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पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में एक बार फिर 80 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी

पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में बीते चार दिनों में तीसरी बार बढ़ोतरी की गई है. तीन बार की बढ़ोतरी के बाद 2.40 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है. उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले चार नवंबर, 2021 से ही पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें स्थिर बनी हुई थीं.

(फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: पेट्रोल और डीजल की कीमतों में शुक्रवार को एक बार फिर 80 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई. चार दिनों में तीसरी बार कीमतों में बढ़ोतरी की गई है.

सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियों की तरफ से जारी मूल्य अधिसूचना के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 97.01 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर अब 97.81 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 88.27 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 89.07 रुपये हो गई है.

अमर उजाला के मुताबिक, मुंबई में पेट्रोल की कीमत 112.51 रुपये व डीजल की कीमत 96.70 रुपये प्रति लीटर है. कोलकाता में पेट्रोल का दाम 107.18 रुपये जबकि डीजल का दाम 92.22 रुपये प्रति लीटर है. वहीं, चेन्नई में भी पेट्रोल 103.67 रुपये प्रति लीटर तो डीजल 93.71 रुपये प्रति लीटर है.

मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में पेट्रोल का दाम 100 रुपये चल रहा है. मुंबई में पेट्रोल की कीमत सबसे अधिक है.

पेट्रोल तथा डीजल की कीमतें रिकॉर्ड 137 दिन तक स्थिर रहने के बाद 22 मार्च को बढ़ाई गई थीं. इसके बाद 23 मार्च को भी इनकी कीमतों में प्रति लीटर 80 पैसे की बढ़ोतरी की गई थी. घरेलू रसोई गैस के दाम में भी 50 रुपये प्रति सिलेंडर की वृद्धि की गई थी.

22 मार्च से तीन बार कीमतों में वृद्धि के साथ पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2.40 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है.

उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले चार नवंबर, 2021 से ही पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें स्थिर बनी हुई थीं. हालांकि, इस अवधि में कच्चे तेल की कीमत 30 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ गई थी.

विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के साथ ही पेट्रोल एवं डीजल के दाम में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन पेट्रोलियम कंपनियों ने कुछ दिन और इंतजार किया.

ऐसा कहा जा रहा है कि अब पेट्रालियम विपणन कंपनियां अपने घाटे की भरपाई कर रही हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विसेज का कहना है कि पांच राज्यों में चुनावों के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों को बनाए रखने के लिए ईंधन खुदरा विक्रेताओं- आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल को कुल मिलाकर लगभग 2.25 बिलियन अमरीकी डॉलर (19,000 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ.

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के अनुसार, तेल कंपनियों को डीजल की कीमतों में 13.1-24.9 रुपये प्रति लीटर और गैसोलीन (पेट्रोल) पर 10.6-22.3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने की आवश्यकता होगी.

‘क्रिसिल रिसर्च’ के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में हुई वृद्धि से पूरी तरह से पार पाने के लिए दरों में नौ से 12 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की आवश्यकता है. भारत अपनी तेल की जरूरतें पूरी करने के लिए आयात पर 85 फीसदी निर्भर है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)