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यूक्रेन के खारकीव शहर में रूसी सेना की गोलाबारी में भारतीय छात्र की मौत

मृतक छात्र की पहचान कर्नाटक के हावेरी ज़िले के रहने वाले 20 वर्षीय नवीन शेखरप्पा ज्ञानगौदर के रूप में हुई है. वह खारकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में चौथे वर्ष के मेडिकल छात्र थे. उनके ​पिता ने आरोप लगाया कि वहां फंसे छात्रों से भारतीय दूतावास से किसी ने संपर्क नहीं किया. भारतीय दूतावास ने भारतीयों को तत्काल राजधानी कीव छोड़ने की सलाह दी. रूस ने यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खारकीव पर की बमबारी, राजधानी पर बढ़ा ख़तरा. अमेरिका ने जासूसी के आरोप में 12 रूसी राजनयिकों को निष्कासित करने की घोषणा की.

नवीन शेखरप्पा ज्ञानगौदर. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली/हावेरी/मुंबई/कीव/संयुक्त राष्ट्र/मॉस्को: युद्ध प्रभावित यूक्रेन के खारकीव शहर में मंगलवार सुबह गोलाबारी में एक भारतीय छात्र की मौत हो गई, जो कर्नाटक का निवासी था. रूस के हमले के बाद यूक्रेन में जारी युद्ध में यह किसी भारतीय व्यक्ति की मौत का पहला मामला है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय छात्र की पहचान कर्नाटक के 20 वर्षीय नवीन शेखरप्पा ज्ञानगौदर के रूप में हुई है. वह खारकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में चौथे वर्ष के मेडिकल छात्र थे.

नवीन के हॉस्टल में रहने वाले श्रीधरन गोपालकृष्णन ने कहा, यूक्रेन के समयानुसार आज सुबह करीब 10:30 बजे नवीन की गोली मारकर हत्या कर दी गई. वह एक किराना दुकान के सामने कतार में खड़े थे, तभी रूसी सेना ने लोगों पर गोलियां चला दीं. उनके शव के बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है. हम में से कोई भी अस्पताल जाने में सक्षम नहीं था, शायद शव को अभी वहां रखा गया है.

विदेश मंत्रालय ने ट्वीट किया, ‘अत्यंत दुख के साथ हम पुष्टि करते हैं कि आज सुबह खारकीव में गोलाबारी में एक भारतीय छात्र की जान चली गई.’

मंत्रालय ने कहा कि वह छात्र के परिवार के संपर्क में है. इसने कहा, ‘हम परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं.’

एक अन्य ट्वीट में कहा गया, ‘विदेश सचिव रूस और यूक्रेन के राजदूतों से भारतीय नागरिकों के लिए तत्काल सुरक्षित मार्ग की हमारी मांग को दोहराने के लिए बुला रहे हैं, जो अभी भी खारकीव और अन्य संघर्ष क्षेत्रों में शहरों में हैं. इसी तरह की कार्रवाई रूस और यूक्रेन में हमारे राजदूतों द्वारा भी की जा रही है.’

इस संबंध में एक अधिकारी ने बताया कि छात्र कर्नाटक के हावेरी जिले के चलगेरी का निवासी था.

कर्नाटक राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आयुक्त डॉ. मनोज राजन ने कहा कि गोलाबारी में हावेरी जिले के चलगेरी के मूल निवासी नवीन शेखरप्पा ज्ञानगौदर की मौत हो गई.

कई भारतीय अभी भी खारकीव में फंसे हुए हैं, जहां रूस ने एक बड़ा सैन्य आक्रमण शुरू किया है.

विदेश मंत्रालय ने कहा कि विदेश सचिव रूस और यूक्रेन के राजदूतों से बात कर रहे हैं, जिसमें वह उन भारतीय नागरिकों के लिए ‘तत्काल सुरक्षित मार्ग’ की भारत की मांग को दोहराएंगे, जो अभी भी खारकीव और अन्य शहरों में संघर्ष क्षेत्रों में फंसे हैं.

इसने कहा, ‘इसी तरह की कार्रवाई रूस और यूक्रेन में हमारे राजदूतों द्वारा भी की जा रही है.’

खारकीव शहर में यूक्रेनी सैनिकों और रूसी सेना के बीच भीषण लड़ाई हो रही है.

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि खारकीव में बिगड़ती स्थिति गंभीर चिंता का विषय है और उस शहर में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है.

उन्होंने कहा कि भारत पहले ही रूसी और यूक्रेनी दूतावासों के साथ खारकीव और संघर्ष वाले अन्य शहरों से छात्रों सहित भारतीय नागरिकों के लिए सुरक्षित मार्ग की आवश्यकता का मुद्दा उठा चुका है.

इस संबंध में एक सूत्र ने कहा, ‘24 फरवरी को इस संघर्ष की शुरुआत के बाद से रूस और यूक्रेन से यह मांग बार-बार की जाती रही है. नई दिल्ली में उनके राजदूतों के साथ-साथ उनकी राजधानियों में भी यह मांग की गई है.’

सूत्रों ने कहा कि भारत सरकार की ओर से भारतीयों को निकालने की तैयारी पिछले कुछ समय से की जा रही है.

सूत्र ने कहा, ‘यूक्रेनी सीमा के पास रूसी शहर बेलगोरोद में एक भारतीय टीम को तैनात किया गया है. हालांकि, खारकीव और आसपास के शहरों में संघर्ष की स्थिति एक बाधा बन कर रही है.’

उन्होंने कहा, ‘इसलिए, यह जरूरी है कि रूस और यूक्रेन सुरक्षित मार्ग की हमारी आवश्यकता पर तत्काल प्रतिक्रिया दें.’

सूत्रों ने कहा कि जिन जगहों पर संघर्ष से आवाजाही के लिए खतरा नहीं है, वहां भारतीय अधिकारी नागरिकों को निकालने में सफल रहे हैं.

उन्होंने कहा कि भारत यूक्रेन में फंसे भारतीय नागरिकों की वापसी सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास करना जारी रखेगा.

यूक्रेन से भारतीयों की सुरक्षित निकासी के प्रयासों के तहत केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी हंगरी जा रहे हैं, ज्योतिरादित्य सिंधिया रोमानिया और मोल्दोवा में निकासी प्रक्रिया की देखरेख करेंगे. वहीं, किरेन रिजिजू स्लोवाकिया की यात्रा कर रहे हैं और जनरल (अवकाशप्राप्त) वीके सिंह पोलैंड से लगते पारगमन बिंदुओं पर निकासी प्रक्रिया की देखरेख करेंगे.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेनी अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि जब एक विशाल रूसी सैन्य काफिला राजधानी कीव के पास पहुंचा तो रूसी रॉकेट हमले में 70 से अधिक यूक्रेनी सैनिक और ‘बर्बर’ गोलाबारी में दर्जनों नागरिक मारे गए.

कीव में भारतीय दूतावास ने मंगलवार को जारी एक एडवाइजरी में भारतीयों से ‘किसी भी उपलब्ध साधन’ के माध्यम से कीव को तत्काल छोड़ने के लिए कहा है. यह एडवाइजरी तब आई जब रूस ने यूक्रेन पर अपने हमले को और तेज कर दिया. यहां तक ​​कि लड़ाई को रोकने के उद्देश्य से बातचीत जारी रखने के लिए केवल एक समझौता हुआ.

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि यूक्रेन में रूसी आक्रमण शुरू होने के बाद से सात बच्चों सहित कम से कम 102 नागरिकों की मौत हो गई है. इस बीच संकटग्रस्त यूक्रेन यूरोपीय संघ में शामिल होने के लिए आवेदन करके पश्चिम के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए आगे बढ़ा, जो अभी के लिए एक बड़ा प्रतीकात्मक कदम है.

दूतावास ने खारकीव में फंसे छात्रों से संपर्क नहीं किया: मारे गए छात्र के पिता का आरोप

रूस के हमले के बीच यूक्रेन में गोलाबारी में मारे गए कर्नाटक के छात्र के पिता ज्ञानगौदर ने मंगलवार को आरोप लगाया कि यूक्रेन के खारकीव में फंसे भारत के छात्रों से भारतीय दूतावास से किसी ने संपर्क नहीं किया.

पीड़ित नवीन शेखरप्पा ज्ञानगौदर के परिवार के सदस्यों ने कहा कि नवीन खारकीव मेडिकल कॉलेज में चौथे वर्ष का छात्र था.

उसके चाचा उज्जनगौड़ा ने दावा किया कि नवीन कर्नाटक के अन्य छात्रों के साथ खारकीव के एक बंकर में फंसे हुए थे. वह सुबह में मुद्रा बदलवाने और खाने का सामान लेने गए थे तभी गोलाबारी की चपेट में आ गया और उनकी मौत हो गई.

चालगेरी स्थित पीड़ित के घर पर उसकी मौत की खबर के बाद से मातम पसरा है और बड़ी संख्या में लोग उसके परिवार को दिलासा देने के लिए पहुंच रहे हैं.

उज्जनगौड़ा ने कहा कि मंगलवार को ही उसने अपने पिता से फोन पर बातचीत की थी और बताया था कि बंकर में खाने-पीने को कुछ नहीं है.

इस त्रासदी का पता चलने पर मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने ज्ञानगौदर को फोन किया और अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं.

बोम्मई ने ज्ञानगौदर को आश्वस्त किया कि वह उनके बेटे की पार्थिव देह को भारत वापस लाने के लिए हरसंभव कोशिश करेंगे. मुख्यमंत्री ने उन्हें यह भी बताया कि वह विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के संपर्क में हैं.

शोक संतप्त पिता ने बोम्मई से कहा कि नवीन ने उन्हें (मंगलवार) सुबह में फोन बात की थी. ज्ञानगौदर ने बताया कि नवीन रोज़ाना दो-तीन बार उन्हें फोन करते थे.

पूर्वी यूक्रेन में भारतीय छात्र मुश्किल स्थिति में हैं : भारत लौटे छात्र

रूस के आक्रमण के बाद यूक्रेन के पश्चिमी हिस्सों में फंस गए भारतीय छात्रों ने देश लौटने के बाद अपने अनुभव साझा किए और पूर्वी यूक्रेन में फंसे छात्रों की मदद की गुहार लगाई.

यूक्रेन से भारत लौटे छात्र. (फोटो: पीटीआई)

एअर इंडिया एक्सप्रेस का एक विमान यूक्रेन में फंसे 182 भारतीय को रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट से लेकर मंगलवार सुबह मुंबई पहुंचा.

इनमें से एक निशी मल्कानी ने मुंबई हवाई अड्डे पर पत्रकारों से कहा कि वह पश्चिम यूक्रेन स्थित एक विश्वविद्यालय की छात्रा हैं, जहां स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर है.

उन्होंने कहा, ‘हम कई दिन तक अपने हॉस्टल में छुपे थे और फिर पश्चिमी सीमा पर पहुंचे. यूक्रेन के पूर्वी हिस्सों में शैक्षणिक संस्थानों में हजारों छात्रों को गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि वहां से सड़क पर निकलना बेहद मुश्किल है.’

उन्होंने कहा, ‘उन छात्रों की सुरक्षित वापसी के लिए और प्रयास किए जाने चाहिए.’

यूक्रेन में पिछले कुछ दिनों का अनुभव पूछने पर उन्होंने कहा, ‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि जीवन में कभी ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा. विश्वविद्यालय प्रशासन ने हमसे चार दिन तक हॉस्टल में रहने को कहा था.’

मल्कानी ने कहा, ‘हम पश्चिमी सीमा के करीब थे, इसलिए पड़ोसी देश रोमानिया पहुंच पाए. भारतीय दूतावास अधिकारियों ने बाकी मदद की और हम घर वापस लौट पाए.’

उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ दिनों से उनके विश्वविद्यालय परिसर में ‘कुछ आतंकवादी’ थे, लेकिन उन्होंने छात्रों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया.

यूक्रेन से मंगलवार को लौटी एक अन्य छात्रा पूर्वा पाटिल ने सुरक्षित वापसी के बाद भगवान का शुक्रिया अदा किया.

उन्होंने कहा कि वह पश्चिमी यूक्रेन के एक संस्थान में पढ़ाई कर रही थीं. उन्होंने कहा, ‘मैं बहुत डर गई थी, भगवान की दया से मैं सुरक्षित घर लौट पाई. यह मेरे लिए बड़ी बात है.’

उन्होंने बताया कि सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने में भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने उनकी काफी मदद की.

पाटिल ने कहा, ‘पहले हमें छात्रावास में रहने को कहा गया फिर बंकर में हमने पनाह ली. वहां काफी ठंड थी तापमान दो डिग्री सेल्सियस के आसपास था. रोमानिया सीमा तक पहुंचने के लिए हमें लगभग 10 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा.’

केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री नारायण राणे ने मुंबई हवाई अड्डे पर छात्रों का स्वागत किया. उन्होंने कहा, ‘182 छात्र आज मुंबई लौटे हैं. केंद्र सरकार के ‘ऑपरेशन गंगा’ के तहत संचालित यह पांचवीं उड़ान थी.’

रूस के यूक्रेन पर हमला करने के बाद भारत युद्धग्रस्त देश में फंसे अपने नागरिकों को 27 फरवरी से रोमानिया और हंगरी के रास्ते स्वदेश ला रहा है. रोमानिया और हंगरी यूक्रेन के पड़ोसी देश हैं.

यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने भारतीयों को तत्काल कीव छोड़ने की सलाह दी

यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने मंगलवार को छात्रों सहित सभी भारतीयों को उपलब्ध ट्रेन या किसी अन्य माध्यम से आज तत्काल कीव छोड़ने का सुझाव दिया है.

पंजाब के अ​मृतसर में डिप्टी कमिश्नर गुरप्रीत सिंह खैरा से मिलने पहुंचे यूक्रेन में फंसे छात्रों के परिजन. (फोटो: पीटीआई)

दूतावास ने ट्वीट किया, ‘कीव में भारतीयों के लिए परामर्श… छात्रों सहित सभी भारतीयों को सलाह दी जाती है कि वे उपलब्ध ट्रेन या किसी अन्य उपलब्ध माध्यम के जरिये आज तत्काल कीव छोड़ दें.’

यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद युद्धग्रस्त देश का हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण भारत वहां फंसे अपने नागरिकों को रोमानिया, हंगरी, पोलैंड और स्लोवाकिया से लगी उसकी (यूक्रेन की) सीमा चौकियों के जरिये वहां से बाहर निकाल रहा है.

सोमवार को यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने छात्रों को राजधानी कीव में रेलवे स्टेशन पहुंचने की सलाह दी थी, ताकि वे युद्धग्रस्त देश के पश्चिमी हिस्सों तक आगे की यात्रा कर सकें.

कीव में स्थित भारतीय दूतावास ने कहा कि यूक्रेन की राजधानी में सप्ताहांत कर्फ्यू हटा लिया गया है और भारतीय छात्र शहर से बाहर निकलने के लिए रेलवे स्टेशन जा सकते हैं.

दूतावास ने ट्वीट किया, ‘कीव में सप्ताहांत कर्फ्यू हटा लिया गया है. सभी छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे पश्चिमी भागों तक जाने के लिए रेलवे स्टेशन जाएं. यूक्रेन रेलवे लोगों की निकासी के लिए विशेष ट्रेन चला रहा है.’

वहीं, सोमवार को विदेश मंत्रालय ने कहा था कि यूक्रेन में जमीनी हालात बहुत मुश्किल और जटिल होने के बावजूद वह युद्धग्रस्त देश से अपने हर नागरिक को स्वदेश वापस लाएगा.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, ‘भारत, यूक्रेन से अपने हर नागरिक को वापस लेकर आएगा. ऐसे में (वहां पर फंसे भारतीय) घबराएं नहीं, विदेश मंत्रालय की टीम से संपर्क करें तथा सीधे सीमा पर नहीं आएं.’

गौरतलब है कि भारत ने युद्धग्रस्त यूक्रेन से भारतीयों को वापस निकालने के लिए ‘ऑपरेशन गंगा’ अभियान शुरू किया है.

यूक्रेन से अपने नागरिकों को वापस लाने के लिए सरकार सभी पक्षों के संपर्क में हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच देशों से अभियान के समन्वय एवं देखरेख के लिए चार वरिष्ठ मंत्रियों को दायित्व सौंपा हैं.

इसके तहत, केंद्रीय मंत्री वीके सिंह पोलैंड में, किरेन रिजिजू स्लोवाकिया में, हरदीप पुरी हंगरी में जबकि ज्योतिरादित्य सिंधिया रोमानिया और माल्डोवा में समन्वय करेंगे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा था कि यूक्रेन में सभी भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरा सरकारी तंत्र 24 घंटे काम कर रहा है.

सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय वायु सेना से निकासी अभियान का हिस्सा बनने को कहा है.

जयशंकर ने यूक्रेन से भारतीयों को वापस लाने के अभियान पर सांसदों को पत्र लिखा

यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद वहां फंसे भारतीय नागरिकों के परिवारों की ओर से कई सांसदों को फोन कॉल मिलने के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सांसदों से ऐसी किसी भी ‘चिंता’ को लेकर उनके कार्यालय से सीधे संपर्क करने और ऐसे लोगों की सूचना साझा करने को कहा है.

विदेश मंत्री ने सोमवार को सभी सांसदों को भेजे पत्र में कहा, ‘कृपया आश्चस्त रहें कि हम सभी तरह की पूछताछ और जानकारी को लेकर संज्ञान ले रहे हैं. इन सभी पर विदेश मंत्रालय की टीम के प्रतिनिधि सतत संज्ञान ले रहे हैं.’

उन्होंने संसदों को ईमेल आईडी और वॉट्सऐप नंबर भी साझा किया जिस पर वे ब्यौरा भेज सकते हैं.

रूस ने यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खारकीव पर की बमबारी, राजधानी पर बढ़ा खतरा

रूसी सेनाओं ने यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खारकीव पर सोमवार को बमबारी की. इसके साथ ही रूसी सेना यूक्रेन की राजधानी कीव के और करीब पहुंच गई है और करीब 40 मील के काफिले में रूस के टैंक और अन्य सैन्य वाहन कूच कर रहे हैं.

कीव के केंद्रीय हिस्से में तैनात देश के नेशनल गॉर्ड के सुरक्षाकर्मी. (फोटो: रॉयटर्स)

वहीं, युद्ध को रोकने के लिए चल रही वार्ता केवल आगे की दौर की वार्ता पर सहमति बनने के साथ ही समाप्त हो गई है.

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि बमबारी में वृद्धि केवल उन पर दबाव बनाने के उद्देश्य से की गई है. उन्होंने सोमवार को देर रात जारी वीडियो संदेश में कहा, ‘रूस इन आसान तरीकों से (यूक्रेन पर) दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है.’

जेलेंस्की ने हालांकि दिन में दोनों पक्ष के बीच हुई लंबी वार्ता की जानकारी नहीं दी, लेकिन उन्होंने कहा कि कीव कोई रियायत देने को तैयार नहीं है, वह भी तब जब एक ओर रॉकेट और तोप से हमले किए जा रहे हैं.

उल्लेखनीय है कि गत पांच दिन से जारी युद्ध से रूस अलग-थलग पड़ता जा रहा है, जबकि यूक्रेन से भी उसे अप्रत्याशित रूप से प्रतिरोध का सामना करना पड़ा रहा है. घरेलू स्तर पर रूस को आर्थिक रूप से भी झटका लगा है.

बेलारूस की सीमा पर सोमवार को जब रूस और यूक्रेन के बीच वार्ता हो रही थी, तब कीव में धमाके सुनाई दे रहे थे और रूसी सैनिक 30 लाख की आबादी वाली यूक्रेन की राजधानी कीव की ओर बढ़ रहे थे.

मैक्सर टेक्नोलॉजी द्वारा उपलब्ध कराई गईं उपग्रह तस्वीरों के मुताबिक बख्तरबंद गाड़ियों, टैंक, तोप और अन्य सहायक वाहनों का काफिला शहर से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर हैं और इसकी लंबाई करीब 40 मील है.

जेलेंस्की ने कहा, रूसियों के लिए कीव ‘मुख्य लक्ष्य’ है. उन्होंने कहा, ‘वे हमारे देश की राष्ट्रीयता को खंडित करना चाहते हैं और इसलिए राजधानी लगातार खतरे में है.’

यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े और करीब 15 लाख आबादी वाले शहर खारकीव से आए वीडियो में दिख रहा है कि रिहायशी इलाकों में बमबारी हो रही है. जोरदार धमाकों से लगातार अपार्टमेंट इमारतों में कंपन हो रहा है और आसमान में आग और धुएं का गुबार दिखाई दे रहा है.

खारकीव के अधिकारियों ने बताया कि हमले में सात लोगों की मौत हुई है और दर्जनों अन्य घायल हुए हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि हताहतों की संख्या बढ़ सकती है.

वहीं, रूसी सेना ने घरों, स्कूलों और अस्पतालों पर बमबारी की कई तस्वीरें सामने आने के बावजूद रिहायशी इलाकों को निशाना बनाने से इंकार किया है.

यूक्रेन के अन्य शहरों और कस्बों में भी लड़ाई चल रही है. जेलेंस्की के सलाहकार ओलेक्सी अरेस्टोविच ने बताया कि रणनीतिक रूप से अहम और अजोव सागर के किनारे स्थित बंदरगाह शहर मारियुपोल की स्थिति ‘अधर में’ है. पूर्वी शहर समी के तेल डिपो पर बमबारी की भी खबर है.

रूस की गोलाबारी में 70 यूक्रेनी सैनिकों की मौत

रूसी तोपों द्वारा खारकीव और कीव के बीच सुमी प्रांत के ओखतिरका में एक सैन्य अड्डे पर किए गए हमले में 70 से अधिक यूक्रेनी सैनिकों की मौत हो गई है.

सुमी प्रांत के गवर्नर दमित्रो झिवित्स्की ने ‘टेलीग्राम’ पर यह जानकारी दी. उन्होंने जली हुई चार मंजिला इमारत और मलबे में लोगों की तलाश करते बचावकर्मियों की तस्वीरें पोस्ट कीं.

बाद में उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट पर लिखा कि रविवार को युद्ध के दौरान कई रूसी सैनिक और कई स्थानीय नागरिकों की भी मौत हो गई. इस रिपोर्ट की तत्काल पुष्टि नहीं हो पाई है.

इस बीच तीन बड़े हॉलीवुड स्टूडियो ने ‘द बैटमैन’ समेत रूस के सभी थियेटर में अपनी फिल्मों की रिलीज रोक दी है. ‘वार्नर ब्रदर्स’, ‘द वॉल्ट डिजनी कंपनी’ और ‘सोनी पिक्चर्स’ ने सोमवार को कहा कि वे रूस में अपनी फिल्मों की रिलीज़ ‘‘रोक’’ रहे हैं.

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने मंगलवार को कहा कि उनका देश रूस का मुकाबला करने के लिए यूक्रेन को पांच करोड़ डॉलर की मिसाइल, हथियार और अन्य सैन्य उपकरण मुहैया कराएगा.

मॉरिसन ने कहा, ‘इन हथियारों में से अधिकतर घातक श्रेणी में आते हैं.’

इससे पहले मॉरिसन ने यूक्रेन को पिछले सप्ताह केवल गैर-घातक सैन्य उपकरण मुहैया कराने का ही वादा किया था.

अमेरिका में यूक्रेन के राजदूत ओकसाना मारकारोवा ने अमेरिकी सीनेटरों से कहा कि उनके देश को और सैन्य अधिकारों की आवश्यकता है. अमेरिकी संसद संकट के दौरान यूक्रेन की मदद करने के लिए पूरक निधि मुहैया कराने की तैयारी कर रही है. इसके लिए ह्वाइट हाउस 6.4 अरब डॉलर की सैन्य एवं मानवीय सहायता चाहता है.

अमेरिकी खुफिया समिति के अध्यक्ष एवं सांसद मार्क वार्नर ने कहा, ‘उन्हें (यूक्रेन को) और हथियार चाहिए.’

अमेरिका ने जासूसी के आरोप में 12 रूसी राजनयिकों को निष्कासित करने की घोषणा की

अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र में रूसी मिशन के 12 सदस्यों को जासूसी में शामिल ‘खुफिया अधिकारी’ होने के आरोप में सोमवार को निष्कासित करने की घोषणा की.

न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय. (फोटो: रॉयटर्स)

यूक्रेन पर रूस के हमले के पांचवें दिन अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने यह कदम उठाया है. रूस के हमले की अमेरिका और कई अन्य देशों ने निंदा की है.

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी मिशन ने एक बयान में कहा कि रूसी राजनयिकों ने ‘जासूसी गतिविधियों में शामिल होकर अमेरिका में रहने के अपने अधिकार का दुरुपयोग किया है, जो हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नुकसानदेह है.’

मिशन ने कहा कि निष्कासन की प्रक्रिया ‘कई महीनों से जारी’ थी और 193 सदस्यीय विश्व निकाय के मेजबान के रूप में संयुक्त राष्ट्र के साथ अमेरिका के समझौते के अनुरूप है.

इस मामले में रूस के राजदूत वासिली नेबेंजिया से उनकी प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) से कहा कि रूसी अधिकारी जासूसी में शामिल थे.

उन्होंने कहा, ‘जब भी वे किसी व्यक्ति को अवांछित घोषित करते हैं, तो यही बहाना बनाते हैं. वे यही एकमात्र स्पष्टीकरण देते हैं.’

यह पूछे जाने पर कि क्या रूस इसे लेकर जवाबी कार्रवाई करेगा, उन्होंने कहा, ‘यह मुझे नहीं तय करना है, लेकिन राजनयिक प्रक्रिया में यह आम बात है.’’

नेबेंजिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से सोमवार को कहा कि उन्हें ‘रूसी मिशन के खिलाफ मेजबान देश के एक अन्य शत्रुतापूर्ण कदम’ के बारे में अभी सूचना मिली है. उन्होंने इस कदम को अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के बीच हुए समझौते और राजनयिक संबंधों को नियंत्रित करने वाली वियना संधि का ‘गंभीर उल्लंघन’ बताया.

नेबेंजिया के इस बयान में बाद अमेरिकी उपराजदूत रिचर्ड मिल्स ने निष्कासन संबंधी फैसले की पुष्टि की.

रूस की कई समाचार वेबसाइट हैक, कुछ पर रूस ने खुद लगाई रोक

रूस की कई समाचार वेबसाइट सोमवार को हैक हो गईं. इन वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर एक संदेश आने लगा, जिसमें यूक्रेन पर रूस के आक्रमण की निंदा की गई थी.

वहीं, युद्ध को लेकर दिखाई जा रहीं खबरों से नाखुश रूस ने कुछ मीडिया मंचों पर रोक भी लगा दी है.

मीडिया में ऐसा हस्तक्षेप रूस की आम जनता के बीच बढ़ती युद्ध-विरोधी भावना का संकेत है. हालांकि, वेबसाइट हैक करने के पीछे किसका हाथ है, यह अभी तक पता नहीं चल पाया है. साथ ही, यह असहमति को दबाने के लिए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सरकार के प्रयासों का प्रमाण भी है.

रूस के संचार मंत्रालय और मीडिया निगरानी समूह ‘रोसकोम्नाडज़ोर’ ने युद्ध को लेकर दिखाई जा रहीं खबरों के मद्देनजर कई रूसी और यूक्रेनी मीडिया संगठनों पर रोक लगा दी है.

क्रेमलिन की सार्वजनिक रूप से आलोचना करने वाली रूसी पत्रिका ‘द न्यू टाइम्स’ पर यूक्रेन में रूसी सैन्य हताहतों के बारे में विवरण देने के कारण रोक लगा दी गई, जिसका रूसी रक्षा मंत्रालय ने अभी तक खुलासा नहीं किया है.

रूस में पिछले चार दिनों से आक्रमण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जबकि लगभग 10 लाख लोगों ने युद्ध को समाप्त करने की मांग करते हुए एक ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं.

रूस में इन प्रदर्शनों में शामिल कई लोगों को हिरासत में लिया गया है. वहीं, अधिकारियों ने सोशल मीडिया मंच पर पाबंदियां लगाई हैं और स्वतंत्र समाचार साइट को बंद करने की धमकी दी है.

स्वतंत्र समाचार साइट ‘मेडुज़ा’ ने हैक की गई कुछ वेबसाइट के मुख्य पृष्ठों पर दिख रहे संदेश साझा किए.

इस संदेश में लिखा है, ‘प्रिय नागरिकों. हम आपसे निवेदन करते हैं कि यह पागलपन बंद करें और अपने बेटों और पति को मरने के लिए न भेजें. कुछ वर्ष में हम उत्तर कोरिया की तरह हो जाएंगे. इससे हमें क्या फायदा है? क्या पुतिन का नाम इतिहास में दर्ज होगा? यह युद्ध हमारे लिए नहीं है, इसे रोकें.’

हैक की गई कई वेबसाइट को एक घंटे में बहाल कर लिया गया. सरकारी समाचार एजेंसी ‘तास’ ने कहा, ‘‘ इस संदेश में वास्तविकता से जुड़ा कुछ नहीं था.’’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)