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अदालत ने फिलिस्तीन में मृत मिले भारतीय राजनयिक के शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम का आदेश दिया

फिलिस्तीन के रामल्ला में मृत मिले भारतीय राजनयिक मुकुल आर्य के शव का फ़िर से पोस्टमॉर्टम करने का आग्रह करने वाली उनकी मां की याचिका दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वीकार कर ली है. याचिका में कहा गया है कि राजनयिक की मौत अप्राकृतिक है.

मुकुल आर्य (फोटो साभारः ट्विटर)

नयी दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलिस्तीन के रामल्ला में भारतीय मिशन में हाल में मृत मिले भारतीय राजनयिक मुकुल आर्य के शव का फिर से पोस्टमॉर्टम करने का आग्रह करने वाली उनकी मां की याचिका गुरुवार को स्वीकार कर ली.

अदालत ने इसके साथ ही संबंधित प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करने का भी निर्देश दिया.

बता दें कि मुकुल आर्य फिलिस्तीन में भारत के प्रतिनिधि थे.

केंद्र ने जस्टिस रजनीश भटनागर को बताया कि विदेश मंत्रालय परिवार की मांग के अनुरूप अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में शव परीक्षण कराने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहा है.

केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता अनुराग अहलूवालिया ने कहा, ‘याचिकाकर्ता से अधिक हम चिंतित हैं और प्रशासन दोबारा पोस्टमॉर्टम का आग्रह करने वाली याचिका का विरोध नहीं कर रहा, क्योंकि मौत के पीछे कोई साजिश नहीं है.’

मुकुल आर्य की मां रोशनलता आर्य की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा, ‘राजनयिक की मौत अप्राकृतिक है.’

उन्होंने अदालत से यह अनुमति देने का आग्रह किया कि ऑटोप्सी के दौरान परिवार के सदस्यों या उनके प्रतिनिधि को वहां उपस्थित रहने दिया जाए.

जस्टिस भटनागर ने कहा कि वह नियमों के अनुरूप शव परीक्षण करने की अनुमति देंगे और इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाए.

न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता से कहा, ‘वह एक भारतीय अधिकारी थे. हर कोई चिंतित है.’

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि इस चरण पर वह संदिग्ध परिस्थितियों में आर्या की मौत की जांच के लिए आयोग के गठन की मांग करने के अन्य आग्रह पर दबाव नहीं डाल रहे.

अदालत ने कहा, ‘पहले आग्रह (ऑटोप्सी की मांग) को मंजूरी दी गई. पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी की जाएगी और उसे रिकॉर्ड में रखा जाएगा.’

वकील नितिन सालूजा के जरिये दायर की गई याचिका में 65 साल की याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि परिवार की मौजूदगी में उसके मृतक बेटे के दोबारा पोस्टमार्टम के लिए एम्स के डॉक्टरों की समिति का तुरंत गठन करने का निर्देश दिया जाए.

याचिका में कहा गया कि सात मार्च को फिलिस्तीन प्रशासन ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट जारी कर मौत की वजह म्योकार्डियल इनफारक्शन (Myocardial Infarction – एक तरह का दिल का दौरा) बताई.

याचिका में कहा गया, ‘मृतक फिटनेस को लेकर जुनूनी थे और परिवार की जानकारी के मुताबिक उनकी आर्टरी (धमनियों) में किसी तरह का ब्लॉकेज नहीं था, ऐसे में यह समझ से परे है कि मृतक को दिल का दौरा कैसे पड़ा, जिससे कथित तौर पर उनकी मौत हो गई.’

याचिका में कहा गया है, ‘आर्य (मृतक) के चालक के मुताबिक, वह छह मार्च को अपने कमरे में बेहोशी की अवस्था में मिले थे. उनका शरीर सूजा हुआ था और उनके कपड़े, चेहरा और कंबल उलटी से सना हुआ था.’

याचिका में कहा गया कि परिवार के रामल्ला पहुंचने तक कमरे की सफाई कर दी गई और सभी सबूतों को नष्ट कर दिया गया.

याचिका में कहा गया, ‘संदिग्ध परिस्थितियों में मौत को लेकर विवाद को सरकारी एजेंसियों के समक्ष उठाने के बाद भी उन्हें इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली.’

याचिका में कहा गया है कि परिवार को आर्य की मौत के बारे में केंद्र सरकार या अन्य अधिकारियों से कोई आधिकारिक पत्र नहीं मिला और ये चीजें संदेह बढ़ाती हैं.

याचिका में कहा गया, ‘पूरा देश मुकुल आर्य की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर गंभीर संदेह जता रहा है. इसे लेकर स्वतंत्र जांच की मांग की जा रही है. इस तरह यह उचित है कि एम्स के प्रतिष्ठित डॉक्टरो की एक टीम द्वारा मृतक की दूसरी ऑटोप्सी की जाए और मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए स्वतंत्र न्यायिक जांच की जाए.’

मालूम हो कि मुकुल आर्य (37) दिल्ली में विदेश मंत्रालय में डिप्लोमैट थे. पेरिस में यूनेस्को में भारत के स्थायी प्रतिनिधिमंडल में काम करने के अलावा काबुल और मॉस्को में भारत के दूतावासों में भी उन्होंने काम किया था.

फिलिस्तीन के रामल्ला में भारत के प्रतिनिधि कार्यालय की वेबसाइट के मुताबिक, मुकुल की शिक्षा दिल्ली में हुई. उन्होंने 2008 में विदेश सेवा में शामिल होने से पहले दिल्ली विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स की पढ़ाई की थी.

(समाचार एजेंसी पीटीआई से इनपुट के साथ)