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गणतंत्र दिवस हिंसा के 17 मामले वापस लेने के लिए उपराज्यपाल को अनुरोध भेजा: दिल्ली कमिश्नर

नवंबर 2021 में केंद्र सरकार ने दिल्ली की सीमाओं पर कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ एक साल से अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे किसानों पर दर्ज मामलों को वापस लेने पर सहमति व्यक्त की थी. दिल्ली पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना ने बताया कि 26 जनवरी 2021 को हुई हिंसा से जुड़े मामलों को वापस लेने का औपचारिक अनुरोध उपराज्यपाल को भेजा गया है.

2021 में गणतंत्र दिवस के दिन नई दिल्ली के लाल किले में किसान पुलिस द्वारा लगाए बैरिकेड्स को हटाते हुए. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: दिल्ली के पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना ने बृहस्पतिवार को कहा कि उपराज्यपाल अनिल बैजल को पिछले साल गणतंत्र दिवस हिंसा के सिलसिले में दर्ज 17 मामलों को वापस लेने के लिए औपचारिक अनुरोध भेजा गया है.

केंद्र ने दिल्ली की सीमाओं और अन्य विरोध स्थलों पर एक साल से अधिक समय से विरोध कर रहे किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने पर सहमति व्यक्त की थी जिसे अब दो महीने से अधिक समय हो चुका है. विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस लिए जाने तथा अन्य मांगें माने जाने के बाद किसानों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया था.

दिल्ली पुलिस की वार्षिक बैठक को संबोधित करते हुए आयुक्त राकेश अस्थाना ने हिंसा के संबंध में दर्ज मामलों की स्थिति के बारे में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि बल द्वारा उपराज्यपाल को 26 जनवरी, 2021 के बाद दर्ज 17 मामलों को वापस लेने का अनुरोध भेजा गया है.

उन्होंने कहा, ‘हमने कुछ मामलों को वापस लेने के लिए अनुरोध भेजा है. अन्य मामलों में जांच लंबित है क्योंकि कई लोगों की पहचान नहीं हो पाई है. हम मामलों में आरोपपत्र दाखिल करने की कोशिश कर रहे हैं. जिन मामलों में आरोपपत्र दायर किया गया है, हम उनमें त्वरित सुनवाई की उम्मीद कर रहे हैं.’

दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, पिछले साल हुई इस हिंसा के सिलसिले में लगभग 160 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से 20 को लाल किले पर हुई हिंसा के लिए गिरफ्तार किया गया था. इसके अलावा 54 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 16 अपराध शाखा के पास हैं.

पिछले साल मई में दिल्ली पुलिस ने अभिनेता-कार्यकर्ता दीप सिद्धू और 15 अन्य के खिलाफ 3,224 पन्नों का पहला आरोप पत्र दायर किया था. सिद्धू की बीते 15 फरवरी को एक हादसे में मौत हो गई थी.

अधिकारियों ने कहा, ‘अपराध शाखा, जिसे गणतंत्र दिवस हिंसा की जांच का काम सौंपा गया था, ने पिछले साल 17 जून को सिद्धू और अन्य के खिलाफ पूरक आरोपपत्र भी दायर किया था.’

वहीं, जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि के खिलाफ ‘टूलकिट’ मामले की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर अस्थाना ने मीडिया से कहा कि जांच लंबित है.

उन्होंने कहा, ‘हमने संदिग्ध लोगों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जूम,वॉट्सऐप, गूगल और इंस्टाग्राम को कई अनुरोध भेजे हैं. हम किसानों के प्रदर्शन से जुड़े पैसों के लेन-देन की भी जांच कर रहे हैं.’

गौरतलब है कि अक्टूबर 2021 में इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया था कि रवि के खिलाफ दिल्ली पुलिस कोई भी ठोस निष्कर्ष नहीं निकाल पाई है, जिसके चलते इस केस में क्लोजर रिपोर्ट फाइल किए जाने की संभावना है.

अख़बार ने सूत्रों के हवाले से बताया था कि रवि के जमानत पर रिहा होने के बाद जांच अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की थी, लेकिन 26 जनवरी की हिंसा को लेकर ‘आपराधिक साजिश’ के संदर्भ में उन्हें कुछ नहीं मिला. मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पुलिस चार्जशीट फाइल करने की स्थिति में नहीं, इसलिए वे क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर सकते हैं.

मालूम हो कि दिल्ली पुलिस ने दिशा रवि को जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग द्वारा साझा किए गए किसानों के आंदोलन का समर्थन करने वाले टूलकिट को साझा करने में कथित भूमिका के चलते 14 फरवरी 2021 को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया था. उन पर 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के संबंध में राजद्रोह तथा आपराधिक साजिश की धाराएं लगाई गई थीं.

पुलिस ने दावा किया था कि 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के दौरान राजधानी दिल्ली में हुई हिंसा समेत किसान आंदोलन का पूरा घटनाक्रम ट्विटर पर साझा किए गए टूलकिट में बताई गई कथित योजना से मिलता-जुलता है.

इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि इस ‘टूलकिट’ में भारत में अस्थिरता फैलाने को लेकर साजिश की योजना थी. पुलिस ने दावा किया था कि इसका संबंध ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ (पीजेएफ) के खालिस्तान समर्थक कार्यकर्ताओं से है.

गिरफ्तारी के दस दिन बाद दिशा रवि को जमानत मिली थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)