जन की बात

कर्नाटक: मुस्लिम व्यापारी द्वारा मंदिर में केले की आपूर्ति करने को लेकर विवाद

कर्नाटक के मंगलुरु शहर के बाहर कुडुपू स्थित अनंत पद्मनाभ मंदिर का मामला. मंदिर प्रशासन ने सबसे कम बोली लगाने वाले मुस्लिम ठेकेदार को मंदिर में विभिन्न सेवाओं और कार्यक्रमों के लिए नियमित आधार पर केले की आपूर्ति करने का ठेका दिया था. दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

मैंगलुरु: कर्नाटक के मंगलुरु शहर के बाहर कुडुपू स्थित अनंत पद्मनाभ मंदिर में पिछले साल एक मुस्लिम व्यापारी को केले की आपूर्ति का ठेका देने का मामला सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है.

मंदिर प्रशासन ने सबसे कम बोली लगाने वाले ठेकेदार को एक जुलाई, 2021 से 30 जून, 2022 तक की अवधि के लिए मंदिर में विभिन्न सेवाओं और कार्यक्रमों के लिए नियमित आधार पर केले की आपूर्ति करने का ठेका दिया था.

मंदिर के लिए केले की आपूर्ति का ठेका मुस्लिम व्यापारी को दिए जाने की जानकारी हाल ही में सामने आने के बाद इस पर विवाद खड़ा हो गया है और दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों ने विरोध करना शुरू कर दिया है.

मंदिर प्रशासन के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने पिछले साल व्यापारियों से केले की आपूर्ति के लिए निविदाएं आमंत्रित की थीं. निविदाएं जमा करने वाले चार बोलीदाताओं में से मुस्लिम व्यापारी ने सबसे कम कीमत का उल्लेख किया था, इसलिए उन्हें ठेका दिया गया था.

हाल ही में खबर सामने आई थी कि मंदिर में केले की आपूर्ति कर रहे मुस्लिम व्यापारी को लेकर हिंदू संगठनों ने अपना विरोध जताया है.

हाल ही में कार्यभार संभालने वाले मंदिर के कार्यकारी अधिकारी जगदीश ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि 30 जून के बाद जब वर्तमान अनुबंध समाप्त हो जाएगा तो इस मुद्दे को सुलझा लिया जाएगा.

बीते दिनों कर्नाटक के नागरिकों के एक समूह ने मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई को एक पत्र लिखकर कहा था कि अल्पसंख्यक समुदायों पर हालिया हमलों से ‘शांति, विविधता और बहुलवाद के नष्ट होने’ का खतरा है, जिसके लिए राज्य लंबे समय से जाना जाता है और जिसकी वजह से उसकी प्रशंसा की जाती है.

उन्होंने बोम्मई से यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का अनुरोध किया था कि हिंसा भड़काने और भय पैदा करने वालों को यह स्पष्ट संदेश जाना चाहिए कि किसी गैरकानूनी व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसा करने वालों को दंडित किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि ‘विशेष समुदायों को अलग-थलग करने और उन्हें उनके मौलिक अधिकारों से वंचित करने के उद्देश्य से विभाजनकारी कृत्यों की वर्तमान में वृद्धि’ न केवल विकास को बाधित करेगी, बल्कि राज्य की प्रतिष्ठा को भी चोट पहुंचाएगी.

उन्होंने कहा कि हाल में ‘मुस्लिम, ईसाई और दलित समुदायों पर विभिन्न प्रकार के हमलों’ ने कर्नाटक के समावेशी स्वभाव पर गर्व करने वालों को झकझोर कर रख दिया है.

समूह ने कहा कि इससे प्रगति और नवाचार में बाधा उत्पन्न होगी, उद्यमियों और निवेशकों का विश्वास कम होगा तथा नागरिकों में असुरक्षा, संदेह, भय और आक्रोश बढ़ेगा. उन्होंने कहा, ‘ऐसे माहौल में ‘मेक इन इंडिया’ का सपना संभव नहीं है, जहां लोग ‘भारत में डरे हुए’ हैं.’

मालूम हो कि कर्नाटक के दक्षिणपंथी समूहों द्वारा लगातार हिजाब, हलाल मीट और मस्जिदों में अजान जैसे मुद्दों पर मुस्लिमों को निशाना बनाया है. कुछ दक्षिणपंथी सदस्य फल बेचने वाले मुस्लिम विक्रेताओं पर भी निशाना साध रहे हैं और हिंदुओं से मुस्लिम विक्रेताओं से फल नहीं खरीदने को कह रहे हैं.

पिछले साल बोम्मई के राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही राज्य में विवादित धर्मांतरण विरोधी विधेयक पारित हो गया था.

स्कूल-कॉलेजों में हिजाब पर विवाद शुरू हुआ, जिसके बाद कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया. हलाल मीट के खिलाफ अभियान शुरू हुआ और उसके बाद मस्जिदों में अजान के दौरान लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर भी विरोध दर्ज कराया गया है.

इसके अलावा मुस्लिम ड्राइवरों का बहिष्कार, मंदिरों में मुस्लिमों द्वारा दुकानें लगाने और धार्मिक मेलों में मुस्लिमों को भाग लेने से रोकने वाली दक्षिणपंथी समूहों की गतिविधियां भी कर्नाटक में जारी रहीं.

बीते मई महीने में कर्नाटक के कई विद्वानों और शिक्षाविदों ने राज्य सरकार की समितियों और निकायों से इस्तीफा देकर राज्य में चल रहे शिक्षा के ‘भगवाकरण’ का विरोध किया था.

इसी महीने मांड्या जिले के श्रीरंगपट्टनम शहर में एक मस्जिद में हिंदुत्व समूहों द्वारा घुसने और 4 जून को पूजा करने की धमकी दी गई थी, जिसके बाद सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)