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अयोध्या: योगी आदित्यनाथ का मंदिर बनाने वाले शख़्स पर सरकारी भूमि कब्ज़ाने की साज़िश का आरोप

अयोध्या में राम जन्मभूमि से क़रीब 25 किलोमीटर दूर प्रभाकर मौर्य नाम के एक व्यक्ति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मंदिर बनवाया है, जहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना की जा रही है. अब प्रभाकर के चाचा ने आरोप लगाया है कि उक्त मंदिर सरकारी ज़मीन पर बनाया गया है, ताकि वह ज़मीन कब्ज़ाई जा सके.

अयोध्या के योगी आदित्यनाथ मंदिर की एक तस्वीर. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: बीते दिनों अयोध्या में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मंदिर बनाए जाने की खबरें सामने आई थीं. अमर उजाला के मुताबिक, मंदिर का निर्माण राम जन्मभूमि से करीब 25 किलोमीटर दूर भरतकुंड क्षेत्र में फैजाबाद-इलाहाबाद राजमार्ग पर खुद को योगी समर्थक बताने वाले प्रभाकर मौर्य ने कराया था.

यह जगह परिवहन विभाग की क्षेत्रीय कार्यशाला के पीछे स्थित मौर्य का पुरवा गांव में है. बताया गया है कि मंदिर में नियमित रूप से सुबह और शाम दोनों समय विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और भक्तों के बीच प्रसाद बांटा जा रहा है.

इस मंदिर में धनुष और बाण लिए योगी आदित्यनाथ की आदमकद, भगवा रंग की प्रतिमा स्थापित की गई है. प्रभाकर मौर्य ने कहा था कि वह भगवान श्री राम की तरह प्रतिदिन योगी की प्रतिमा के सामने भजन पाठ करते रहते हैं.

मंदिर का निर्माण करने वाले स्थानीय निवासी प्रभाकर मौर्य का कहना था कि वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यों से बहुत प्रभावित हैं, इसलिए उन्हें यह मंदिर बनाने का विचार आया था. अब यह मंदिर विवादों में आ गया है.

दैनिक जागरण की एक खबर के मुताबिक, मंदिर बनवाने वाले प्रभाकर मौर्य के सगे चाचा रामनाथ मौर्य ने आरोप लगाया है कि मंदिर का निर्माण बंजर पड़ी सरकारी जमीन पर कब्जा करके कराया गया है.

उन्होंने आरोप लगाया है कि बंजर भूमि पर कब्जा करने की नीयत से उनके भतीजे प्रभाकर ने आदित्यनाथ का मंदिर बनवाया है.

खबर के मुताबिक, इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायती पत्र भी भेजा था, जिसका संज्ञान लेते हुए कार्यालय ने अयोध्या के जिलाधिकारी को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उक्त पत्र रामनाथ मौर्य ने 21 सितंबर को लिखा था और मामले की जांच कराने की मांग की थी.

पत्र में उन्होंने आरोप लगाया है कि जिस भूमि पर मंदिर बनवाया गया है, उस पर आम के तीन पेड़ और चार बांस के कोठ थे, जिसे अकेले ही प्रभाकर काटकर उठा ले गए. यह मामला बेहद ही गंभीर है.

बहरहाल, मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए उप जिलाधिकारी (एसडीएम) के नेतृत्व में जांच शुरू कर दी है. एसडीएम मनोज कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि प्रकरण संज्ञान में आया है, अब जांच कराई जा रही है.

इस बीच, विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राज्य सरकार पर तंज कसते हुए पूछा है कि क्या मुख्यमंत्री भूमाफिया पर कार्रवाई करेंगे।

अखिलेश यादव ने आरोपों के हवाले से कहा है कि अयोध्या जिले में जमीन पर अवैध कब्जा करने की नीयत से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मंदिर बनाया गया है और अब मुख्‍यमंत्री जी बताएं कि ऐसे भूमाफिया पर वो कार्रवाई करेंगे या दिल्ली से विशेष दस्ता आएगा.

सपा प्रमुख ने शुक्रवार देर रात ट्वीट किया, ‘अयोध्या में मुख्यमंत्री जी का जो मंदिर बनाया गया है, उसको बनाने वाले के चाचा ने ही यह शिकायत मुख्यमंत्री जी से की है कि वो ज़मीन पर अवैध कब्जा करने की बदनीयत से बनाया गया है.’

इसी ट्वीट में यादव ने सवाल किया, ‘अब मुख्यमंत्री जी बताएं कि ऐसे भू-माफिया भतीजे पर कार्रवाई वो करेंगे या दिल्ली से विशेष दस्ता आएगा.’

वहीं, शनिवार को समाजवादी पार्टी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया, ‘भाजपाई सबसे बड़े भू-माफिया हैं. अयोध्या में बंजर जमीन पर भूमि कब्जाने के लिए भाजपा समर्थकों ने उस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मंदिर बनवा दिया. मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम) के तहत कार्रवाई हो.’

सपा ने अपने ट्वीट के साथ एक अखबार की खबर साझा की है जिसमें रामनाथ ने आरोप लगाया है उसका भतीजा ग्राम समाज की बंजर भूमि पर मंदिर बनवा दिया है और उसके हिस्से की भी जमीन पर कब्जा करने की नीयत से शनिदेव की मूर्ति लगवा दी है.

इसी खबर में भतीजे ने चाचा के आरोपों को खारिज किया है और दावा किया है कि उसने अपनी जमीन पर मंदिर निर्माण कराया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)