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प्रेम विवाह महिला को गुणवत्तापूर्ण जीवन जीने से वंचित रखने का बहाना नहीं: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात के साबरकांठा ज़िले का मामला. महिला के पिता की मृत्यु के बाद परिवार ने महिला को उनकी मर्ज़ी से विवाह करने के लिए मजबूर करने की कोशिश की, लेकिन इसके बजाय महिला ने इस साल फरवरी में अपने प्रेमी से शादी की. फैसले से नाराज़ महिला के चाचा ने उसके पति और ससुर पर हमला किया और महिला को अगवा कर लिया था.

गुजरात हाईकोर्ट. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्लीः गुजरात हाईकोर्ट ने शनिवार को एक मृतक शख्स की संपत्ति को उसकी बेटी को तत्काल ट्रांसफर करने का आदेश देते हुए कहा कि बेटी के संपत्ति के अधिकार की रक्षा करने की जरूरत है, क्योंकि परिवार के सदस्य महिला (बेटी) के उसके प्रेमी के साथ शादी के फैसले के विरोध में हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने कहा कि संपत्ति पर महिला के अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए अन्यथा अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का उसका संवैधानिक अधिकार उसे एक गुणवत्तापूर्ण जीवन नहीं दे सकता.

अदालत ने स्थानीय पुलिस और कानूनी सेवा प्राधिकरण को महिला के नाम संपत्ति (दो घर, एक दुकान और एक खेत) ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा.

यह मामला गुजरात के साबरकांठा जिले के प्रांजतिज तालुका की 24 साल की महिला से जुड़ा हुआ है. महिला के पिता की मृत्यु दिसंबर 2021 में हो गई थी, जबकि उसकी मां का निधन कुछ साल पहले हुआ था.

रिपोर्ट के मुताबिक, अपने पिता की मृत्यु के बाद परिवार ने महिला को उनकी मर्जी से विवाह करने के लिए मजबूर करने की कोशिश की, लेकिन इसके बजाय महिला ने इस साल फरवरी में अपने प्रेमी से शादी की, जो उसी गांव का रहने वाला है.

इस फैसले से नाराज महिला के चाचा ने उसके पति और ससुर पर हमला किया और महिला को अगवा कर लिया.

रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद महिला के पति ने अपनी पत्नी की कस्टडी की मांग करते हुए वकील भुनेश रूपेरा के जरिये बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर हाईकोर्ट का रुख किया.

महिला को बुधवार (23 मार्च) को अदालत में पेश किया गया, जहां महिला ने बताया कि उसके परिवार के सदस्यों ने उसके पिता की संपत्ति पर कब्जा करना शुरू कर दिया है.

इस पर जस्टिस सोनिया सोलंकी और जस्टिस मौना भट्ट की पीठ ने कहा कि संपत्ति पर महिला के अधिकारों की रक्षा करने की जरूरत है, क्योंकि महिला के प्रेम विवाह को उसके गुणवत्तापूर्ण जीवन से वंचित रखने के बहाने के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए.

अदालत ने सरकारी वकील से कहा कि वह संपत्ति को महिला के नाम ट्रांसफर करने के लिए प्रांजतिज पुलिस स्टेशन के साथ मिलकर काम करें.

पीठ ने सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा कि जितनी जल्दी संभव हो सके महिला को संपत्ति पर मालिकाना हक मिल जाए.