दिल्ली: उपराज्यपाल ने घोटाले के आरोप लगाने को लेकर ‘आप’ नेताओं को क़ानूनी नोटिस भेजा

आम आदमी पार्टी के ने आरोप लगाया है कि खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष के रूप में उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने 2016 में अपने कर्मचारियों पर 1,400 करोड़ रुपये के पुराने नोटों को बदलने के लिए दबाव डाला था और एक खादी लाउंज की साज-सज्जा का ठेका अपनी बेटी को दिया था.

दिल्ली के उपराज्यपाल वी के सक्सेना और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल. (फोटो: पीटीआई)

आम आदमी पार्टी के ने आरोप लगाया है कि खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष के रूप में उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने 2016 में अपने कर्मचारियों पर 1,400 करोड़ रुपये के पुराने नोटों को बदलने के लिए दबाव डाला था और एक खादी लाउंज की साज-सज्जा का ठेका अपनी बेटी को दिया था.

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के अध्यक्ष के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान 1,400 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में उनकी संलिप्तता रहने के झूठे और अपमानजनक आरोप लगाए जाने पर सोमवार को आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं को कानूनी नोटिस भेजा है.

यह नोटिस आप के नेताओं आतिशी, दुर्गेश पाठक, सौरभ भारद्वाज, संजय सिंह और जैस्मीन शाह सहित अन्य को भेजा गया है.

सक्सेना ने आरोप लगाया है कि ‘आप’ नेताओं ने प्रतिशोध के कारण एक अपमानजनक अभियान शुरू किया है, क्योंकि उनके कार्यों ने आप के प्रमुख नेताओं के भ्रष्टाचार को उजागर किया है.

इस नोटिस में आप नेताओं को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करने के लिए कहा गया है, जिसमें पार्टी के सभी सदस्यों और इससे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े सभी व्यक्तियों को निर्देश दिया जाए कि वे झूठे, मानहानिकारक, दुर्भावनापूर्ण और निराधार बयान देने और उसका प्रसार करने से दूर रहें.

कानूनी नोटिस में आप नेताओं को नोटिस प्राप्ति के 48 घंटों के भीतर इसमें कही गईं बातों का पालन करने के लिए कहा गया है.

आप के सूत्रों ने राज्यपाल पर उसके नेताओं को कानूनी नोटिस भेजने के लिए निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें लोगों को धमकी देना बंद कर देना चाहिए.

पार्टी के एक सूत्र ने कहा, ‘अगर उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है तो वह सीबीआई के छापे और जांच से इतना डरते क्यों हैं? वह स्वतंत्र जांच के लिए स्वयं को पेश क्यों नहीं करते? उन्हें लोगों को धमकी देना बंद कर देना चाहिए.’

उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी आवाज को चुप नहीं करा सकते.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, नोटिस में दावा किया गया है कि इन सबका असर उनके परिवार के सदस्यों, सामाजिक दायरे और उनके कार्यस्थल के लोगों पर पड़ने की संभावना है.

कानूनी नोटिस में कहा गया है, ‘इस बदनामी अभियान का उद्देश्य मेरे मुवक्किल (वीके सक्सेना) को डराना और उसे दिल्ली के उपराज्यपाल के रूप में अपने संवैधानिक दायित्वों को निभाने से हतोत्साहित करना है.’

उपराज्यपाल द्वारा नोटिस में वर्ष 2016-17 के खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग की वार्षिक रिपोर्ट के आंकड़ों का भी हवाला दिया गया, जब सक्सेना अध्यक्ष थे और कथित भ्रष्टाचार हुआ था.

नोटिस में कहा गया है कि आप ऐसा इसलिए कर रही है, क्योंकि दिल्ली में आप सरकार की घोर विफलता से लोगों का ध्यान हटाना है. हाल ही में सामने आए आबकारी और क्लास-रूम घोटाले में खुलासे के साथ-साथ सक्सेना को दिल्ली के उपराज्यपाल के रूप में सेवा करते हुए पिछले तीन महीनों में उनके द्वारा किए गए असाधारण काम के लिए सराहना मिली है.

सक्सेना ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों में अतिरिक्त कक्षाओं के निर्माण की जांच पर केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की रिपोर्ट पर कार्रवाई करने में ढाई साल से अधिक की देरी पर पिछले सप्ताह मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी थी.

मालूम हो कि बीते दिनों आम आदमी पार्टी ने सक्सेना पर 2016 में खादी और ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था और इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की थी.

दुर्गेश पाठक ने पिछले हफ्ते विधानसभा में आरोप लगाया था कि केवीआईसी के अध्यक्ष के रूप में सक्सेना ने 2016 में अपने कर्मचारियों पर 1,400 करोड़ रुपये के पुराने नोटों को बदलने के लिए दबाव डाला था.

साथ ही आरोप लगाया था कि वीके सक्सेना ने खादी विकास एवं ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष पद पर रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग किया और मुंबई की एक खादी लाउंज की आंतरिक साजसज्जा (इंटीरियर डिजाइनिंग) का ठेका अपनी बेटी को दिया था.

बीते जुलाई महीने के आखिरी हफ्ते में दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) वीके सक्सेना ने आबकारी नीति 2021-22 के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की सिफारिश की थी. उन्होंने इस मामले में 11 आबकारी अधिकारियों को निलंबित भी किया है.

एलजी के अनुसार, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कथित तौर पर शराब नीति में कुछ बदलाव किए और कैबिनेट को सूचित किए बिना या एलजी की मंजूरी लिए बिना लाइसेंसधारियों को अपनी ओर से अनुचित लाभ दिया था.

आरोप है कि मनीष सिसोदिया ने कथित तौर पर कोविड-19 महामारी के बहाने निविदा लाइसेंस शुल्क पर शराब कारोबारियों को 144.36 करोड़ रुपये की छूट की अनुमति दी है. यह भी आरोप लगाया गया है कि आम आदमी पार्टी ने पंजाब चुनाव के दौरान इस पैसे का इस्तेमाल किया होगा.

बहरहाल उपराज्यपाल द्वारा आबकारी नीति में अनियमितताओं की सीबीआई जांच की सिफारिश के बाद उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने 30 जुलाई 2022 को जानकारी दी थी कि दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति को फिलहाल वापस लेने का फैसला किया है और सरकार द्वारा संचालित दुकानों के जरिये शराब की बिक्री किए जाने का निर्देश दिया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)