केपीएसएस ने कश्मीरी पंडितों से घाटी छोड़ने की अपील की, कहा- अब कोई विकल्प नहीं बचा

मंगलवार को शोपियां में आतंकवादियों ने दो कश्मीरी पंडित भाइयों पर हमला किया, जिसमें एक की मौत हो गई. इसके बाद कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति ने कहा कि कश्मीरी पंडितों के लिए केवल एक ही विकल्प बचा है कि घाटी छोड़ दें या फिर धार्मिक कट्टरपंथियों के हाथों मार डाले जाएं. 

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(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

मंगलवार को शोपियां में आतंकवादियों ने दो कश्मीरी पंडित भाइयों पर हमला किया, जिसमें एक की मौत हो गई. इसके बाद कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति ने कहा कि कश्मीरी पंडितों के लिए केवल एक ही विकल्प बचा है कि घाटी छोड़ दें या फिर धार्मिक कट्टरपंथियों के हाथों मार डाले जाएं.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

श्रीनगर: कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति (केपीएसएस) ने आतंकवादियों द्वारा कि जा रही कश्मीरी पंडित समुदाय के लोगों की हत्या के मद्देनजर मंगलवार को समुदाय के लोगों से घाटी छोड़ने की अपील की.

केपीएसएस के प्रमुख संजय टिक्कू ने कहा, ‘कश्मीर में कश्मीरी पंडित पर आतंकवादियों द्वारा किए गए एक और हमले के जरिये आतंकवादियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे कश्मीर घाटी के सभी कश्मीरी पंडितों की हत्या कर देंगे.’

टिक्कू ने कहा कि उन्होंने सभी कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़ने और जम्मू, दिल्ली जैसे सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है.

सोशल मीडिया पर साझा किए गए पत्र में टिक्कू ने लिखा है, ‘कश्मीर घाटी में कोई भी कश्मीरी पंडित सुरक्षित नहीं है. कश्मीरी पंडितों के लिए केवल एक ही विकल्प बचा है कि कश्मीर छोड़ दें या फिर धार्मिक कट्टरपंथियों के हाथों मार डाले जाएं.’

उन्होंने कहा, ‘हमने पिछले 32 वर्षों से यही देखा है. सरकार अल्पसंख्यकों खासतौर पर कश्मीरी पंडितों को सुरक्षा मुहैया कराने में नाकाम रही है. हम कब तक ऐसे ही मरते रहेंगे? बहुत हो गया.’

उन्होंने आरोप लगाया कि कश्मीर में पर्यटक और अमरनाथ यात्री सुरक्षित रहे, लेकिन गैर-स्थानीय मुसलमान और कश्मीरी पंडित आतंकवादियों के निशाने पर हैं.

उन्होंने आगे कहा कि देश की न्याय-व्यवस्था और सरकार कश्मीरी पंडितों को बचाने में असमर्थ रही हैं इसलिए समिति पंडितों से अपील कर रही है कि वो चिकनी-चुपड़ी बातों में न आएं और घाटी छोड़ दें.

केपीएसएस प्रमुख ने कहा कि खुफिया सूचना थी कि आतंकवादी, समुदाय के और लोगों को निशाना बना सकते हैं जिसके बाद मंगलवार के हमले में जिन लोगों को निशाना बनाया गया है.

उन्होंने प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से उन्हें सुरक्षित स्थानों पर भेजने का अनुरोध किया था.

उन्होंने कहा, ‘यह दुर्भागयपूर्ण है कि अधिकारियों ने उनसे कहा कि उन्हें उनके गांवों में रहना है. यह क्या बात हुई? उनके पास हमला होने की आशंका की जानकारी थी और उसके बाद भी उन्होंने हमें सुरक्षा नहीं दी.’

गौरतलब है कि मंगलवार को शोपियां ज़िले में आतंकवादियों ने दो कश्मीरी पंडित भाइयों पर हमला किया, जिसमें एक की मौत हो गई और एक घायल हैं. केपीएसएस का बयान इसी घटना के बाद आया है.

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह 24 घंटों से कम समय में कश्मीर से पलायन न करने वाले पंडितों पर दूसरा हमला था.

सोमवार को स्वतंत्रता दिवस वाले दिन बडगाम में एक घर पर ग्रेनेड फेंक दिया गया था, जिसमें करन कुमार सिंह नामक एक व्यक्ति घायल हो गया था. सिंह श्रीनगर के एक अस्पताल में इलाजरत हैं.

जम्मू कश्मीर में बीते कई महीनों से आतंकियों द्वारा निशाना बनाकर की जा रही हत्याओं में कई कश्मीरी पंडित और कई अप्रवासी जान गँवा चुके हैं. इस साल आतंकवादियों द्वारा अब तक 14 आम नागरिकों और छह सुरक्षाबलों को इसी तरह मारा गया है.

जनवरी में एक पुलिसकर्मी की अनंतनाग में लक्षित हत्या की गई थी. फरवरी में ऐसी कोई घटना नहीं हुई.

वहीं, मार्च में सबसे अधिक सात ऐसी हत्याएं हुई जिनमें पांच आम लोग और एक सीआरपीएफ का जवान शामिल थे, जो छुट्टी पर शोपियां आए हुए थे जबकि विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) की बडगाम में हत्या कर दी गई थी. इस हमले में एसपीओ के भाई की भी मौत हो गई थी.

अप्रैल में एक सरपंच सहित दो लोगों की हत्या की गई थी. वहीं, मई महीने में आतंकवादियों ने पांच लोगों को निशाना बनाकर मारा था, जिनमें दो पुलिसकर्मी और तीन आम नागरिक शामिल थे.

मई में आतंकवादियों द्वारा गए मारे गए आम नागरिकों में कश्मीरी पंडितों के लिए प्रधानमंत्री के विशेष पैकेज के तहत भर्ती सरकारी कर्मचारी राहुल भट, टीवी एंकर अमरीन भट और शिक्षिका रजनी बाला शामिल थीं.

जून महीने में एक प्रवासी बैंक प्रबंधक और एक प्रवासी मजदूर की आतंकवादियों ने हत्या कर दी, जबकि एक पुलिस उपनिरीक्षक भी आतंकवादियों के हमले में मारे गए. अगस्त महीने में भी आतंकवादियों द्वारा अब तक दो गैर-कश्मीरी मजदूरों की हत्या की जा चुकी है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)