प्रधानमंत्री मोदी से एल्गार परिषद मामले में गिरफ़्तार कार्यकर्ताओं को ज़मानत देने की अपील

इस पत्र में कहा गया कि साइबर हमलों और भीमा-कोरेगांव एल्गार परिषद मामले में साक्ष्यों को प्लांट करने के संबंध में खुलासे को देखते हुए गिरफ़्तार किए गए इन कार्यकर्ताओं को कम से कम ज़मानत दी जानी चाहिए. एल्गार परिषद मामले में अब तक 16 कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों को गिरफ़्तार किया जा चुका है. इनमें से एक फादर स्टेन स्वामी की कोरोना की वजह से हिरासत में ही मौत हो गई थी.

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एल्गार परिषद मामले में गिरफ्तार कार्यकर्ता. (फोटो: द वायर)

विपक्ष के कई सांसदों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र में कहा गया है कि साइबर हमलों और भीमा-कोरेगांव एल्गार परिषद मामले में साक्ष्यों को प्लांट करने के संबंध में खुलासे को देखते हुए गिरफ़्तार किए गए इन कार्यकर्ताओं को कम से कम ज़मानत दी जानी चाहिए. एल्गार परिषद मामले में अब तक 16 कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों को गिरफ़्तार किया जा चुका है. इनमें से एक फादर स्टेन स्वामी की कोरोना की वजह से हिरासत में ही मौत हो गई थी.

भीमा कोरेगांव और एल्गार परिषद मामले में गिरफ़्तार कार्यकर्ता. (फोटो: द वायर)

नई दिल्लीः माकपा नेता एलामारम करीम ने बीते एक फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर एल्गार परिषद मामले में गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों की तत्काल रिहाई की मांग की है.

इस पत्र पर माकपा, डीएमके, कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, लोक जनता दल, केरल कांग्रेस (एम) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के 19 अन्य सांसदों ने मीडिया और साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञ की रिपोर्टों पर चिंता जताते हुए हस्ताक्षर किए हैं.

दरअसल इस रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि उनमें से कुछ साइबर हमलों के निशाने पर थे, जिनके जरिये उनके खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री प्लांट की गई थी.

दरअसल इस मामले में फंसे कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों और उनके वकीलों ने पेगासस जासूसी मामले की जांच कर रही सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त तकनीकी समिति को लिखा है कि उनके फोन पर भी पेगासस सॉफ्टवेयर का हमला हुआ था.

इस पत्र में न्यूयॉर्क टाइम्स की हालिया रिपोर्ट का उल्लेख किया गया, जिसमें बताया गया था कि भारत ने पेगासस खरीदा था.

इसके साथ ही द वायर की उस रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया, जिससे पता चला कि भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं के कंप्यूटर में आपत्तिजनक दस्तावेज प्लांट किए गए थे.

सांसदों के पत्र में कहा गया, ‘मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जमानत का विरोध करने के लिए गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के अत्यधिक व्यापक प्रावधानों पर भरोसा किया.’

पत्र में कहा गया, साइबर हमलों और भीमा-कोरेगांव मामले में साक्ष्यों को प्लांट करने के संबंध में खुलासे को देखते हुए यह उचित है कि गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं को कम से कम जमानत दी जानी चाहिए.’

पत्र में आगे कहा गया कि हालांकि एनआईए ने आपकी सरकार के निर्देश पर जमानत का विरोध किया. हम आपसे आग्रह करते हैं कि इस घोर अन्याय से निपटने के लिए तत्काल जरूरी कदम उठाएं और इन्हें जमानत दी जाए.

बता दें कि एल्गार परिषद मामले में अब तक 16 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें से एक फादर स्टेन स्वामी की कोरोना की वजह से हिरासत में ही मौत हो गई थी.

बाकी अन्य कार्यकर्ताओं में लेखक और मुंबई के दलित अधिकार कार्यकर्ता सुधीर धावले, विस्थापितों के लिए काम करने वाले गढ़चिरौली के युवा कार्यकर्ता महेश राउत, नागपुर यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी साहित्य विभाग की प्रमुख रह चुकीं शोमा सेन, वकील अरुण फरेरा, सुधा भारद्वाज, लेखक वरवराराव, कार्यकर्ता वर्नोन गॉन्जाल्विस, कैदियों के अधिकार के लिए काम करने वाले रोना विल्सन, यूएपीए विशेषज्ञ और नागपुर से वकील सुरेंद्र गाडलिंग, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, हेनी बाबू और कबीर कला मंच के कलाकार, सागर गोरखे, रमेश गायचोर और ज्योति जगताप हैं.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)