राजनीति

टिकट न मिलने पर नाराज़ उत्तराखंड भाजपा के कई नेताओं ने पार्टी छोड़ने की धमकी दी

विधानसभा चुनाव राउंड-अप: भाजपा से कोई जवाब न मिलने पर जदयू ने यूपी चुनाव में अकेले उतरने का फैसला किया. सीएए विरोधी प्रदर्शनों में शामिल रहे अलीगढ़ शहर सीट से कांग्रेस प्रत्याशी को ज़िला बदर करने का आदेश. भाजपा छोड़ने वाले मनोहर पर्रिकर के बेटे उत्पल ने कहा कि अगर पार्टी गोवा में पणजी से अच्छा उम्मीदवार खड़ा करती है, तो वह निर्दलीय चुनाव नहीं लड़ेंगे. ए​डीआर के अनुसार, गोवा में बीते पांच साल में 60 प्रतिशत विधायकों ने किया दलबदल, बना देशव्यापी रिकॉर्ड.

(फोटो: पीटीआई)

लखनऊ/देहरादून/चंडीगढ़/पणजी/नई दिल्ली: टिकट नहीं दिए जाने पर भाजपा के मजबूत दावेदारों में असंतोष की भावना पैदा हो गई और इनमें से कई ने या तो दूसरी पार्टियों में चले जाने या निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी शुरू कर दी है.

पार्टी ने 59 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची में कई सीटों पर समर्पित पार्टी कैडर पर कांग्रेस के दलबदलुओं को तरजीह दी है, जबकि टिकट से वंचित किए गए कई लोग अपनी आहत भावनाओं के साथ खुलकर सामने आ गए हैं.

इनमें से सबसे बड़े नाम थराली से मौजूदा विधायक मुन्नी देवी शाह और द्वाराहाट विधायक महेश नेगी के हैं.

शाह ने कहा, ‘पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को यह बताना चाहिए कि मुझे टिकट क्यों नहीं दिया गया. मैंने केंद्र एवं राज्य सरकार की उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाने के साथ ही अपने निर्वाचन क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास कार्य किया है.’

इस सीट से मौजूदा विधायक एवं अपने पति मगन लाल शाह के निधन के बाद 2018 में उपचुनाव में जीतने वाली शाह ने कहा, ‘इससे पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा है.’

उन्होंने कहा कि उनके समर्थक उन पर दवाब बना रहे हैं कि वह सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ें. यहां भाजपा ने कांग्रेस छोड़कर पार्टी में आए भोपाल राम टमटा को उतारा है.

वहीं सितंबर 2020 में बलात्कार के एक मामले के आरोपी, नेगी ने कहा कि उन्हें साजिश के तहत टिकट नहीं दिया गया है. उन्होंने कहा कि सभी संगठनात्मक सर्वेक्षणों में उनका नाम सबसे ऊपर था, फिर भी उन्हें टिकट नहीं दिया गया.

इनके अलावा नरेंद्र नगर सीट से टिकट के मजबूत दावेदार माने जा रहे ओम गोपाल रावत कांग्रेस में शामिल होने की योजना बना रहे हैं. भाजपा ने इस सीट से एक बार फिर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल को उतारा है.

रावत ने कहा, ‘भाजपा समर्पित पार्टी कार्यकर्ताओं की परवाह नहीं करती जो संगठन को मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर मेहनत करते हैं. इसके कोई सिद्धांत या मूल्य नहीं हैं. यह बस सत्ता चाहती है.’

पूर्व विधायक महावीर रांगड़ भी भाजपा द्वारा धनौल्टी से प्रीतम सिंह पवार को उतारे जाने से नाखुश हैं. उन्होंने शुक्रवार को पार्टी कार्यकर्ताओं की राय ली और कहा कि वह निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ेंगे.

घनसाली से प्रत्याशी, दर्शन लाल ने भी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है.

कर्णप्रयाग से टिकट पाने की कोशिश कर रहे टीका मैखुरी ने भी निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरने की धमकी दी है, क्योंकि पार्टी ने सीट से अनिल नौटियाल को उतारा है.

भीमताल में मनोज शाह ने पार्टी छोड़ने की धमकी दी है, क्योंकि पार्टी ने सीट से मौजूदा निर्दलीय विधायक राम सिंह कैरा को उतारा है जो पिछले साल के आखिर में भाजपा में शामिल हो गए थे.

उन्होंने कहा, मैं 2002 से सीट से टिकट की दौड़ में हूं. मुझे टिकट न देना अन्याय है. मैं निर्दलीय के तौर पर लड़ूंगा.’

पार्टी के अंदर के मिजाज को भांपते हुए  भाजपा ने कहा कि असंतोष स्वाभाविक है और यह कड़वाहट कुछ दिनों में खत्म हो जाएगी.

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने कहा, ‘एक सीट से टिकट के कई दावेदार हो सकते हैं, लेकिन यह सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर ही एक को दिया जा सकता है. केंद्रीय नेतृत्व का फैसला सभी को मानना चाहिए.’

उन्होंने कहा, ‘भाजपा एक अनुशासित पार्टी है. यह उनकी शुरुआती प्रतिक्रिया है. मुझे पूरा विश्वास है कि वे समझेंगे.’


उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव


मेरठ/कैराना: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह शनिवार को ‘घर-घर संपर्क’ अभियान के तहत शामली जिले के कैराना शहर की गलियों में घूमे.

उत्तर प्रदेश के कैराना में शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भाजपा के लिए प्रचार किया. (फोटो साभार: ट्विटर/BJP4UP)

इस दौरान शाह ने शनिवार को कहा कि ‘यही कैराना है, जहां पलायन होता था, लेकिन अब पलायन कराने वाले खुद पलायन कर गए हैं.’

उन्होंने कहा कि 2014 के बाद वह पहली बार कैराना आए हैं, कोविड के कारण घर-घर जाकर संपर्क किया. शाह के मुताबिक, इस दौरान पलायन पीड़ित परिवार ने उनसे कहा, ‘अब हमें कोई डर नहीं हैं, हम शांति के साथ व्यापार कर रहे हैं, हमें पलायन कराने वाले पलायन कर गए हैं.’

उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विकास की गति को तेज किया है. पूरे देश में विकास की लहर दिखाई देती है. हर गरीब को सुविधाएं दी जा रही हैं.’

शाह ने कहा कि वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार बनने और 2017 में प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्‍व में सरकार बनने पर समग्र विकास हुआ है.

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘आज मैं कैराना में पलायन पीड़ित मित्तल परिवार के साथ बैठा, परिवार के 11 लोग मौजूद थे. वे सभी पहले पलायन कर गए थे और अब यहां दोबारा आकर सुरक्षित माहौल में अपना व्यापार कर रहे हैं.’

शाह ने मतदाताओं से भाजपा को वोट देने की अपील करते हुए कहा कि अगर उत्तर प्रदेश में कानून और व्यवस्था की स्थिति को बरकरार रखना है, तुष्टिकरण को खत्म करना है, एक जाति के लिए काम करने वाली सरकारों के चलन को खत्म करना है और मोदी जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का विकास करना है तो फिर से इस प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार प्रचंड बहुमत से बनानी होगी.

इस दौरान उनके साथ कैराना से भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह, गन्ना मंत्री सुरेश राणा व सांसद प्रदीप चौधरी भी मौजूद थे. शाह ने घर-घर जाकर लोगों से आगामी दस फरवरी को भाजपा के पक्ष में मतदान करने की अपील की.

शाह का शामली और बागपत में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करने का भी कार्यक्रम है.

इससे पहले कैराना में भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और गृह मंत्री शाह ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ अपने हाथों से पर्चे और पार्टी की प्रचार सामग्री लोगों के बीच बांटी.

भाजपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव में पलायन के मामले को प्रमुखता से उठाया था और इसे मुद्दा बनाया था. बाद में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री और पार्टी ने दावा किया कि सपा शासन में कथित पलायन करने वाले लोग वापस लौटे हैं.

शाह ने ‘जय श्री राम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों के बीच भाजपा सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कैराना में पर्चे बांटे. इस दौरान क्षेत्र के निवासियों ने फूलों की पंखुड़ियों की वर्षा की और ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाए.

भाजपा ने कैराना से समाजवादी पार्टी-राष्‍ट्रीय लोकदल की उम्मीदवार इकरा हसन के खिलाफ कई बार सीट जीतने वाले दिवंगत हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को मैदान में उतारा है.

उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री हुकुम सिंह 2014 के लोकसभा चुनाव में कैराना से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते थे और उन्होंने कैराना के पलायन को लोकसभा में प्रमुखता से उठाया था.

फरवरी 2018 में उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा ने उनकी पुत्री मृगांका को लोकसभा का उम्मीदवार बनाया था लेकिन वह हार गईं.

सपा के मौजूदा ‘दागी’ विधायक नाहिद हसन को टिकट मिलने के बाद राजनीतिक विरोधियों द्वारा तीखा प्रहार किया गया, जिसके बाद सपा ने इकरा हसन को मैदान में उतारा है. नाहिद को नामांकन दाखिल करने के बाद 15 जनवरी को गैंगस्टर एक्ट के तहत पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था.

कैराना पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली जिले में एक शहर और नगर पालिका परिषद है.

उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव की शुरुआत 10 फरवरी को राज्य के पश्चिमी हिस्से के 11 जिलों की 58 सीटों पर मतदान के साथ होगी. दूसरे चरण में 14 फरवरी को राज्य की 55 सीटों पर मतदान होगा. उत्तर प्रदेश में 20 फरवरी को तीसरे चरण में 59 सीटों पर, 23 फरवरी को चौथे चरण में 60 सीटों पर, 27 फरवरी को पांचवें चरण में 60 सीटों पर, तीन मार्च को छठे चरण में 57 सीटों पर और सात मार्च को सातवें चरण में 54 सीटों पर मतदान होगा.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाजपा के प्रचार रथ को झंडी दिखाकर रवाना किया

इस बीच उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को प्रचार रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इस मौके पर उन्होंने कहा, ‘भाजपा की डबल इंजन सरकार प्रदेश की जनता का विकास कर रही है.’

उन्होंने कहा, ‘प्रदेश की 25 करोड़ जनता ने देखा कि 2017 से पहले व्यापारी और संभ्रांत नागरिक पलायन करते थे, इससे प्रदेश की प्रगति अवरुद्ध हो गई थी, लेकिन वर्ष 2017 के बाद अपराधी पलायन कर रहे हैं और प्रदेश आज प्रगति के नए-नए प्रतिमान स्थापित कर देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर है.’

लखनऊ स्थित भाजपा कार्यालय परिसर में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, केन्द्रीय मंत्री एवं प्रदेश के सह-चुनाव प्रभारी अनुराग ठाकुर और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के साथ भाजपा का झंडा दिखाकर चुनाव प्रचार ‘रथ’ को रवाना किया.

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी प्रदेश की सभी 403 विधानसभा में चुनाव वैन के जरिये प्रचार का शुभारंभ कर रही है.

उन्होंने कहा, ‘आज डबल इंजन की सरकार का लाभ सबको दिखाई दे रहा है. हमने सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबके प्रयास से प्रधानमंत्री मोदी के मूलमंत्र को अंगीकार करते हुए गांवों के विकास, गरीबों के उत्थान, किसानों की खुशहाली, युवाओं के रोजगार और मातृशक्ति की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं.’

भाजपा से कोई जवाब न मिलने पर जदयू ने यूपी चुनाव में अकेले उतरने का फैसला किया

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन के प्रस्ताव पर भाजपा की ओर से कोई जवाब न मिलने पर जदयू ने शनिवार को 26 सीट की सूची जारी की, जिस पर वह चुनाव लड़ेगी और कहा कि पार्टी कम से कम 51 निर्वाचन क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतारेगी.

(फोटो साभार: फेसबुक)

जनता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष ललन सिंह ने नई दिल्ली में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी पार्टी के नेता एवं केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह ने शुरू में गठबंधन के लिए भाजपा के राजी होने की बात कही थी और यदि जदयू ने इसके बाद इतने लंबे समय तक इंतजार नहीं किया होता, तो वह उत्तर प्रदेश में अधिक ताकत के साथ और अधिक सीटों पर चुनाव लड़ता.

उन्होंने बार-बार उल्लेख किया कि यह आरसीपी सिंह थे जिन्हें जदयू नेतृत्व ने भाजपा नेताओं से बात करने के लिए अधिकृत किया था तथा कोई अन्य व्यक्ति इसका हिस्सा नहीं था.

ललन सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी ने केंद्रीय मंत्री के कहने पर इतने लंबे समय तक इंतजार किया और अब वह स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने के निर्णय के साथ आगे बढ़ रही है, क्योंकि भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उत्तर प्रदेश में उनकी पार्टी के सहयोगी अपना दल और निषाद पार्टी हैं तथा उन्होंने जदयू का कोई जिक्र नहीं किया.

आरसीपी सिंह को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का करीबी माना जाता है और वह जदयू के प्रमुख नेता हैं, लेकिन मोदी सरकार में जगह प्राप्त करने वाले पार्टी के एकमात्र सदस्य बनने के बाद पार्टी में उनके गिरते महत्व को लेकर अटकलें लगाई जाती रही हैं.

वह जदयू के अध्यक्ष थे और उनके केंद्रीय मंत्री बनने के बाद ललन सिंह के लिए इस पद का मार्ग प्रशस्त हुआ.

ललन सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी ने 51 से अधिक सीट पर लड़ने के लिए पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई के प्रमुख अनूप पटेल को उम्मीदवारों के नाम इत्यादि तय करने के लिए अधिकृत किया है.

सपा की सरकार बनी तो आईटी क्षेत्र में 22 लाख युवाओं को देंगे रोजगार: अखिलेश यादव

समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को वादा किया कि पार्टी की सरकार बनने पर उत्तर प्रदेश के 22 लाख युवाओं को आईटी क्षेत्र में रोजगार दिया जाएगा.

अखिलेश यादव ने यह घोषणा लखनऊ में अयोजित संवाददाता सम्मेलन में की. इस अवसर पर बरेली के पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन और उनकी पत्नी व इस चुनाव में कांग्रेस में उम्मीदवार सुप्रिया ऐरन सपा में शामिल हुईं. अखिलेश ने बरेली की पूर्व महापौर सुप्रिया को बरेली कैंट से सपा का प्रत्याशी घोषित किया है.

इसके अलावा संडीला से पूर्व विधायक महावीर सिंह की पत्नी रीता सिंह भी पार्टी में शामिल हुईं.

अखिलेश यादव ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘वर्ष 2022 में बाइसिकल का नारा साकार करने के लिए सपा आज संकल्प लेती है. आईटी सेक्टर में 22 लाख युवाओं को नौकरी देने का संकल्प लेते हैं, इसके लिए सरकार काम करेगी. जो सरकार 18 लाख लैपटॉप दे सकती है, वो सरकार इस दिशा में देर नहीं लगाएगी. यह नौकरी आईटी सेक्टर वालों को मिलेगी.’

बसपा ने नए चुनावी नारे के साथ प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी की

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने शनिवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण के तहत 55 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए 51 सीटों पर पार्टी प्रत्याशियों के नामों की दूसरी सूची जारी की.

बसपा अध्यक्ष मायावती. (फोटो: पीटीआई)

मायावती ने इस अवसर पर चुनावी नारा भी दिया, ‘हर पोलिंग बूथ को जिताना हैं, बसपा को सत्ता मे लाना हैं.’

उन्होंने इस अवसर पर पार्टी प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं से अपील की कि वह कोरोना नियमों का पालन करते हुए चुनाव मैदान में उतरें.

यहां जारी दूसरी सूची में सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, संभल, रामपुर, अमरोहा, बदायूं, बरेली और शाहजहांपुर जिलों की सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं.

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, आज घोषित उम्मीदवारों में 23 मुस्लिम, 10 अनुसूचित जाति और एक ब्राह्मण शामिल हैं.

बसपा द्वारा जारी दूसरी सूची में सहारानपुर की बेहट सीट से रईस मलिक, बिजनौर की नजीबाबाद सीट से शाहनवाज आलम, मुरादाबाद की कांठ सीट से आफाक अली खां, संभल की चंदौसी सुरक्षित सीट से रणविजय सिंह, रामपुर जिले की रामपुर सीट से सदाकत हुसैन, शाहजहांपुर की कटरा सीट से राजेश कश्यप आदि का नाम शामिल हैं.

उल्लेखनीय है कि बसपा प्रत्याशियों की पहली सूची 15 जनवरी को जारी की गई थी.

अलीगढ़ शहर सीट से कांग्रेस प्रत्याशी इम्तियाज को जिला बदर करने का आदेश

अलीगढ़: उत्तर प्रदेश में अलीगढ़ शहर से कांग्रेस उम्मीदवार सलमान इम्तियाज को जिले से बाहर रहने (जिला बदर) का आदेश दिया गया है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी.

इम्तियाज के घर पर शुक्रवार को 14 जनवरी का यह आदेश चस्पा किया गया है. उन्होंने बृहस्पतिवार को अपना नामांकन दाखिल किया था.

अपर जिला मजिस्ट्रेट (शहर) राकेश कुमार पटेल ने बताया, ‘उन पर गुंडा अधिनियम के तहत मामला होने के आधार पर प्रतिबंध लगाया गया था, क्योंकि वह शहर की शांति के लिए खतरा थे.’

इम्तियाज एएमयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष भी रहे हैं और उन पर पहले भी मार्च 2020 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में सीएए विरोधी आंदोलन के मद्देनजर प्रतिबंध लगाया गया था. एएमयू के कई अन्य छात्र नेताओं को भी इस तरह के प्रतिबंध आदेश जारी किए गए थे.

इम्तियाज ने कहा कि उन्होंने 2020 में प्रतिबंध के आदेश का जवाब दिया था और तब से उनकी याचिका पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला है.

उन्होंने बताया, ‘अचानक नामांकन दाखिल करने के बाद मुझे शहर छोड़ने और कासगंज जिले के एक पुलिस थाने में रिपोर्ट करने को कहा गया है.’

गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में इम्तियाज ने भारत के राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेजकर हरिद्वार में दिए गए कथित घृणा भाषणों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी. उन्होंने अलीगढ़ में प्रस्तावित ‘धर्म संसद’ का भी विरोध किया था, जिसे बाद में स्थगित कर दिया गया.

कांग्रेस के जिलाध्यक्ष संतोष सिंह ने कहा कि पार्टी इस आदेश को अदालत में चुनौती देगी.

मालूम हो कि उत्तराखंड के हरिद्वार में 17-19 दिसंबर 2021 के बीच हिंदुत्ववादी नेताओं और कट्टरपंथियों द्वारा ‘धर्म संसद’ का आयोजन किया गया, जिसमें मुसलमान एवं अल्पसंख्यकों के खिलाफ कथित तौर पर खुलकर नफरत भरे भाषण (हेट स्पीच) दिए गए, यहां तक कि उनके नरसंहार का आह्वान भी किया गया था.

भाजपा की दूसरी सूची जारी, पूर्व आईपीएस असीम अरुण कन्नौज से मैदान में

भाजपा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए शुक्रवार को 85 और उम्मीदवारों की सूची जारी की. भाजपा ने हाल में कांग्रेस छोड़कर पार्टी का दामन थामने वालीं अदिति सिंह और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर राजनीति में आए असीम अरुण को मैदान में उतारा है.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

इस सूची में मौजूदा विधायक हरिओम यादव भी शामिल हैं, जो समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के दूर के रिश्तेदार हैं. हरिओम ने हाल में सपा छोड़ दी थी. भाजपा ने अदिति सिंह और हरिओम यादव दोनों को क्रमश: रायबरेली और सिरसागंज की अपनी मौजूदा सीटों से टिकट दिया हैं. जबकि, अरुण कन्नौज से चुनाव लड़ेंगे.

पार्टी ने हाथरस (सुरक्षित सीट) से आगरा की पूर्व मेयर अंजुला महोर को मैदान में उतारा है. पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय को सादाबाद विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया गया है, जिसका वह वर्तमान में प्रतिनिधित्व करते हैं.

इस बार टिकट पाने वाले मंत्रियों में राम नरेश अग्निहोत्री (मैनपुरी के भोंगांव विधानसभा क्षेत्र से), सतीश महाना (कानपुर के महाराजपुर से), नीलिमा कटियार (कानपुर के कल्याणपुर से), अजीत पाल (कानपुर देहात के सिकंदरा से), मनोहर लाल ‘मन्नू’ कोरी (ललितपुर में मेहरोनी से) और रणवेंद्र प्रताप सिंह ‘धुन्नी’ (फतेहपुर के हुसैनगंज से) मैदान में हैं.

भाजपा द्वारा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए शुक्रवार को जारी उम्मीदवारों की दूसरी सूची में 60 प्रतिशत टिकट अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अनुसूचित वर्ग के नेताओं को दिया गया है. उत्तर प्रदेश सरकार में वरिष्ठ मंत्री एवं सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि भाजपा की 85 उम्मीदवारों की दूसरी सूची में पिछड़ा, दलित, महिला, सामान्य सभी वर्गों की पर्याप्त भागीदारी है.

उन्होंने कहा कि दूसरी सूची में 49 सीटें ओबीसी और अनुसूचित समाज को दी गई हैं. सिंह ने कहा कि दूसरी सूची में भाजपा ने 15 महिलाओं को जबकि सामान्य वर्ग के 36 उम्मीदवारों को जगह दी है.

भाजपा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अब तक 194 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है. पार्टी ने पहली सूची में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित 107 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की थी. इसके बाद पार्टी ने बरेली जिले की दो और सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की थी.

कुल्ला हबीबपुर गांव के निवासियों ने सड़क को लेकर मतदान के बहिष्कार की घोषणा की

उत्तर प्रदेश के एटा सदर विधानसभा क्षेत्र के सकीट ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले कुल्ला हबीबपुर गांव के निवासियों ने सामूहिक रूप से चुनाव का बहिष्कार करने की घोषणा करते हुए विरोध प्रदर्शन किया है. प्रदर्शन के दौरान वे ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ का नारा लगाते हुए नजर आए.

करीब एक हजार से अधिक आबादी वाले कुल्ला हबीबपुर गांव निवासी प्रमोद कुमार ने बताया कि बरसात के समय सड़क पर पानी भर जाता है और लोगों को परेशानी होती है, अभी तक कई लोगों को पानी व सड़ पर गिरने से चोट भी लग चुकी है.

उन्होंने बताया, ‘ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधि व आला अधिकारियों से कई बार शिकायतें की व निस्तारण के लिए प्रार्थना पत्र दिये, लेकिन समाधान नहीं हुआ. इसलिए गांव वालों ने फैसला किया है कि वोट उसी को करेंगे जो सड़क सही कराएगा.’

वहीं मुख्यालय स्थित कांशीराम कालोनी में जलभराव की समस्या को लेकर वहां के नागरिकों ने भी समस्या के समाधान न होने तक मतदान का बहिष्कार करने की घोषणा की है. दोनों ही स्थानों पर लोगों ने बहिष्कार किए जाने के बैनर लगा दिया है.

इस बारे में उप जिलाधिकारी (सदर) शिव कुमार सिंह ने बताया कि दोनों स्थानों पर तहसीलदार को भेजकर मामले की जांच कराई जा रही हैं और उनकी समस्या का शीघ्र समाधान कर दिया जाएगा.

उल्लेखनीय है कि एटा सदर सीट से भाजपा के विपिन वर्मा डेविड मौजूदा विधायक हैं, जिन्हें पार्टी ने दोबारा मैदान में उतारा है. इस सीट पर तीसरे चरण में 20 फरवरी को मतदान होना है.


पंजाब विधानसभा चुनाव


कांग्रेस में कई नेता चन्नी को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने के पक्ष में

पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस की राज्य इकाई में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा किए जाने की मांग लगातार बढ़ रही है और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता अनुसूचित जाति समुदाय से संबंध रखने वाले राज्य के पहले मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को अपना समर्थन दे रहे हैं.

चरणजीत सिंह चन्नी. (फोटोः पीटीआई)

कांग्रेस आला कमान का अभी तक यही कहना है कि पार्टी 117 सदस्यीय विधानसभा के लिए 20 फरवरी को होने वाला चुनाव ‘सामूहिक नेतत्व’ में लड़ेगी, लेकिन इसकी राज्य इकाई के कई नेताओं की मांग है कि इस मामले पर स्थिति को शीघ्र अति शीघ्र स्पष्ट किया जाना चाहिए.

वरिष्ठ नेता एवं मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा ने कहा कि पार्टी ने 2012 और 2017 के चुनावों से पहले मुख्यमंत्री पद के अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी और चन्नी ने तीन महीनों में अपनी योग्यता साबित की है.

उन्होंने कहा, ‘जब कोई एक व्यक्ति स्वयं को हरेक की उम्मीदों से पहले ही बेहतर साबित कर चुका है, तो ऐसे में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा को लेकर पार्टी में कोई दुविधा नहीं होनी चाहिए.’

पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद चन्नी पिछले साल मुख्यमंत्री बने थे.

कांग्रेस की पंजाब इकाई में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा की मांग ऐसे में जोर पकड़ रही है, जब चुनाव में मजबूत दावेदार के रूप में उभर रही आम आदमी पार्टी (आप) ने अपने सांसद और प्रदेश इकाई के प्रमुख भगवंत मान को मुख्यमंत्री पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है.

राज्य में कांग्रेस के मुख्य प्रतिद्वंद्वी शिरोमणि अकाली दल ने भले ही मुख्यमंत्री पद के लिए अपने उम्मीदवार की औपचारिक घोषणा अभी तक नहीं की है, लेकिन पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल इसके संभावित उम्मीदवार हैं.

कांग्रेस नेता राणा गुरजीत सिंह ने भी चन्नी का समर्थन करते हुए कहा कि पार्टी के सत्ता में लौटने के बाद मुख्यमंत्री के रूप में उनके बने रहने पर सवालिया निशान लगाना स्वयं को नुकसान पहुंचाने के समान होगा. उन्होंने कहा, ‘चन्नी ने मात्र तीन महीनों में शानदार काम किया है.’

कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा और शाहकोट से विधायक हरदेव सिंह लाडी शेरोवालिया ने भी चन्नी को मुख्यमंत्री बनाए जाने का समर्थन किया है.

बहरहाल, इस संबंध में प्रश्न पूछे जाने पर कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस सप्ताह चंडीगढ़ में कहा था, ‘सिद्धू जी कांग्रेस की पंजाब इकाई के ‘सरदार’ हैं, चन्नी जी सरकार के सरदार (प्रमुख) हैं और हम सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ेंगे.’

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सहयोगी निखिल अलवा ने ट्विटर के जरिये एक सर्वेक्षण किया, जिसमें सवाल किया गया था कि ‘पंजाब में कांग्रेस का मुख्यमंत्री पद का चेहरा कौन होना चाहिए?’ इस सर्वेक्षण में शामिल कुल 1,283 लोगों में से 68.7 प्रतिशत ने चन्नी के समर्थन में मत दिया.

इस सर्वेक्षण में 11.5 प्रतिशत ने सिद्धू और 9.3 प्रतिशत ने सुनील जाखड़ के समर्थन में मतदान किया, जबकि 10.4 प्रतिशत ने कहा कि मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की पूर्व में घोषणा करने की आवश्यकता नहीं है.

कांग्रेस ने 17 जनवरी को एक छोटा वीडियो साझा किया था, जिसमें अभिनेता सोनू सूद यह कहते नजर आए थे कि स्वयं को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने वाले व्यक्ति के बजाय वह व्यक्ति ‘असली मुख्यमंत्री’ होगा, जो इस पद के लायक होगा.

कांग्रेस की पंजाब इकाई ने 36 सेकंड के इस वीडियो को ट्वीट किया था, जिसके अंत में विभिन्न कार्यक्रमों में चन्नी की फुटेज दिखाई गई है.

सूद की बहन मालविका सूद सच्चर हाल में कांग्रेस में शामिल हुई हैं.

चन्नी ने भी हाल में कहा था कि कांग्रेस को मुख्यमंत्री पद के अपने उम्मीदवार की घोषणा कर देनी चाहिए. उन्होंने कहा था कि अतीत में भी साबित हुआ है कि ऐसा करने से पार्टी को चुनावी लाभ मिला था.

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के छापों के मुद्दे पर राजनीतिक विरोधियों के निशाने पर आई पंजाब की कांग्रेस इकाई ने सोशल मीडिया पर अभियान चलाया है जिसमें दावा किया गया है कि पूरा राज्य चन्नी के साथ है.

यहां सत्तारूढ़ पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा नीत केंद्र सरकार अनुसूचित जाति से आने वाले पंजाब के पहले मुख्यमंत्री को बदनाम करने की कोशिश कर रही है.

उल्लेखनीय है कि ईडी ने बुधवार को बताया था कि पंजाब में गैर कानूनी रेत खनन के मामले में धनशोधन की जांच के तहत की गई छापेमारी की कार्रवाई में 10 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की गई है जिनमें से आठ करोड़ रुपये चन्नी के रिश्तेदार से मिले हैं.

उल्लेखनीय है कि पंजाब की 117 सदस्यीय विधानसभा के लिए 20 फरवरी को मतदान होगा और मतों की गिनती 10 मार्च को होगी.

प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक चन्नी सरकार द्वारा ‘प्रबंधित’: अमरिंदर

इस बीच ‘पंजाब लोक कांग्रेस’ के नेता अमरिंदर सिंह ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के खिलाफ तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा भंग करने वाली सड़क नाकाबंदी ‘प्रबंधित’ थी और अधिकारियों के स्थानांतरण और पोस्टिंग में रिश्वत प्राप्त की गई थी.

अमरिंदर सिंह. (फोटो: पीटीआई)

उन्होंने एक बयान में कहा कि हाल ही में प्रवर्तन निदेशाल की छापेमारी और मुख्यमंत्री के परिजनों से करोड़ों रुपये का पता लगने के बाद मौजूदा सरकार को ‘सूटकेस दी सरकार’ के रूप में उजागर हुई है.

अमरिंदर सिंह ने यह दावा भी किया कि एक बार एक महिला अधिकारी की उत्पीड़न की शिकायत से छुटकारा दिलवाने का अनुरोध करते हुए चन्नी ‘उनके पैरों में गिर गए थे.’

इस महीने की शुरुआत में फिरोजपुर में प्रदर्शनकारियों द्वारा की गई नाकेबंदी के कारण प्रधानमंत्री का काफिला फ्लाईओवर पर फंस गया था, जिसके बाद वह वहां की रैली में शामिल हुए बिना ही चुनावी राज्य से लौट आए.

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि चन्नी सरकार ने पुलिस को निर्देश दिया था कि वे उन किसानों को न हटाएं, जो भाजपा की बसों को फिरोजपुर रैली स्थल तक पहुंचने से रोक रहे थे.

अमरिंदर सिंह ने कहा कि उन्होंने पहले फिरोजपुर के पास फ्लाईओवर पार किया था और वहां कोई नाकाबंदी नहीं थी.

सिंह ने एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक चन्नी सरकार द्वारा ‘स्पष्ट रूप से प्रबंधित’ थी. घटना को एक बड़ी सुरक्षा चूक बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि टकराव वाला रुख अपनाने के बजाय चन्नी को स्पष्ट रूप से माफी मांगनी चाहिए थी.

अमरिंदर सिंह ने ‘चन्नी के खिलाफ ‘मी टू’ शिकायत को हल करने’ में मदद करने पर खेद व्यक्त करते हुए कहा कि तत्कालीन मंत्री ‘उनके पैरों पर गिर गए थे और जीवन भर उनके प्रति वफादारी का वादा किया था.’

उन्होंने कहा, ‘अब, उसने रंग बदल लिया है और दावा कर रहा है कि वह पिछले दो सालों से मुझसे छुटकारा पाने की कोशिश कर रहा था.’

भाजपा ने जारी की 34 उम्मीदवारों की पहली सूची

भाजपा ने शुक्रवार को आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए 34 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी. पार्टी की इस सूची में किसान परिवारों के 12 नेताओं, 13 सिखों और आठ दलितों को टिकट दिया गया है.

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और भाजपा महासचिव व पंजाब के प्रभारी दुष्यंत गौतम और महासचिव तरुण चुघ ने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की.

भाजपा इस बार राज्य में पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाले पंजाब लोक कांग्रेस और पूर्व केंद्रीय मत्री सुखदेव सिंह ढींढसा के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है और कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार को सत्ता से बेदखल करने की कोशिशों में जुटी है.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक तीनों दलों में सीटों के तालमेल को लेकर एक सहमति बन गई है. इसके मुताबिक भाजपा 65 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी, जबकि पंजाब लोक कांग्रेस 34 और शिअद (संयुक्त) 18 सीटों पर अपने-अपने उम्मीदवार उतारेगी.

चुघ ने उम्मीदवारों का नाम घोषित करने से पहले संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी ने 12 ऐसे नेताओं को टिकट दिया है, जो किसान परिवार से आते हैं, जबकि पार्टी ने 13 सिखों और आठ दलितों को भी अपना उम्मीदवार बनाया है.

भाजपा पंजाब की क्षेत्रीय पार्टी लोक इंसाफ पार्टी से भी गठबंधन की कोशिश कर रही है. इस पार्टी का लुधियाना और उसके आसपास के इलाकों में प्रभाव है.

पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था और उसने 23 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. हालांकि वह मात्र तीन सीट ही जीत सकी थी. वर्तमान में उसके दो ही विधायक हैं, क्योंकि एक सीट पर उपचुनाव में उसके उम्मीदवार को पराजय का मुंह देखना पड़ा था.

भाजपा ने अपने दोनों विधायकों को टिकट दिया है. दिनेश सिंह बब्बू को सुजानपुर से, जबकि अरुण नारंग को अबोहर से उम्मीदवार बनाया गया है. पूर्व भाजपा विधायक के डी भंडारी को जालंधर उत्तर से पार्टी ने टिकट दिया है.

चुघ ने कहा, ‘भाजपा सभी धर्म, जाति और संप्रदाय को साथ लेकर चलने वाली पार्टी है. इसलिए 34 उम्मीदवारों की सूची में राज्य की जितनी भी बिरादरी है, उन्हें प्रतिनिधित्व दिया गया है. इन उम्मीदवारों में महाजन, खत्री, बनिया, ब्राह्मण और जाट भी हैं.’

भाजपा से गठबंधन तोड़ने के बाद शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से गठबंधन किया है. केंद्र के तीन कृषि कानूनों के मुद्दे पर शिअद ने भाजपा से किनारा कर लिया था. जून 2021 में इस गठबंधन में बनी सहमति के आधार पर शिअद 97 सीटों पर और बसपा 20 सीटों पर चुनाव लड़ रही है.

शिअद और आप ने चुनाव के लिए ज्यादातर सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है. शिअद ने 90 से अधिक विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है, जबकि आप ने 112 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं.

कांग्रेस ने पंजाब में 86 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी की है. पार्टी ने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू, उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर रंधावा और ओ पी सोनी समेत कई वरिष्ठ नेताओं को चुनाव के मैदान में उतारा है.

किसान संगठनों के राजनीतिक मंच संयुक्त समाज मोर्चा (एसएसएम) ने भी चुनाव मैदान में ताल ठोंक कर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है. मोर्चे ने अब तक 57 उम्मीदवारों की घोषणा की है.

शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) ने 12 प्रत्याशियों की सूची जारी की

शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) ने आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए शुक्रवार को 12 उम्मीदवारों की सूची जारी की.

राज्यसभा सदस्य सुखदेव सिंह ढींढसा नीत शिअद (संयुक्त) पार्टी राज्य में भाजपा और पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की पंजाब लोक कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है.

पार्टी द्वारा जारी बयान के मुताबिक, पंजाब के पूर्व वित्तमंत्री और ढींढसा के बेटे परमिंदर सिंह, लहरागागा सीट से चुनाव लड़ेंगे. परमिंदर सिंह मौजूदा विधानसभा में भी लहरागागा से ही विधायक हैं.

बयान के मुताबिक, दिड़बा से सोमा सिंह को, साहनेवाल से हरप्रीत सिंह गर्चा, जैतू से पूर्व सांसद परमजीत कौर गुलशन, मेहल कलां से सुखविंदर सिंह टिब्बा को, बाघा पुराना से जगतार सिंह को, सुनाम से सनमुख सिंह को, उड़मुड़ टांडा से मनजीत सिंह को, सुल्तानपुर लोधी से जगराजपाल सिंह को, खेमकरन से दलजीत सिंह गिल को और कादियान से जौहर सिंह को प्रत्याशी बनाया गया है.

पार्टी फिल्लौर से सरवन सिंह फिल्लौर या उनके बेटे धर्मनवीर सिंह को प्रत्याशी बनाएगी. सरवन सिंह और उनके पुत्र कांग्रेस छोड़ने के बाद हाल में शिअद (संयुक्त) में शामिल हुए हैं.

आम आदमी पार्टी ने बाकी चार सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की

आम आदमी पार्टी (आप) ने पंजाब विधानसभा की बाकी चार सीटों के लिए शुक्रवार को उम्मीदवारों की घोषणा की. इसी के साथ पार्टी राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित कर चुकी है.

नई सूची के अनुसार अमित सिंह मंटो सुजानपुर से, मनजिंदर सिंह लालपुरा खडूरसाहिब से, केएनएस कांग डाखा से और बृंदार कुमार गोयल लहरगागा से चुनाव लड़ेंगे.


गोवा विधानसभा चुनाव


यदि भाजपा पणजी से अच्छा उम्मीदवार खड़ा करती है, तो चुनाव नहीं लड़ूंगा: उत्पल पर्रिकर

गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत मनोहर पर्रिकर के बेटे उत्पल पर्रिकर ने कहा है कि भाजपा को छोड़ना उनके लिए ‘सबसे मुश्किल’ फैसला था और यदि भगवा दल पणजी से किसी ‘अच्छे उम्मीदवार’ को खड़ा करता है, तो वह चुनाव नहीं लड़ेंगे.

उत्पल पर्रिकर. (फोटो साभार: एएनआई)

उत्पल ने शुक्रवार (21 जनवरी) को भाजपा छोड़ दी थी और घोषणा की कि वह राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव पणजी से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ेंगे. भाजपा ने उत्पल को टिकट न देकर मौजूदा विधायक अतानासियो मॉन्सरेट को पणजी सीट से मैदान में उतारा है, जिसका प्रतिनिधित्व लंबे समय तक मनोहर पर्रिकर ने किया था.

मनोहर पर्रिकर के बड़े बेटे उत्पल पर्रिकर ने शनिवार को कहा कि भाजपा हमेशा उनके दिल में है. उन्होंने कहा कि पार्टी छोड़ने का फैसला आसान नहीं था.

उन्होंने कहा, ‘मैं इस बात से नाखुश हूं कि मुझे यह फैसला (पार्टी छोड़ने और निर्दलीय चुनाव लड़ने का) करना पड़ा, लेकिन आपको कभी-कभी मुश्किल फैसले करने पड़ते हैं. यदि पार्टी पणजी से किसी अच्छे उम्मीदवार को खड़ा करती है तो मैं फैसला वापस लेने के लिए तैयार हूं.’

उत्पल ने अधिक विस्तार से बात किए बिना दावा किया कि उन्हें टिकट नहीं दिया जाना 1994 की उस स्थिति के समान है, जब उनके पिता को पार्टी से बाहर निकालने की कोशिश की गई थी.

उन्होंने कहा, ‘उस समय मनोहर पर्रिकर को बाहर इसलिए निकाला नहीं जा सका था, क्योंकि उनके पास लोगों का समर्थन था.’ उन्होंने कहा वे (उनके पिता के विरोधी) लोग अब भी पार्टी में ‘ऊंचे पदों’ पर बैठे हैं, जबकि उनके जैसा व्यक्ति ‘लोगों के साथ है.

उत्पल ने 2019 पणजी उपचुनाव का जिक्र किया, जो उनके पिता के निधन के बाद हुआ था. उन्होंने कहा कि उन्हें उस समय भी टिकट नहीं दिया गया था, जबकि उनके पास ‘समर्थन’ था.

उत्पल ने कहा, ‘जब (भाजपा प्रमुख जेपी नड्डा) नड्डा जी गोवा आए थे, तो पांच दंपत्तियों ने (अगले महीने होने वाले चुनाव के लिए) पार्टी का टिकट मांगा था. यदि मनोहर पर्रिकर जीवित होते, तो एक भी पुरुष नेता अपनी पत्नी के लिए टिकट मांगने की हिम्मत नहीं कर पाता.’

भाजपा ने मॉन्सरेट की पत्नी जेनिफर, स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे और उनकी पत्नी दिव्या राणे को भी टिकट दिया है.

उत्पल ने कहा कि उनके पिता राजनीति में ‘परिवार राज’ के खिलाफ थे. उन्होंने कहा कि उन्होंने मनोहर पर्रिकर के बेटे के रूप में टिकट नहीं मांगा था.

टिकट नहीं मिलने से नाराज गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पाारसेकर भाजपा छोड़ेंगे

अगले महीने के राज्य विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा द्वारा टिकट नहीं देने से नाराज गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता लक्ष्मीकांत पारसेकर ने शनिवार को कहा कि वह सत्तारूढ़ पार्टी से इस्तीफा दे देंगे.

65 वर्षीय नेता ने कहा कि वह पार्टी में नहीं रहना चाहते हैं. पारसेकर फिलहाल आगामी गोवा चुनाव के लिए भाजपा की घोषणा-पत्र समिति के प्रमुख हैं और पार्टी को कोर समिति के भी सदस्य हैं.

भाजपा ने मांद्रेम विधानसभा सीट के लिए मौजूदा विधायक दयानंद सोपते को नामांकित किया है. इस सीट का पारसेकर ने 2002 से 2017 के बीच प्रतिनिधित्व किया था. सोपते ने 2017 के राज्य विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर पारसेकर को हराया था, लेकिन 2019 में नौ अन्य नेताओं के साथ सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल हो गए थे.

पारसेकर ने कहा, ‘फिलहाल, मैंने इस्तीफा देने का फैसला किया है. मैं आगे क्या करूंगा, इसका फैसला बाद में करूंगा.’

उन्होंने कहा कि सोपते मांद्रेम में मूल भाजपा कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर रहे हैं, जिससे उनके भीतर व्यापक असंतोष है.

पारसेकर 2014 से 2017 के बीच गोवा के मुख्यमंत्री थे. उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने के बाद राज्य का मुख्यमंत्री चुना गया था.

भाजपा ने 14 फरवरी के गोवा विधानसभा चुनाव के लिए 34 प्रत्याशियों की पहली सूची की घोषणा कर दी है. राज्य में विधानसभा की 40 सीट हैं.

बीते पांच साल में 60 प्रतिशत विधायकों ने किया दलबदल, बना देशव्यापी रिकॉर्ड: एडीआर 

गोवा में बीते पांच साल में लगभग 24 विधायकों ने एक पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी का दामन थामा है, जो 40 सदस्यीय राज्य विधानसभा में विधायकों की कुल संख्या का 60 प्रतिशत है. एक संगठन की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है.

‘एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (एडीआर) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इस मामले में गोवा ने एक विचित्र रिकॉर्ड कायम किया है, जिसकी भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में कोई दूसरी मिसाल नहीं मिलती.

गोवा में 14 फरवरी को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है.

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘मौजूदा विधानसभा (2017-2022) के पांच साल के कार्यकाल के दौरान लगभग 24 विधायकों ने दल बदला, जो सदन में विधायकों की कुल संख्या का 60 प्रतिशत हिस्सा है. भारत में इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ. इससे जनादेश के घोर अनादर की बात बिल्कुल साफ नजर आती है और अनियंत्रित लालच नैतिक दृष्टिकोण व अनुशासन पर भारी पड़ता दिखाई देता है.’

रिपोर्ट में कहा गया है कि 24 विधायकों की सूची में विश्वजीत राणे, सुभाष शिरोडकर और दयानंद सोपटे के नाम शामिल नहीं हैं, जिन्होंने 2017 में कांग्रेस विधायकों के रूप में विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. वे सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल हो गए थे और उसके टिकट पर चुनाव लड़ा था.

कांग्रेस के 10 विधायक 2019 में पार्टी का दामन छोड़ भाजपा में शामिल हो गए थे. इनमें नेता प्रतिपक्ष चंद्रकांत कावलेकर भी शामिल थे.

भाजपा में जाने वाले कांग्रेस के अन्य विधायकों में जेनिफर मोनसेरेट (तालिगाओ), फ्रांसिस्को सिल्वरिया (सेंट आंद्रे), फिलिप नेरी रोड्रिग्स (वेलिम), विल्फ्रेड नाजरेथ मेनिनो डी’सा (नुवेम), क्लैफसियो डायस (कनकोलिम), एंटोनियो कारानो फर्नांडीस (सेंट क्रूज़), नीलकंठ हलर्नकर (टिविम), इसिडोर फर्नांडीस (कैनकोना), अतानासियो मोनसेरेट (जिन्होंने मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद 2019 में पणजी उपचुनाव जीता था) शामिल हैं.

महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) के विधायक दीपक पौस्कर (संवोर्डेम) और मनोहर अजगांवकर (पेरनेम) भी इसी अवधि के दौरान भाजपा में शामिल हो गए थे. सालिगांव से गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी) के विधायक जयेश सालगांवकर भी भाजपा में शामिल हो गए थे.

हाल में गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री तथा पोंडा से कांग्रेस विधायक रवि नाइक सत्तारूढ़ भगवा पार्टी में शामिल हुए. एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस नेता लुइजिन्हो फलेरियो (नावेलिम) ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का दामन थामा और वह 14 फरवरी के विधानसभा चुनावों में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.

साल 2017 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के टिकट पर जीतने वाले पूर्व मुख्यमंत्री चर्चिल अलेमाओ ने भी हाल में टीएमसी का रुख किया.

साल 2017 के चुनावों में, कांग्रेस 40 सदस्यीय सदन में 17 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी, लेकिन सरकार नहीं बना सकी, क्योंकि 13 सीटें जीतने वाली भाजपा ने कुछ निर्दलीय विधायकों और क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन कर सरकार बना ली थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)