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जम्मू कश्मीर: सेब के हज़ारों ट्रक हाईवे पर फंसने के चलते करोड़ों की फसल सड़ने की कगार पर

जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर मरम्मत कार्य के चलते हज़ारों की संख्या में सेब से भरे ट्रक कई दिनों से जाम में फंसे हैं. यह सेब देश के विभिन्न हिस्सों में जाने हैं. जहां एक ओर किसानों को अब सेब सड़ने का डर सता रहा है,  वहीं प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में हालात और ख़राब हो सकते हैं.

जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई दिनों से फंसे ट्रक. (फोटो: जहांगीर अली)

नई दिल्ली/जम्मू/श्रीनगर: एप्पल फारमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एएफएफआई) ने जम्मू कश्मीर के राज्यपाल मनोज सिन्हा से एक शिकायत में कहा है कि जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर अनियंत्रित यातायात के कारण घाटी के सेब किसानों को भारी नुकसान हुआ है.

द हिंदू के मुताबिक, देश के विभिन्न बाजारों में भेजे जाने वाले करीब 5,000 सेब से भरे ट्रक राजमार्ग पर फंसे हुए हैं और किसानों को डर है कि इससे न केवल उनका नुकसान होगा, बल्कि छोटे और मध्यम व्यापारियों पर भी असर पड़ेगा.

जम्मू कश्मीर के एएफएफआई के नेता अब्दुल रशीद ने कहा कि 5,000 ट्रकों में से प्रत्येक में 20 किलो सेब के 1,200 बक्से होते हैं, यानी हर ट्रक में करीब 20 टन सेब है. हालांकि, प्रशासन ने किसानों को बताया है कि यातायात प्रतिबंध राजमार्ग का निर्माण कार्य होने के चलते हैं और शिकायत के बाद एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का तबादला कर दिया, वे ट्रैफिक नियंत्रण संभाल नहीं पा रहे हैं.

उन्होंने आगे कहा, ‘यदि सभी ट्रक एक ही समय पर बाजार में पहुंचते हैं तो सेब की कीमतें गिर जाएंगी. अब कश्मीर के बाजारों, ट्रकों और बगीचों में सेब सड़ रहा है.’

एएफएफआई ने कहा कि सोपोर के सेब बाजार को पिछले कुछ दिनों में करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

उन्होंने कहा, ‘परिणामस्वरूप, किसानों को सेब के एक बक्से पर कम से कम 300 से 400 रुपये का घाटा हो रहा है. ट्रांसपोर्टर भी संकट का सामना कर रहे हैं. राज्य में चार लाख परिवार सेब व्यापार पर निर्भर हैं. ट्रैफिक के कारण ट्रक घाटी के बाजारों में पहुंच नहीं पा रहे हैं. हमने सिन्हा जी से मुलाकात की. उन्होंने कहा कि वे कदम उठाएंगे, लेकिन अब तक ट्रैफिक समस्या का समाधान नहीं हुआ है.’

एक बयान में एएफएफआई ने केंद्र सरकार से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि किसानों को कम से कम एक किलो सेब के 60 रुपये मिलें.

एएफएफआई ने कहा कि राजमार्ग के अवरुद्ध हो जाने से सेब का भंडारण नियंत्रित वातावरण (सीए) में करना जरूरी है, जिसमें उच्च लागत लगती है. जिसके चलते छोटे किसान अपने उत्पादन का भंडारण करने और परिस्थितियां सुधरने पर बेचने की स्थिति में नहीं हैं.

फेडरेशन का कहना है कि सीए कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए प्रशासन जानबूझकर ऐसा कर रहा है. ये कंपनियां उन कृषि व्यवसायों को अपनी जगह किराए पर देती हैं जो इनके कोल्ड स्टोरेज की उच्च लागत वहन कर सकते हैं.’

श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग एकमात्र ज़मीनी रास्ता है जो कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है.

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने रामबन जिले में राजमार्ग की तत्काल मरम्मत करने के संबंध में नए प्रतिबंध लागू किए थे.

द वायर  से बात करते हुए कश्मीर में फल उत्पादकों और व्यापारियों के सबसे बड़े समूह ऑल वैली फ्रूट ग्रोअर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन (एवीएफजीडीए) के अध्यक्ष बशीर अहमद बशीर ने कहा, ‘यह फलों के सड़ने का पहला संकेत है.’

बशीर का कहना है कि कई दिनों से राजमार्ग पर हजारों ट्रकों के फंसे रहने के कारण 100 करोड़ रुपये के कश्मीरी सेब और नाशपाती सड़ने के कगार पर हैं.

इस बीच, राजनेताओं, ट्रेड यूनियनों और फल उत्पादकों ने जम्मू कश्मीर प्रशासन पर कश्मीरियों को प्रताड़ित करने के लिए फलों से लदे ट्रकों को ‘जानबूझकर रोके’ रखने का आरोप लगाया है.

बहरहाल, द वायर  ने जब राजमार्ग का दौरा किया तो पाया कि ट्रैफिक में फंस हुए ट्रक तीन दिन में केवल चार किलोमीटर की दूरी तय कर पाए हैं.

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के एक ट्रक ड्राइवर अखलाक अहमद ने बताया, ‘इस तरह तो मुझे उत्तर प्रदेश पहुंचने में महीनों लग जाएंगे.’

इसी तरह एक अन्य ड्राइवर जम्मू के रहने वाले विशाल, जो सेब लेकर नई दिल्ली की आजादपुर मार्केट जा रहे हैं, ने कहा कि सरकारी प्रतिबंधों और ट्रैफिक के कुप्रबंधन के चलते वे 14 दिनों से राजमार्ग पर फंसे हुए हैं.

उनका कहना है कि वे हर महीने दिल्ली और श्रीनगर के बीच चार चक्कर लगा लेते हैं, इस बार दो चक्कर भी नहीं लगा पाएंगे. इसके चलते उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है और वे सरकार से इस संबंध में कुछ करने का आग्रह कर रहे हैं.

वहीं, जम्मू कश्मीर प्रशासन के एक अधिकारी के मुताबिक, आने वाले दिनों में हालात और ख़राब होंगे.

ट्रकों की आवाजाही में बाधा पर जनाक्रोश के बीच वरिष्ठ पुलिस अधिकारी स्थानांतरित

इस बीच, फलों से लदे ट्रकों की आवाजाही में बाधा से उपजे जनाक्रोश के बाद बुधवार को एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को स्थानांतरित करते हुए पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया.

गृह विभाग ने बुधवार सुबह वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (यातायात-राष्ट्रीय) राजमार्ग शबीर अहमद मलिक का तबादला आदेश जारी किया.

वित्त आयुक्त -सह-अवर मुख्य सचिव राज कुमार गोयल द्वारा जारी इस आदेश में कहा गया है, ‘प्रशासन के हित में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (यातायात-राष्ट्रीय) राजमार्ग साबिर अहमद मलिक का तबादला किया जाता है ओर उन्हें पुलिस मुख्यालय से संबद्ध किया जाता है.’

इस आदेश के अनुसार रामबन की पुलिस अधीक्षक मोहिता शर्मा को अगले आदेश तक इस पद का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है.

संभागीय आयुक्त (कश्मीर) पांडुरंग के पोले ने मंगलवार को कहा था कि जम्मू जाने वाले सभी ट्रकों को आगे जाने दिया गया है तथा 270 किलोमीटर लंबे जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सामान्य यातायात बहाल कर दिया गया है.

सभी मौसमों में कश्मीर को शेष भारत से जोड़ने वाले एकमात्र इस राजमार्ग पर यातायात पिछले सप्ताह रामबण जिले के कैफेटेरिया-मेहर सेक्टर में संपर्क मार्ग के सामने से पहाड़ी से पत्थरों के गिरने के करण बाधित रहा था.

सोमवार को कश्मीर के फल उत्पादकों ने इस राजमार्ग पर ट्रकों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने में प्रशासन की कथित विफलता को लेकर श्रीनगर में प्रदर्शन किया था.

राजनीतिक दलों ने भी फल उत्पादकों की परेशानियों को लेकर प्रशासन की आलोचना की थी. पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने धमकी दी कि यदि फल उत्पादकों के वाहनों को नहीं जाने दिया जाता है तो श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर दिया जाएगा.

शोपियां में महबूबा ने कहा था, ‘लाखों लोग फल व्यापार पर निर्भर हैं. उन्होंने दिल्ली की मंडी से पैसे लेने के अलावा कर्ज भी लिया है. मैं सरकार को आगाह करती हूं कि यदि सड़कों पर ट्रकों को चलने की अनुमति नहीं दी गई, तो मैं अन्य लोगों के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग को बाधित कर दूंगी.’

वह सेब उत्पादकों के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दक्षिण कश्मीर जिले के दौरे पर थीं. सेब उत्पादक राजमार्ग पर फंसे, फल लदे ट्रकों की सुगम निकासी की मांग कर रहे हैं.

महबूबा ने कहा, ‘आप हमें अपने फल लाने की अनुमति नहीं दे रहे जो मंडियों में सड़ रहे हैं. लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे. मैं आप से अपील करती हूं और आगाह करती हूं कि कश्मीर के लोगों की परीक्षा नहीं लें.’

महबूबा ने कहा, ‘वे कहते हैं कि आतंकवाद का अंत हो गया, लेकिन भारत सरकार ने यहां जनता और बागवानी के खिलाफ सबसे बड़ा आतंकवाद शुरू किया है.’

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार वही करने की कोशिश कर रही है जो यहूदियों ने फलस्तीनियों के साथ उन्हें आर्थिक रूप से अलग-थलग करके किया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)