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धर्म संसद: मुस्लिमों के ख़िलाफ़ नफ़रती भाषण देने के आरोपी जितेंद्र त्यागी को अंतरिम ज़मानत

सुप्रीम कोर्ट ने हरिद्वार धर्म संसद में मुसलमानों के ख़िलाफ़ कथित तौर पर नफ़रत फैलाने वाला भाषण देने के मामले में आरोपी जितेंद्र नारायण त्यागी को तीन महीने की अंतरिम ज़मानत देते हुए उन्हें नफ़रत फैलाने वाला भाषण नहीं देने और इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल या सोशल मीडिया पर कोई टिप्पणी न करने का वादा करते हुए एक हलफ़नामा दाख़िल करने का निर्देश दिया है.

13 जनवरी, 2022 को हरिद्वार में पुलिस हिरासत में जितेंद्र नारायण त्यागी. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने हरिद्वार धर्म संसद में मुसलमानों के खिलाफ कथित तौर पर नफरत फैलाने वाला भाषण देने के मामले में आरोपी जितेंद्र नारायण त्यागी को मंगलवार (17 मई) को तीन महीने की अंतरिम जमानत दे दी.

जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने जितेंद्र नारायण त्यागी को नफरत फैलाने वाला भाषण नहीं देने और इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल या सोशल मीडिया पर कोई टिप्पणी नहीं करने का वादा करते हुए एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश भी दिया.

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने देश के विभिन्न स्थानों पर धर्म संसद जैसे कार्यक्रमों के आयोजन पर चिंता जताई थी और  जितेंद्र नारायण त्यागी उर्फ ​​वसीम रिजवी की जमानत याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था.

इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म अपनाने से पहले त्यागी का नाम वसीम रिजवी था. वह उत्तर प्रदेश के शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व सदस्य और अध्यक्ष रह चुके हैं.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, मंगलवार को राज्य ने अदालत से कहा कि हर कीमत पर सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखा जाना चाहिए. उसने कहा कि त्यागी को कोई भड़काऊ बयान नहीं देना चाहिए.

इस साल मार्च में उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा उनकी जमानत याचिका खारिज कर दिए जाने के बाद त्यागी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हरिद्वार धर्म संसद मामले में जितेंद्र त्यागी उर्फ वसीम रिजवी को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था, कि त्यागी के भाषण की भाषा भड़काऊ थी, जिसका उद्देश्य युद्ध छेड़ना, आपसी दुश्मनी को बढ़ावा देना और पैगंबर मुहम्मद का अपमान करना था.

हरिद्वार कोतवाली के अंतर्गत ज्वालापुर के निवासी नदीम अली द्वारा दो जनवरी 2022 को की गई शिकायत के आधार पर त्यागी तथा अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था.

अली ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि पिछले साल 17 से 19 दिसंबर तक हिंदू संतों द्वारा हरिद्वार में धर्म संसद या धार्मिक संसद का आयोजन किया गया और इसकी आड़ में वहां आए लोगों को मुसलमानों के खिलाफ भड़काया गया था.

शिकायत में दावा किया गया कि पवित्र कुरान और पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया. उन्होंने कहा कि ये भड़काऊ बयान बाद में सोशल मीडिया पर देखे गए थे.

अली ने आरोप लगाया कि वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण त्यागी, यति नरसिंहानंद और अन्य लोगों ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर डाला. एफआईआर में यह भी आरोप है कि प्रबोधानंद गिरि ने हरिद्वार की मस्जिदों में रहने वाले लोगों के खिलाफ हिंसा फैलाने का प्रयास किया.

मालूम हो कि त्यागी के कथित हेट स्पीच के संबंध में उनके खिलाफ उत्तराखंड पुलिस ने आईपीसी की धारा 153ए (विभिन्न समूहों के बीच धर्म, जाति, जन्मस्थान, निवास के आधार पर शत्रुता को बढ़ावा देना) और 298 (धार्मिक भावनाएं आहत करने के लिए जान-बूझकर टिप्पणी करना) के तहत मामला दर्ज किया है.

इससे पहले जनवरी 2022 को हरिद्वार की एक स्थानीय अदालत ने धर्म संसद के दौरान पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोपी जितेंद्र त्यागी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी.

उत्तराखंड के हरिद्वार में 17-19 दिसंबर 2021 के बीच हिंदुत्ववादी नेताओं और कट्टरपंथियों द्वारा इस ‘धर्म संसद’ का आयोजन किया गया था, जिसमें मुसलमान एवं अल्पसंख्यकों के खिलाफ खुलकर नफरत भरे भाषण (हेट स्पीच) दिए गए, यहां तक कि उनके नरसंहार का आह्वान भी किया गया था.

कट्टर हिंदुत्ववादी नेता यति नरसिंहानंद इस धर्म संसद के आयोजकों में से एक थे. नरसिंहानंद पहले ही नफरत भरे भाषण देने के लिए पुलिस की निगाह में रहे हैं.

यति नरसिंहानंद ने मुस्लिम समाज के खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी करते हुए कहा था कि वह ‘हिंदू प्रभाकरण’ बनने वाले व्यक्ति को एक करोड़ रुपये देंगे.

हरिद्वार धर्म संसद मामले में नरसिंहानंद को 7 फरवरी को जमानत मिल गई थी, लेकिन अन्य लंबित मामलों के कारण उन्हें जेल से रिहा नहीं किया गया था. हरिद्वार की एक स्थानीय अदालत से बीते 17 फरवरी को जमानत मिलने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था.

मामले में 15 लोगों के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गई. इस आयोजन का वीडियो वायरल होने पर मचे विवाद के ​बाद 23 दिसंबर 2021 को इस संबंध में पहली एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें सिर्फ जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी को नामजद किया गया था. इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म अपनाने से पहले त्यागी का नाम वसीम रिजवी था.

एफआईआर में 25 दिसंबर 2021 को बिहार निवासी स्वामी धरमदास और साध्वी अन्नपूर्णा उर्फ पूजा शकुन पांडेय के नाम भी जोड़े गए थे. पूजा शकुन पांडेय निरंजनी अखाड़े की महामंडलेश्वर और हिंदू महासभा के महासचिव हैं.

इसके बाद बीते एक जनवरी को इस एफआईआर में यति नरसिंहानंद और रूड़की के सागर सिंधुराज महाराज का नाम शामिल किया गया था.

बीती दो जनवरी को राज्य के पुलिस महानिदेशक ने मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का भी गठन किया था. उसके बाद बीते तीन जनवरी को धर्म संसद के संबंध में 10 लोगों के खिलाफ दूसरी एफआईआर दर्ज की गई थी.

दूसरी एफआईआर में कार्यक्रम के आयोजक यति नरसिंहानंद गिरि, जितेंद्र नारायण त्यागी (जिन्हें पहले वसीम रिज़वी के नाम से जाना जाता था), सागर सिंधुराज महाराज, धरमदास, परमानंद, साध्वी अन्नपूर्णा, आनंद स्वरूप, अश्विनी उपाध्याय, सुरेश चव्हाण और प्रबोधानंद गिरि को नामजद किया गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)