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बिहार: आरटीआई कार्यकर्ता हत्या मामले में कार्रवाई न होने पर बेटे ने कथित तौर पर जान दी

मोतीहारी के आरटीआई कार्यकर्ता बिपिन अग्रवाल की बीते वर्ष सितंबर में हत्या कर दी गई थी. उनके 14 वर्षीय बेटे की शुक्रवार को कथित तौर पर आत्महत्या कर ली. पुलिस इसे दुर्घटना बता रही है, लेकिन परिवार का आरोप है कि पिता की हत्या की जांच में देरी के चलते रोहित ने आत्महत्या की है. अब पुलिस ने पिता के हत्या मामले की जांच सीआईडी को दे दी है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

मोतिहारी: बिहार पुलिस ने शनिवार को बताया कि उसने सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता बिपिन अग्रवाल की हत्या का मामला आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) को सौंप दिया है.

मोतीहारी के आरटीआई कार्यकर्ता बिपिन अग्रवाल की हत्या का मामला उनके किशोर बेटे रोहित अग्रवाल की मौत के बाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है. 14 वर्षीय रोहित कथित तौर पर तीन मंजिला एक मकान की छत से बिजली की हाईटेंशन तार पर गिर गए थे.

अपने पिता की हत्या की जांच की धीमी गति का विरोध करने के लिए गुरुवार (24 मार्च) को रोहित कुमार द्वारा कथित तौर पर उठाए गए इस कदम के बाद शुक्रवार (25 मार्च) को मोतिहारी के एक निजी क्लिनिक में मौत हो गई.

रोहित के दादा विजय अग्रवाल ने एक वीडियो जारी करके आरोप लगाया है कि उनका पोता जिला पुलिस प्रमुख (एसपी) से मिलने गया था, लेकिन निराश होकर लौटने के बाद वह मिट्टी के तेल का कनस्तर लेकर बगल की इमारत की छत पर चढ़ गया था.

शोक संतृप्त दादा ने आरोप लगाया, ‘उसने खुद पर मिट्टी का तेल डाला और छत से गिर गया. पुलिस अब मुझ पर अपने अनुकूल बयान देने को लेकर दबाव डाल रही है.’

हालांकि, पूर्वी चंपारण (मोतीहारी) के पुलिस अधीक्षक (एसपी) कुमार आशीष ने विजय अग्रवाल के आरोपों को खारिज कर दिया है और कहा है कि लड़के की मां ने बयान दिया था कि रोहित का ‘पैर फिसल गया’ जिससे वह हाईटेंशन तार पर गिर गया.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, विजय अग्रवाल ने हरसिद्धि पुलिस पर उनके बयान को बदलने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए रोहित के इस कदम के लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहराया था. इन आरोपों को एसपी ने खारिज किया है.

हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि लड़के ने खुद पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगाई थी या नहीं.

पुलिस अधीक्षक ने स्वीकार किया कि रोहित गुरुवार को उनके कार्यालय आया था, लेकिन सीसीटीवी फुटेज दिखाते हुए उसके खिलाफ दुर्व्यवहार संबंधी आरोपों का भी खंडन किया है.

उन्होंने लड़के की ‘अधीरता’ पर भी अफसोस जताया और कहा कि उसके पिता की हत्या के सिलसिले में सात लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है.

उन्होंने कहा, ‘हमने रोहित के संबंध में आत्महत्या का मामला केवल इसलिए दर्ज नहीं किया है, क्योंकि गिरने से पहले वह छत से अपने दादा से बात कर रहा था. पुलिस को सूचित करने के लिए पर्याप्त समय था, जिससे कि लड़के को बचाया जा सकता था. मामला दर्ज करने से परेशान परिवार को और परेशानी होगी.’

एसपी आशीष ने कहा, ‘पुलिस द्वारा की जा रही जांच पर संदेह के मद्देनजर हम (आरटीआई कार्यकर्ता की) हत्या के मामले को जांच के लिए सीआईडी को सौंप रहे हैं.’

बता दें कि मोतीहारी के हरसिद्धि इलाके के 47 वर्षीय आरटीआई कार्यकर्ता बिपिन अग्रवाल की पिछले साल 24 सितंबर को अज्ञात मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. अग्रवाल के परिवार ने हत्या के लिए स्थानीय भू-माफिया को जिम्मेदार ठहराते हुए हमलावरों का पता लगाने के लिए निष्पक्ष जांच की मांग की थी.

बिपिन अग्रवाल ने जिले में कथित रूप से अतिक्रमण की गई सरकारी जमीन और संपत्ति का ब्योरा मांगते हुए कई आरटीआई आवेदन दिए थे.  बताया जाता है कि स्थानीय भू-माफियाओं के साथ उनका टकराव उनकी मौत का सबब बनी थी .

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आरटीआई कार्यकर्ता के बेटे रोहित अपने पिता की हत्या के मामले में धीमी गति से हो रही जांच का विरोध कर रहे थे.

अखबार ने कुछ रिपोर्ट्स के हवाले से लिखा है कि रोहित पूर्वी चंपारण के एसपी कुमार आशीष से मिलने गए थे, लेकिन स्टाफ ने उन्हें मिलने नहीं दिया.

जिसके बाद रोहित ने कथित तौर पर एसपी कार्यालय में धमकी दी थी कि अगर पुलिस ने उसके पिता की हत्या के मामले में संदेही स्थानीय भाजपा नेता को गिरफ्तार करने का आश्वासन नहीं दिया तो वह आत्महत्या कर लेंगे.

बता दें कि बिपिन ने अपनी आरटीआई याचिकाओं के माध्यम से उजागर किया था कि कितने लोग ने, जिनमें से कुछ राजनीतिक जुड़ाव रखते थे, वर्षों से हरसिद्धि में सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया था. बिपिन पर पहले भी एक हमला हुआ था, जिसमें वे बच गए थे. बाद में सितंबर 2021 में उनमें गोली मार दी गई.

बहरहाल, तीन बेटों में रोहित सबसे बड़े थे और अपने पिता के लिए न्याय पाने की लड़ाई में आगे थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)