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केंद्र सरकार ने एनजीओ सीएचआरआई, एएडब्ल्यूडब्ल्यू का एफसीआरए लाइसेंस रद्द किया

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दो ग़ैर सरकारी संगठनों- ‘कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनीशिएटिव’ और ‘अपने आप विमेन वर्ल्डवाइड’ का एफसीआरए लाइसेंस रद्द करते हुए दावा किया है कि उन्होंने क़ानून का उल्लंघन किया है और विदेशी चंदे के रूप में प्राप्त धन की कथित तौर पर हेराफेरी की.

(फोटो साभार: CHRI/AAWW वेबसाइट)

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दो गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) ‘कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनीशिएटिव’ (सीएचआरआई) और ‘अपने आप विमेन वर्ल्डवाइड’ (एएडब्ल्यूडब्ल्यू) का एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया है. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी.

उन्होंने कहा कि दोनों एनजीओ विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम 2010 (एफसीआरए) के तहत अनिवार्य वार्षिक वित्तीय विवरण दाखिल करने में कथित तौर पर विफल रहे.

अधिकारियों ने कहा कि गृह मंत्रालय ने यह भी पाया है कि गैर सरकारी संगठनों ने विदेशी चंदे के रूप में प्राप्त धन की कथित तौर पर हेराफेरी की.

सीएचआरआई की वेबसाइट के अनुसार, यह राष्ट्रमंडल देशों में सरकार और अन्य सार्वजनिक निकायों से जानकारी प्राप्त करने के लिए लोगों के बुनियादी मानव अधिकार की प्राप्ति के क्षेत्र में काम करता है. यह संस्था ऐसे पुलिस सुधार कार्यक्रमों पर भी काम करती है जिसका उद्देश्य हकों पर आधारित पुलिस सुधार की जरूरत समझना और राष्ट्रमंडल देशों में पुलिस की जवाबदेही को मजबूत करना है.

सीएचआरआई का एफसीआरए लाइसेंस पिछले साल जून में निलंबित कर दिया गया था, जिसके बाद संगठन ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. तब द वायर  ने एक रिपोर्ट में बताया था कि केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट को एनजीओ द्वारा कथित एफसीआरए उल्लंघन के मूल रिकॉर्ड पेश करने से इनकार कर दिया था.

हाईकोर्ट से भी इस एनजीओ को कोई राहत नहीं मिली थी और इसने सरकार के आदेश को बरकरार रखा था.

एएडब्ल्यूडब्ल्यू की स्थापना मुंबई के एक रेडलाइट इलाके में 22 महिलाओं ने की थी. इसकी वेबसाइट के अनुसार, यह संगठन देह व्यापार के लिए महिलाओं की खरीद -फरोख्त का विरोधी है और महिलाओं की मदद के लिए काम करता है.

वर्ष 2017 से 2021 तक सरकार ने कथित उल्लंघन का हवाला देते हुए करीब 1,900 गैर सरकारी संगठनों का एफसीआरए के तहत पंजीकरण रद्द किया है. अधिकार समूहों और अन्य लोगों ने आरोप है कि सरकार इस कानून का इस्तेमाल उन संगठनों के फंड में कटौती करने के लिए कर रही है जिनका काम सरकार के लिए असुविधाजनक है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)