पेगासस: फिनलैंड ने कहा- अन्य देशों में काम कर रहे उसके राजनयिकों के भी फोन हैक किए गए

फिनलैंड के विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है. उसने कहा कि वह पिछले साल से पेगासस के इस्तेमाल की जांच कर रहा था और साथ ही कहा कि जासूसी अब नहीं की जा रही है. मंत्रालय की ओर से कहा गया कि बेहद जटिल मालवेयर से उपयोगकर्ताओं के एप्पल या एंड्रॉयड फोन में घुसपैठ की गई है. यह उनकी जानकारी के बिना किया गया.

(इलस्ट्रेशन: द वायर)

फिनलैंड के विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है. उसने कहा कि वह पिछले साल से पेगासस के इस्तेमाल की जांच कर रहा था और साथ ही कहा कि जासूसी अब नहीं की जा रही है. मंत्रालय की ओर से कहा गया कि बेहद जटिल मालवेयर से उपयोगकर्ताओं के एप्पल या एंड्रॉयड फोन में घुसपैठ की गई है. यह उनकी जानकारी के बिना किया गया.

(इलस्ट्रेशन: द वायर)

स्टॉकहोम: फिनलैंड की सरकार ने बीते 28 जनवरी को कहा कि विदेश में काम कर रहे फिनलैंड के राजनयिकों के मोबाइल उपकरणों को किसी जटिल जासूसी सॉफ्टवेयर (स्पायवेयर) के जरिये हैक कर लिया गया है. देश की खुफिया एजेंसी के प्रमुख ने कहा कि इसके लिए किसी देश की सरकारी संस्था जिम्मेदार है.

फिनलैंड के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इजरायली कंपनी एनएसओ समूह द्वारा विकसित पेगासस स्पायवेयर की मदद से राजनयिकों के मोबाइल हैक किए गए. इस सॉफ्टवेयर की सहायता से किसी मोबाइल फोन में घुसपैठ की जा सकती है और उसके सारे विवरण हासिल किए जा सकते हैं.

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी और ट्वीट किए गए एक बयान में कहा गया, ‘बेहद जटिल मालवेयर से उपयोगकर्ताओं के एप्पल या एंड्रॉयड फोन में घुसपैठ की गई है. यह उनकी जानकारी के बिना किया गया.’

बयान में कहा गया है, ‘स्पायवेयर के जरिये घुसपैठियों ने उपकरण से डेटा चुराया और जानकारी हासिल कर ली होगी.’

हालांकि फिनलैंड के सायबर सुरक्षा राजदूत जारमो सरेवा ने यह नहीं बताया कि कौन-सा डेटा चुराया गया, लेकिन यह कहा कि फोन से भेजी गई सरकारी जानकारी या तो सार्वजनिक थी या बेहद निचले स्तर पर गोपनीय थी.

सरेवा ने कहा, ‘आपको पता है कि पेगासस स्पायवेयर फोन को नियंत्रण में ले लेता है. उसके माइक्रोफोन और कैमरे की भी जासूसी की जा सकती है.’ उन्होंने यह नहीं बताया कि कितने राजनयिकों को निशाना बनाया गया या वे किस देश में तैनात हैं.

यूरो न्यूज की एक खबर के मुताबिक, विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह पिछले साल से पेगासस के इस्तेमाल की जांच कर रहा था और साथ ही कहा कि जासूसी अब नहीं की जा रही है. हालांकि उसने कहा कि दुरुपयोग को रोकने के लिए उसके पास सुरक्षा उपाय हैं.

दूसरी ओर पेगासस स्पायवेयर विकसित करने वाली कंपनी एनएसओ कहती है कि ग्राहक कैसे स्पायवेयर का इस्तेमाल करता है, इस पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है और न ही वह यह डेटा जुटाता है और न ग्राहकों द्वारा जुटाए गए डेटा तक एनएसओ की पहुंच है.

इजरायली कंपनी का कहना है कि उसने पेगासस का अनुचित इस्तेमाल किए जाने के कारण कई अनुबंधों को रद्द कर दिया है और फिनलैंड द्वारा की जा रही जांच में सहयोग करेगा.

एनएसओ ने कहा कि अगर यह पहचान की जाती है कि हमारे किसी ग्राहक ने स्पायवेयर का दुरुपयोग किया है तो हम तत्काल कार्रवाई करेंगे, जिसमें ग्राहक के साथ अनुबंध खत्म करना भी शामिल है.

मालूम हो कि एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया कंसोर्टियम, जिसमें द वायर  भी शामिल था, ने पेगासस प्रोजेक्ट के तहत यह खुलासा किया था कि इजरायल की एनएसओ ग्रुप कंपनी के पेगासस स्पायवेयर के जरिये दुनियाभर में नेता, पत्रकार, कार्यकर्ता, सुप्रीम कोर्ट के अधिकारियों के फोन कथित तौर पर हैक कर उनकी निगरानी की गई या फिर वे संभावित निशाने पर थे.

इस कड़ी में 18 जुलाई से द वायर  सहित विश्व के 17 मीडिया संगठनों ने 50,000 से ज्यादा लीक हुए मोबाइल नंबरों के डेटाबेस की जानकारियां प्रकाशित करनी शुरू की थी, जिनकी पेगासस स्पायवेयर के जरिये निगरानी की जा रही थी या वे संभावित सर्विलांस के दायरे में थे.

इस एक पड़ताल के मुताबिक, इजरायल की एक सर्विलांस तकनीक कंपनी एनएसओ ग्रुप के कई सरकारों के क्लाइंट्स की दिलचस्पी वाले ऐसे लोगों के हजारों टेलीफोन नंबरों की लीक हुई एक सूची में 300 सत्यापित भारतीय नंबर हैं, जिन्हें मंत्रियों, विपक्षी नेताओं, पत्रकारों, न्यायपालिका से जुड़े लोगों, कारोबारियों, सरकारी अधिकारियों, अधिकार कार्यकर्ताओं आदि द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा है.

यह खुलासा सामने आने के बाद देश और दुनियाभर में इसे लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था.

बता दें कि एनएसओ ग्रुप मिलिट्री ग्रेड के इस स्पायवेयर को सिर्फ सरकारों को ही बेचती हैं. भारत सरकार ने पेगासस की खरीद को लेकर न तो इनकार किया है और न ही इसकी पुष्टि की है.

अमेरिकी अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने अपनी एक रिपोर्ट में खुलासा किया था कि 2017 में भारत और इजरायल के बीच हुए लगभग दो अरब डॉलर के अत्याधुनिक हथियारों एवं खुफिया उपकरणों के सौदे में पेगासस स्पायवेयर तथा एक मिसाइल प्रणाली की खरीद मुख्य रूप से शामिल थी.

बता दें कि जुलाई 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल की यात्रा की थी, जो भारत के किसी भी प्रधानमंत्री की इजरायल की पहली यात्रा थी.

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया था, ‘यह यात्रा ऐसे समय में की गई, जब भारत ने फिलिस्तीन और इजरायल संबंधों को लेकर नीति बनाई थी, जिसमें भारत ने फिलिस्तीन के साथ प्रतिबद्धता की अपनी नीति को कायम रखा है, जबकि इजरायल के साथ अपने संबंधों को अमैत्रीपूर्ण रखा.’

रिपोर्ट में कहा गया, ‘मोदी का दौरा हालांकि सौहार्दपूर्ण था. उन्हें और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को नंगे पैर स्थानीय समुद्र तट पर चहलकदमी करते देखा गया. दोनों के बीच गर्मजोशी की वजह दोनों देशों के बीच दो अरब डॉलर के हथियारों का सौदा था, जिसमें पेगासस और मिसाइल सिस्टम भी शामिल थे.’

रिपोर्ट में कहा गया कि कई महीनों बाद नेतन्याहू ने भारत का दौरा किया. जून 2019 में भारत ने संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक परिषद में इजरायल के समर्थन में वोट किया, ताकि फिलिस्तीन मानवाधिकार संगठन को पर्यवेक्षक का दर्जा नहीं मिल सके.

उल्लेखनीय है कि अभी तक न तो भारत सरकार और न ही इजरायल सरकार ने यह स्वीकार किया है कि भारत ने पेगासस खरीदा था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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