राजनीति

यूपी: रिहाई के बाद बोले आज़म ख़ान- मेरी तबाहियों में मेरे अपनों का बड़ा योगदान

सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद सीतापुर जेल से रिहा हुए समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक आज़म ख़ान ने प्रेस वार्ता में बिना किसी का नाम लिए कहा कि उनकी जड़ों में ज़हर डालने वाले उनके अपने ही हैं.

सीतापुर जेल से रामपुर लौटे सपा के वरिष्ठ नेता आज़म खान. (फोटो: पीटीआई)

रामपुर: करीब 27 माह बाद सीतापुर जेल से रिहा होकर शुक्रवार को रामपुर पहुंचे समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान ने संवाददाताओं से दो-टूक लहजे में कहा कि उनकी तबाहियों में उनके अपनों का बड़ा योगदान है.

रामपुर में आजम ने कहा, ‘मेरी तबाहियों में मेरा अपना हाथ है, मेरे अपने लोगों का बड़ा योगदान है. मालिक से दुआ है कि उन्हें सदबुद्धि आए.’

इससे पहले गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने खान को अंतरिम जमानत दी थी, इसके बाद सांसद-विधायक स्थानीय अदालत ने सीतापुर जेल प्रशासन को देर रात पत्र भेजकर खान को रिहा करने को कहा था.

शीर्ष न्यायालय ने खान को अंतरिम जमानत देते हुए कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत उसे (कोर्ट को) मिले विशेषाधिकार का उपयोग करने के लिए यह एक उपयुक्त मामला है.

जस्टिस एल. नागेश्वर राव, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने कहा था, ‘याचिकाकर्ता को भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत पुलिस थाना कोतवाली, रामपुर, उत्तर प्रदेश में वर्ष 2020 में दर्ज प्राथमिकी के संदर्भ में नियम और शर्तों पर अंतरिम जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया जाता है.’

शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि नियमित जमानत के लिए याचिका पर फैसला आने तक खान अंतरिम जमानत पर रहेंगे.

इससे पहले, उत्तर प्रदेश सरकार ने खान की जमानत याचिका का विरोध करते हुए उन्हें ‘भूमि कब्जा करने वाला’ और ‘आदतन अपराधी’ बताया था..

शीर्ष न्यायालय ने 17 मई को मामले पर सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. कोर्ट ने इससे पहले खान की जमानत अर्जी पर सुनवाई में देरी पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि यह न्याय का मजाक उड़ाने जैसा है.

इसके बाद खान को शुक्रवार सुबह सीतापुर जेल से रिहा कर दिया गया. खान के बेटे एवं विधायक अब्दुल्ला आजम, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के नेता शिवपाल सिंह यादव सहित बड़ी संख्या में समर्थकों ने करीब 27 माह बाद जेल से बाहर आने पर आजम खान का स्वागत किया.

इसके बाद आजम खान लंबे काफिले के साथ रामपुर पहुंचे. रामपुर में शाम को पत्रकारों से बातचीत में आजम खान ने ‘सर्वोच्च अदालत की जय’ करते हुए अपनी बात की शुरुआत की. उन्होंने उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता कपिल सिब्बल के लिए बहुत ही आदर भाव जताया.

आजम ने कहा ‘कपिल सिब्बल साहब का शुक्रिया. शुक्रिया बहुत छोटा शब्द है, मेरे पास शब्द नहीं हैं कि मैं अपने प्रति उनके व्यवहार के लिए शुक्रिया अदा कर सकूं.’

आजम खान ने सर्वोच्च अदालत के बारे में कहा, ‘विधाता ने उन्हें जो ताकत दी है, उसने उसका बहुत ही ईमानदारी के साथ इस्तेमाल किया, और जब तक ऐसे न्यायाधीश हिंदुस्तान में बाकी हैं…सर्वोच्च अदालत जिंदाबाद.’

इससे पहले समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर उनकी (आजम की) लड़ाई में साथ न देने और यादव से मुसलमानों की नाराजगी के सवाल पर उन्होंने कहा कि ‘मेरी तबाहियों में मेरा अपना हाथ है.’

बता दें कि खान की रिहाई के बाद अखिलेश यादव ने ट्वीट कर इस फैसले का स्वागत किया था. यादव ने कहा था, ‘जमानत के इस फैसले से सर्वोच्च न्यायालय ने न्याय को नए मानक दिए हैं. पूरा ऐतबार है कि वे अन्य सभी झूठे मामलों-मुकदमों में बाइज्जत बरी होंगे.’

अमर उजाला के अनुसार, उन्होंने कहा, ‘हमारी जड़ों में जहर डालने वाले हमारे अपने ही हैं. जुल्म और जालिम की मुद्दत लंबी नहीं होती, जब जुल्म खत्म होता है, तब जालिम भी खत्म हो जाता है. हम आपके सामने जिंदा खड़े हैं ये किसी आश्चर्य से कम नहीं है. ‘

अपने राजनीतिक भविष्य के बारे में खान ने कहा कि उनका 40 साल का सफर बेकार नहीं जाएगा. उनका वक्त फिर लौटकर आएगा.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सरकार या सरकार की पार्टी (भारतीय जनता पार्टी) को मुझसे इतनी घृणा क्यों है, आज तक वह यह नहीं समझ सके. उन्होंने कहा कि वह इसे जानने की कोशिश करेंगे.

उन्होंने कहा इस वक्त उनके लिए भाजपा, बसपा या कांग्रेस इसलिए बड़ा सवाल नहीं है, क्योंकि उनके परिवार पर हजारों की तादाद में मुकदमे दर्ज हैं.

उल्लेखनीय है कि हालिया उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले द वायर  ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि आजम खान के खिलाफ 87 आपराधिक मामले लंबित हैं. इनमें से 84 एफआईआर साल 2017 में उत्तर प्रदेश में भाजपा के सत्ता में आने के बाद के दो वर्षों में दर्ज की गई थीं. इन 84 मामलों में से 81 मामले 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले और बाद की अवधि के दौरान दर्ज किए गए थे.

खान के समर्थकों का मानना है कि ये एफआईआर उन्हें अनिश्चितकाल तक जेल में रखने के इरादे से भारतीय जनता पार्टी द्वारा प्राप्त शिकायतों के आधार पर दर्ज की गई हैं.

प्रेस वार्ता में खान ने सवालिया लहजे में पूछा कि मुझ पर मुकदमे कायम कराने वाले कौन लोग हैं, सबसे पहले आठ मुकदमे मेरे ऊपर हुए और उन लोगों ने कहा कि आजम खान ने जबरन मुझसे जमीन छीन ली. उन्होंने कहा कि जिन आठ लोगों ने दीवानी अदालत में मुझ पर मुकदमे किए उन आठों लोगों के भुगतान चेक से किए गए थे.

आजम ने कहा कि जो जमीन दो हजार रुपये बीघा की नहीं थी, उस वक्त उन्होंने एक बीघे के लिए 40 हजार रुपये दिए. सारे लोग मुकदमे हार गए और हमसे लिए पैसे से लोगों ने हज किए, दो बीघा जमीन थी तो आठ बीघा जमीन खरीद लिए.

27 माह के संघर्ष में सपा की भूमिका को लेकर उठे एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ‘मैं खतावार मानता ही नहीं हूं तो माफ किसलिए करूं. मेरे लिए जिसने जितना किया उसका शुक्रिया, जिसने नहीं किया उसका भी शुक्रिया. किसने कितना किया, यह आपसे बेहतर कौन जान सकता है.’

जेल में सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा भेजे एक प्रतिनिधिमंडल से आजम खान द्वारा मुलाकात करने से मना कर दिए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि तब उनकी तबीयत ठीक नहीं थी.

उल्लेखनीय है कि आजम खान ने पिछले दिनों जेल में प्रसपा प्रमुख शिवपाल सिंह यादव और कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम से मुलाकात की लेकिन सपा के वरिष्ठ विधायक रविदास मेहरोत्रा के नेतृत्व में गए प्रतिनिधि मंडल से मुलाकात नहीं की थी.

खान ने दोहराया ‘मैं उन तमाम लोगों का शुक्रगुजार हूं जो मुझसे जेल में मिले, उनका भी शुक्रगुजार हूं जिनसे नहीं मिल सका. उनका भी शुक्रगुजार हूं जिन्होंने मेरे बारे में अच्छी राय बनाई.’

आजम खान ने जोर देकर कहा कि ‘और मैं इसलिए शुक्रगुजार हूं कि मैं वो पहला बदनसीब शख्स हूं, जिसे पूरे चुनाव में माफिया की सूची में नंबर एक पर रखा गया, पहले मेरा नाम, बाद में मुख्तार अंसारी का नाम और फिर अतीक का नाम.’

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के सभी वरिष्ठ नेता चुनावी मंचों से कहते थे कि योगी की सरकार ने माफिया को जेल में भेज दिया है और अगर सपा की सरकार बनी तो सभी जेल से बाहर आ जाएंगे.

पत्रकारों से बातचीत में अत्यंत भावुक आजम खान ने कई घटनाएं गिनाई और कहा कि वह उस वक्त नहीं मरे जब उन्हें कोरोना हुआ था और वह अस्पताल में अकेले जिंदा बचे. उन्होंने कहा, ‘मेरे सामने सारी लाशें गईं, मेरे सामने वॉर्ड खाली होता था और फिर भर जाता था, मैं तब नहीं मरा, मेरे चाहने वालों ने बहुत कोशिश की, मैं फिर जिंदा बाहर आ गया.’

विधानसभा में दसवीं बार सदस्य चुने गए आजम खान ने कहा कि ‘मैंने अपनी सारी जिंदगी एक चीज साबित करने की कोशिश की कि मेरी निष्ठा संदिग्ध नहीं है, मैं जमीर बेचने वाला नहीं हूं, न मैं देश बेचने वाला हूं और न मैं कौम बेचने वाला हूं. ये मैंने आपातकाल के वक्त भी साबित कर दिया था.’

अपने संघर्षों की याद दिलाते हुए आजम खान ने कहा कि ‘जब मैं अलीगढ़ विश्वविद्यालय में छात्रसंघ का महामंत्री था उसी वक्त इमरजेंसी (आपातकाल) लग गई थी, तब भी मैं जेल गया और दो वर्ष बनारस की जेल में रहा. जब जिंदगी की शुरुआत हुई थी तब भी जेल में था और अब जब जिंदगी अपने आखिरी दौर में है तब भी जेल में था.’

जेल की जिंदगी के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनके साथ जो जेल में हुआ, वह उनके चेहरे पर नजर आ रहा है. खान ने कहा कि ‘मैं 27-28 महीने एक ऐसी काल कोठरी में रहा जिसमें उन लोगों को बंद किया जाता था जिन्हें दो दिन बाद फांसी होती. मैं बिल्कुल अकेला रहता था.’

आजम खान ने कहा कि उन्होंने कभी अपने राजनीतिक आकाओं के जूते सीधे नहीं किए, क्योंकि सोने और चांदी के कंगन नहीं चाहिए थे.

आजम ने कहा कि जब ईडी वाले उनसे पूछताछ करने जेल में पांच दिन आए और पूछा कि विदेशों में आपकी कहां-कहां संपत्ति और बैंक खाते हैं, तो उन्होंने उनसे बस इतना कहा कि मुझे आपके सवालात पर गुस्सा नहीं आ रहा है, बल्कि इस बात पर शर्म आ रही है कि मैं कहां पैदा हो गया.’

उन्होंने जेल में एक दारोगा द्वारा की गई पूछताछ की चर्चा करते हुए कहा कि ‘जब दारोगा जी हमारा बयान लेने जेल में आए तो कहा कि आपने बहुत अच्छा विश्वविद्यालय बनाया है, लेकिन आप जमानत मिलने के बाद रामपुर आएं तो कोशिश करिएगा कि भूमिगत रहें. आप पर इतने मुकदमे हैं कि आपका एनकाउंटर भी हो सकता है.’

खान ने कहा कि ‘आज मुसलमानों को जो भी सजा मिल रही है, यह उनके ‘मतदान के अधिकार’ की सजा मिल रही है. उन्होंने कहा कि सारे राजनीतिक दल यह समझते हैं कि मुसलमान सियासी जमातों के समीकरण खराब कर देते हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)