जम्मू कश्मीर: अलगाववादी नेता यासीन मलिक जेल में भूख हड़ताल के बाद अस्पताल में भर्ती

टेरर फंडिंग मामले में आजीवन कारावास की सज़ा काट रहे प्रतिबंधित जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख यासीन मलिक ने रुबैया सईद अपहरण से जुड़े मामले में जम्मू की अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का अनुरोध किया था, पर केंद्र से इस पर कोई जवाब न मिलने पर शुक्रवार से उन्होंने भूख हड़ताल शुरू कर दी.

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यासीन मलिक. (फाइल फोटो: पीटीआई)

टेरर फंडिंग मामले में आजीवन कारावास की सज़ा काट रहे प्रतिबंधित जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख यासीन मलिक ने रुबैया सईद अपहरण से जुड़े मामले में जम्मू की अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का अनुरोध किया था, पर केंद्र से इस पर कोई जवाब न मिलने पर शुक्रवार से उन्होंने भूख हड़ताल शुरू कर दी.

यासीन मलिक. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: राजधानी की तिहाड़ जेल में भूख हड़ताल कर रहे कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक को तबीयत बिगड़ने के बाद आरएमएल अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

सूत्रों ने बुधवार को बताया कि मलिक के रक्तचाप (बीपी) में उतार-चढ़ाव आ रहा है, जिसके कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

उन्होंने बताया कि मलिक ने अस्पताल के डॉक्टरों को एक पत्र लिखकर कहा है कि वह इलाज कराना नहीं चाहते हैं.

एक सूत्र ने कहा, ‘बीपी में उतार-चढ़ाव के बाद मंगलवार को मलिक को आरएमएल अस्पताल में भर्ती कराया गया.’

इससे पहले बताया गया था कि दिल्ली की तिहाड़ जेल में पिछले पांच दिन से भूख हड़ताल पर बैठे कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक (56) को ड्रिप (नलियों) के जरिये तरल पदार्थ दिए जा रहे हैं.

मलिक ने रुबैया सईद के अपहरण से जुड़े मामले में जम्मू की अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का अनुरोध किया था, लेकिन केंद्र सरकार से इस पर कोई जवाब नहीं मिलने पर शुक्रवार से उन्होंने भूख हड़ताल शुरू कर दी. वह इस मामले में आरोपी है.

प्रतिबंधित जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख मलिक को तिहाड़ जेल संख्या सात की एक कोठरी में अकेले रखा गया था.

मलिक आतंकवाद के वित्त पोषण के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं.

एक अधिकारी ने बताया, ‘शुक्रवार सुबह से मलिक कुछ भी नहीं खा रहा. वह अब भी भूख हड़ताल पर है और चिकित्सक उसके स्वास्थ्य पर लगातार नजर रख रहे हैं. उसे रविवार से ड्रिप के जरिये तरल पदार्थ दिए जा रहे हैं.’

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, एक जेल अधिकारी ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए कहा, ‘अधिकारियों ने उनसे अनशन समाप्त करने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया.’

13 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के विशेष न्यायाधीश के सामने पेश होकर मलिक ने कहा था कि वह रुबैया सईद के अपहरण से जुड़े मामले में जम्मू की अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होना चाहते हैं.

आठ दिसंबर, 1989 को तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद का अपहरण कर लिया गया था.

बीते 15 जुलाई को रुबैया सईद ने जम्मू में एक विशेष अदालत के समक्ष यासीन मलिक की पहचान उसके अपहरणकर्ताओं में से एक के रूप में की थी, जो 1989 में जेकेएलएफ द्वारा हाई-प्रोफाइल अपहरण में शामिल था. उन्होंने जिन अन्य तीन लोगों की पहचान की, उनके नाम मोहम्मद जमान मीर, मेहराज-उद-दीन शेख और मंजूर अहमद सोफी हैं.

मलिक ने अदालत से कहा था कि उन्होंने सरकार को पत्र लिखकर उन्हें जम्मू जेल में भेजने की मांग की है ताकि वह इस मामले में व्यक्तिगत रूप से पेश हो सकें एवं अपने विरुद्ध लगे आरोपों का प्रतिवाद कर पाएं.

मलिक ने कहा था कि 22 जुलाई तक अगर सरकार ने इस संबंध में अनुमति नहीं दी, तो वह भूख हड़ताल शुरू करेंगे.

रुबैया सईद का आठ दिसंबर, 1989 को कथित तौर पर जेकेएलएफ के आतंकवादियों द्वारा अपहरण किया गया था. रुबैया को पांच दिन बाद 13 दिसंबर को अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छुड़ाया गया, लेकिन इसके बदले भारतीय जनता पार्टी द्वारा समर्थित तत्कालीन वीपी सिंह सरकार को जेकेएलएफ के पांच आतंकवादियों को रिहा करना पड़ा था.

रुबैया का अपहरण घाटी के अस्थिर इतिहास की एक प्रमुख घटना माना जाता है. उनकी आजादी के बदले जेकेएलएफ के पांच सदस्यों की रिहाई को आतंकी समूहों का मनोबल बढ़ाने वाले कदम के रूप में देखा गया था, जिन्होंने उस समय सिर उठाना शुरू किया था.

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) द्वारा 2017 में दर्ज आतंकवाद के वित्तपोषण के मामले में मलिक को 2019 की शुरुआत में गिरफ्तार किया गया था. एनआईए की विशेष अदालत ने गत मई में उन्हें सजा सुनाई थी.

प्रतिबंधित संगठन जेकेएलएफ के प्रमुख यासीन मलिक को बीते मई महीने में आतंकवाद के वित्त पोषण से जुड़े एक मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. मलिक को दो अपराधों – आईपीसी की धारा 121 (भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना) और यूएपीए की धारा 17 (यूएपीए) (आतंकवादी गतिविधियों के लिए राशि जुटाना) – के लिए दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी.

बीते 10 मई को यासीन मलिक ने 2017 में घाटी में कथित आतंकवाद और अलगाववादी गतिविधियों से संबंधित एक मामले में दिल्ली की एक अदालत के समक्ष कड़े गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) सहित सभी आरोपों के लिए दोष स्वीकार कर लिया था.

मलिक जनवरी 1990 में श्रीनगर में भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के चार कर्मचारियों की हत्या से संबंधित एक मामले में भी मुकदमे का सामना कर रहे हैं.

वायुसेना कर्मचारियों की हत्या के अन्य आरोपी अली मोहम्मद मीर, मंजूर अहमद सोफी उर्फ मुस्तफा, जावेद अहमद मीर उर्फ नालका, नानाजी उर्फ सलीम, जावेद अहमद जरगर और शौकत अहमद बख्शी है. इन सभी सात आरोपियों पर टाडा और शस्त्र अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के अलावा आपराधिक साजिश और हत्या का आरोप लगाया गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

(नोट: इस ख़बर को अपडेट किया गया है.)

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