राजनीति

यूपी विधान परिषद चुनाव: भाजपा ने हिस्ट्रीशीटर और बाहुबली के क़रीबी को मैदान में उतारा

भाजपा ने हिस्ट्रीशीटर और बसपा के पूर्व एमएलसी विनीत सिंह उर्फ़ श्याम नारायण सिंह और बाहुबली धनंजय सिंह के क़रीबी बृजेश सिंह प्रिंशु को विधान परिषद चुनाव में उतारा है. कांग्रेस और बसपा ने इस चुनाव में शामिल नहीं होने का फैसला किया है. उत्तर प्रदेश विधान परिषद का चुनाव नौ अप्रैल को होगा, जबकि मतगणना 12 अप्रैल को होगी.

भाजपा उम्मीदवार विनीत सिंह. (फोटोः पीटीआई)

लखनऊः भाजपा ने हिस्ट्रीशीटर और बसपा के पूर्व एमएलसी विनीत सिंह उर्फ श्याम नारायण सिंह और बाहुबली धनंजय सिंह के एक करीबी को विधान परिषद चुनाव में उतारा है.

भाजपा अब तक चुनावों के लिए 30 उम्मीदवारों के नाम जारी कर चुकी है. पार्टी ने विधान परिषद के लिए नौ अप्रैल को होने वाले चुनाव के लिए शेष छह उम्मीदवारों के नाम भी जारी किए.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा ने विनीत सिंह को मिर्जापुर-सोनभद्र स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतारा है. विनीत सिंह के खिलाफ कई आपराधिक मामले लंबित हैं और वह वाराणसी जिले के चोलापुर पुलिस थाने के रिकॉर्ड में हिस्ट्रीशीटर हैं.

भाजपा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि विनीत सिंह 2019 लोकसभा चुनावों के दौरान भाजपा में शामिल हुए थे. उन्होंने 2017 का विधानसभा चुनाव बसपा की टिकट पर चंदौली की सैयदराजा सीट से लड़ा था. उस समय वह अपहरण के मामले में रांची जेल में बंद थे. वह उस चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे थे.

रिपोर्ट के अनुसार, इसके अलावा जौनपुर स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा ने बाहुबली धनंजय सिंह के करीबी बसपा के मौजूदा एमएलसी बृजेश सिंह प्रिंशु को उतारा है.

धनंजय सिंह ने जनता दल (यूनाइटेड) उम्मीदवार के रूप में जौनपुर जिले की मल्हानी सीट से हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव लड़ा था. उन्हें इस सीट पर सपा के उम्मीदवार से हार का सामना करना पड़ा, जबकि भाजपा इस सीट पर चौथे स्थान पर रही.

जौनपुर के एक भाजपा नेता ने कहा, ‘हमें नहीं पता कि वह (प्रिंशु) भाजपा में कब शामिल हुए. जब से पार्टी ने उन्हें अपना उम्मीदवार घोषित किया है, वह भाजपा में हैं.’

प्रिंशु को इसी निर्वाचन क्षेत्र से 2016 में एमएलसी चुने गए थे और उनका कार्यकाल सात मार्च को समाप्त हो गया.

वाराणसी स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा ने काशी क्षेत्र इकाई के पार्टी सचिव सुदामा सिंह पटेल को टिकट दिया है.

सुल्तानपुर स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी ने समाजवादी पार्टी के एमएलसी शैलेंद्र प्रताप सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है, वह विधानसभा चुनाव से कुछ हफ्ते पहले भाजपा में शामिल हुए थे.

एक भाजपा नेता ने कहा कि वह पांच बार इसी सीट से एमएलसी रहे हैं.

भाजपा के राज्य सचिव सुभाष यदुवंश बस्ती-सिद्धार्थनगर निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी चुनाव लड़ेंगे. वह इससे पहले भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष थे.

कानपुर-फतेहपुर स्थानीय निकाय सीट से भाजपा ने पार्टी की कानपुर देहात इकाई के जिलाध्यक्ष अविनाश सिंह चौहान को टिकट दिया है.

कांग्रेस और बसपा ने एमएलसी चुनावों में अपने उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है. इस तरह इस बार सीधा मुकाबला समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच है.

इसके साथ ही चुनाव मैदान में कुछ निर्दलीय उम्मीदवार भी हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, राज्य चुनाव कार्यालय ने बताया कि पहले चरण के चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया सोमवार को समाप्त हो गई, जबकि दूसरे चरण के लिए यह प्रक्रिया मंगलवार को समाप्त होगी. दोनों चरणों में मतदान नौ अप्रैल को होगा.

मतगणना 12 अप्रैल को होगी. समाजवादी पार्टी 100 सदस्यीय विधान परिषद में अपना बहुमत बनाए रखने के लिए सभी प्रयास करेगी, जबकि भाजपा विधान परिषद में अपना बहुमत हासिल करने की पूरी कोशिश करेगी.

यूपी विधान परिषद की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, 100 सदस्यीय यूपी विधान परिषद में मौजूदा समय में भाजपा के 35 एमएलसी, समाजवादी पार्टी के 17 और बसपा के चार एमएलसी हैं. इसके अलावा कांग्रेस, अपना दल (सोनेलाल) और निषाद पार्टी के एक-एक सदस्य हैं.

इस बीच भाजपा की सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) ने उन अटकलों को खारिज कर दिया कि वह चुनाव लड़ना चाहती है और इसके लिए वह भाजपा के साथ बातचीत कर रही है.

अपना दल (सोनेलाल) एमएलसी आशीष पटेल ने कहा, ‘हम यूपी में विधान परिषद के लिए द्विवार्षिक चुनाव नहीं लड़ रहे हैं.’

समाजवादी पार्टी ने विधान परिषद चुनाव के लिए बीते 20 मार्च अपने उम्मीदवारों की घोषणा की थी. मेरठ-गाजियाबाद और बुलंदशहर सीटों को छोड़कर समाजवादी पार्टी ने बाकी बची 34 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा की. पार्टी ने मेरठ-गाजियाबाद और बुलंदशहर सीटों को अपने सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल के लिए छोड़ दी.

कांग्रेस के एमएलसी दीपक सिंह ने बताया, ‘कांग्रेस पार्टी ने यूपी विधान परिषद चुनाव में अपना कोई उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है. अब हम चुनाव सिर्फ जीतने के लिए लड़ेंगे. हम हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन की समीक्षा कर रहे हैं.’