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सशस्त्र बल जल्द ही कर सकते हैं अल्पकालिक अनुबंधों पर सैनिकों की भर्ती: रिपोर्ट

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, इस संभावित निर्णय के तहत सैनिकों को तीन साल के अनुबंध पर रखकर प्रशिक्षित किया जाएगा. साथ ही वे उग्रवाद विरोधी अभियानों, ख़ुफ़िया जानकारी इकट्ठा करने सहित विभिन्न क्षेत्रों में सेवा देंगे. तीन साल होने पर अधिकांश सैनिकों को सेवामुक्त कर दिया जाएगा.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: सशस्त्र बलों में सैनिकों की भर्ती के लिए एक नया दृष्टिकोण आकार ले चुका है, और जल्द ही ऐसी ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ अवधारणा की औपचारिक घोषणा हो सकती है, जिसे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करने और राजकोष में बड़ी बजटीय बचत लाने के लिए डिज़ाइन किया गया है.

इकॉनोमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह अनूठा विचार दो साल पहले सामने आया, जो सशस्त्र बलों में एक निश्चित अल्पकालिक अनुबंध पर अधिकारियों और सैनिकों की भर्ती की बात करता है.

अनुबंध की तीन साल की अवधि हो सकती है, जिस दौरान भर्ती किए गए सैनिकों को प्रशिक्षित किया जाएगा और साथ ही वे उग्रवाद विरोधी अभियानों, खुफिया जानकारी एकत्रित करने व सूचना प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में सेवा प्रदान करेंगे.

ऐसी जानकारी है कि शीर्ष नेतृत्व से प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने के पूर्वाभास के चलते इस सप्ताह रक्षा मंत्रालय में ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ के विचार पर चर्चा हुई है.

अख़बार के अनुसार, इस योजना को 2020 में सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे द्वारा आगे बढ़ाया गया था, सरकार में शीर्ष स्तर पर इस संबंध में हालिया महीनों में विमर्श हुआ है. हालांकि, अंतिम योजना की रूपरेखा का खुलासा होना अभी बाकी है, लेकिन मूल विचार यह था कि सैनिकों को तीन साल की एक निश्चित अवधि के लिए जोड़ा जाए.

उल्लेखनीय है कि इससे पहले सशस्त्र बलों में स्थायी भर्ती होती थीं, जिसमें सैनिकों की सेवा अवधि अलग-अलग होती थी.

बताया गया है कि अनुबंध वाली भर्ती सशस्त्र बलों के किन-किन क्षेत्रों में होगी, इसका भी विस्तार किया जा सकता है.

अख़बार की रिपोर्ट कहती है कि तीन साल के अंत में अधिकांश सैनिकों को सेवा से मुक्त कर दिया जाएगा और उन्हें आगे के रोजगार के अवसरों के लिए सशस्त्र बलों से सहायता मिलेगी. सशस्त्र बलों द्वारा शुरुआती गणना में अनुमान लगाया गया था कि यदि ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ के तहत बड़ी संख्या में सैनिक लाए जाते हैं तो वेतन, भत्तों और पेंशन में हजारों करोड़ रुपये की बचत होगी.

भर्ती किए गए युवाओं में से जो सर्वश्रेष्ठ होंगे, उन्हें सेना में रिक्तियां (नौकरी) उपलब्ध होने की स्थिति में अपनी सेवा जारी रखने का अवसर मिल सकता है.