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एबीजी शिपयार्ड घोटाला: सीबीआई ने पूछताछ शुरू की, कांग्रेस बोली- चुप क्यों पीएम-वित्त मंत्री

सीबीआई ने गुजरात की जहाज निर्माता कंपनी एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड, इसके पूर्व अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक ऋषि कमलेश अग्रवाल और अन्य पर एसबीआई के नेतृत्व वाले बैंकों के एक समूह के साथ 22,842 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने के आरोप में मामला दर्ज किया है. इसके बाद ईडी ने भी इन सभी के ख़िलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग का आपराधिक मामला दर्ज किया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: सीबीआई ने 22,848 करोड़ रुपये के कथित बैंक घोटाले से जुड़ी अपनी जांच के सिलसिले में एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन और प्रबंध निदेशक ऋषि अग्रवाल से पूछताछ की. अधिकारियों ने गुरुवार को इस आशय की जानकारी दी.

पूछताछ की तारीख सहित अन्य कोई जानकारी दिए बगैर अधिकारियों ने बताया कि हाल ही में अग्रवाल से पूछताछ की गई थी.

22,848 करोड़ रुपये का यह कथित बैंक घोटाला किसी भी केंद्रीय एजेंसी द्वारा दर्ज किया गया इस तरह का सबसे बड़ा मामला है. भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) द्वारा 25 अगस्त, 2020 को दी गई शिकायत पर आधार पर सात फरवरी को मामला दर्ज करने के बाद सीबीआई इसकी जांच कर रही है.

अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने मामले के आरोपी को देश छोड़कर भागने से रोकने के लिए लुक आउट सर्कुलर जारी किया है.

उन्होंने बताया कि एजेंसी ने आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, विश्वास भंग और आधिकारिक पद के दुरुपयोग से जुड़ी भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निरोधी कानून के तहत एबीजी शिपयार्ड के तत्कालीन कार्यकारी निदेशक संतनम मुथुस्वामी, निदेशकों अश्विनी कुमार, सुशील कुमार अग्रवाल और रवि विमल निवेदिता को भी प्राथमिकी में नामजद किया है.

प्राथमिकी दर्ज करने के तुरंत बाद सीबीआई ने 12 फरवरी को 13 परिसरों की तलाशी ली थी. अधिकारियों का दावा है कि उन्हें तमाम दस्तावेज मिले हैं जिनका अध्ययन किया जा रहा है.

ईडी ने एबीजी शिपयार्ड के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामला दर्ज किया

इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बैंकों के समूह के साथ 22,842 करोड़ रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी मामले में एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड, उसके पूर्व प्रवर्तकों के साथ अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का आपराधिक मामला दर्ज किया है.

 सीबीआई के कथित तौर पर देश के सबसे बड़े बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद यह कदम उठाया गया है.

सूत्रों ने बतायाकि सीबीआई की शिकायत और फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट देखने के बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (पीएमएलए) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है.

सूत्रों ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) विशेष रूप से बैंक ऋण की कथित ‘हेराफेरी’, लोगों के पैसे को लूटने के लिए मुखौटा कंपनियों के गठन तथा कंपनी के अधिकारियों और अन्य की भूमिका पर गौर करेगा.

उन्होंने बताया कि एक बार मनी लॉन्ड्रिंग और धन के अवैध हस्तांतरण का आरोप स्थापित होने के बाद एजेंसी द्वारा आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने की भी कार्रवाई की जा सकती है.

सीबीआई ने मामले में एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड और उसके तत्कालीन चेयरमैन और प्रबंध निदेशक ऋषि कमलेश अग्रवाल के साथ अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

उसने प्राथमिकी में तत्कालीन कार्यकारी निदेशक संतनाम मुथुस्वामी, निदेशक अश्विनी कुमार, सुशील कुमार अग्रवाल और रवि कुमार निवेतिया और एक अन्य कंपनी एबीजी इंटरनेशनल लिमिटेड को भी कथित आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और पद के दुरुपयोग मामले में नामजद किया है.

ईडी द्वारा इस मामले में दर्ज प्राथमिकी में इन्हें ही आरोपी के तौर पर नामजद किया गया है.

कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा

कांग्रेस ने बैंकों के 22,842 करोड़ रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी मामले में गुजरात की जहाज निर्माता कंपनी ‘एबीजी शिपयार्ड’ लिमिटेड के खिलाफ मामला दर्ज होने की पृष्टभूमि में गुरुवार को सरकार पर निशाना साधा और सवाल किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस मामले पर चुप क्यों हैं.

पार्टी प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने संवाददाताओं से कहा, ‘मोदी सरकार में 22,842 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी बैंकों से की गई. पांच साल के बाद सीबीआई ने आखिरकार प्राथमिकी दर्ज की.’

उन्होंने दावा किया, ‘एबीजी शिपायर्ड के मालिक ऋषि अग्रवाल हमेशा से ‘वाइब्रेंट गुजरात’ सम्मेलन में बतौर निवेशक शामिल होते थे और 2013 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आधिकारिक शिष्टमंडल में दक्षिण कोरिया भी गए थे.’

उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत ने अग्रवाल से 13,975 करोड़ रुपये वसूली किए जाने का आदेश दिया, लेकिन सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया.

उनके मुताबिक, इसके बाद 31 मार्च, 2016 को ऋषि अग्रवाल ने खुलासा किया था कि उसके पास 2.66 लाख करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति है तथा उसने बैंकों से 1,925 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है.

वल्लभ ने सवाल किया, ‘प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री धोखाधड़ी के इस मामले पर खामोश क्यों हैं? इस मामले में कदम उठाने में पांच साल का समय क्यों लगा? ऋषि अग्रवाल कहां है? उसकी अब तक की गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई? वह विदेश कैसे गए? दोहरी नागरिकता हासिल करने में उसकी किसने मदद की?’

इससे पहले कांग्रेस ने 22,842 करोड़ रुपये की सबसे बड़ी बैंक धोखाधड़ी मामले में मोदी सरकार की मिलीभगत का आरोप लगाया था.

गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बैंकों के समूह के साथ 22,842 करोड़ रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी मामले में एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड तथा उसके पूर्व प्रवर्तकों के साथ अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का आपराधिक मामला दर्ज किया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)