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महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई की आरे कॉलोनी में मेट्रो कार शेड निर्माण पर लगी रोक हटाई

उद्धव ठाकरे सरकार ने 2019 में पर्यावरण संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए मुंबई के आरे वन क्षेत्र में मेट्रो-3 कार शेड परियोजना के काम पर रोक लगा दी थी, लेकिन एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस द्वारा 30 जून को क्रमश: मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद मेट्रो कार शेड पर काम फिर से शुरू करने का निर्णय लिया गया था. आरे वन क्षेत्र मुंबई के उपनगर गोरेगांव में एक हरित क्षेत्र है. इस शहर का ‘ग्रीन लंग्स’ भी कहा जाता है.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार (21 जुलाई) को मुंबई की आरे कॉलोनी में मेट्रो-3 कारशेड के निर्माण पर लगी रोक हटा दी.

आरे मेट्रो कार शेड पर काम फिर से शुरू करने का निर्णय एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस द्वारा बीते 30 जून को क्रमश: मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद लिया गया था.

शहरी विकास विभाग के एक अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘हमने पूरे मामले की जांच की है और मामले को कैबिनेट के सामने लाने की जरूरत नहीं है. हमने कार्यान्वयन एजेंसी मुंबई मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एमएमआरसी) से प्रस्ताव तैयार करने और ठेकेदार जुटाने के लिए कहा है.’

अखबार ने अधिकारियों के हवाले से खबर दी कि शहरी विकास विभाग और एमएमआरसी ने बीते 20 जुलाई को राजनीतिक स्तर पर इस मामले पर चर्चा की थी.

2019 में तत्कालीन उद्धव ठाकरे सरकार ने पर्यावरण संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए आरे मेट्रो रेल कार शेड पर काम रोक दिया था.

आरे क्षेत्र में कार शेड स्थापित करने के फैसले को पर्यावरणविदों के विरोध का सामना करना पड़ा था, क्योंकि इस परियोजना में सैकड़ों पेड़ों को काटा जाना है. बाद में ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार ने परियोजना को कांजुरमार्ग में स्थानांतरित करने की घोषणा की थी.

तब फडणवीस ने कहा था, ​‘अगर कार शेड को कांजुरमार्ग में स्थानांतरित किया जाता है तो इससे और अधिक संख्या में पेड़ कटेंगे, परियोजना में देरी होगी और करोडों रुपये बर्बाद होंगे.​’

हालांकि, बाद में कांजुरमार्ग में कार शेड निर्माण करने की योजना अटक गई थी.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 14 दिसंबर 2020 को मुंबई उपनगरीय जिला कलेक्टर द्वारा कांजुरमार्ग क्षेत्र में मेट्रो कार शेड के निर्माण के लिए 102 एकड़ जमीन के आवंटन के आदेश पर रोक लगा दी थी. अदालत ने अधिकारियों को उक्त जमीन पर कोई भी निर्माण कार्य करने से भी रोक दिया था.

इससे पहले अक्टूबर 2019 में जब देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री थे, तब मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने कार शेड के निर्माण के लिए क्षेत्र में 2,000 से अधिक पेड़ों को काट दिया था. क्षेत्र में पेड़ों की कटाई को चुनौती देने संबंधी याचिकाओं को बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा खारिज करने के बाद केवल 24 घंटों के भीतर पेड़ों को काट दिया गया था.

पेड़ों की कटाई के बाद पूरे शहर में स्थानीय आदिवासियों ने विरोध प्रदर्शन किए थे. तब पुलिस ने आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई का विरोध कर रहे पर्यावरण कार्यकर्ताओं समेत कम से कम 29 लोगों को गिरफ्तार किया था.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के विधायक जितेंद्र आव्हाड, शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी और शिवसेना नेता व पूर्व महापौर शुभा राउल समेत कई विपक्षी नेताओं को भी हिरासत में लिया गया था.

द वायर की रिपोर्ट के मुताबिक, अब सालों बाद चिंतित मुंबईवासी एक बार फिर आरे कॉलोनी में कार शेड बनाने के खिलाफ खड़े हो गए हैं.

बता दें कि मेट्रो-3 कार शेड को 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण ने सबसे पहले आरे में बनाने का प्रस्ताव दिया था, जिसे स्थानीय एनजीओ वनशक्ति ने बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.

इसके बाद फडणवीस भी इसी प्रस्ताव पर आगे बढ़े, लेकिन पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कार शेड के लिए आरे में पेड़ काटे जाने का कड़ा विरोध किया.

शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन के 2019 में सत्ता में आने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस फैसले को पलट दिया और मेट्रो-3 कार शेड को कांजुर मार्ग पूर्वी उपनगर में बनाने का प्रस्ताव दिया. ठाकरे सरकार ने आरे को आरक्षित वन भी घोषित कर दिया था.

लेकिन, 30 जून को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके उपमुख्यमंत्री फडणवीस ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ठाकरे सरकार के पिछले फैसले को पलट दिया.

आरे वन क्षेत्र मुंबई के उपनगर गोरेगांव में एक हरित क्षेत्र है. 1,800 एकड़ में फैले इस वन क्षेत्र को शहर का ‘ग्रीन लंग्स’ भी कहा जाता है. आरे वन में तेंदुओं के अलावा जीव-जंतुओं की करीब 300 प्रजातियां पाई जाती हैं. यह संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान से जुड़ा है.

पर्यावरण कार्यकर्ताओं के अनुसार, वन न केवल शहर के लोगों को ताजा हवा देते हैं, बल्कि यह वन्यजीवों के लिए प्रमुख प्राकृतिक वास है और इनमें से कुछ तो स्थानिक प्रजातियां हैं. इस वन में करीब पांच लाख पेड़ हैं और कई नदियां और झीलें यहां से गुजरती हैं.