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महाराष्ट्र: चार साल से बतौर शरणार्थी देश में रह रहे अफ़ग़ानिस्तान के सूफ़ी धर्मगुरु की हत्या

अफ़ग़ानिस्तान के सूफ़ी धर्मगुरु ख़्वाजा अहमद ज़रीफ़ चिश्ती उर्फ़ ज़रीफ़ बाबा पिछले चार साल से शरणार्थी के तौर पर भारत में रह रहे थे. पुलिस ने बताया कि ऐसा लगता है कि हत्या का कारण ज़मीन या पैसों से संबंधित विवाद है. पुलिस ने इस संबंध में एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है, जबकि तीन अन्य फ़रार हैं.

अहमद जरीफ चिश्ती. (फोटो साभार: फेसबुक)

मुंबई: महाराष्ट्र के नासिक जिले में अफगानिस्तान के सूफी धर्मगुरु की कथित तौर पर संपत्ति विवाद में हत्या कर दी गई. एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी. अधिकारी ने बताया कि मंगलवार (पांच जुलाई) शाम को हुई इस हत्या के सिलसिले में एक शख्स को हिरासत में लिया गया है.

नासिक के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) सचिन पाटिल ने बताया कि महाराष्ट्र में नासिक के येवला शहर में चार अज्ञात लोगों ने ख्वाजा अहमद जरीफ चिश्ती उर्फ ज़रीफ बाबा (38 वर्ष) की गोली मारकर हत्या कर दी.

उन्होंने बताया कि वह चार साल से शरणार्थी के तौर पर भारत में रह रहे थे और सोशल मीडिया पर उन्हें लोग बड़ी संख्या में फॉलो करते थे.

पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने प्रेस वार्ता में बताया कि संदिग्धों की तलाश की जा रही है.

पाटिल ने बताया कि वह चार साल पहले अफगानिस्तान से भारत आए थे और उन्हें शरणार्थी का दर्जा मिल गया था. वह सिन्नर तहसील के वावी इलाके में एक महिला के साथ रहते थे और माना जाता है कि महिला भी अफगानिस्तान की नागरिक हैं.

शुरुआती जांच के मुताबिक, वह अपने तीन-चार अनुयायियों के साथ मंगलवार दोपहर को येवला गए थे और वहां कोई धार्मिक रस्म की.

पुलिस के अधिकारी के मुताबिक, इसके बाद वे ‘भूमिपूजन’ के लिए रवाना हुए और चिनचोली एमआईडीसी (महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम) इलाके में पहुंचे.

एसपी ने बताया कि रस्म के बाद शाम में जब चिश्ती अपनी कार में बैठे तो उनके चालक ने पिस्तौल से उनके सिर में कथित रूप से गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई.

पुलिस ने हत्या को अंजाम देने के बाद मौके से फरार हुए आरोपियों के नामों का खुलासा नहीं किया है.

पाटिल ने बताया कि कुछ लोगों को वह खून से लथपथ पड़े मिले तो उन्होंने पुलिस को सूचित किया. एसपी के मुताबिक, चिश्ती को येवला के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है, जबकि चालक समेत तीन अन्य फरार हैं.

उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि हत्या का कारण जमीन या पैसों से संबंधित विवाद है. एक अन्य अधिकारी ने बताया कि चिश्ती ने हाल में अपने एक दोस्त के नाम पर वावी में 15 एकड़ जमीन खरीदी थी.

अधिकारी ने बताया कि वह शरणार्थी होने की वजह से भारत में संपत्ति नहीं खरीद सकते थे, लिहाजा वह अपने जानकारों के नाम पर संपत्ति खरीदते थे.

रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस का दावा है कि मामले में कथित तौर पर पांच संदिग्धों की पहचान की गई है.

चिश्ती, जिसे ‘सूफी बाबा’ के नाम से जाना जाता थे, एक अफगान शरणार्थी थे, जो कथित तौर पर अब सत्ताधारी तालिबान के हाथों फांसी के डर से देश छोड़कर भाग गए थे.

माना जाता है कि सरकार द्वारा शरणार्थी का दर्जा दिए जाने के बाद से वह पिछले चार वर्षों से भारत में रह रहे हैं. वह इससे पहले कर्नाटक और दिल्ली में रह चुके थे और फिलहाल नासिक में रह रहे थे.

उनका यूट्यूब चैनल भी था, जहां उन्हें लोग बड़ी संख्या में फॉलो करते हैं. अधिकारियों के मुताबिक, उन्हें उनके अनुयायियों से चंदा मिलता था. मामले की जांच की जा रही है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि उनकी अधिकांश आय उनके यूट्यूब चैनल से आती थी, जहां वे अपने उपदेश के वीडियो पोस्ट करते थे. 2017 में बने चैनल के 2.27 लाख फॉलोअर्स हैं और इसे 6 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिले हैं. पुलिस ने कहा कि उन्होंने जनता से दान से भी आय अर्जित की थी.

पुलिस ने कहा कि चिश्ती के पास भारत में 3 करोड़ रुपये की संपत्ति है. चूंकि वह अफगानिस्तान से एक शरणार्थी हैं, वह भारतीय कानूनों के अनुसार संपत्ति नहीं खरीद सकते हैं, इसलिए सभी संपत्तियां भारतीय नागरिकों के नाम पर खरीदी गईं जिन्हें वह जानते थे.

पुलिस ने कहा कि उन्होंने येवला में 15 एकड़ जमीन और एक कार भी खरीदी थी. उन्हें संदेह है कि हत्यारे वही हो सकते हैं, जिन्हें चिश्ती ने अपनी संपत्ति का मालिक बताया था.

पुलिस ने कहा कि एक महिला, जो अफगानिस्तान की नागरिक हैं, उनके साथ रह रही थीं. उनका दावा है कि वह उनकी पत्नी हैं, लेकिन पुलिस को उनके पास से कोई मैरिज सर्टिफिकेट नहीं मिला है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)