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दिल्लीः सुल्ली डील्स, बुली बाई ऐप बनाने वाले आरोपियों को ज़मानत मिली

सुल्ली डील्स और बुली बाई डील्स नामक ऐप पर सैकड़ों मुस्लिमों महिलाओं की तस्वीरों को बिना उन महिलाओं की मंज़ूरी के ‘नीलामी’ के लिए डाला गया था. सुल्ली डील्स बनाने वाले ओंकारेश्वर ठाकुर को ज़मानत देते हुए दिल्ली की एक अदालत ने कहा कि आरोपी ने पहली बार अपराध किया है और लंबे समय तक क़ैद उसके लिए नुकसानदायक हो सकती है.

नई दिल्लीः मुस्लिम महिलाओं की छेड़छाड़ की गईं तस्वीरों को ‘नीलामी’ के लिए ऑनलाइन अपलोड करने के मामले में दिल्ली की एक अदालत ने सुल्ली डील्स ऐप को बनाने वाले शख्स को 28 मार्च को जमानत दे दी.

डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, पटियाला हाउस कोर्ट के मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट पंकज कुमार ने ओंकारेश्वर ठाकुर (26) को जमानत देते हुए कहा कि ‘आरोपी ने पहली बार अपराध किया है और लंबे समय तक कैद उसके लिए नुकसानदायक हो सकती है.’

इस मामले में कई इंटरमीडियरी और फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरीज (एफएसएल) की रिपोर्ट का इंतजार है क्योंकि ठाकुर संभावित रूप से एफएसएल रिपोर्ट के नतीजों को प्रभावित नहीं कर सकता.

रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत के आदेश में कहा गया है कि आरोपी की समुदाय में पैठ है और उसका देश छोड़कर फरार होने का भी कोई खतरा नहीं है.

ठाकुर को 50,000 रुपये के मुचलके पर सशर्त जमानत दी गई है.

बता दें कि सुल्ली डील्स पर मुस्लिमों महिलाओं की सहमति के बिना उनकी तस्वीरों से छेड़छाड़ कर आपत्तिजनक टिप्पणियों के साथ उनकी तस्वीरों को इस ऐप पर नीलामी के लिए डाला जाता था.

यह मामला जुलाई 2021 में सामने आया था और दिल्ली पुलिस ने मामले में आठ जुलाई को आईपीसी की धारा 345ए (यौन उत्पीड़न) के तहत एफआईआर दर्ज की थी.

मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले ठाकुर को इस साल नौ जनवरी को उनके आवास से दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था.

सुल्ली डील्स की तरह ही ऐसे ही एक अन्य ऐप बुली बाई का मामला भी इस साल जनवरी में सामने आया था. इस ऐप पर भी मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरों से छेड़छाड़ कर उनकी नीलामी के लिए अपलोड की जाती थी.

बुली बाई ऐप के कथित क्रिएटर नीरज बिश्नोई को ठाकुर की गिरफ्तारी से तीन दिन पहले छह जनवरी को गिरफ्तार किया गया था.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, बिश्नोई को भी सोमवार को पटियाला हाउस कोर्ट से जमानत दे दी गई.

हालांकि, जमानत दिए जाने के बावजूद ठाकुर को हिरासत से रिहा नहीं किया गया क्योंकि वह मामले में एक अन्य चार्जशीट में नामजद है, जिसे मुंबई पुलिस ने दायर किया था.

दिल्ली की एक अदालत ने इससे पहले जनवरी में ठाकुर की जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि उस समय मामले की जांच शुरुआती चरण में थी और ऐसे में जमानत देना निष्पक्ष जांच के खिलाफ होता.