राजनीति

उत्तर प्रदेश चुनाव: आधा फीसदी वोट भी नहीं पा सकी ओवैसी की एआईएमआईएम

असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमीन के अधिकतर उम्मीदवार 5,000 मतों के आंकड़े को भी पार नहीं कर सके. ओवैसी ने जनादेश स्वीकारते हुए कहा कि पार्टियां ईवीएम को दोष दे रहे हैं. ख़राबी ईवीएम में नहीं है, जो चिप लोगों के दिमाग में लगाई गई है, वह बड़ी भूमिका निभा रही है.

कन्नौज में हुई एक चुनावी सभा में असदुद्दीन ओवैसी. (फोटो साभार: ट्विटर/@aimim_national)

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमीन (एआईएमआईएम) के अधिकतर उम्मीदवार पांच हजार मतों के आंकडे को पार नहीं कर पाए हैं और राज्य के मतदाताओं ने उन्हें बुरी तरह नकार दिया है.

उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 विधानसभा सीटों में एआईएमआईएम को इस बार आधा फीसदी से भी कम मत मिले हैं.

चुनाव आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, आजमगढ़ से एआईएमआईएम के उम्मीदवार कमर कमाल को 5515, देवबंद सीट से उमैर मदनी 3500, जौनपुर से अभयराज को 6224, कानपुर कैंट से मुईनुद्दीन 1109, लखनऊ मध्य से सलमान को 621, मुरादाबाद से बक़ी रशीद को 2658, मेरठ से इमरान अहमद को 3036, मुरादाबाद ग्रामीण से मोहीद फरगनी को 2376, निजामाबाद से अब्दुररहमान अंसारी 6097, मुजफ्फरनगर से मोहम्मद इंतेज़ार को 3740, संडीला से मोहम्मद रफीक को 1452, टांडा से इरफान अहमद को 7431 वोट, सिराथू से शेर मोहम्मद को 863 तथा बहराइच से राशिद जमील को 2238 वोट प्राप्त हुए हैं.

चुनाव आयोग के अनुसार, राज्य में एआईएमआईएम को 0.49 फीसदी वोट प्राप्त हुए हैं.

एआईएमआईएम ने विधानसभा चुनाव में सौ उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारने का दावा किया था. ओवैसी ने अपने उम्मीदवार उन्ही सीटों पर उतारे थे जो मुस्लिम बाहुल्य थीं, लेकिन प्रदेश के मुसलमानों सहित विभिन्न मतदाताओं ने उन्हें बुरी तरह से नकार दिया.

पिछले विधानसभा चुनाव में ओवैसी की पार्टी ने 38 सीटों पर चुनाव लड़ा था और इनमें से 37 सीटों पर उसके उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी. तब उसे 0.24 फीसदी मत प्राप्त हुए थे.

इस लिहाज से देखने पर उसे दोगुने मत मिले हैं, लेकिन उसने पिछली बार की अपेक्षा ढाई गुना से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ा था.

हालांकि, चुनाव पूर्व पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी काफी सुर्खियों में रहे थे. मुख्य मुकाबले में शामिल रहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) पर वे लगातार हमले करते रहे.

अपने हमले में वे सत्ता में मुस्लिम भागीदारी का सवाल उठाते थे. सपा पर आरोप लगाते थे कि उसने मुसलमानों का वोट लेकर उसे छला है. चुनाव के दौरान ओवैसी और उनकी पार्टी पर विपक्ष की ओर से लगातार आरोप लगाए जाते रहे कि वे सपा का मुस्लिम वोट काटकर भाजपा को फायदे पहुंचाने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं. उन पर भाजपा की ‘बी’ टीम होने के आरोप लगते रहे.

हालांकि, चुनाव परिणाम बताते हैं कि मुस्लिम वोट ने ओवैसी पर भरोसा नहीं जताया, बावजूद इसके समाजवादी पार्टी सरकार नहीं बना सकी.

ओवैसी तब भी सुर्खियों में आए थे, जब यूपी के एक चुनावी दौरे के बाद वे दिल्ली जा रहे थे तो उनकी कार पर गोलियां चलाईं गईं.

कांग्रेस की तरह ही सुर्खियों में रहने के बावजूद भी एआईएमआईएम के प्रदर्शन में कोई सुधार नहीं हुआ. हालांकि, उम्मीद तो थी कि बिहार में सफलता का स्वाद चख चुके ओवैसी उत्तर प्रदेश में भी अपने कदम जमाते नज़र आएंगे.

हालांकि गौर करने की बात यह भी है कि चुनाव पूर्व द वायर से बातचीत में यूपी की राजनीति के जानकारों ने पहले ही कहा था कि यूपी का चुनाव भाजपा बनाम सपा के बीच दो ध्रुवीय हो गया है, जिसमें मतदाता किसी दूसरे विकल्प के बारे में विचार नहीं करेगा और मुस्लिम वोट एकमुश्त सपा की झोली में जाएगा. अब नतीजे भी इस बात की पुष्टि करते हैं.

बहरहाल, चुनावी नतीजों के बाद ओवैसी ने चुनाव परिणामों को ‘80 -20 की विजय’ करार देते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि देश के लोकतंत्र में इस तरह की परिस्थिति अगले कई वर्षों तक रहेगी.

ओवैसी की पार्टी द्वारा एक भी सीट न जीत पाने पर उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी जनादेश का सम्मान करती है और भविष्य में जनता का विश्वास जीतने के लिए प्रयास जारी रखेगी. पार्टी कड़ी मेहनत करेगी और अपनी खामियों को दूर करेगी. साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई की यूपी में एआईएमआईएम का भविष्य अच्छा होगा.

ओवैसी ने गुरुवार को कहा, ‘राजनीतिक दल अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को दोष दे रहे हैं. मैंने 2019 में भी कहा था कि खराबी ईवीएम में नहीं है. जो चिप लोगों के दिमाग में लगाई गई है, वह बड़ी भूमिका निभा रही है.’

उन्होंने कहा, ‘सफलता तो जरूर मिली है, लेकिन यह सफलता 80-20 की है.’ उनका प्रत्यक्ष तौर पर इशारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चुनाव के दौरान दिए गए ‘80-20’ के बयान की तरफ था.

योगी ने जनवरी में एक कार्यक्रम में कहा था कि उत्तर प्रदेश में ‘80 प्रतिशत बनाम 20 प्रतिशत’ के बीच मुकाबला दिखाई देगा. माना जा रहा था कि उनका इशारा राज्य की मुस्लिम आबादी की ओर था.

मुख्यमंत्री ने कहा था, ‘80 प्रतिशत समर्थक एक तरफ होंगे तो वहीं 20 प्रतिशत दूसरी तरफ होंगे. मेरा मानना है कि 80 प्रतिशत सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ेंगे तो वहीं 20 प्रतिशत ने हमेशा विरोध किया है और आगे भी करेंगे.’

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की कुल आबादी में 20 प्रतिशत मुसलमान हैं.

ओवैसी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मेहनत करने के लिए पार्टी के नेताओं का आभार जताते हुए कहा कि उनकी पार्टी गुजरात, राजस्थान और अन्य राज्यों में भी चुनाव लड़ेगी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)