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आंध्र प्रदेशः पूर्व इंटेलिजेंस प्रमुख बोले- राज्य सरकार ने ठुकराई थी एनएसओ की पेगासस की पेशकश

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू द्वारा पेगासस स्पायवेयर खरीदा गया था. अब प्रदेश की ख़ुफ़िया इकाई के प्रमुख रह चुके एबी वेंकटेश्वर ने पुष्टि की है कि इज़रायली कंपनी एनएसओ ग्रुप ने राज्य सरकार को पेगासस स्पायवेयर बेचने की पेशकश की थी, लेकिन इसे अस्वीकार कर कर दिया गया था.

(फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्लीः आंध्र प्रदेश की खुफिया इकाई के प्रमुख रह चुके एबी वेंकटेश्वर ने पुष्टि की है कि इजरायली कंपनी एनएसओ ग्रुप ने राज्य सरकार को पेगासस स्पायवेयर बेचने की पेशकश की थी.

द न्यूज मिनट के साथ साक्षात्कार के दौरान एबी वेंकटेश्वर राव ने पूर्व मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के उस दावे की पुष्टि की है कि तेलुगु देशम  पार्टी (टीडीपी) सरकार ने पेगासस नहीं खरीदा था.

बता दें कि पश्चिम बंगाल की मुख्यंमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया था कि आंध्र प्रदेश सरकार ने पेगासस खरीदा था, जिसके बाद नायडू सरकार विवादों में आ गई थी.

बनर्जी ने कहा था कि उनकी सरकार (पश्चिम बंगाल) को भी 25 करोड़ रुपये में पेगासस बेचने की पेशकश की गई थी लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया था.

बीते दिनों वर्तमान वाईएसआर सरकार ने पिछली चंद्रबाबू सरकार द्वारा पेगासस स्पायवेयर की कथित खरीद और अवैध उपयोग की जांच के लिए एक समिति गठित करने का फ़ैसला किया है.

वहीं, टीडीपी ने कहा है कि वह किसी भी जांच के लिए तैयार है, चाहे वह सदन की समिति हो, न्यायिक जांच हो या सीबीआई जांच. टीडीपी और नायडू इनकार कर चुके हैं कि उनके कार्यकाल के दौरान पेगासस नहीं खरीदा गया.

राव ने बताया कि तत्कालीन नायडू सरकार ने उनसे पूछा था कि क्या यह स्पायवेयर कानूनी है.

उन्होंने कहा, ‘जब हमने सरकार को बताया कि इस तरह की तकनीक मौजूद है और इसकी अनुमानित लागत यह है तो सरकार ने एक ही सवाल पूछा कि क्या यह कानूनी है और हमने कहा नहीं, जिसके बाद उन्होंने इसे पेशकश को अस्वीकार करने को कहा और यहीं यह मामला खत्म हो गया था.’

गौरतलब है कि इजरायली कंपनी एनएसओ ग्रुप का पेगासस एक अत्याधुनिक स्पायवेयर है, जो फोन को अपने नियंत्रण में ले लेता है. एक बार इंस्टॉल करने पर पेगासस डिवाइस के कैमरे, उसके मैसेज और फोन में स्टोर अन्य सभी डेटा को अपने नियंत्रण में ले लेता है.

मालूम हो कि एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया कंसोर्टियम, जिसमें द वायर  भी शामिल था, ने 2021 में पेगासस प्रोजेक्ट के तहत यह खुलासा किया था कि इजरायल की एनएसओ ग्रुप कंपनी के पेगासस स्पायवेयर के जरिये दुनियाभर में नेता, पत्रकार, कार्यकर्ता, सुप्रीम कोर्ट के अधिकारियों के फोन कथित तौर पर हैक कर उनकी निगरानी की गई या फिर वे संभावित निशाने पर थे.

इस कड़ी में 18 जुलाई 2021 से द वायर  सहित विश्व के 17 मीडिया संगठनों ने 50,000 से ज्यादा लीक हुए मोबाइल नंबरों के डेटाबेस की जानकारियां प्रकाशित करनी शुरू की थी, जिनकी पेगासस स्पायवेयर के जरिये निगरानी की जा रही थी या वे संभावित सर्विलांस के दायरे में थे.

इस पड़ताल के मुताबिक, इजरायल की एक सर्विलांस तकनीक कंपनी एनएसओ ग्रुप के कई सरकारों के क्लाइंट्स की दिलचस्पी वाले ऐसे लोगों के हजारों टेलीफोन नंबरों की लीक हुई एक सूची में 300 सत्यापित भारतीय नंबर हैं, जिन्हें मंत्रियों, विपक्षी नेताओं, पत्रकारों, न्यायपालिका से जुड़े लोगों, कारोबारियों, सरकारी अधिकारियों, अधिकार कार्यकर्ताओं आदि द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा है.

यह खुलासा सामने आने के बाद देश और दुनियाभर में इसे लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था.

बता दें कि एनएसओ ग्रुप मिलिट्री ग्रेड के इस स्पायवेयर को सिर्फ सरकारों को ही बेचती हैं. भारत सरकार ने पेगासस की खरीद को लेकर न तो इनकार किया है और न ही इसकी पुष्टि की है.