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यूपी: 18 वर्ष बाद फ़र्ज़ी एनकाउंटर मामले में 18 पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ हत्या का केस दर्ज

आरोप है कि उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर ज़िले के जलालाबाद में 18 साल पहले अक्टूबर 2004 में तत्कालीन एसपी सहित 18 पुलिसकर्मियों ने दो ग्रामीणों को पकड़कर उनके गले में कारतूस की पेटी बांधकर तथा एक-एक बंदूक दोनों के कंधे पर लटकाकर उन्हें गोलियों से भून दिया था. बाद में पुलिसकर्मियों ने उन्हें डकैतों के गिरोह का सदस्य बता दिया था. अदालत के आदेश के बाद इनके ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया है.

(इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रबर्ती/द वायर)

शाहजहांपुर: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में दस्यु (डाकू) उन्मूलन अभियान के दौरान राम गंगा व गंगा की कटरी में दो लोगों को कथित रूप से पुलिस मुठभेड़ में मार गिराने के आरोप में 18 वर्ष बाद अदालत के आदेश पर तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (एसपी), अपर पुलिस अधीक्षक समेत 18 पुलिसकर्मियों पर हत्या की प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है.

यह केस जलालाबाद थााने में दर्ज किया गया है. 18 आरोपियों में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (एसपी) के अलावा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी), तीन सर्किल ऑफिसर (सीओ) और 10 थानों के प्रभारी शामिल हैं.

पुलिस ने बताया कि रिकॉर्ड के मुताबिक, 2014 में जिला पुलिस और बाद में यूपी पुलिस की क्राइम ब्रांच (सीआईडी) ने जांच की थी, जिसने संबंधित पुलिसकर्मियों को क्लीनचिट दे दी थी.

शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक एस. आनंद ने शनिवार को यह जानकारी पत्रकारों को दी. उन्होंने बताया कि अदालत के आदेश पर थाना जलालाबाद में 18 पुलिसकर्मियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है तथा इस मामले की जांच अपराध शाखा (Crime Branch) को सौंप दी गई है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जलालाबाद थाने के प्रभारी जय शंकर सिंह ने कहा कि मजिस्ट्रियल जांच में भी पुलिसकर्मियों को क्लीनचिट दे दी गई थी. उन्होंने कहा, ‘मामले में नामित लगभग सभी पुलिस अधिकारी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं.’

पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता एजाज हसन खां ने बताया कि तीन अक्टूबर 2004 को थाना जलालाबाद के चचुआपुर गांव के ग्रामीण अपने पशुओं को लेकर कटरी गए थे तथा वहीं पर प्रह्लाद अपने खेत की जुताई कर रहे थे. इसी बीच लगभग 18 पुलिसकर्मी वहां पहुंचे और खेत जोत रहे प्रह्लाद तथा धनपाल को पकड़ लिया.

उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद पुलिसकर्मियों ने दोनों के गले में कारतूस की पेटी बांधी तथा एक-एक बंदूक दोनों के कंधे पर लटकाकर एवं हाथ बांधकर कटरी के पतेल में ले जाकर उन्हें गोलियों से भून दिया. बाद में उनके शव को पुलिसकर्मी अपनी जीप में डालकर ले गए और उन्हें डकैतों के गिरोह का सदस्य बता दिया था.

अधिवक्ता ने बताया कि मृतक प्रह्लाद का भाई राम कीर्ति घटना के बाद से विभिन्न आयोगों समेत अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाते रहे, लेकिन जब उनकी सुनवाई नहीं हुई तो 24 नवंबर 2012 को उन्होंने न्यायालय से पुलिसकर्मियों पर हत्या करने की रिपोर्ट दर्ज करने की गुहार लगाई.

हालांकि मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) द्वारा यह कहते हुए अर्जी खारिज कर दी गई कि मामले में काफी समय बीत गया है और पूरे मामले में अंतिम रिपोर्ट भी लगाई जा चुकी है.

एजाज खां ने बताया कि इसके बाद उन्होंने जिला जज की अदालत में रिवीजन अर्जी दाखिल की और तर्क दिया कि तत्कालीन जिलाधिकारी अमित घोष ने भी पूरे मामले की जांच अपर जिलाधिकारी से कराई थी, उसमें भी मामला संदिग्ध पाया गया था, ऐसे में अपर जिला जज सौरभ द्विवेदी ने रिवीजन अर्जी स्वीकार करते हुए सीजेएम आभा पाल की अदालत को पुन: सुनवाई का आदेश दिया.

उन्होंने बताया कि सीजेएम आभा पाल ने पिछले 28 जनवरी को 18 पुलिसकर्मियों पर धारा 302/34 (एक राय होकर हत्या करने) के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है और इसकी प्रति उन्हें (अधिवक्ता) शुक्रवार को प्राप्त हुई.

आदेश में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार, अपर पुलिस अधीक्षक माता प्रसाद, क्षेत्राधिकारी (तिलहर) मुन्नू लाल, क्षेत्राधिकारी (जलालाबाद) जयकरण सिंह भदौरिया, क्षेत्राधिकारी (सदर) आरके सिंह (सभी तत्कालीन अधिकारी) समेत 18 पुलिसकर्मियों पर हत्या की प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए गए थे.

उल्लेखनीय है कि यह मामला उस दौर का है, जब शाहजहांपुर जिले की तहसील जलालाबाद में दस्यु कल्लू, नज्जू गिरोह, नरेश धीमर समेत कई गिरोह अपना आतंक मचाए हुए थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)