैं घोषणा करता हूं कि समाजवादी सरकार बनते ही पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल कर दी जाएगी. इसमें जो भी धनराशि की आवश्यकता होगी, उसकी व्यवस्था कर ली जाएगी. इसके अलावा कर्मचारियों के लिए कैशलेस इलाज की भी व्यवस्था की जाएगी. साथ ही वित्तविहीन शिक्षकों को सम्मानजनक धनराशि प्रदान की जाएगी.’


उत्तराखंड विधानसभा चुनाव


भाजपा से निष्कासित हरक सिंह रावत कांग्रेस में शामिल हुए

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से कुछ दिनों पहले पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत शुक्रवार को कांग्रेस में शामिल हो गए. इससे कुछ दिन पूर्व उन्हें भाजपा से निष्कासित किया गया था.

कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष अविनाश पांडे, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल, प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव, विधायक दल के नेता प्रीतम सिंह और कुछ अन्य नेताओं की मौजूदगी में हरक सिंह रावत पार्टी में शामिल हुए.

हरक सिंह रावत. (फोटो साभार: फेसबुक)

सूत्रों के अनुसार हरक सिंह रावत के साथ उनकी पुत्रवधू अनुकृति भी कांग्रेस में शामिल हुईं. पिछले दिनों हरक सिंह रावत को उत्तराखंड सरकार से बर्खास्त और भाजपा से निष्कासित कर दिया गया था.

सूत्रों ने बताया, ‘कांग्रेस आलाकमान से हरी झंडी मिलने के बाद रावत पार्टी में शामिल हुए हैं. उन्हें या उनकी पुत्रवधू अथवा किसी समर्थक को टिकट देने के संदर्भ में कोई फैसला अभी नहीं हुआ है. लेकिन जल्द ही फैसला हो जाएगा.’

सूत्रों का कहना है कि हरीश रावत 2016 के राजनीतिक घटनाक्रम के चलते इस पक्ष में नहीं थे कि हरक सिंह रावत फिर से पार्टी में लिया जाए, लेकिन प्रदेश के कई अन्य वरिष्ठ नेताओं की पैरवी और आलाकमान की सहमति मिलने के बाद उन्होंने अपनी रजामंदी दी.

पौड़ी गढ़वाल जिले की कोटद्वार विधानसभा सीट से विधायक हरक सिंह रावत पहले कई वर्षों तक कांग्रेस में थे. पिछले विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले विजय बहुगुणा और हरक सिंह रावत समेत कई कांग्रेस नेताओं ने बगावत कर दी थी, जिससे तत्कालीन हरीश रावत सरकार संकट में आ गई थी. फिर विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा.

इस घटनाक्रम को लेकर हरक सिंह रावत पिछले दिनों माफी मांगी थी और कहा था कि हरीश रावत उनके ‘बड़े भाई हैं और (वह) उनसे 100 बार माफी मांगने को तैयार हैं.’

उत्तराखंड की सभी 70 विधानसभा सीटों के लिए 14 फरवरी को मतदान होगा. 10 मार्च को मतगणना होगी.


पंजाब विधानसभा चुनाव


भाजपा ने जारी की 34 उम्मीदवारों की पहली सूची

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए 34 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी. पार्टी की इस सूची में किसान परिवारों के 12 नेताओं, 13 सिखों और आठ दलितों को टिकट दिया है.

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और भाजपा महासचिव व पंजाब के प्रभारी दुष्यंत गौतम और महासचिव तरुण चुग ने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की.

चुग ने उम्मीदवारों का नाम घोषित करने से पहले संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी ने 12 ऐसे नेताओं को टिकट दिया है, जो किसान परिवार से आते हैं, जबकि पार्टी ने 13 सिखों और आठ दलितों को भी अपना उम्मीदवार बनाया है.

उन्होंने कहा, ‘भाजपा सभी धर्म, जाति और संप्रदाय को साथ लेकर चलने वाली पार्टी है. इसलिए 34 उम्मीदवारों की सूची में राज्य की जितनी भी बिरादरी है, उन्हें प्रतिनिधित्व दिया गया है. इन उम्मीदवारों में महाजन, खत्री, बनिया, ब्राह्मण और जाट भी हैं.’

उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों में डॉक्टर, अधिवक्ता, उद्योगपति, मजदूर और श्रीगुरुद्वारा प्रबंधक समिति का चुनाव जीतने वाले भी शामिल हैं.

गौतम ने कहा कि पंजाब की जनता कांग्रेस के ‘कुशासन’ से त्रस्त है.

उन्होंने कहा, ‘पिछले कुछ समय से पंजाब में नशे की समस्या, भ्रष्टाचार और कई अन्य समस्याएं आती रहीं, दुर्भाग्य है कि आज भी वो समस्याएं जस की तस हैं. पिछली सरकार में पंजाब में कोई प्रगति नहीं हुई है. पंजाब में कांग्रेस के वर्तमान मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हुए हैं. उनकी ही विधानसभा में रेत का अवैध खनन हो रहा है. इससे साबित हो रहा है कि प्रदेश के रेत माफियाओं से उनके घनिष्ठ संबंध हैं.’

पंजाब में 20 फरवरी को मतदान होना है जबकि मतगणना 10 मार्च को होगी. पंजाब में कुल 117 विधानसभा सीट है.

भाजपा इस बार राज्य में पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाले पंजाब लोक कांग्रेस और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखदेव सिंह ढींढसा के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है और कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार को सत्ता से बेदखल करने की कोशिशों में जुटी है.

पिछले विधानसभा चुनाव में प्रमुख विपक्षी दल का स्थान हासिल करने वाली दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) भी सत्ता पाने के लिए प्रयासरत है. पिछले दिनों उसने संगरूर के सांसद भगवंत मान को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया है.

भाजपा से गठबंधन तोड़ने के बाद शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से गठबंधन किया है. केंद्र के तीन कृषि कानूनों के मुद्दे पर अकाली दल ने भाजपा से किनारा कर लिया था. जून 2021 में इस गठबंधन में बनी सहमति के आधार पर अकाली दल 97 सीटों पर और बसपा 20 सीटों पर चुनाव लड़ रही है.

शिअद और आप ने चुनाव के लिए ज्यादातर सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है. अकाली दल ने 90 से अधिक विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है, जबकि आप ने 112 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं.

कांग्रेस ने पंजाब में 86 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी की है. पार्टी ने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू, उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर रंधावा और ओपी सोनी समेत कई वरिष्ठ नेताओं को चुनाव के मैदान में उतारा है.

किसान संगठनों के राजनीतिक मंच संयुक्त समाज मोर्चा (एसएसएम) ने भी चुनाव मैदान में ताल ठोंक कर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है. मोर्चे ने अब तक 57 उम्मीदवारों की घोषणा की है.

बसपा ने 14 उम्मीदवारों की सूची जारी की

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने पंजाब विधानसभा के लिए 20 फरवरी को होने वाले चुनाव के सिलसिले में बृहस्पतिवार को 14 उम्मीदवारों की एक सूची जारी की.

पार्टी द्वारा जारी सूची के अनुसार, बसपा की पंजाब इकाई के प्रमुख जसवीर सिंह गढ़ी फगवाड़ा सीट से चुनाव लड़ेंगे. इसके अलावा नवांशहर सीट से नछत्तर पाल, पायल से जसप्रीत सिंह, भोआ से राकेश महाशा, पठानकोट से ज्योति भीम और दिनानगर से कमलजीत चावला चुनावी समर में उतरेंगे.

पार्टी ने दविंदर सिंह को कपूरथला से, कुलदीप सिंह लुबाना को जालंधर उत्तर से, सुशील कुमार को दसुया से, लखविंदर सिंह को उरमर से, वरिंदर सिंह को होशियारपुर साहिब से, नितिन नंदा को आनंदपुर साहिब से, शिव कुमार को बस्सी पठाना से एवं बलविंदर सिंह संधू को रायकोट से उम्मीदवार बनाया है.


गोवा विधानसभा चुनाव


चुनाव पूर्ण गठबंधन के शिवसेना के प्रस्ताव पर कांग्रेस ने नहीं दिखाई दिलचस्पी : राउत

पणजी: शिवसेना नेता संजय राउत ने शुक्रवार को कहा कि वह तृणमूल कांग्रेस की इस बात से इत्तफाक रखते हैं कि अगर गोवा में भाजपा चुनाव जीतकर एक बार फिर सरकार बनाने में कामयाब रहती है तो इसके लिए कांग्रेस जिम्मेदार होगी.

राउत ने दावा किया कि शिवसेना ने कांग्रेस के सामने गोवा में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी) के साथ मिलकर चुनाव पूर्व गठबंधन बनाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन पार्टी ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई.

संजय राउत. (फोटो: पीटीआई)

राउत गोवा में 14 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए शिवसेना की नौ उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करने के बाद संवाददाताओं से मुखातिब हुए थे. गोवा में शिवसेना शरद पवार की एनसीपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है.

इससे पहले तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी ने बृहस्पतिवार को कहा था कि अगर कांग्रेस गोवा में भाजपा को सत्ता से बेदखल करने में नाकाम रहती है तो पार्टी के राज्य प्रभारी पी. चिदंबरम को हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए.

बनर्जी ने दावा किया कि तृणमूल ने चुनाव पूर्व गठबंधन के आधिकारिक प्रस्ताव के साथ चिदंबरम का रुख किया था, लेकिन इस दिशा में कुछ नहीं हुआ.

राउत ने शुक्रवार को कहा, ‘मैं अभिषेक बनर्जी की बात से सहमत हूं. हमने भी कांग्रेस के साथ वार्ता की कोशिश की थी. हमने पार्टी नेता दिनेश गुंडु राव, दिगंबर कामत और गिरीश चोडंकर को प्रस्ताव दिया था कि कांग्रेस, एनसीपी, जीएफपी व शिवसेना को गोवा चुनाव के लिए साथ आना चाहिए.’

शिवसेना नेता ने हालांकि यह भी कहा कि चिदंबरम को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए, क्योंकि वह सिर्फ पार्टी आलाकमान की ओर से लिए गए फैसलों पर अमल कर रहे थे.

राउत ने कहा, ‘गठबंधन के तहत शिवसेना ने कांग्रेस को गोवा की 30 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया था, जबकि बाकी दस सीटें अन्य घटकों में बंट जातीं. ये वो दस सीटें थीं, जिन पर कांग्रेस को कभी जीत नसीब नहीं हुई है.’

शिवसेना नेता ने दावा किया कि कांग्रेस ने गठबंधन के प्रस्ताव में दिलचस्पी नहीं दिखाई. उन्होंने कहा कि पार्टी को अपने फैसले का मूल्यांकन करना चाहिए.

राज्यसभा सदस्य ने कहा, ‘हमारी पार्टी की छवि बेहद साफ है. शिवसेना इस बार के गोवा विधानसभा चुनावों में इतिहास रचेगी.’

राउत ने यह भी कहा कि अगर गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के बेटे उत्पल पर्रिकर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ते हैं तो शिवसेना उनका समर्थन करने के लिए तैयार है. उत्पल ने गोवा की पणजी सीट से चुनाव मैदान में उतरने में इच्छा जताई थी, लेकिन भाजपा ने उन्हें टिकट देने से इनकार कर दिया था.

सिओलिम क्षेत्र के विधायक ने विधानसभा की सदस्यता, जीएफपी से इस्तीफा दिया

गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी) के विधायक विनोद पालीनकर ने चुनावी राज्य में शुक्रवार को पार्टी और विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया.

सिओलिम सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे पालीनकर ने दिन में अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय को सौंपा. चुनाव से पहले सदन की सदस्यता छोड़ने वाले जयेश सालगांवकर के बाद वह जीएफपी के दूसरे विधायक हैं.

इसके साथ ही, 40 सदस्यीय सदन में विजय सरदेसाई नीत पार्टी के सदस्यों की संख्या घट कर मात्र एक रह गई है.

पालीनकर ने कहा कि उन्होंने इसलिए इस्तीफा दिया है, क्योंकि उनके समर्थक चाहते हैं कि वह 14 फरवरी का चुनाव सिओलिम सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ें.

भाजपा के चार उम्मीदवारों के खिलाफ हैं आपराधिक मामले

गोवा में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने राज्य विधानसभा चुनावों के लिए बृहस्पतिवार को 34 उम्मीदवारों की घोषणा की, जिनमें से चार के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं.

(फोटो: पीटीआई)

पुलिस सूत्रों ने बताया कि पणजी से मौजूदा विधायक अतानासियो मोंसेराटे के खिलाफ 2016 में एक नाबालिग लड़की को खरीदने और उसका बलात्कार करने का आरोप है. उन्होंने बताया कि यह मामला अब तक लंबित है.

सूत्रों ने बताया कि 2008 में पणजी पुलिस थाने पर हमला करने वाली भीड़ का कथित तौर पर हिस्सा रहने को लेकर मोंसेराटे की पत्नी जेनिफर के खिलाफ भी एक मामला लंबित है. मौजूदा राजस्व मंत्री जेनिफर को भी भाजपा ने 14 फरवरी के चुनाव के लिए टिकट दिया है.

भाजपा के दो अन्य उम्मीदवार जिनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं, उनमें हाल में पार्टी में शामिल हुए पूर्व कला एवं संस्कृति मंत्री गोविंद गौडे और पूर्व मंत्री रमेश तावडकर शामिल हैं.

उल्लेखनीय है कि भाजपा ने बृहस्पतिवार को गोवा में 40 सीटों के लिए 34 उम्मीदवारों की घोषणा की.

कांग्रेस ने पांच और उम्मीदवारों की घोषणा की

कांग्रेस पार्टी ने 14 फरवरी को गोवा में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए बृहस्पतिवार को पांच और प्रत्याशियों की सूची जारी की.

इसके साथ ही पार्टी अब तक 36 उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है. पणजी से एकवीस गोम्स, सिरोडा से तुकाराम बोरकर और वास्को डा गामा सीट से जोस लुइस कार्लोस अल्मीडा चुनाव लड़ेंगे.

इसके अलावा, बेनौलिम सीट से एंथनी डायस और कुर्कोरेम सीट से अमित पाटकर कांग्रेस प्रत्याशी होंगे.

राकांपा ने पहली सूची जारी की

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने बृहस्पतिवार को गोवा विधानसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की, जिसमें चार नामों की घोषणा की गई.

सूची में राकांपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जोस फिलिप का भी नाम शामिल है जोकि दोबालिम सीट से चुनाव लड़ेंगे.

राकांपा नेता प्रफुल्ल पटेल ने सूची जारी की. पार्टी ने नवेलिम सीट से रहमान मुजावर को, प्रिओल सीट से दिग्विजय वर्लेकर और शिरोदा से डॉ सुभाष प्रभु देसाई को मैदान में उतारा है.

शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा ने गोवा विधानसभा चुनाव के लिए शिवसेना के साथ गठबंधन किया है.

एमजीपी ने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की

महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) ने गोवा विधानसभा चुनाव के लिए शुक्रवार को अपने दस उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की.

पार्टी प्रमुख दीपक धवलीकर और उनके भाई सुदीन धवलीकर का नाम सूची में शामिल है. 14 फरवरी को होने वाले चुनाव के लिए एमजीपी ने तृणमूल कांग्रेस पार्टी के साथ गठबंधन किया है.

शुक्रवार को जारी सूची के अनुसार, दीपक धवलीकर प्रियोल निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे, जबकि उनके भाई सुदीन, मरकाइम सीट से किस्मत आजमाएंगे. सुदीन फिलहाल मरकाइम से विधायक हैं.

हाल में एमजीपी में शामिल हुए भाजपा के पूर्व विधायक प्रवीण जंते मयेम से चुनाव लड़ेंगे, जबकि गोवा में खनन की बहाली के लिए लड़ने वाले मजदूर नेता बालाजी गौंस सांवोर्डेम से किस्मत आजमाएंगे.

अन्य उम्मीदवारों में जीत अरोलकर (मॉन्दरम निर्वाचन क्षेत्र), राजन कोरगांवकर (पेरनेम), नरेश सावल (बिचोलिम), विश्वेश प्रभु (वालपोई), डॉ केतन भाटीकर (पोंडा) और संकेत नायक मुले (शिरोदा) शामिल हैं.

एमजीपी ने 2017 के विधानसभा चुनावों में मरकाइम, पेरनेम और सांवोर्डेम सीटें जीती थीं.

हालांकि, दो साल बाद इसके तीन विधायकों में से दो, दीपक पौस्कर (सांवोर्डेम) और मनोहर अजगांवकर (पेरनेम) सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल हो गए थे.


मणिपुर विधानसभा चुनाव


मणिपुर में तृणमूल के एकमात्र विधायक भाजपा में शामिल

इंफाल: मणिपुर में विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के एकमात्र विधायक तोंग्ब्राम रविंद्र सिंह ने बृहस्पतिवार को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया. भाजपा के एक नेता ने यह जानकारी दी.

सिंह, 2017 विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर थंगा निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए थे और बाद में उन्होंने भाजपा के नेतृत्व में गठबंधन सरकार को समर्थन दिया था.

पिछले महीने कांग्रेस छोड़ने वाले वाई. सुरचंद्र सिंह भी भाजपा में शामिल हो गए. यह दोनों नेता केंद्रीय मंत्री प्रतिमा भौमिक, असम के मंत्री अशोक सिंहल और पार्टी की मणिपुर इकाई की अध्यक्ष अधिकारीमयूम शारदा देवी की उपस्थिति में भाजपा में शामिल हुए.

देवी ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी. मणिपुर की 60 सदस्यीय विधानसभा में दो चरणों में 27 फरवरी और तीन मार्च को चुनाव होगा. मतगणना 10 मार्च को होगी.


आपराधिक छवि के उम्मीदवारों के चयन की जानकारी देनी होगी: आयोग

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों को आपराधिक छवि वाले प्रत्याशियों के चयन के बारे में जानकारी समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के जरिये प्रसारित करानी होगी.

चुनाव आयोग. (फोटो: रॉयटर्स)

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अजय कुमार शुक्ला ने बृहस्पतिवार को बताया कि उच्चतम न्यायालय के आदेशों के क्रम में निर्वाचन आयोग की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि अगर कोई राजनीतिक दल आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों का चयन करता है तो 48 घंटे के अंदर उसे समाचार-पत्रों, सोशल मीडिया मंचों एवं पार्टी की वेबसाइट पर प्रसारित करना होगा कि उसने उस प्रत्याशी का चयन क्यों किया है.

उन्होंने बताया कि पार्टियों को नामांकन वापसी की अंतिम तिथि से प्रचार की अवधि खत्म होने तक कम से कम तीन बार ऐसे उम्मीदवारों के चयन का कारण प्रकाशित-प्रसारित कराना होगा. आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों की सूचना को जन सामान्य तक पहुंचाने के लिए जिम्मेदारी प्रत्याशी एवं राजनीतिक दल दोनों को दी गई है.

शुक्ला ने बताया कि समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय लोक दल एवं भारतीय जनता पार्टी ने अभी तक प्रथम चरण के आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 28 उम्मीदवारों के चयन के संबंध में सूचना मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को दी है. इन पार्टियों ने यह भी बताया है कि उन्होंने इस सूचना का प्रकाशन विभिन्न समाचार पत्रों में करा दिया है. शेष दलों से यह सूचना देने का अनुरोध किया गया है.

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने एक केवाईसी ऐप विकसित किया है, जिसे एंड्रॉयड अथवा आईओएस दोनों प्रकार के फोन द्वारा प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है.

इस ऐप में चुनाव लड़ने वाले सभी अभ्यर्थियों की सूची एवं उनके द्वारा दाखिल किए गए शपथ-पत्र उपलब्ध हैं. ऐप में यह भी व्यवस्था की गई है कि प्रत्येक प्रत्याशी के आपराधिक पृष्ठभूमि होने या न होने को स्पष्ट रूप से ‘हां’ या ‘नहीं’ में अंकित किया गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)