राजनीति

32 साल तक कांग्रेस में रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह भाजपा में शामिल

विधानसभा चुनाव राउंड-अप: नोट बांटते बेटे का वीडियो सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री अनिल शर्मा को निर्वाचन आयोग ने भेजा नोटिस. उत्तराखंड में कांग्रेस उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी, रामनगर से चुनाव लड़ेंगे हरीश रावत. सांप्रदायिक टिप्पणी मामले में भाजपा ने पंजाब कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू के सलाहकार के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की. मणिपुर में एनपीपी ने 20 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की.

दिल्ली में मंगलवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आरपीएन सिंह भाजपा में शामिल हो गए. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली/लखनऊ/देहरादून/चंडीगढ़/इंफाल: पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आरपीएन सिंह मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए.

करीब 32 साल तक कांग्रेस में रहे और विधायक से लेकर सांसद और केंद्रीय मंत्री तक का सफर तय करने वाले सिंह ने मंगलवार को ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना इस्तीफा सौंपा. भाजपा में शामिल होने को उन्होंने एक नई शुरुआत करार दिया और कहा कि पहले जो कांग्रेस थी, अब वह नहीं रही और न ही उसकी सोच रही.

सिंह ने दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री व उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान, कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, उत्तर प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा तथा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की.

इससे पहले सिंह ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की.

सिंह के साथ ही कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के प्रवक्ता शशि वालिया और सचिव राजेंद्र अवाना ने भी भाजपा का दामन थामा.

भाजपा में पूर्व केंद्रीय मंत्री का स्वागत करते हुए प्रधान ने कहा कि विधायक, सांसद और केंद्रीय मंत्री के रूप में और कांग्रेस में सांगठनिक स्तर पर प्रमुख जिम्मेदारी निभाने वाले सिंह का भाजपा में आना शुभ संकेत है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए सिंह ने कहा कि पहले जो सपने में सोचा जाता था, उसे जमीन पर अब उतारा जा रहा है.

उन्होंने कहा, ‘मैं 32 सालों तक एक पार्टी में रहा और ईमानदारी और मेहनत से अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह किया. लेकिन अब वह वैसी रह नहीं गई जो थी. न ही वह सोच रह गई है, जब मैंने वहां शुरुआत की थी.’

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मंत्रिपरिषद के सदस्य रहे आरपीएन सिंह के कांग्रेस छोड़ने की अटकलें पिछले कुछ समय से लगाई जा रही थीं. वह कांग्रेस में अलग-थलग महसूस कर रहे थे.

उन्होंने कहा, ‘देर आए, दुरुस्त आए.’

भाजपा ने शामिल होने से पहले ही सिंह ने एक ट्वीट में कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह के दूरदर्शी नेतृत्व और मार्गदर्शन में राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देने के लिए तत्पर हूं.’

वह अब तक कांग्रेस में राष्ट्रीय प्रवक्ता और झारखंड के प्रभारी की जिम्मेदारी निभा रहे थे. कांग्रेस द्वारा उत्तर प्रदेश के लिए जारी की गई स्टार प्रचारकों की सूची में भी उनका नाम था.

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जारी प्रचार अभियान के बीच आरपीएन सिंह का भाजपा में शामिल होना कांग्रेस को बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है. सिंह से पहले उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के बड़े ब्राह्मण चेहरे और पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद भाजपा का दामन थाम चुके हैं. वह वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हैं.

कुशीनगर जिले के पडरौना राजघराने से ताल्लुक रखने वाले आरपीएन सिंह का पूरा नाम कुंवर रतनजीत प्रताप नारायण सिंह है. उन्होंने पडरौना विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर वर्ष 1996, 2002 और वर्ष 2007 में जीत दर्ज की थी.

इसके बाद वह कुशीनगर से 2009 के लोकसभा चुनाव में जीतकर वह सांसद बने और मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार में गृह राज्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाली थी.

हालांकि, इसके बाद के चुनावों में उन्हें लगातार हार का ही सामना करना पड़ा.

भाजपा में शामिल होने से पहले सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजे त्याग-पत्र की प्रति ट्विटर पर साझा की और कहा, ‘आज, जब पूरा राष्ट्र गणतंत्र दिवस का उत्सव मना रहा है, मैं अपने राजनीतिक जीवन में नया अध्याय आरंभ कर रहा हूं. जय हिंद.’

उन्होंने इस्तीफे में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देते हुए कहा है, ‘मैं राष्ट्र, लोगों और पार्टी की सेवा करने का अवसर प्रदान करने के लिए आपका (सोनिया) धन्यवाद करता हूं.’

आरपीएन के इस्तीफे पर कांग्रेस ने कहा: हमारी लड़ाई ‘कायर’ नहीं लड़ सकते

कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह के इस्तीफे के बाद मंगलवार को उन पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान में जो लड़ाई वो लड़ रही है, उसे लड़ने के लिए साहस होना चाहिए और यह काम ‘कायर’ नहीं कर सकते.

पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने संवाददाताओं से कहा , ‘मेरा मानना है कि जिस लड़ाई को कांग्रेस लड़ रही है, वो बहुत मुश्किल है. वो साहस और वीरता से लड़नी है. यह सच और सिद्धांतों की लड़ाई है. यह एजेंसियों के खिलाफ लड़ाई है. प्रियंका जी ने भी यह कहा है. मुझे नहीं लगता है कि लड़ाई कायर के लिए है. इसे लड़ने के लिए साहस होना चाहिए.’

उन्होंने कहा, ‘जो जहां जा रहा है, हम उसको उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हैं. आशा करते हैं कि उन्हें समय रहते पता चल जाएगा कि शिद्दत से लड़ाई लड़ना वीरों की निशानी है.’

सुप्रिया ने यह भी कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि कोई भी कांग्रेस में रहकर बिल्कुल ही विपरीत विचारधारा वाली पार्टी में जाएगा. ये काम कायर ही कर सकते हैं.’

कांग्रेस के पूर्व सांसद आनंद प्रकाश गौतम ने पार्टी से दिया इस्तीफा

बाराबंकी: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा के पूर्व सदस्य आनंद प्रकाश गौतम ने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप लगाते हुये पार्टी से इस्तीफा दे दिया है.

गौतम ने सोमवार शाम संवाददाताओं से बातचीत में किसी का नाम लिए बगैर दावा किया कि जिलों में स्थानीय मठाधीशों के धन और बाहुबल के चलते जमीनी और कर्मठ कार्यकर्ता उपेक्षित हो रहे हैं.

उन्होंने बाराबंकी से पूर्व सांसद पीएल पुनिया का नाम लिए बगैर कहा कि पार्टी के एक वरिष्ठ नेता अपने पुत्र को विधानसभा क्षेत्र जैदपुर से जिताने के लिए अन्य विधानसभा क्षेत्रों पर अपने समीकरण बैठा रहे हैं और उन्हें कांग्रेस के अन्य प्रत्याशियों के पक्ष में बात करने की फुर्सत नहीं है‍.

गौतम ने आरोप लगाया कि ऐसे नेता जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर रहे हैं, जिससे खिन्न होकर वह पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्याग-पत्र दे रहे हैं.

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू को भेजे गए त्याग-पत्र में उन्होंने कहा कि प्रदेश के लगभग सभी जिलों में कुछ स्थानीय नेताओं की ‘चौधराहट’ से वह आहत हैं.

उन्होंने दावा किया कि पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा से उन्होंने कई बार मुलाकात व फोन पर बात करने की कोशिश की, लेकिन उनके साथ रहने वाले लोगों ने कभी भी उनसे बात या मुलाकात नहीं कराई.

केंद्रीय मंत्री बालियान ने ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ नारा लगाया, माफी मांगे भाजपा: कांग्रेस

कांग्रेस ने सोशल मीडिया में वायरल एक वीडियो का हवाला देते हुए मंगलवार को भाजपा पर ‘ब्राह्मण विरोधी’ होने का आरोप लगाया और कहा कि केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ का नारा लगाया है, जिसके लिए सत्तारूढ़ पार्टी को माफी मांगनी चाहिए.

Dr. Sanjeev Kumar Balyan taking charge as the Minister of State for Agriculture, in New Delhi on May 28, 2014.

केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान. (फोटो साभार: विकिपीडिया)

दूसरी तरफ, बालियान ने इस वीडियो को फर्जी करार देते हुए कहा है कि उनकी छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है.

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने संवाददाताओं से कहा, ‘एक वीडियो बहुत वायरल हो रहा है, जिसमें संजीव बालियान एक वर्ग विशेष और वस्तुत: ब्राह्मणों को लेकर ‘पंडितवाद मुर्दाबाद’ की बात कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने जिस तरह से एक जाति विशेष को केंद्रित करके ब्राह्मणों का शोषण किया है, संजीव बालियान का ‘पंडितवाद मुर्दाबाद’ कहना उसका शायद एक प्रमाण है.’

उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि राजनीति में जाति की जगह होनी नहीं चाहिए, लेकिन जाति विशेष को केंद्रित करके, जाति विशेष का शोषण करके, उनके खिलाफ गालियां देकर, उनके खिलाफ नारे लगाकर भाजपा ये कौन सी राजनीति करने की कोशिश कर रही है? यह भाजपा का ब्राह्मण विरोध है.’

उन्होंने कहा, ‘भाजपा नेतृत्व, मंत्री को स्पष्टीकरण देना चाहिए. पार्टी को माफी मांगनी चाहिए.’

दूसरी ओर बालियान ने इस वायरल वीडियो को निराधार और फर्जी करार दिया है.

उन्होंने 23 जनवरी को ट्वीट कर कहा था, ‘मेरी छवि को धूमिल करने और चुनाव में ब्राह्मण समाज को भ्रमित करने के लिए जो कुछ सोशल मीडिया पर मेरे बारे में भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं, वो बिल्कुल निराधार व फर्जी हैं, मैं इसका खंडन करता हूं. मेरी प्रार्थना है कि ऐसी खबरों पर बिना सत्यापन के भरोसा ना करें.’

नोट बांटते बेटे का वीडियो सामने आने के बाद मंत्री को नोटिस

बुलंदशहर: उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और शिकारपुर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी अनिल शर्मा के बेटे का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर उन्हें लोगों को रुपये बांटते देखा जा सकता है. इसके बाद क्षेत्र के निर्वाचन अधिकारी ने मंत्री से 24 घंटे में स्पष्टीकरण देने को कहा है.

इस वीडियो में कथित रूप से शर्मा के बेटे कुश को अपनी कार से लोगों को 100-100 रुपये के नोट बांटते देखा जा सकता है और इस दौरान ढोल की आवाज सुनाई दे रही है. दावा किया गया है कि ढोल बजाने वाले लोग ये नोट ले रहे थे.

निर्वाचन अधिकारी ने मंत्री को दिए नोटिस में कहा है कि उनके पार्टी कार्यकर्ता या अधिकारी इलाके में लोगों को नोट बांट रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया यह आदर्श आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन लगता है. अधिकारी ने मंत्री से 24 घंटे के अंदर स्पष्टीकरण देने को कहा है.

कैराना में विधायक भाई नाहिद हसन के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी इकरा हसन

नोएडा: उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में से एक माने जाने वाली कैराना में इकरा हसन अपने विवादास्पद भाई और समाजवादी पार्टी (सपा) के मौजूदा विधायक नाहिद हसन के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी.

इकरा हसन. (फोटो साभार: फेसबुक)

निर्वाचन आयोग के अनुसार, 27 वर्षीय इकरा ने 21 जनवरी को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया था और उनकी उम्मीदवारी को मंजूरी दे दी गई है.

आयोग की वेबसाइट के अनुसार, उन्होंने सपा के उम्मीदवार के रूप में भी नामांकन पत्र दाखिल किया था, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया है. इसके अनुसार, 14 जनवरी को नामांकन दाखिल करने वाले सपा के नाहिद हसन की उम्मीदवारी को भी मंजूरी मिल गई है.

भाजपा की मृगांका सिंह के अलावा कैराना से चार निर्दलीय उम्मीदवारों सहित नौ अन्य उम्मीदवार मैदान में हैं.

निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, उत्तर प्रदेश में पहले चरण में 10 फरवरी को होने वाले चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने और उनकी जांच करने का काम समाप्त हो गया है और नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 27 जनवरी है.

नाहिद हसन को उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत कैराना कोतवाली में दर्ज 2021 के एक मामले में 16 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था.

इस घटनाक्रम से ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि सपा नाहिद हसन की उम्मीदवारी को रद्द कर देगी और इसके बजाय उनकी बहन इकरा को इस सीट से मैदान में उतारेगी.

समाचार एजेंसी ‘पीटीआई/भाषा’ द्वारा देखे गए उनके हलफनामे में इकरा ने घोषणा की है कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं है और कृषि को अपनी आय का स्रोत बताया है.

इकरा और नाहिद दोनों चौधरी मुनव्वर हसन की संतान हैं, जो कैराना से दो बार विधायक रहे और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से दो बार लोकसभा सांसद रहे. उनकी 2008 में एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी.

वर्ष 2013 में हुए दंगों के बाद शामली जिले का कैराना सुर्खियों में रहा था और 2014-2016 के दौरान कई हिंदू परिवारों के कैराना से कथित तौर पर पलायन करने की सूचना मिली थी.

राज्य में हुए 2017 के चुनावों के बाद जहां भाजपा सत्ता में आई, वहीं कैराना सीट सपा के नाहिद हसन ने जीती. कैराना में पहले चरण में 10 फरवरी को मतदान होगा और मतगणना 10 मार्च को होगी.

बुलंदशहर हिंसा के आरोपी और शिवसेना उम्मीदवार का नामांकन पत्र खारिज

बुलंदशहर: बुलंदशहर में 2018 की भीड़ हिंसा मामले के एक आरोपी योगेश राज और दो बार विधायक रहे श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित का नामांकन पत्र खारिज कर दिया गया है. अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी.

बुलंदशहर के स्याना इलाके में हुई हिंसा में एक पुलिस निरीक्षक की हत्या कर दी गई थी. उन्होंने बताया कि कागजी काम पूरा नहीं होने की वजह से दोनों उम्मीदवारों का नामांकन पत्र खारिज किया गया.

योगेश राज ने स्याना विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार योगेश कुमार के तौर पर नामांकन पत्र दाखिल किया था.

योगेश दिसंबर 2018 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के स्याना इलाके में हुई हिंसा के आरोपियों में से एक हैं. हिंसा के दौरान पुलिस निरीक्षक सुबोध कुमार सिंह और स्थानीय निवासी सुमित की गोली लगने से मौत हो गई थी.

चिंगरावती गांव के बाहर मवेशियों के शव पाए जाने के बाद हिंसा भड़क गई थी.

दक्षिणपंथी संगठन के एक पदाधिकारी ने पिछले साल मई में बताया था कि योगेश घटना के समय बजरंग दल की बुलंदशहर इकाई का संयोजक था, लेकिन अब वह इसका सदस्य नहीं है.

योगेश को हालांकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सितंबर 2019 में जमानत दे दी थी, लेकिन उच्चतम न्यायालय ने इस साल तीन जनवरी को इसे खारिज कर दिया था.

दूसरी ओर, पंडित को शिवसेना ने डिबाई निर्वाचन क्षेत्र से मैदान में उतारा था.

डिबाई से 2007 और 2012 में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए पंडित ने हाल ही में आरोप लगाया था कि वह समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने के इच्छुक थे, लेकिन उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत कल्याण सिंह के बेटे और एटा से भाजपा सांसद राजवीर सिंह ने अपनी राजनीतिक शक्ति का इस्तेमाल यह सुनिश्चित करने के लिए किया था कि अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली पार्टी उसे टिकट न दे.


उत्तराखंड विधानसभा चुनाव


पार्टी ने कुछ अच्छा सोचकर ही निर्णय लिया होगा: टिकट नहीं मिलने पर ऋतु खंडूरी ने कहा

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए कुछ दावेदारों को टिकट नहीं मिलने से जहां उनके बगावती सुर सामने आ रहे हैं, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी की पुत्री ऋतु खंडूरी को विधायक होते हुए भी टिकट न मिलने पर भाजपा से कोई नाराजगी नहीं है.

ऋतु खंडूरी. (फोटो साभार: फेसबुक)

यमकेश्वर से मौजूदा विधायक ऋतु को इस बार के चुनाव के लिए पार्टी द्वारा उम्मीदवार नहीं बनाए जाने के बारे में जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पार्टी संगठन सर्वोपरि है और उनका मानना है कि भाजपा ने यह निर्णय कुछ अच्छा सोचकर ही लिया होगा.

उन्होंने देहरादून में कहा, ‘कुछ कारण रहा होगा, जिससे मुझे टिकट नहीं मिला. मेरे लिए संगठन सर्वोपरि है. मैं यह मानती हूं कि संगठन ने यह निर्णय लिया है तो कुछ अच्छा ही सोचकर लिया होगा. मुझे इस निर्णय से कोई दिक्कत नहीं है.’

प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष खंडूरी की जगह पार्टी ने इस बार रेणु बिष्ट को प्रत्याशी बनाया है और सूत्रों का कहना है कि पार्टी के चुनाव पूर्व आंतरिक सर्वेक्षण में ऋतु खंडूरी की जीत की कम संभावनाओं के मद्देनजर पार्टी ने नई उम्मीदवार को तरजीह दी है.

पिछले विधानसभा चुनाव में ऋतु खंडूरी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरीं बिष्ट को 8,982 मतों के अंतर से पराजित किया था.

पिछले सप्ताह जारी भाजपा की 59 प्रत्याशियों की पहली सूची में ऋतु खंडूरी के अलावा नौ अन्य विधायकों को भी टिकट नहीं दिया गया है.

थराली से विधायक मुन्नी देवी शाह और द्वाराहाट के विधायक महेश नेगी सहित कुछ भाजपा नेताओं ने सूची जारी होते ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिन्हें मनाने के लिए पार्टी कई स्तरों पर प्रयास कर रही है.

शाह ने कहा था, ‘पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को यह बताना चाहिए कि मुझे टिकट क्यों नहीं दिया गया. मैंने केंद्र एवं राज्य सरकार की उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाने के साथ ही अपने निर्वाचन क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास कार्य किया है.’

वहीं सितंबर 2020 में बलात्कार के एक मामले के आरोपी नेगी ने कहा था कि उन्हें साजिश के तहत टिकट नहीं दिया गया है. उन्होंने कहा कि सभी संगठनात्मक सर्वेक्षणों में उनका नाम सबसे ऊपर था, फिर भी उन्हें टिकट नहीं दिया गया.

दूसरी ओर, प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस भी इस समस्या से जूझ रही है. इसी तरह के एक मामले में कांग्रेस को रामनगर सीट पर अपनों के असंतोष का सामना करना पड़ रहा है, जहां पार्टी महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को चुनावी समर में उतारे जाने से सीट के प्रबल दावेदार और प्रदेश के कार्यवाहक अध्यक्ष रणजीत सिंह रावत के नाराज होने की बात कही जा रही है.

कांग्रेस ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की, रामनगर से चुनाव लड़ेंगे हरीश रावत

कांग्रेस ने उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए सोमवार को 11 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की, जिसमें सबसे प्रमुख नाम पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का है.

कांग्रेस नेता हरीश रावत. (फोटो: पीटीआई)

पार्टी की ओर से जारी इस सूची के अनुसार, रावत को नैनीताल जिले की रामनगर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है. रावत पिछली बार हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा (ऊधम सिंह नगर) से चुनाव लड़े थे, हालांकि उन्हें दो स्थानों पर हार का सामना करना पड़ा था.

इस सूची के साथ ही कांग्रेस उत्तराखंड में अब तक 64 उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है. अब उसे छह और सीटों पर उम्मीदवार घोषित करने हैं.

कांग्रेस ने उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए शनिवार को 53 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी की थी, जिसमें पार्टी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष गणेश गोदियाल और विधायक दल के नेता प्रीतम सिंह के नाम शामिल थे.

पार्टी की दूसरी दूसरी सूची में हरीश रावत के बाद दूसरा प्रमुख नाम अनुकृति रावत का है जो पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत की पुत्रवधू हैं. अनुकृति को गढ़वाल जिले की लैंसडाउन विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है.

हरक सिंह रावत और अनुकृति गत 22 जनवरी को कांग्रेस में शामिल हुए थे. हरक सिंह रावत को 16 जनवरी को भाजपा सरकार के मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया गया था और फिर भाजपा से भी निष्कासित कर दिया गया था.

कांग्रेस ने देहरादून कैंट से सूर्यकांत धसमाना और धोइवाला से मोहित उनियाल को टिकट दिया है.

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि रामनगर से हरीश रावत को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद अब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष रंजीत रावत को सल्ट से टिकट दिया जा सकता है, क्योंकि वह पिछले कई महीनों से रामनगर से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे.

उत्तराखंड में सभी 70 सीटों के लिए 14 फरवरी को मतदान होगा. मतगणना 10 मार्च को होगी.


पंजाब विधानसभा चुनाव


सांप्रदायिक टिप्पणी मामले में भाजपा ने पंजाब के पूर्व डीजीपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग

भाजपा ने पंजाब के मलेरकोटला में एक जनसभा के दौरान प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मोहम्मद मुस्तफा द्वारा कथित तौर पर सांप्रदायिक टिप्पणी किए जाने के मामले में सोमवार को निर्वाचन आयोग से शिकायत की और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की.

नवजोत सिंह सिद्धू के साथ उनके राजनीतिक सलाहकार मोहम्मद मुस्तफ़ा. (फोटो साभार: फेसबुक)

केंद्रीय मंत्री और पंजाब के चुनाव प्रभारी गजेंद्र सिंह शेखावत के नेतृत्व में भाजपा नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग को एक ज्ञापन भी सौंपा. केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और भाजपा महासचिव व पंजाब के प्रभारी दुष्यंत गौतम भी इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे.

मुस्तफा कांग्रेस की राज्य इकाई के प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू के प्रमुख रणनीतिक सलाहकार हैं. इस विवादित टिप्पणी के मामले में मुस्तफा के खिलाफ शिकायत मिलने के बाद स्थानीय पुलिस ने जनप्रतिनिधि कानून के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 153-ए और धारा 125 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है.

मुस्तफा पंजाब की कैबिनेट मंत्री रजिया सुल्ताना के पति हैं, जो पंजाब के मुस्लिम बहुल जिले मलेरकोटला विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार हैं.

भाजपा ने शनिवार को मुस्तफा पर एक जनसभा के दौरान ‘हिंदुओं’ के खिलाफ विवादित बयान देने का आरोप लगाया था, जबकि मुस्तफा ने इस आरोप को सिरे से खारिज किया.

आयोग को ज्ञापन सौंपने के बाद पत्रकारों से बातचीत में शेखावत ने मुस्तफा के बयानों का उल्लेख करते हुए कहा, ‘भाजपा ने आज चुनाव आयोग के समक्ष प्रस्तुत होकर इस मामले में एक प्रतिवेदन दिया है और निर्वाचन आयोग से इसका संज्ञान लेना लेने को कहा है.’

मुस्तफा के बयान को समाज को तोड़ने वाला बयान करार देते हुए उन्होंने कहा, ‘मामले का संज्ञान लेकर मुस्तफा के खिलाफ निर्वाचन आयोग को प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए. हमने आग्रह किया है कि मुस्तफा को वह गिरफ्तार भी करे.’

शेखावत ने आरोप लगाया कि पूर्व डीजीपी का बयान ‘एक सोची समझी साजिश’ और इसके जरिये पंजाब सहित अन्य चुनावी राज्यों में माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है.

सोशल मीडिया पर वायरल कथित वीडियो में मुस्तफा बीते 20 जनवरी को मलेरकोटला में एक जनसभा में कथित तौर पर यह कहते हुए सुने जा सकते हैं, ‘मैं अल्लाह की कसम खाता हूं कि मैं उन्हें कोई कार्यक्रम नहीं करने दूंगा. मैं ‘कौमी फौजी’ हूं… मैं आरएसएस का एजेंट नहीं हूं, जो डर के मारे घर में छिप जाएगा.’

उन्होंने कथित रूप से वीडियो में कहा, ‘यदि वे फिर से ऐसा करने का प्रयास करेंगे तो मैं अल्लाह की कसम खाता हूं कि मैं उन्हें उनके घर में पीटूंगा.’

हालांकि, मुस्तफा ने ‘हिंदू’ शब्द का इस्तेमाल करने से इनकार किया है और कहा कि उन्होंने बस आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया था, क्योंकि उनमें से कुछ ने उनका पीछा किया था और उनके साथ दुर्व्यवहार करने का प्रयास किया था.

सभी कांग्रेसी उम्मीदवार राहुल गांधी के साथ स्वर्ण मंदिर जाएंगे

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पंजाब में पार्टी के सभी 117 उम्मीदवार बृहस्पतिवार को स्वर्ण मंदिर में मत्था टेकेंगे और लंगर छकेंगे. बाद में दिन में गांधी जालंधर के मीठापुर से पार्टी की एक डिजिटल रैली को संबोधित करेंगे.

कांग्रेस अब तक 86 उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है और जल्द ही अन्य नामों की घोषणा करने की उम्मीद है.

पार्टी के मुताबिक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष बृहस्पतिवार सुबह दिल्ली से अमृतसर पहुंचेंगे. अमृतसर पहुंचने के बाद वह स्वर्ण मंदिर में मत्था टेकेंगे और पार्टी के 117 उम्मीदवारों के साथ लंगर में प्रसाद लेंगे.

वह दुर्गयाना मंदिर और भगवान वाल्मीकि तीर्थ स्थल पर भी मत्था टेकेंगे. दोपहर बाद राहुल अमृतसर से 100 किलोमीटर दूर जालंधर पहुंचेंगे.

बाद में राहुल गांधी शाम को दिल्ली लौटने से पहले जालंधर के मीठापुर में, “पंजाब फतेह” डिजिटल रैली को संबोधित करेंगे.

चुनाव आयोग ने शनिवार को भौतिक रैलियों और रोड शो पर प्रतिबंध 31 जनवरी तक बढ़ा दिया था. पंजाब में 117 विधानसभा सीटों पर 20 फरवरी को वोट डाले जाएंगे और मतगणना 10 मार्च को होगी.

नामांकन भरने के दौरान उम्मीदवार के साथ सिर्फ दो लोग जा सकेंगे

पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. करुणा राजू ने सोमवार को कहा कि निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में नामांकन पत्र दाखिल करने जा रहे उम्मीदवार के साथ सिर्फ दो लोगों को ही अनुमति होगी.

पंजाब में अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन 25 जनवरी से एक फरवरी तक भरे जा सकेंगे.

राजू ने कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा पहले ही जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, नामांकन भरने के दौरान उम्मीदवार के साथ जाने वाले लोगों की संख्या पांच से घटाकर दो कर दी गई है, जबकि वाहनों की संख्या तीन से घटाकर दो कर दी गई है.

उन्होंने कहा कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी व जिला निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर भी नामांकन पत्र उपलब्ध हैं और उम्मीदवार इन्हें ऑनलाइन भर सकते हैं और नोटरी द्वारा सत्यापित हलफनामे के साथ उसे जमा करा सकते हैं.

निर्वाचन आयोग ने आदर्श आचार संहिता के ‘उल्लंघन’ को लेकर आप को नोटिस जारी किया

निर्वाचन आयोग ने आम आदमी पार्टी (आप) के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार भगवंत मान द्वारा रविवार को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करके संगरूर में कथित तौर पर रोड शो करने के लिए आप से स्पष्टीकरण मांगा है.

आयोग ने पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के दौरान कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए रैलियों और अन्य चुनावी गतिविधियों पर कुछ पाबंदियां लगाई हैं.

मान ने अपनी पार्टी के समर्थकों के साथ रविवार को संगरूर जिले के धुरी में कथित तौर पर रोड शो किया.

धुरी के निर्वाचन अधिकारी इस्मत विजय सिंह ने सोमवार को कहा कि आप के जिला प्रमुख को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जिसमें उनसे यह बताने को कहा गया है कि आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के लिए पार्टी के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए.


मणिपुर विधानसभा चुनाव


एनपीपी ने 20 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की

इंफाल/शिलांग: मणिपुर विधानसभा चुनाव को लेकर सक्रिय नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) ने सोमवार को 20 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी की. इस सूची में तीन मौजूदा विधायकों के भी नाम हैं. टिकट पाने वालों में उपमुख्यमंत्री वाई. जॉयकुमार सिंह का भी नाम है, जो अपनी पुरानी सीट उरिपोक से चुनाव लड़ेंगे.

एनपीपी का फिलहाल भाजपा के साथ गठबंधन है, लेकिन यह आगामी विधानसभा चुनाव में सभी 60 सीट पर अकेले चुनाव लड़ रही है.

एनपीपी के मणिपुर इकाई के अध्यक्ष एल. जयंत कुमार सिंह केशमथोंग सीट से और एन. कायीसी अपनी टाडुबी सीट से चुनाव लड़ेंगे. राज्य के खेल मंत्री लेटपाओ हाओकिप वर्ष 2001 में भाजपा में शामिल हो गए थे, लेकिन पांच साल पहले उन्होंने एनपीपी के टिकट पर चंदेल सीट से जीत दर्ज की थी.

एनपीपी के एक नेता ने बताया कि 20 उम्मीदवारों की सूची को अंतिम मंजूरी मेघालय के मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख कोनराड के संगमा ने दी.

इसके पहले वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा ने केवल 21 सीट जीतकर सरकार बनाई थी, जबकि कांग्रेस के पास 28 सीट थी. भाजपा ने सरकार बनाने के लिए एनपीपी और एनपीएफ का सहयोग लिया था. मणिपुर में 27 फरवरी और तीन मार्च को चुनाव होंगे, जबकि मतदान 10 मार्च को होगा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)