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जम्मू कश्मीर: राजनीतिक दलों का आरोप- परिसीमन का मसौदा भाजपा कार्यालय में तैयार हुआ

जम्मू कश्मीर भाजपा के अध्यक्ष रवींद्र रैना व पूर्व मंत्री शक्ति परिहार की परिसीमन संबंधी कथित बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद कांग्रेस और पीडीपी ने आरोप लगाया कि परिसीमन आयोग का मसौदा भाजपा नेताओं के निर्देश पर तैयार हुआ है. वहीं, रैना ने लीक ऑडियो को फ़र्ज़ी बताया है.

(फोटो: पीटीआई)

जम्मू: जम्मू कश्मीर के राजनीतिक दलों ने शुक्रवार को भाजपा पर आरोप लगाया कि परिसीमन आयोग की रिपोर्ट का मसौदा उसके दफ्तर में तैयार किया गया. विपक्षी दलों ने यह आरोप भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष रवींद्र रैना और पूर्व मंत्री शक्ति परिहार के बीच हुई कथित बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद लगाया.

भाजपा के विरोधी दलों ने एक ओर जहां आयोग के स्वतंत्र कामकाज पर संदेह जताया, तो दूसरी ओर भाजपा की जम्मू कश्मीर इकाई के प्रमुख रैना ने इसे पार्टी के खिलाफ एक ‘साजिश’ करार दिया और दावा किया कि ऑडियो ‘गढ़ा हुआ और फर्जी’ है.

जम्मू कश्मीर कांग्रेस ने एक जांच की मांग करते हुए कहा कि लीक हुए ऑडियो ने उसके इस रुख की पुष्टि की है कि प्रशासन ने ‘परिसीमन रिपोर्ट उनके (भाजपा पार्टी) कार्यालय में तैयार की है.’

जम्मू कश्मीर कांग्रेस प्रमुख गुलाम अहमद मीर ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘यह देश के संवैधानिक और स्वायत्त स्वतंत्र संस्थानों की स्वायत्तता के खिलाफ है और उसके स्वतंत्र कामकाज पर आक्षेप के समान है.’

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, मीर ने कहा, ‘2014 से भाजपा सरकार संवैधानिक निकायों को नष्ट करने की कोशिश कर रही है और उन्हें केवल कठपुतली बना दिया है. हम सभी जानते हैं कि कैसे न्यायपालिका, सीबीआई, ईडी और अन्य एजेंसियों का इस्तेमाल मौजूदा सरकार अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए कर रही है.’

उन्होंने कहा कि इसी तर्ज पर वर्तमान शासन ने जम्मू कश्मीर में अपने फायदे के लिए परिसीमन आयोग का इस्तेमाल किया है.

उन्होंने कहा, ‘आयोग एक कानून के माध्यम से अस्तित्व में आया और संवैधानिक निकाय के पास दिशानिर्देशों का एक संग्रह है जो इसे नियंत्रित करता है. हालांकि आयोग ने अभी तक मसौदे को सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन जम्मू कश्मीर में एक भी व्यक्ति ने इसका स्वागत नहीं किया है.’

उन्होंने कहा, ‘सबसे पहले भाजपा ने जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया. दूसरा, डोमिसाइल कानून के माध्यम से बाहरी लोगों को लाया गया और हमारे लोगों की जमीन और नौकरियां छीन लीं. अब इस परिसीमन आयोग के माध्यम से तीसरा हमला हो रहा है.’

उन्होंने कहा कि पैनल का काम सात विधानसभा सीटों को जोड़ना था और इसके पैरामीटर पहले से ही परिभाषित थे.

मीर ने कहा, ‘हमें पहले से ही आशंका थी कि निर्वाचन क्षेत्रों के नक्शे लिए जाने के दौरान पटवारियों और तहसीलदारों को सत्ता में रहने वालों द्वारा प्रभावित किया जा रहा है, लेकिन उस समय भाजपा ने कहा कि कोई राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है. अब देखिए कैसे जम्मू कश्मीर भाजपा अध्यक्ष (रवींद्र रैना) पूर्व मंत्री (शक्ति राज परिहार) से कह रहे हैं कि वह उन्हें अस्सार क्षेत्र से मतदाता दे रहे हैं.’

कांग्रेस ने मांग की कि परिसीमन आयोग को अपनी रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से पहले उसकी विभिन्न मापदंडों को ध्यान में रखते हुए समीक्षा करनी चाहिए और उसे फिर से तैयार करना चाहिए.

मीर ने आगे कहा, ‘आज न केवल जम्मू कश्मीर के लोग बल्कि पूरे भारत ने समझ लिया है कि कैसे पीएम मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार संवैधानिक संस्थानों को नष्ट कर रही है, कैसे उनकी शक्तियों का क्षरण हो रहा है और इसके उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कैसे उनका अतिक्रमण हो रहा और रौंदा जा रहा है.’

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने कहा कि ऑडियो इस आरोप को सही साबित करता है कि रिपोर्ट भाजपा नेताओं के निर्देश पर तैयार की गई.

ऑडियो में रैना को कथित तौर पर उनके डोडा निर्वाचन क्षेत्र में कुछ क्षेत्र को शामिल करने की ओर इशारा करते हुए सुना गया.

परिसीमन आयोग की मसौदा रिपोर्ट को खारिज करते हुए पीडीपी के महासचिव गुलाम नबी लोन हंजुरा ने आरोप लगाया कि आयोग ने ‘भाजपा के विभाजनकारी एजेंडा का खुले तौर पर पालन किया है.’

उन्होंने जम्मू में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘ऐसा प्रतीत होता है कि परिसीमन आयोग की रिपोर्ट त्रिकुटा नगर स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भवन में तैयार की गई थी और उस पर आयोग के सदस्यों द्वारा केवल हस्ताक्षर किए गए थे.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)