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मोदी-शाह ने आठ साल में कभी किसी बंगाली को कैबिनेट मंत्री नहीं बनाया: बाबुल सुप्रियो

बीते वर्ष भाजपा छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने वाले बाबुल सुप्रियो ने कहा कि पिछले आठ साल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को ऐसा कभी नहीं लगा कि किसी बंगाली को कैबिनेट मंत्री बनाया जाए. क्या उन्हें लगता है कि बंगाली लोग कैबिनेट मंत्री बनने योग्य नहीं हैं?

बाबुल सुप्रियो. (फोटो: पीटीआई)

कोलकाता: बंगाली अस्मिता के मुद्दे को हवा देने का प्रयास करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने सोमवार को सवाल उठाया कि केंद्र में आठ साल से भाजपा की सरकार होने के बाद भी किसी बंगाली को केंद्रीय कैबिनेट में शामिल क्यों नहीं किया गया.

सुप्रियो ने कहा, ‘पिछले आठ साल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को ऐसा कभी नहीं लगा कि किसी बंगाली को कैबिनेट मंत्री बनाया जाए. क्या उन्हें लगता है कि बंगाली लोग कैबिनेट मंत्री बनने योग्य नहीं हैं?’

उन्होंने कहा, ‘उत्तर भारत की पार्टियों ने हमेशा बंगालियों को नजरअंदाज किया है. मैं ममता बनर्जी को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने मुझे लोगों की सेवा करने का अवसर दिया.’

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, ममता बनर्जी ने बालीगंज विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए बाबुल सुप्रियो और आसनसोल संसदीय सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए शत्रुघ्न सिन्हा को पार्टी का उम्मीदवार बनाया है.

आसनसोल सीट सुप्रियो ने खाली की थी, जिन्होंने पिछले साल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छोड़ दी थी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में शामिल हो गए थे. बालीगंज विधानसभा सीट नवंबर 2021 में बंगाल के मंत्री सुब्रत मुखर्जी के निधन के बाद खाली हुई थी.

भाजपा के दो बार के पूर्व सांसद बाबुल सुप्रियो पिछले साल केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल के तहत मंत्री पद से हटाए जाने के कुछ महीने बाद ही टीएमसी में शामिल हुए थे.

आसनसोल सीट के लिए शत्रुघ्न सिन्हा को नामित करने पर जब सुप्रियो से टीएमसी के ‘स्थानीय बनाम बाहरी’ मुद्दे को लेकर विरोधाभास के संबंध में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है क्योंकि शत्रुघ्न सिन्हा एक प्रसिद्ध अभिनेता हैं और देश भर में एक जाना-पहचाना नाम है.

उन्होंने कहा, ‘इसमें न तो विरोधाभास है और न ही भ्रम क्योंकि अन्य राज्यों के भाजपा नेता, जिन्हें बंगाल या इसकी संस्कृति से कोई प्यार नहीं था, वे राज्य में चुनाव जीतने के एकमात्र इरादे से आए थे. लेकिन शत्रुघ्न सिन्हा के मामले में ऐसा नहीं है.’

अपने सीधे संवाद और भाषणों के चलते अपने प्रशंसकों द्वारा ‘शॉटगन’ के रूप में लोकप्रिय, सिन्हा ने अपने प्रतिद्वंद्वियों द्वारा दिए गए ‘बाहरी’ टैग को खारिज करते हुए कहा कि वह किसी अन्य बंगाली से कम बंगाली नहीं हैं.

इसी बीच, सुप्रियो की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि टीएमसी को बंगाली अस्मिता वाले अपने चुनावी नारे पर सफाई देनी चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘बाबुल सुप्रियो अब बहुत कुछ कह रहे हैं लेकिन जब वह भाजपा में थे तो उन्होंने कुछ क्यों नहीं कहा? टीएमसी को स्थानीय-बाहरी लोगों के अपने बयान पर सफाई देनी चाहिए. जब भाजपा नेता बंगाल आए तो वे बाहरी हो गए और जब टीएमसी दूसरे राज्यों के नेताओं को लाती है तो वे बंगाली बन जाते हैं. यह हास्यास्पद सिद्धांत है.’

बता दें कि पश्चिम बंगाल में ‘स्थानीय-बाहरी’ बहस को 2021 में राज्य के चुनाव से पहले हवा मिली थी, जब सत्तारूढ़ टीएमसी ने बंगाली उप-राष्ट्रवाद को राज्य में भाजपा के हिंदुत्व से मुकाबला करने के लिए अपना मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया था और भाजपा की ‘बाहरी लोगों की पार्टी’ के रूप में ब्रांडिंग की थी.

टीएमसी ने तब एक चुनावी नारा, ‘बांग्ला निजेर मेयेकेई चाय’ (बंगाल को अपनी बेटी चाहिए यानी ममता बनर्जी) के साथ बंगाली अस्मिता को हवा दी थी और भाजपा की पहचान की राजनीति का मुकाबला करने के लिए उप-राष्ट्रवाद का एक चुनावी आख्यान तैयार किया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)