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प्रधानमंत्री मोदी के ‘मुफ़्त की रेवड़ी’ बयान पर केजरीवाल बोले- ऐसा कहने वाले देश के गद्दार हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने लोगों को वोट के लिए मुफ़्त उपहार देने को ‘रेवड़ी संस्कृति’ क़रार देते हुए कहा था कि यह देश के विकास के लिए बहुत ख़तरनाक है. अब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पूछा है कि आम नागरिकों को मुफ़्त शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली देने में ग़लत क्या है?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल. (फोटो साभार: फेसबुक/@/AAPkaArvind)

नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उनकी इस टिप्पणी को लेकर निशाना साधा है, जिसमें उन्होंने लोगों को वोट के लिए मुफ्त उपहार देने की ‘रेवड़ी संस्कृति’ संबंधी बात कही थी और कहा था कि यह देश के विकास के लिए बहुत खतरनाक है.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, इसी कड़ी में सोमवार को केजरीवाल ने कहा कि जो लोग आम नागरिकों को दी जाने वाली कल्याणकारी योजनाओं को ‘मुफ्त की रेवड़ी’ कहते हैं, वे देश के गद्दार हैं.

यह पूछते हुए कि आम नागरिकों को मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली देने में गलत क्या है, केजरीवाल ने कहा, ‘पिछले कुछ महीनों से देश भर में एक माहौल बनाया जा रहा है… वे लोग जो मुफ्त योजनाओं पर सवाल उठाते हैं और इन्हें सरकार के राजस्व घाटे का मुख्य कारण बताते हैं, वे अपने दोस्तों द्वारा लिए गए करोड़ों के कर्ज को बट्टे खाते में डाल चुके हैं और 10 लाख करोड़ का कर्ज माफ कर चुके हैं. उनके दोस्त जनता का पैसा लेकर देश छोड़ कर भाग गए हैं. इससे सरकार की तिजोरी पर कोई असर नहीं पड़ा, लेकिन गरीब नागरिकों के लिए योजनाएं उन्हें प्रभावित कर रही हैं.’

उन्होंने कहा, ‘यह सुनकर बहुत दुख होता है कि 75वें स्वतंत्रता दिवस पर जब हम सबको एक साथ आना चाहिए और शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली व पानी को जनता के लिए सुलभ बनाने हेतु एक क्रांतिकारी योजना लानी चाहिए, (ऐसे समय में) ये लोग इन सभी योजनाओं पर विराम लगाने का माहौल पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं.’

उन्होंने पार्टियों पर ‘दोस्तवाद’ या ‘परिवारवाद’ बढ़ाने का भी आरोप लगाया लेकिन किसी पार्टी का नाम नहीं लिया.

उन्होंने कहा, ‘एक पार्टी है जो परिवारवाद का प्रत्यक्ष उदाहरण है और दूसरी दोस्तवाद का. समय आ गया है कि हम भारतवाद लाने के लिए परिवारवाद और दोस्तवाद दोनों को समाप्त करने का संकल्प लें.’

उन्होंने कहा, ‘इन लोगों ने कुछ चंद लोगों का 10 लाख करोड़ का कर्जा माफ कर दिया है. कहा जा रहा है कि उन चंद लोगों में कई इनके पक्के दोस्त थे. पर इसके बारे में कोई बात नहीं कर रहा है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘वे सरकारी धन का उपयोग करके बच्चों को मुफ्त शिक्षा नहीं देना चाहते हैं, जबकि वो पैसा इसी के लिए है. वे उन चंद लोगों की परवाह करते हैं जो पैसों से उनकी मदद करते हैं. ये लोग आम आदमी द्वारा इस्तेमाल किए जाने वालीं रोजमर्रा की जरूरी चीजों और खाद्य पदार्थों पर जीएसटी बढ़ा चुके हैं क्योंकि उन्हें परवाह नहीं है कि गरीब जीता है या मरता है.’

उन्होंने कहा, ‘इन लोगों ने अपने दोस्तों के 10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया. ऐसे लोगों को गद्दार करार दिया जाना चाहिए और उनके खिलाफ जांच की जानी चाहिए.’

उन्होंने इसकी भी जांच करने की मांग की कि कितने लोगों को कर्ज में छूट दी गई और क्या पार्टी ने उनसे चुनावी अभियान के लिए पैसा प्राप्त किया?

केजरीवाल ने कहा, ‘वे चाहते हैं कि केवल मंत्रियों और नेताओं को मुफ्त बिजली दी जाए. गरीबों को शिक्षा और बिजली देना क्यों गलत है… हिंदू धर्म में हमें सिखाया जाता है अगर किसी के पास थोड़ा भी पैसा आ जाए तो वो प्याऊ खोलता है, लोगों को फ्री पानी पिलाता है. प्यासे को पानी पिलाना हमारे हिंदू धर्म में पुण्य की बात मानी जाती है.’

केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने दुनियाभर की सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का अध्ययन किया और पाया कि करीब 39 देश बच्चों को मुफ्त शिक्षा देते हैं. कनाडा, ब्राजील और ब्रिटेन समेत नौ देश मुफ्त स्वास्थ्य सेवा प्रदान करते हैं और जर्मनी व अमेरिका समेत 16 देश नागरिकों को बेरोजगारी भत्ता देते हैं.

उन्होंने कहा, ‘लेकिन कोई भी सरकार अपने दोस्तों के निजी लाभ के लिए करोड़ों का कर्ज माफ नहीं करती.’

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने सरकार से हर नागरिक को मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने के लिए भी कहा.

केजरीवाल ने कहा, ‘130 करोड़ लोगों की तरफ से मैं मांग करता हूं कि प्रत्येक बच्चे, फिर वह चाहे गरीब परिवार से हो या अमीर से, को मुफ्त शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए. हर नागरिक को मुफ्त बिजली दी जाए और हर घर को 300 यूनिट बिजली की खपत तक सब्सिडी दी जानी चाहिए. जो लोग इसे मुफ्त योजना और मुफ्त की रेवड़ी बताते हैं, उन्हें इस देश का गद्दार घोषित किया जाना चाहिए.’