राजनीति

किसानों से किए गए वादे अब तक पूरे नहीं हुए, एमएसपी पर क़ानून बनाए सरकार: सत्यपाल मलिक

मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि किसानों ने केवल दिल्ली में अपना धरना समाप्त किया है, लेकिन तीन विवादास्पद कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ उनका आंदोलन अभी भी जीवित है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में जिस रफ़्तार से बेरोज़गारी और महंगाई बढ़ रही है उससे देश में संकट खड़ा होने वाला है.

मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक. (फोटो: पीटीआई)

मुजफ्फरनगर/मेरठ: मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि सरकार ने कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन को समाप्त कराने के लिए जो वादे किए थे उन्हें अभी तक पूरा नहीं किया गया है.

राज्यपाल ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानून बनाने की वकालत की.

मलिक ने कहा कि किसानों ने केवल दिल्ली में अपना धरना समाप्त किया है, लेकिन तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ उनका आंदोलन अभी भी जीवित है.

मलिक ने रविवार शाम मुजफ्फरनगर में संवाददाताओं से कहा, ‘सरकार द्वारा किसानों से किए गए वादे पूरे नहीं हुए हैं. सरकार को किसानों के मुद्दे को हल करने के लिए एमएसपी पर कानून बनाना चाहिए.’

उन्होंने कहा, ‘किसानों ने केवल दिल्ली से अपना धरना समाप्त किया है, लेकिन उनका आंदोलन अभी भी जीवित है.’

इन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने दिल्ली की सीमाओं पर तकरीबन एक साल तक प्रदर्शन किया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  द्वारा विवादित तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा के बाद किसानों ने ​बीते साल दिसंबर में अपना आंदोलन स्थगित कर दिया था.

भारतीय किसान यूनियन और अन्य किसान नेताओं ने कहा था कि वे राष्ट्रीय राजधानी छोड़ रहे हैं, लेकिन अगर उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो वे आंदोलन फिर से शुरू करेंगे.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, सत्यपाल मलिक ने कहा, ‘अगर एमएसपी पर कानून जल्द लागू नहीं किया गया, तो किसान समुदाय में बढ़ती नाराजगी एक बार फिर खतरनाक रूप ले सकती है.’

मलिक ने महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दों पर भी चर्चा की और कहा, ‘मुख्य मुद्दों के बजाय अप्रासंगिक मामलों पर चर्चा हो रही है.’

मेरठ में हुए एक अन्य कार्यक्रम में सत्यपाल मलिक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में जिस रफ्तार से बेरोजगारी और महंगाई बढ़ रही है उससे देश में संकट खड़ा होने वाला है.

राज्यपाल के पद पर रहकर सरकार के खिलाफ बोलने पर सत्यपाल मलिक ने दो टूक कहा कि असली बात यही है कि सरकार के साथ भी रहो और सवाल भी उठाओ.

उन्होंने कहा, ‘अगर मैं गलत सवाल उठाता हूं तो जिस दिन प्रधानमंत्री कह देंगे कि आप पद छोड़ दें, उसी दिन मैं राज्यपाल का पद छोड़ दूंगा.’

मेरठ बार एसोसिएशन की ओर से पं. नानक चंद सभागार में आयोजित अपने सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए मलिक ने कहा, ‘पूरे देश में कोई भी नेता बेरोजगारी और बढ़ती महंगाई पर बोलने को तैयार नहीं है. भारत सरकार चाहे, तो टैक्स घटाकर महंगाई को कम किया जा सकता है. पाकिस्तान जैसे देश में भी डीजल या पेट्रोल इतने महंगे नहीं हैं, जितने हमारे भारत में.’

मेरठ कॉलेज के छात्र रहे मलिक ने सक्रिय राजनीति में आने के संकेत भी दिए. उन्होंने कहा, ‘मैं सेवानिवृति के बाद किसानों की लड़ाई के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उच्च न्यायालय की पीठ की लड़ाई भी लड़ूंगा.’

केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि अगर दिल्ली में कोई जानवर भी मरता है तो उसका भी शोक संदेश जारी किया जाता है, लेकिन किसान आंदोलन के समय कितने किसानों की मौत हुई मगर सरकार की तरफ से कोई संदेश नहीं दिया गया.

वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद के मसले पर मलिक ने कहा कि जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ज्ञानवापी मस्जिद का मसला उठाया जा रहा है.

बता दें कि सत्यपाल मलिक भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार को कई बार, खासकर किसान आंदोलन से जुड़े मसलों को लेकर, आड़े हाथों ले चुके हैं.

अक्टूबर 2021 में उन्होंने कहा था कि यदि किसानों की मांगें स्वीकार नहीं की जाती हैं, तो भाजपा सत्ता में नहीं आएगी.

उस समय यह पूछे जाने पर कि क्या वह किसानों के साथ खड़े होने के लिए अपना पद छोड़ देंगे, मलिक ने कहा था कि वह किसानों के साथ खड़े हैं और वर्तमान में उन्हें पद छोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं है, लेकिन जरूरत पड़ने पर वह ऐसा भी करेंगे.

उन्होंने लखीमपुर खीरी कांड को लेकर कहा था कि ‘केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा को इस्तीफा देना चाहिए था. वैसे भी वह मंत्री मंत्री बनने के लायक नहीं हैं.’

नवंबर महीने में उन्होंने मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा की आलोचना करते हुए कहा था कि एक नए संसद भवन के बजाय एक विश्व स्तरीय कॉलेज बनाना बेहतर होगा.

उस समय भी मालिक ने केंद्र पर किसानों की मौत को लेकर संवेदनशील रवैया न अपनाने पर सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा था, ‘एक कुत्ता भी मरता है तो दिल्ली के नेताओं का शोक संदेश आता है लेकिन 600 किसानों का शोक संदेश का प्रस्ताव लोकसभा में पास नहीं हुआ.’

उल्लेखनीय है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आने वाले जाट नेता मलिक नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दौरान जम्मू कश्मीर और गोवा के बाद वर्तमान में मेघालय के राज्यपाल हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)