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अग्निपथ योजना: व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बीच सरकार ने साल 2022 के लिए आयु सीमा बढ़ाई

अग्निपथ योजना के ख़िलाफ़ देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों के बीच रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि पिछले दो वर्षों के दौरान भर्ती करना संभव नहीं हुआ, सरकार ने साल 2022 के लिए प्रस्तावित भर्ती प्रक्रिया के लिए आयु सीमा पूर्व में घोषित 21 साल से बढ़ाकर 23 साल कर दी है.

नई दिल्ली के जंतर मंतर में अग्निपथ योजना का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने की कोशिश करते सुरक्षाकर्मी. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली/पटना/लखनऊ: सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए घोषित ‘अग्निपथ’ योजना के खिलाफ ट्रेनों में आगजनी, सार्वजनिक और पुलिस के वाहनों को आग लगाने की घटनाओं के बीच बृहस्पतिवार को सरकार ने वर्ष 2022 के लिए इस प्रक्रिया के तहत भर्ती की उम्र पूर्व में घोषित 21 साल से बढ़ाकर 23 साल कर दी.

सरकार ने मंगलवार को अग्निपथ योजना की घोषणा करते हुए कहा था कि सभी नई भर्तियों के लिए आयु साढ़े 17 से 21 वर्ष के बीच होनी चाहिए.

रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि पिछले दो वर्षों के दौरान भर्ती करना संभव नहीं हुआ, सरकार ने फैसला किया है कि 2022 के लिए प्रस्तावित भर्ती प्रक्रिया के लिए एकबारगी (आयु सीमा में) छूट दी जाएगी.’

वहीं, अग्निपथ योजना के खिलाफ कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हो रहा है. इस बीच सरकार ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि नया मॉडल न केवल सशस्त्र बलों में नई क्षमता पैदा करेगा बल्कि यह युवाओं को लिए निजी क्षेत्र के रास्ते भी खोलेगा और उन्हें अवकाश प्राप्त करने के समय मिलने वाले वित्तीय पैकेज से उद्यमी बनने में भी मदद करेगा.

वित्त मंत्रालय ने बैंकों से ‘अग्निवीर’ के लिए रोज़गार के अवसर तलाशने को कहा

इस बीच, वित्त मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को ‘अग्निवीर’ के लिए रोजगार के अवसर तलाशने को लेकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों के साथ बैठक की.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 14 जून को सशस्त्र बलों के लिए एक अल्प अवधि की नियुक्ति योजना ‘अग्निपथ’ को मंजूरी दी. इस योजना के तहत चयनित युवाओं को ‘अग्निवीर’ के रूप में जाना जाएगा.

वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा कि यह भी निर्णय किया गया कि बैंक कौशल बढ़ाने, कारोबार स्थापित करने के लिए शिक्षा और स्वरोजगार को लेकर उपयुक्त कर्ज सुविधाओं के माध्यम से ‘अग्निवीर’ को मदद देने की संभावनाएं तलाशेंगे.

बयान के अनुसार ‘अग्निवीर’ को इस तरह का समर्थन देने के लिए मुद्रा और ‘स्टैंड अप इंडिया’ जैसी मौजूदा सरकारी योजनाओं का लाभ उठाया जाएगा.

वित्तीय सेवा सचिव ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, सरकारी बीमा कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों के साथ बैठक की. बैठक का मकसद इस बात का पता लगाना था कि ये संस्थान सेवा अवधि समाप्त होने पर ‘अग्निवीर’ की मदद कैसे कर सकते हैं.

बैठक में सैन्य मामलों के विभाग के संयुक्त सचिव ने अग्निपथ योजना के मुख्य पहलुओं पर जानकारी दी.

बयान के अनुसार, बैठक के दौरान यह निर्णय किया गया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, सरकारी बीमा कंपनियां और वित्तीय संस्थान उपयुक्त लाभ/छूट आदि के माध्यम से शैक्षणिक योग्यता और कौशल के आधार पर ‘अग्निवीर’ के लिए रोजगार के अवसर तलाशेंगे.

इससे पहले शिक्षा मंत्रालय ने कहा था कि वह ‘अग्निवीरों’ के करियर की भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए ऐसे रक्षा कर्मियों के लिए कौशल आधारित तीन-वर्षीय स्नातक डिग्री कार्यक्रम शुरू करेगा, जो रक्षा प्रतिष्ठानों में उनके कार्यकाल के दौरान प्राप्त कौशल प्रशिक्षण को मान्यता देगा.

मंत्रालय के अधिकारियों ने यह भी बताया था कि राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) रक्षा अधिकारियों की सलाह से एक विशेष कार्यक्रम की शुरुआत कर रहा है ताकि 10वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाले ‘अग्निवीरों’ को उनकी शिक्षा आगे बढ़ाने और उनके सेवा क्षेत्र के लिए प्रासंगिक पाठ्यक्रम विकसित करके 12वीं कक्षा का प्रमाणपत्र प्राप्त करने में सक्षम बनाया जा सके.

इससे पहले केंद्र ने कहा था कि ‘अग्निवीर’ सैनिकों के सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें सीएपीएफ और असम राइफल्स की भर्ती में प्राथमिकता दी जाएगी.’

मालूम हो कि ‘अग्निपथ’ योजना के तहत रोजगार के पहले वर्ष में एक ‘अग्निवीर’ का मासिक वेतन 30,000 रुपये होगा, लेकिन हाथ में केवल 21,000 रुपये ही आएंगे. हर महीने 9,000 रुपये सरकार के एक कोष में जाएंगे, जिसमें सरकार भी अपनी ओर से समान राशि डालेगी.

इसके बाद दूसरे, तीसरे और चौथे वर्ष में मासिक वेतन 33,000 रुपये, 36,500 रुपये और 40,000 रुपये होगा. प्रत्येक ‘अग्निवीर’ को ‘सेवा निधि पैकेज’ के रूप में 11.71 लाख रुपये की राशि मिलेगी और इस पर आयकर से छूट मिलेगी.

योजना के खिलाफ कई राज्यों में हिंसक प्रदर्शन जारी

बिहार में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतर कर इमारतों और वाहनों में तोड़फोड़ की. रेलवे स्टेशन पर पहुंचकर ट्रेनों के डिब्बों में आग लगाने के साथ रेल एवं सड़क यातायात को बाधित किया.

अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) संजय सिंह ने बताया कि, ‘अब तक हमने हिंसा के सिलसिले में 125 लोगों को गिरफ्तार किया है. दो दर्जन प्राथमिकी दर्ज की गई हैं. प्रदर्शनकारियों के साथ हुई झड़प में राज्य भर में कम से कम 16 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं.’

बिहार के एक दर्जन से अधिक जिलों में रेलवे पटरियों पर प्रदर्शन करने के अलावा प्रदर्शनकारियों ने छपरा और भभुआ में ट्रेन के डिब्बों में आग लगा दी जबकि कई ट्रेनों में प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ की गई.

प्रदर्शनकारियों ने भागलपुर, बेगूसराय, जहानाबाद, बक्सर, कटिहार और गया जैसे शहरों में सड़कों पर टायर जलाकर यातायात बाधित किया और योजना को वापस लेने की मांग को लेकर बैनरों के साथ मार्च निकाला.

इस बीच, जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू)  के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह ने अग्निपथ योजना की समीक्षा की मांग की.

उन्होंने ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा, ‘अग्निपथ योजना के निर्णय से बिहार सहित देशभर के नौजवानों, युवाओं एवं छात्रों के मन में असंतोष, निराशा व अंधकारमय भविष्य (बेरोजगारी) का डर स्पष्ट दिखने लगा है. केंद्र सरकार को अग्निवीर योजना पर अविलंब पुनर्विचार करना चाहिए क्योंकि यह निर्णय देश की रक्षा व सुरक्षा से भी जुड़ा है.’

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, जद (यू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा, ‘अब जब छात्र विरोध कर रहे हैं, तो केंद्र को कोई रास्ता निकालना होगा और देखना होगा कि क्या वह युवाओं को अग्निपथ योजना समझाने में विफल रही है. लेकिन हम विरोध के उस तरीके का समर्थन नहीं करते हैं जिससे सार्वजनिक संपत्ति को बहुत नुकसान हुआ है.’

जद (यू) के वरिष्ठ नेता और बिहार के मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने केंद्र से छात्रों के प्रतिनिधियों से बात करने का आह्वान किया.

विपक्षी दलों ने बेरोजगार युवाओं की शिकायतों की अनदेखी करने के लिए केंद्र पर हमला किया, खासकर ग्रामीण इलाकों में और सशस्त्र बलों का सम्मान नहीं करने के लिए.

बिहार की प्रमुख विपक्षी पार्टी राजद के नेता तेजस्वी यादव बीते दिन से ही सोशल मीडिया पर इस कदम को लेकर केंद्र पर हमले कर रहे हैं.

हरियाणा के पलवल में भी बृहस्पतिवार को ‘अग्निपथ योजना’ के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक हो गया. इस दौरान पथराव और गाड़ियों में आगजनी की गई. पुलिस ने हालात पर काबू पाने के लिए बल प्रयोग किया और प्रशासन ने इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया है. पुलिस ने 20 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है.

अधिकारियों ने बताया कि गुड़गांव, रेवाड़ी, चरखी दादरी, हिसार और रोहतक में भी विरोध प्रदर्शन हुए.

पलवल के पुलिस अधीक्षक मुकेश मल्होत्रा ने एक बयान में बताया कि घटना में दो एसएचओ (थानेदार) सहित 15 पुलिस कर्मचारियों को गंभीर चोटें आई हैं, जबकि पांच सरकारी गाड़ियों को उपद्रवियों ने जलाकर नष्ट कर दिया.

उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने जिला उपायुक्त कैंप कार्यालय में भी पथराव कर दिया और कैंप कार्यालय के भीतर दाखिल हो गए और गार्ड कक्ष में आग लगा दी.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, रोहतक में जींद के लिजवाना गांव के रहने वाले 23 वर्षीय युवक ने अपने परिवार के साथ एक पेइंग गेस्ट आवास में अपने कमरे के अंदर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली और दावा किया कि वह सशस्त्र बलों में भर्ती की तैयारी कर रहा था और नई नीति से निराश था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)