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जम्मू कश्मीर: पुलिस ने मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ को जुमे की नमाज़ के लिए घर से निकलने से रोका

पुलिस ने शुक्रवार को हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज़ उमर फारूक़ को जामिया मस्जिद में नमाज़ अदा करने के लिए अपने घर से निकलने से रोक दिया. उन्होंने कहा कि नागरिक के तौर पर उनके अधिकार छीने जा रहे हैं, जबकि उपराज्यपाल ने एक स्पष्ट बयान दिया था कि उनकी आवाजाही पर कोई पाबंदी नहीं है.

मीरवाइज उमर फारूक़. (फाइल फोटो: पीटीआई)

श्रीनगर: पुलिस ने शुक्रवार को हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक को यहां ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में नमाज अदा करने के लिए अपने घर से निकलने से रोक दिया.

उल्लेखनीय है कि कुछ ही दिन पहले उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा था कि मीरवाइज नजरबंद नहीं हैं.

श्रीनगर के नौहट्टा इलाके में 14वीं सदी की जामिया मस्जिद की प्रबंध संस्था अंजुमन औकाफ जामिया मस्जिद (एएजेएम) ने एक बयान जारी कर कहा था कि लगभग तीन वर्षों से कश्मीर के मुख्य मौलवी को खुतबा (उपदेश) देने और सामूहकि प्रार्थना में शामिल होने के लिए मीरवाइज को अपने घर से बाहर निकलने की इजाजत नहीं दी गई है.

मीरवाइज का वाहन जैसे ही उनके आवास के मुख्य द्वार पर पहुंचा, दो पुलिस अधिकारियों ने इसे रोक दिया और उनसे आवास के अंदर जाने को कहा.

उन्होंने पुलिस अधिकारियों से पूछा, ‘उपराज्यपाल ने घोषणा की है कि मैं एक आजाद व्यक्ति हूं… मैं मीरवाइज के तौर पर अपने धार्मिक कर्तव्यों के निर्वहन के लिए जामिया मस्जिद जा रहा हूं. मुझे रोका क्यों जा रहा?’

इस पर, एक अधिकारी ने जवाब दिया कि सुरक्षा समीक्षा की जा रही है, जिसके चलते उन्हें बाहर नहीं जाने दिया जाएगा.

मीरवाइज ने कहा कि नागरिक के तौर पर उनके अधिकार छीने जा रहे हैं, जबकि उपराज्यपाल ने एक स्पष्ट बयान दिया था कि उनकी आवाजाही पर कोई पाबंदी नहीं है.

मीरवाइज ने अपने आवास के मुख्य द्वार से बाहर निकलने कोशिश की, लेकिन दो अधिकारियों के साथ मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया.

मीरवाइज ने कहा, ‘कृपया मुझे लिखित में दीजिए कि मुझे क्यों रोका जा रहा है. केंद्रीय गृह मंत्री ने संसद में कहा था कि कश्मीर में कोई भी नजरबंद नहीं है. उपराज्यपाल ने इसी तर्ज पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया को बयान दिए, लेकिन आप यहां मुझे रोकने आए हैं.’

उन्होंने कहा कि सरकार दावा कर रही है कि कश्मीर में सब कुछ सामान्य हो गया है और लोग खुश हैं.

उन्होंने अपने आवास के अंदर लौटने से पहले कहा, ‘मैं लोगों की खुशी में शरीक होना चाहता हूं. आप मुझे क्यों रोक रहे हैं?’

जम्मू-कश्मीर पुलिस के एडीजीपी विजय कुमार ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि हाउस अरेस्ट के लिए कानून के अनुसार कोई प्रावधान नहीं है.

कुमार ने स्पष्ट किया कि, ‘वह घर में नजरबंद नहीं हैं … वह कभी नजबंद नहीं थे. उसे अस्पताल जाने की इजाजत है. कानून-व्यवस्था से जुड़ी आशंकाओं के कारण हम उन्हें जामिया नहीं जाने दे रहे हैं.’

श्रीनगर में मीरवाइज़ उमर के घर के बाहर दर्जन भर सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं. सुरक्षा कारणों से उन्होंने तस्वीर में आने से इनकार कर दिया. (फोटो: द वायर)

यह कहते हुए कि जब सुरक्षा संबंधी खतरे होते हैं, कभी-कभी नेताओं को यात्रा करने की अनुमति नहीं दी जाती, कुमार ने आगे कहा, ‘उन्हें लिखित में देना होगा कि जनता जामिया मस्जिद में कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा नहीं होने देगी.’

जामिया मस्जिद के प्रबंध निकाय ने 26 अगस्त को शुक्रवार को खुतबे की उम्मीद में गुरुवार, (25 अगस्त) को कहा था, ‘पिछले तीन वर्षों से, मीरवाइज साहब की नजरबंदी के कारण जामा मस्जिद का उपदेश मंच खामोश हो गया है. उनकी रिहाई के लिए सभी वर्गों से बार-बार अपील करने के बावजूद उन्हें जबरन घर में बंद कर दिया गया, जिससे लोगों को दुख हुआ… सब बेसब्री से उनकी रिहाई का इंतजार कर रहे हैं और उन्हें देखने और सुनने के लिए उत्सुक हैं.’

शुक्रवार को अंजुमन औकाफ ने तीन साल के बाद ऐतिहासिक मस्जिद में लोगों को संबोधित करने के लिए अपने अध्यक्ष और मीरवाइज-ए-कश्मीर मौलवी मुहम्मद उमर फारूक को एक बार फिर से अस्वीकार करने के लिए अधिकारियों के खिलाफ कड़ा विरोध व्यक्त किया.

अंजुमन ने कहा, ‘जुमे की नमाज के लिए घाटी भर से बड़ी संख्या में आए लोग एक बार फिर बहुत दुखी हुए. उन्होंने अपना गुस्सा व्यक्त किया और मीरवाइज उमर फारूक की अवैध और मनमानी नजरबंदी का कड़ा विरोध किया.’

उल्लेखनीय है कि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने पिछले हफ्ते बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि मीरवाइज नजरबंद नहीं हैं और उनके आसपास मौजूद पुलिसकर्मी सिर्फ उनकी सुरक्षा के लिए हैं.

एलजी ने साक्षात्कार में इस बात से इनकार किया कि मीरवाइज घर में नजरबंद हैं. सिन्हा ने कहा था, ‘उन्हें न तो गिरफ्तार किया गया है और न ही हिरासत में लिया गया है. उन्हें तय करना होगा कि वह क्या करना चाहते हैं.’

जम्मू कश्मीर प्रशासन ने भी दावा किया था कि मीरवाइज स्वतंत्र हैं और उनके आवास पर तैनात सुरक्षा बल उनकी सुरक्षा के लिए हैं.

सिन्हा ने साक्षात्कार में मीरवाइज को स्वतंत्र रूप से घूमने की अनुमति देने में प्रशासन की सुरक्षा चिंताओं को रेखांकित करने के लिए 21 मई, 1990 को मीरवाइज के पिता की हत्या और 23 जून, 2017 को दरगाह के बाहर भीड़ द्वारा एक अंडरकवर पुलिस अधिकारी अयूब पंडित की पीट-पीट कर हत्या करने का भी जिक्र किया था.

हालांकि, सिन्हा और प्रशासन के दावों के विपरीत, हुर्रियत नेता का श्रीनगर आवास पत्रकारों, धार्मिक निकायों और आम लोगों के लिए बंद है, जो धार्मिक मामलों पर कश्मीर के मुख्य मौलवी के रूप में मीरवाइज की सलाह लेने आते हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)