राजनीति

उपराष्ट्रपति चुनाव में टीएमसी के शामिल न होने के फैसले को मार्गरेट अल्वा ने निराशाजनक बताया

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी की ओर से कहा गया है कि उपराष्ट्रपति पद के लिए संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार के तौर पर मार्गरेट अल्वा का नाम अन्य विपक्षी दलों ने एकतरफा ढंग से तय किया है. पार्टी ने कहा है कि वह अल्वा के ख़िलाफ़ नहीं है और कभी भी इस पद के लिए राजग उम्मीदवार जगदीप धनखड़ का समर्थन नहीं करेगी, लेकिन उसने चुनाव से अनुपस्थित रहने का सैद्धांतिक फैसला किया है.

नई दिल्ली स्थित संसद भवन में 19 जुलाई, 2022 को नामांकन पत्र दाखिल करने के दौरान कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ संयुक्त विपक्ष की उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा ने इस चुनाव से दूर रहने के तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के निर्णय को ‘निराशाजनक’ करार देते हुए उम्मीद जताई है कि ‘साहस की प्रतीक’ ममता बनर्जी इस चुनाव में विपक्ष के साथ खड़ी होंगी.

दूसरी तरफ, ममता बनर्जी की पार्टी ने कहा कि वह अल्वा के खिलाफ नहीं है और कभी भी राजग उम्मीदवार जगदीप धनखड़ का समर्थन नहीं करेगी, लेकिन उसने चुनाव से अनुपस्थित रहने का सैद्धांतिक फैसला किया है, क्योंकि अल्वा का नाम अन्य विपक्षी दलों ने ‘एकतरफा ढंग से’ तय किया.

अल्वा ने ट्वीट किया, ‘उपराष्ट्रपति चुनाव से तृणमूल कांग्रेस का अनुपस्थित रहने का फैसला निराशाजनक है. यह वाद-विवाद, अहंकार और गुस्से का समय नहीं है. यह साहस, नेतृत्व और एकता का समय है.’

उन्होंने कहा, ‘मेरा विश्वास है कि ममता बनर्जी, जो साहस का प्रतीक हैं, विपक्ष के साथ खड़ी होंगी.’

देश के 17 विपक्षी दलों ने बीते 17 जुलाई को उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेता मार्गरेट अल्वा को अपना साझा उम्मीदवार घोषित किया था.

तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का कोई नेता अल्वा के नामांकन के मौके पर नहीं पहुंचा था. ये दोनों दल उस बैठक में भी शामिल नहीं हुए थे, जिसमें अल्वा को विपक्ष का साझा उम्मीदवार बनाने का फैसला हुआ था.

हालांकि पवार ने कहा था कि वह तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के संपर्क में हैं.

अल्वा के ट्वीट पर तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा, ‘हमारे राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कल (21 जुलाई) स्पष्ट किया था कि हम मार्गरेट अल्वा के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवार चुनने का जो एकतरफा फैसला किया गया, उसके खिलाफ हैं. इसमें कोई दूसरा मुद्दा नहीं है.’

उन्होंने कहा, ‘हम आशा करते हैं कि हमारा सैद्धांतिक रुख आने वाले दिनों में विपक्षी एकता को मजबूत करने में मदद करेगा और भविष्य में ऐसे कदम पर विराम लगाएगा.’

घोष ने माकपा के इस आरोप को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि तृणमूल कांग्रेस का कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ममता बनर्जी के बीच सहमति का हिस्सा है.

उन्होंने कहा, ‘पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पद पर रहते धनखड़ ने एक पार्टी विशेष के हित में काम किया. हम ऐसे व्यक्ति का समर्थन नहीं कर सकते. तृणमूल कभी कुछ ऐसा नहीं करेगी, जिससे धनखड़ की संभावना को बल मिलता हो.’

उल्लेखनीय है कि तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बृहस्पतिवार को कहा था कि उनकी पार्टी आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव से दूर रहेगी.

उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस उसे जानकारी दिए बिना विपक्षी उम्मीदवार का फैसला करने के तरीके से सहमत नहीं है.

इस बीच टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने शुक्रवार को कहा कि कांग्रेस को ममता बनर्जी नीत पार्टी को बराबर का साझेदार मानना चाहिए. साथ ही, उन्होंने उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार के चयन के तरीके पर भी आपत्ति जताई.

उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवार चुनने के वास्ते हुई विपक्षी दलों की बैठक से दूर रही टीएमसी ने आरोप लगाया है कि (उम्मीदवार के) नाम की घोषणा को लेकर किए गए संवाददता सम्मेलन से महज 20 मिनट पहले उसे चयनित नाम के बारे में सूचना दी गई.

टीएमसी सांसद ने कहा, ‘हम मार्गरेट अल्वा का काफी सम्मान करते हैं. लेकिन, हम उम्मीदवार के चयन के तरीके के खिलाफ हैं.’

वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने आरोप लगाया कि टीएमसी ने उपराष्ट्रपति चुनाव में मतदान नहीं करने का फैसला कर विपक्षी एकता में मतभेद को सामने ला दिया है.

भाकपा नेता डी. राजा ने कहा, ‘मतदान से दूर रहने का उसका फैसला सही नहीं है.’

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में अपना उम्मीदवार बनाया है, जिनका मुकाबला अल्वा से होना है.

जुलाई 2019 में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभालने के बाद से धनखड़, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य की टीएमसी सरकार के साथ विभिन्न मुद्दों पर टकराव को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहे हैं. संयोग से टीएमसी राज्यसभा में दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है.

धनखड़ का उपराष्ट्रपति चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है. देश के उपराष्ट्रपति को चुनने के लिए निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य शामिल होते हैं.

संसद में सदस्यों की मौजूदा संख्या 780 है, जिनमें से केवल भाजपा के 394 सांसद हैं. जीत के लिए 390 से अधिक मतों की आवश्यकता होती है.

उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 19 जुलाई थी और मतदान छह अगस्त को निर्धारित है.

मौजूदा उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू का कार्यकाल 10 अगस्त को समाप्त हो रहा है. राजग ने 2017 में उपराष्ट्रपति पद के लिए तत्कालीन केंद्रीय मंत्री नायडू को अपना उम्मीदवार बनाया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)