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दिल्ली दंगा: अदालत ने उमर ख़ालिद की ज़मानत याचिका पर आदेश टाला

पुलिस ने दावा किया है कि सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शनों में शामिल उमर ख़ालिद एवं अन्य ने दिल्ली में दंगों का षड्यंत्र रचा, ताकि दुनिया में मोदी सरकार की छवि को खराब किया जा सके. यूएपीए के तहत अक्टूबर 2020 में जेएनयू के पूर्व छात्र उमर ख़ालिद को गिरफ़्तार किया था.

उमर खालिद. (फोटो साभार: फेसबुक/@umar.khalid.984)

नयी दिल्लीः दिल्ली की एक अदालत ने फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगों के संबंध में व्यापक षड्यंत्र के मामले में जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद की जमानत याचिका पर आदेश 23 मार्च तक के लिए टाल दिया है.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने 23 मार्च तक के लिए मामले को स्थगित करते हुए कहा कि आदेश तैयार नहीं है. बता दें कि उन्हें सोमवार को इस मामले में आदेश सुनाना था.

अदालत ने तीन मार्च को खालिद और अभियोजन पक्ष की ओर से पेश वकीलों की दलीलें सुनने के बाद तीन मार्च को आदेश सुरक्षित रख लिया था.

आरोपी ने अदालत को बताया था कि अभियोजक के पास उनके खिलाफ अपने मामले को साबित करने के लिए सबूत नहीं हैं.

खालिद और कई अन्य पर फरवरी 2020 को हुए दंगों के मास्टरमाइंड होने के आरोप में आतंकवाद रोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था. इन दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई थी और 700 से अधिक घायल हो गए थे.

खालिद और कई अन्य लोगों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया है और उन पर फरवरी 2020 में हुए दंगों की साजिश रचने का आरोप है.

फरवरी 2020 में उत्तर पूर्वी दिल्ली में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए), 2019 और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के समर्थन और विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी.

खालिद के अलावा, कार्यकर्ता खालिद सैफी, जेएनयू छात्रा नताशा नरवाल और देवांगना कलीता, जामिया समन्वय समिति के सदस्य सफूरा जरगर, आप के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और कई अन्य लोगों पर भी मामले में कड़े कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है.

खालिद के अलावा जेएनयू की छात्रा नताशा नरवाल और देवांगना कलीता, जामिया समन्वय समिति की सदस्य सफूरा जरगर, आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन तथा अन्य के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है.

अप्रैल 2021 में जेएनयू के पूर्व छात्र उमर को दंगों से जुड़े एक अन्य मामले में जमानत मिल गई थी. अदालत ने जमानत देते हुए यह कहा था कि घटना के दिन वह प्रत्यक्ष रूप से अपराध स्थल पर मौजूद नहीं थे.

यूएपीए के तहत एक अक्टूबर 2020 को उमर खालिद को गिरफ्तार किया था. यूएपीए के साथ ही इस मामले में उनके खिलाफ दंगा करने और आपराधिक साजिश रचने के भी आरोप लगाए गए हैं.

पुलिस ने दावा किया है कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में शामिल उमर खालिद एवं अन्य ने दिल्ली में दंगों का षड्यंत्र रचा, ताकि दुनिया में मोदी सरकार की छवि को खराब किया जा सके.

15 जून 2021 को दिल्ली हाईकोर्ट ने यूएपीए के तहत गिरफ्तार नताशा नरवाल, देवांगना कलीता और इकबाल आसिफ तन्हा को जमानत दे दी थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)